वाल्मीकि जयंती की छुट्टी पर भी सफाईकर्मियों से करवाया जा रहा काम!

आज देश भर में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जा रही है. वहीं दूसपी ओर इस अवसर पर भी महर्षि वाल्मीकि को मानने वाले और वाल्मीकि समुदाय से आने वाले सफाईकर्मियों से सफाई का काम करवाया जा रहा है. वाल्मीकि जयंती पर पूरे देश में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से छुट्टी घोेषित है. केंद्र और राज्य सरकार के सभी कर्मचारी आज छुट्टी मना रहे हैं लेकिन हरियाणा के कैथल में सफाईकर्मियों से काम करवाया जा रहा है.

ये तस्वीरें हरियाणा के कैथल शहर की हैं जहां पर सफाई कर्मचारी वाल्मीकि जयंती पर भी सफाई करते दिखाई दिये. दरअसल सफाई विभाग में अधिकतर सफाईकर्मियों से ठेकेदारी प्रथा के तहत काम लिया जाता है. नियमित सफाईकर्मी न होने के चलते इन लोगों को छुट्टी के दिन भी काम करने के लिए मजबूर किया जाता हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता कीर्ति ने गांव-सवेरा को फोन पर बताया, “इन लोगों से कैथल में न्यू 14 रोड से जींद रोड तक सफाई करवाई जा रही है. ये लोग सुबह 8 बजे से सफाई करने में लगे हैं और दस बजे तक सफाई करेंगे इसके बाद शाम को भी इन लोगों को सफाई करने के लिए बुलाया गया है.”

वाल्मीकि जयंती की छुट्टी के दिन काम करते सफाईकर्मी

सफाई कर्मचारी संघ कैथल के अध्यक्ष शिव चरण ने बताया,”ये सफाईकर्मी पे-रोल पर काम करते हैं जो सीधे सफाई विभाग के अंतर्गत आते हैं. विभाग ने इन कर्मियों के लिए केवल 20 छुट्टियां तय कर रखी हैं जिसमें दस मेडिकल और दस सामान्य छुट्टियां दी गई हैं. ठेकेदारी प्रथा खत्म हो, सफाईकर्मियों का शोषण बंद हो और सबको समान वेतन मिले इसके लिए हम लोग लगातर संघर्ष कर रहे हैं.”

वहीं सफाई विभाग में पे-रोल पर घर-घर जाकर कूड़ा उठाने का काम करने वाली वालीं एक महिला सफाईकर्मी ने बताया, “हमें छुट्टी की कोई जानकारी नहीं दी गई. आज केवल पक्के सफाईकर्मियों की छुट्टी है. मैंने आज भी घर-घर जाकर कूड़ा उठाने का काम किया है.”

वहीं जब इस मामले में पे-रोल पर काम करने वाले सफाईकर्मियों के निरीक्षक प्रदीप शर्मा से बात की तो उसने कहा, “ये लोग अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं”. जब सवाल किया गया कि छुट्टी के दिन अपनी मर्जी से काम कौन करता है तो प्रदीप शर्मा ने फोन काट दिया.

एक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, महर्षि वाल्मीकि जयंती की बधाई दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर उसी समाज से आने वाले सफाईकर्मियों को इतनी भी रहात नहीं दी जा रही है कि कम-से-कम छुट्टी के दिन इन लोगों से काम न लिया जाए.

लखीमपुर न्याय के लिए किसानों का रेल रोको आंदोलन, देश भर में दिखा असर!

3 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में गृह राज्य मंत्री के बेटे की गाड़ी द्वारा किसानों को कुचलने की घटना में राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग को लेकर किसान संगठनों ने देशभर में रेल रोको आंदोलन की कॉल दी थी. किसानों के रेल रोको आंदोलन का असर पूरे भारत में दिखाई दिया.

