सोमवार, 03 अक्टूबर 2022

गांव-देहात

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पैतृक गांव निंदाना के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी के चलते एक चपरासी अंग्रेजी पढ़ा रहा है.

यह आरोप स्कूल के छात्रों ने लगाया, जिन्होंने कल यानी 27 सितंबर को स्कूल में ताला लगाकर शिक्षकों की कमी के खिलाफ धरना दिया. स्कूल के प्रिंसीपल सुरेंद्र कुमार ने कहा कि चपरासी को छात्रों को पढ़ाने के लिए इसलिए नियुक्त किया गया था क्योंकि उसके पास योग्यता थी. प्रिंसीपल ने बताया, “उस चपरासी के पास बीए और बीएड की डिग्री है, और उसने एचटीईटी परीक्षा पास की है. इसलिए, वह शिक्षकों की कमी के कारण वैकल्पिक उपाय के रूप में छठी कक्षा के छात्रों को अंग्रेजी पढ़ा रहा है.”

खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बिजेंद्र हुड्डा ने हालांकि, स्कूल में छात्रों को पढ़ाने के लिए एक चपरासी की तैनाती से इनकार किया. हुड्डा ने कहा कि “स्कूल में टीचिंग स्टाफ की कमी है, लेकिन कोई चपरासी छात्रों को पढ़ा नहीं रहा है. स्कूल में शिक्षकों की कमी जल्दी ही पूरी की जाएगी. ”

हरियाणा में अध्यापकों की कमी के चलते आए दिन सरकारी स्कूलों के सामने ग्रामीणों और छात्रों के प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. सीएम सिटी करनाल के गांव पिचौलिया में भी ग्रामीण, बच्चों के साथ गांव के सरकारी स्कूल के सामने शिक्षकों की कमी के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए थे और ग्रामीणों ने अपनी मांग को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया था.

हरियाणा सरकार एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने का दावा कर रही है लेकिन वहीं दूसरी ओर बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने से ही कतरा रहे हैं. देश के सरकारी स्कूलों में ग्यारहवीं कक्षा में दाखिलों में भारी गिरावट सामने आई है. स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़ो के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस साल 38,976 दाखिले कम हुए हैं. वहीं दसवीं कक्षा के मामले में भी लगभग यही स्थिति रही है.

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले सत्र में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ग्यारहवीं कक्षा में कुल 2,00,946 छात्रों का नाम दर्ज था लेकिन इस सत्र में यह संख्या घटकर 1,61,970 रह गई है. इसी तरह, सरकारी स्कूलों में पिछले साल दसवीं कक्षा में 2,01,962 छात्रों का प्रवेश हुआ था जबकि इस सत्र में यह आंकड़ा 1,84,106 है.


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