हरियाणा के अंबाला में किसानों ने सुबह 10 बजे ही दिल्ली-जम्मू रेल लाइन रोक दी. किसान अपने ट्रैक्टर और गाड़ियों के साथ रेलवे ट्रैक पर बैठ गए. किसानों का रेल रोको आंदोलन सुबह 10 बजे से शुरू हुआ जो शाम चार बजे तक जारी रहेगा.

दिल्ली-जम्मू रेलवे लाइन रोकी

वहीं दक्षिण भारत में भी किसानों के रेल रोको आंदोलन का असर दिखा. कर्नाटक के विजयपुर में भी किसानों ने रेल लाइन रोकी.

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कर्नाटक के विजयपुर में किसानों ने रेल ट्रेक जाम किया

बिहार के वैशाली में भी किसानों ने रेल ट्रैक जाम कर दिया

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बिहार के वैशाली में किसानों ने रेल ट्रेक रोका
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हरियाणा के बहादुरगढ़ में ट्रैक पर बैठे किसान

लखीमपुर हत्याकांड: राज्य मंत्री अजय मिश्र की गिरफ्तारी को लेकर सोमवार को किसानों का रेल रोको आंदोलन!

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं और देश के अलग अलग हिस्सों में आंदोलन कर रहे किसान कल यानी 18 अक्तूबर को देशभर में रेल रोको आंदोलन करेंगे. लखीमपुर में किसानों को गाड़ी से कुचलने के विरोध में किसान रेल यातायात को बाधित करेंगे. किसान लखीमपुर हत्याकांड के आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं.

किसानों का रेल रोको आंदोलन सुबह 10 बजे से शुऱू होकर शाम 4 बजे तक जारी रहेगा. किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने वीडियो संदेश के जरिेए लखीमपुर हत्याकांड में आरोपी राज्य मंत्री की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी को लेकर रेल रोको कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने सुबह दस बजे से शाम 4 बजे तक देश के सभी हिस्सों में रेल यातायात को रोकने की अपील की.

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी

किसान संगठनों से लखीमपुर हत्याकांड के आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर चेतावनी दे ऱखी थी कि अगर गिरफ्तारी नहीं हुई तो 18 अक्तूबर को रेल रोको आंदोलन किया जाएगा. ऐसे में अब तक आरोपी राज्य मंत्री की गिरफ्तारी नहीं हुई है और कल किसान संगठन पूरे भारत में रेल रोको कार्यक्रम को सफल बनाने की रणनीति में जुट गए हैं.

कल वर्किंग डे होने के चलते रेल से यात्राा करने वाले लोगों को पेरशानी का सामना करना पड़ सकता है. उत्तर भारत में किसान आंदोलन के मजबूत होने के चलते उत्तर भारत की रेल यातायात व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा.

हरियाणा में डीएपी खाद की भारी किल्लत, खरीद केंद्रों के बाहर लगी किसानों की लंबी कतार!

किसानों को आए साल डीएपी खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है. इस बार भी इसी तरह की तस्वीरें सामने आई हैं जिसमें किसान डीएपी खाद के लिए खरीद केंद्र से बाहर हजारों की संख्यां में खड़े दिखाई दिए. नारनौल अनाज मंडी में कोऑपरेटिव सोसायटी के दफ्तर के बाहर किसान पिछले तीन दिनों से डीएपी खाद की खरीद के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वहीं नांगल चौधरी में खाद न मिलने से परेशान कोटपूतली रोड पर किसानों ने जाम लगा दिया.

प्रदेश में धान कटाई सीजन के बीच में ही रबी की फसलों के लिए डीएपी खाद की मांग शुरू हो गई है. आपूर्ति कम होने के कारण प्रदेश सरकार के स्टॉक में इस समय केवल 40 हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है, जबकि सीजन में तीन लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत रहती है.

नारनौल के नसीबपुर में डीएपी खरीद केंद्र के बाहर सुबह 4 बजे ही किसानों की लंबी लाइन लग गई.

खाद के लिए सुबह 4 बजे ही लाइन में लगे किसान
नारनौल के गांव खटोटी कला में खाद के लिए जुटे किसान

सिंघु बॉर्डर पर निहंगों ने की हत्या, संयुक्त किसान मोर्चा ने झाड़ा पल्ला!

सिंघु बॉर्डर पर हुई हत्या को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने अपना बयान जारी किया है. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, हमारे संज्ञान में आया है कि आज सुबह सिंघु मोर्चा पर पंजाब के एक व्यक्ति (लखबीर सिंह, पुत्र दर्शन सिंह, गांव चीमा कला, थाना सराय अमानत खान, जिला तरनतारन) का अंग भंग कर उसकी हत्या कर दी गई. इस घटना के लिए घटनास्थल के एक निहंग समूह/ग्रुप ने जिम्मेवारी ले ली है, और यह कहा है कि ऐसा उस व्यक्ति द्वारा सरबलोह ग्रंथ की बेअदबी करने की कोशिश के कारण किया गया. यह भी सामने आया है कि मृतक पिछले कुछ समय से उसी ग्रुप के साथ था.

संयुक्त किसान मोर्चा ने नृशंस हत्या की निंदा करते हुए कहा कि इस घटना के दोनों पक्षों, इस निहंग समूह/ग्रुप या मृतक व्यक्ति का संयुक्त किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं है. हम किसी भी धार्मिक ग्रंथ या प्रतीक की बेअदबी के खिलाफ हैं, लेकिन इस आधार पर किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने मांग की कि इस हत्या और बेअदबी के षड़यंत्र के आरोप की जांच कर दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाए. संयुक्त किसान मोर्चा किसी भी कानून सम्मत कार्यवाही में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करेगा. लोकतांत्रिक और शांतिमय तरीके से चला यह आंदोलन किसी भी हिंसा का विरोध करता है.

वहीं सिंघु बॉर्डर पर हुई हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए सरबजीत सिंह नाम के निहंग ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है.

कंपनियों ने कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के दाम बढ़ाये, एनपीके का बैग डीएपी से 500 रुपये महंगा हुआ

रबी सीजन की बुवाई के समय किसानों को झटका देते हुए उर्वरक उत्पादक कंपनियों ने एनपीके समेत कई कॉम्पलेक्स उर्वरकों के दामों में 500 रुपये प्रति बैग (50 किलो) से  अधिक तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके चलते नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश (एनपीके) के काम्प्लेक्स उर्वरक की कीमतें 1750 रुपये प्रति बैग पहुंच गई हैं। सरकारी उर्वरक कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (एनएफएल) और सहकारी संस्था कृभको का एनपीके (12: 32:16) का बैग 1700 रुपये का हो गया है जबकि निजी कंपनी स्मार्टकेम ने इसी अनुपात वाले एनपीके का दाम 1750 रुपये प्रति बैग कर दिया है। खास बात यह है कि देश की सबसे बड़ी उर्वरक उत्पादक सहकारी संस्था इफको के एनपीके के बैग का दाम अभी भी 1185 रुपये है और उसने कोई बढ़ोतरी नहीं की है। कंपनियों के बैग की पैंकिंग पर अंकित कीमत के साथ ही मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ द्वारा जिला मार्केटिंग अधिकारियों को 7 अक्तूबर को भेजे गये एक पत्र में दी गई कीमतें इसकी पुष्टि करती हैं जिसमें कहा गया है कि नई कीमतें एक अक्तूबर,2021 से लागू हो गई हैं। सरकार न्यूट्रिएंट अधारित सब्सिडी (एनबीएस) तहत गैर यूरिया विनियंत्रित उर्वरकों के लिए न्यूट्रिएंट के आधार पर सब्सिडी देती है और कंपनियों को इनके दाम निर्धारित करने की छूट है। उद्योग का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते ही कंपनियों ने उर्वरकों की कीमतें बढ़ाई हैं। उद्योग सूत्रों का कहना है कि फॉस्फोरिक एसिड की कीमतों में 240 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हो चुकी है और उसके चलते लागत करीब 10 हजार रुपये प्रति टन बढ़ गई है। अगर सरकार ने न्यूट्रिएंट पर सब्सिडी में बढ़ोतरी नहीं की तो जल्दी ही बाकी कंपनियों को भी दाम बढ़ाने पड़ेंगे।

कंपनियों के एक अन्य एनपीके कॉम्प्लेक्स उर्वरक 10:26:26 की कीमत कोरोमंडल फर्टिलाइजर के लिए 1475 रुपये प्रति बैग हो गई है जबकि इफको के लिए इस उर्वरक की कीमत 1175 रुपये प्रति बैग है।

वहीं एक अन्य कॉम्प्लेक्स उर्वरक अमोनिया, फॉस्फेट, सल्फेट (एनपीएस) 20:20:0  की कीमतें भी बढ़ाकर 1300 रुपये प्रति  बैग कर चली गई हैं। इसकी सबसे कम कीमत इफको की है जो 1150 रुपये प्रति बैग है। इफको इसके पहले इसे 1050 रुपये प्रति बैग पर बेच रही थी और हाल ही में इसकी कीमत को 100 रुपये प्रति बैग बढ़ाकर 1150 रुपये प्रति बैग किया गया है। मध्य प्रदेश में इसके लिए इफको की कीमत 1150 रुपये प्रति बैग है जबकि कोरोमंडल के लिए 1225 रुपये प्रति बैग है।

उद्योग सूत्रों का कहना है कि फॉस्फोरिक एसिड, पोटाश और नाइट्रोजन समेत सभी न्यूट्रिएंट की कीमतों में पिछले एक साल में भारी बढ़ोतरी हुई है। इनमें सबसे अधिक बढ़ोतरी के साथ फॉस्फोरिक एसिड की कीमत 1400 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। हालांकि यहां एक तथ्य यह भी है कि डीएपी में 46 फीसदी फॉस्फेट होता है और इसकी कीमत अभी 1200 रुपये प्रति बैग है। वहीं 32 फीसदी फॉस्फेट वाले एनपीके की कीमत 1700 रुपये को  पार कर गई है। अभी हाल तक एनपीके की कीमत डीएपी से कम ही रही हैं। अप्रैल में कंपनियों द्वारा डीएपी के बैग की कीमत को 1200 रुपये से बढ़ाकर 1800 रुपये प्रति बैग करने पर सरकार ने फॉस्फेट पर सब्सिडी में भारी बढ़ोतरी की थी और 20 मई को जारी अधिसूचना में इस के लिए सब्सिडी को 14000 रुपये प्रति टन बढ़ा दिया गया था ताकि डीएपी के बैग की कीमत को 1200 रुपये के पुराने स्तर पर ही रखा जा सके। डीएपी पर सब्सिडी 24231 रुपये प्रति टन हो गई है। उर्वरक विभाग द्वारा 20 मई,2021 की शाम को जारी नोटिफिकेशन में एनबीएस के तहत नाइट्रोजन (एन), फॉस्फेट (पी), पोटाश (के) और सल्फर (एस) के लिए प्रति किलो सब्सिडी के रेट घोषित किये गये हैं। नई सब्सिडी दरों के तहत फॉस्फेट पर सब्सिडी को 14.888 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 45.323 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है। नाइट्रोजन, पोटाश और सल्फर पर सब्सिडी को 3 अप्रैल, 2020 को जारी नोटिफिकेशन के स्तर पर ही रखा गया है। 20 मई को जारी नोटिफिकेशन में नाइट्रोजन (एन) पर सब्सिडी 18.789 रुपये प्रति किलो, पोटाश (के) पर 10.116 रुपये प्रति किलो और सल्फर (एस) पर 2.374 रुपये किलो ही रखी गई है।

इसके चलते  लेकिन उस समय सरकार ने केवल फॉस्फेट पर ही सब्सिडी में बढ़ोतरी की थी जबकि अमोनिया और पोटाश जैसे न्यूट्रिएंट पर सब्सिडी में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। उस समय कंपनियों ने इनके उपयोग से बनने वाले उर्वरकों की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। साथ ही नये सब्सिडी रेट केवल 31 अक्तूबर, 2021 तक के लिए तय किये जाने की बात अधिसूचना में की गई है।

उर्वरकों के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत बढ़ोतरी के बावजूद सरकार ने सब्सिडी में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।  हालांकि उर्वरक मंत्रालय में इस मुद्दे बैठकें हुई और स्थिति की समीक्षा के साथ कंपनियों को आश्वासन दिया गया कि उनको घाटा नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन अभी तक कोई फैसला भी नहीं हुआ है। इसके चलते इन उर्वरकों और इनके कच्चे माल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है और 31 अगस्त,2021 को इनका घरेलू स्टॉक तीन साल के निचले स्तर पर चला गया था।

उद्योग सूत्रों का कहना है कि उर्वरकों की उपलब्धता की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। वहीं देश के कुछ राज्यों से उर्वरकों की किल्लत की खबरें भी आना शुरू हो गई हैं। इस समय रबी सीजन की फसलों की बुआई जोरों से शुरू होने को है और अगर इस समय कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की किल्लत होगी तो किसानों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा हो जाएगी क्योंकि एनपीके, डीएपी और दूसरे कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का बुआई के समय बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।   

साभार: रूरल वॉइस

लखीमपुर हत्याकांड मामले को देशी बनाम सिख का रंग देने की कोशिश कर रहे आरोपी मंत्री अजय मिश्र के कार्यकर्ता

जब पंजाब से उनके नेता उनको सपोर्ट करने यहाँ आ रहे हैं तो हम भी अपने नेता को सपोर्ट करेंगे, हम हमारे टेनी महाराज के साथ हैं” – लखीमपुर के निघासन में एक फल बेचने वाले ने नाम न छापने की शर्त के साथ हमें ये बात कही. जब हमने उनसे पुछा कि आप तो सांसद अजय मिश्र के पक्ष में बोल रहे है फिर नाम क्यों नहीं बताना चाहते, उत्तर में उस फल बेचने वाले ने कहा, “यहाँ माहौल टाइट है, हम कोई मुसीबत अपने सर नहीं लेना चाहते. कल ही एक फल बेचने वाले का पुराना वीडयो सरदारों ने वायरल कर दिया क्योंकि उसने भी टेनी महाराज के पक्ष में सोशल मीडिया पर लिखा था.”

लखीमपुर जिले को यूपी का मिनी पंजाब कहते हैं, यहाँ लगभग 6 लाख से अधिक सिख रहते हैं. यूपी के किसी अन्य जिले में इतनी सिख आबादी नहीं है, साथ ही इस इलाके में किसान आंदोलन में भी मुख्य रूप से सिख किसान ही शामिल हो रहे हैं. लखीमपुर खीरी के जिन-जिन गाँवों में सिख किसान रहते हैं, उनके पास अन्य समुदायों की तुलना में जमीन अधिक है. रिपोर्टिंग के दौरान हमें ये देखने को मिला कि गाँवों के दुसरे समुदाय तो गाँव के अंदर ही रहते हैं वहीँ सिखों ने खेतों में अपने मकान बनाए हुए हैं. सिखों की सघन आबादी की वजह से यूपी का लखीमपुर खीरी जिला खेती उत्पादकता में प्रदेश का सबसे अग्रणी जिला है. साल 2019-20 के दौरान यूपी की खेती उत्पादकता में लखीमपुर खीरी जिले की भागेदारी 12,414.40 करोड़ रूपए थी. यहाँ रहने वाले सभी सिख परिवार बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आकर यहाँ बसे थे.
सिख इस इलाके में आर्थिक तौर पर तो मज़बूत है मगर राजनीतिक तौर पर प्रदेश सरकारों में उनकी भागेदारी न के बराबर रही है. वर्तमान में लखीमपुर खीरी लोकसभा सीट से ब्राह्मण जाति से आने वाले अजय कुमार मिश्र लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए है, इस से पहले यहाँ से केवल कुर्मी सांसद बनते रहे हैं.

लखीमपुर के वास्तविक बाशिंदे इलाके के सिखों से अलग अपनी पहचान बताने के लिए खुद को “देशी/देहाती” कहते हैं. सांसद अजय मिश्र के गाँव बनवीरपुर से वर्तमान प्रधान आकाश मित्तल किसान आन्दोलन के बारे में कहते है, “क्या सिख ही किसान हैं? हम भी तो किसान है. जो मरे हैं उनको मुआवजा मिल तो गया और क्या लेंगे? किसान आंदोलन की आड़ में सिख और विपक्षी पार्टी वाले नाटक कर रहे हैं, इनकी जांच होनी चाहिए.”

उमरा गाँव के किसान विकास का कहना है कि, “टेनी महाराज के बेटे की गिरफ़्तारी दबाव के कारण हुई है, मोनू भईया इसमें शामिल नहीं थे.” जब हमने उनसे पुछा कि वो किस आधार पर ये कह रहे है तो उन्होनें कहा कि मोनू भैया के वहां मौजूद होने के भी तो कोई सबूत नहीं है.
बनवीरपुर के ही मोनू अग्रवाल कहते है, “हमारे यहाँ के देशी लोग इनके खेतों में जाकर काम करते हैं जबकि ये बाहर से आकर यहाँ बसे हैं. इन्होनें गरीब लोगों की पट्टे की जमीन पर अवैध कब्जे कर रखे हैं. जंगल की कटाई सबसे अधिक हमारे जिले में सरदारों ने ही की है.”
मोनू ने आगे कहा, “लखीमपुर की घटना के बाद से सिसवारी और जस नगर टोटली गाँव के लोगों ने तो सरदारों के यहाँ खेतों में काम पर जाने से भी मना कर दिया है चाहे वो दिहाड़ी बढ़ा दे मगर अब देशी लोग उनके यहाँ काम पर नहीं जाएंगे.” जब हमने इसकी पड़ताल के लिए सिसवारी और जस नगर गाँव में कुछ लोगों से बातचीत की तो नाम न बताने की शर्त पर उन्होनें इस बात को स्वीकार किया और कहा कि सांसद अजय मिश्र से जुड़े लोग इस तरह की बातों को बढ़ावा दे रहे हैं.

बनवीरपुर के ही विजयपाल कहते है, “यदि सरदार इकट्ठे होंगे तो हम सब भी उनके खिलाफ़ एकजुट होंगे. इस घटना के बाद भाजपा का वोटर और संगठित होगा क्योंकि वो देख रहा है कैसे विपक्ष और सरदार लोग मिलकर हंगामा कर रहे हैं.”

सांसद अजय मिश्र के इस्तीफ़े को लेकर सवाल किया तो बनवीरपुर के एक दुकानदार ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर कहा कि, “टेनी महाराज का इस्तीफ़ा लेकर भाजपा ब्राह्मणों को नाराज़ नहीं करना चाहती. पहले ही यूपी में ब्राह्मण योगी से चिढ़े हुए हैं. लखीमपुर कोर्ट में मोनू भईया की पेशी के दौरान भी हजारों की संख्यां में ब्राह्मण लोग मोनू भईया के समर्थन में वहां पहुंचे थे.”

लखीमपुर की घटना को लेकर सांसद अजय मिश्र के गाँव में लगभग लोगों की एक ही राय है, कोई भी व्यक्ति इस मामले पर खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है. गाँव का प्रधान और सांसद अजय मिश्र से जुड़े लोग ही बोल रहे हैं और वो भी पूरे घटनाक्रम के लिए किसानों को आरोपी ठहरा रहे हैं.

स्थानीय किसान नेता गुरबाज सिंह का कहना है कि सांसद अजय मिश्र और भाजपा से जुड़े लोग इस मामले को देसी बनाम सिख बनाने में लगे हैं लेकिन हम उनके मंसूबों को कामियाब नहीं होने देंगे. गुरबाज सिंह आगे कहते है, “हम लोग किसान के हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं और किसान किसी एक धर्म के नहीं होते, किसान तो सभी धर्मों में हैं. अपने राजनीतिक फायदे के लिए कुछ लोग इस घटना को धर्म से जोड़ रहे हैं, ऐसे लोगों की हम पहचान कर के, सबके सामने उनकी पोल खोलेंगे.”

पूरे मामले को देशी बनाम सिख का रंग देने पर जब हमने सांसद अजय मिश्र से बात करनी चाही तो कई बार कोशिश करने के बाद भी उनसे संपर्क न हो सका. यदि सांसद अजय मिश्र से हमारी बात होती है तो हम ख़बर को अपडेट करेंगे.

करनाल: जातीय दंभ के चलते दलित परिवार पर चढ़ाई गाड़ी, दो सदस्यों की मौत, तीन घायल!

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के विधानसभा क्षेत्र और सीएम सीटी करनाल से महज 15 किलोमीटर दूर नीलोखेड़ी के बुटाना गांव में जातीय दंभ के चलते एक सिरफिरे युवक ने दलित परिवार पर गाड़ी चढ़ा दी. जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और तीन लोग गंभीर रुप से घायल हैं. मृतकों में एक महिला और एक पुरूष शामिल हैं.

परिवार के ही एक सदस्य ने बताया, “दो दिन पहले ही परिवार में शादी समारोह था. घर में सारे रिश्तेदार जुड़े हुए थे. यह सोची समझी साजिश के तहत किया गया है. रोड़ बिरादरी से आने वाला अमन नाम का लड़का हमारे घर के सामने से हर रोज तेज स्पीड में गाड़ी लेकर जाता था. इसकी शिकायत उसके पिता से की जिसके बाद अमन और उसका पिता बलविंद्र वापस गाड़ी के साथ घर के बाहर आए और कहासुनी के बाद घर के सामने खड़े परिवार के लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी. 

पीड़ित परिवार के सदस्य ने आगे बताया, “उन्होंने इस बीच जातिसूचक शब्द प्रयोग करते हुए कहा कि ये क्या कर लेंगे और उसके बाद पिता की शह पर बेटे ने इस घटना को अंजाम दे दिया.” वहीं परिवार की एक युवती ने बताया, “हमारे साथ रंजिश के तहत किया गया है क्योंकि वो खुद को ऊंची जाति का मानते हैं और हम एससी समुदाय से हैं. हमें नीचा दिखाने के लिए आए दिन इस तरह की हरकतें की जाती हैं लेकिन आज तो हद ही हो गई. हमारे परिवार के दो लोगों की जान ले ली.”

मृतक सुभाष के बेटे साहिल ने बताया,“घटना को लेकर पुलिस का ढीला रवैया है. दोनों बाप-बेटा फरार हैं. 36 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अब तक दोनों में से किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है.” साथ ही पीड़ित परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि विदेश में बैठा मुख्योरापी अमन का भाई और रिस्तेदार मामले को न बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं. 

घटना की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी कंवर सिहं ने बताया, “घटना के मुख्यारोपी अमन और पिता बलविंद्र के खिलाफ 302 का मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पांच टीम बनाई गई हैं जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.”            

36 घंटे बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई. वहीं पीड़ित परिवार और वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने आरोपियों की जल्द-से-जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए करनाल में धरना दिया. परिवार ने कहा जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे.

लखीमपुर हत्याकांड के विरोध में SKM का 18 को रेल रोको आंदोलन, 26 को लखनऊ में ‘किसान महापंचायत’!

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में 3 अक्तूबर कोे हुए हत्याकांड को लेकर ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के नेताओं ने दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता की. प्रेस वार्ता के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने अपनी बात रखते हुए लखीमपुर हत्याकांड के मुख्यारोपी की गिरफ्तारी की मांग की.

इस बीच किसान नेताओं ने पत्रकारों की ओर से पूछे गए सवालों के जबाव दिया. प्रेस वार्ता के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा का विषय लखीमपुर घटना पर प्रशासन और किसान नेताओं के बीच का समझौता रहा. समझौते पर उठे सवाल का जवाब देते हुुए किसान नेताओं ने एक सुर में कहा, “समझौता केवल शहीद किसानों के अंतिम संस्कार करने तक था. हत्याकांड के मुख्यारोपी की गिरफ्तारी और गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र की बर्खास्तगी की मांग जारी है.”

दिल्ली, प्रेस क्लब में संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस वार्ता

संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 12 अक्तूबर को लखीमपुर में शहीद किसानों के भोग में आस-पास के ज्यादा-से-ज्यादा किसानों से पहुंचने की अपील की. वहीं 15 अक्तूबर को दशहरे के दिन तीन नये कृषि कानूनों का बुराई के तौर पर दहन करने की बात कही गई. 18 अक्तूबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रेल रोको अभियान का फैसला लिया गया है. रेल रोको की कॉल के तहत किसान देश भर में रेल ट्रेक पर बैठकर रेल यातायात का बाधित करेंगे. 26 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में किसान महापंचायत करने का एलान किया. वहीं साथ ही जब तक गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र का इस्तीफा और उनके आरोपी बेटे की गिरफ्तारी नहीं होगी तब तक विरोध चलता रहेगा.

लखीमपुर हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की योगी सरकार को फटकार, कहा- जांच से संतुष्ट नहीं!

3 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुए हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले पर सरकार का पक्ष जानते हुए सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी की घटना पर यूपी पुलिस की जांच से नराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम यूपी सरकार की जांच से संतुष्ट नहीं हैं. चीफ जस्टिस एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने लखीमपुर मामले में केस दर्ज करने, घटना में शामिल दोषियों को सजा देने की मांग को लेकर सुनवाई की.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता हरिश साल्वे पेश हुए. साल्वे ने कोर्ट को जानकारी देते हुए कहा कि मुख्य आरोपी आशिष मिश्रा को कल 11 बजे तक पेश होने के लिए नोटिस भेजा गया है. साल्वे ने आरोप स्वीकार हुए कहा “मुझे बताया गया था कि पोस्टमार्टम में गोली के घाव नहीं दिखे हैं. इसलिए 160 सीआरपीसी के तहत नोटिस भेजा गया था. लेकिन जिस तरह से कार चलाई गई, आरोप सही हैं और 302 का मामला दर्ज किया गया है.”

इसके जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा, “अगर कोई बुलेट इंजरी नहीं है तो भी यह गंभीर अपराध नहीं है क्या?”

चीफ जस्टिस ने यूपी सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि हत्या के मामले में आरोपी से अलग व्यवहार क्यों हो रहा है? हम एक जिम्मेदार सरकार और जिम्मेदार पुलिस देखना चाहते हैं. सीजेआई ने कहा कि अगर 302 यानी हत्या का मामला दर्ज होता है तो ऐसे हालात में पुलिस क्या करती है? सीजेआई ने पूछा कि मामले की जांच सीबीआई से करने के बारे में क्या सरकार या किसी और कि ओर से कहा गया है?

चीफ जस्टिस ने आदेश में कहा,”उत्तर प्रदेश सरकार की स्टेट्स रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है राज्य सरकार ने जो एक्शन लिया है इस मामले में उससे हम संतृष्ट नहीं.” साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को मामले से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित रखने को कहा.