शनिवार, 04 फ़रवरी 2023
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लखीमपुर हत्याकांड मामले को देशी बनाम सिख का रंग देने की कोशिश कर रहे आरोपी मंत्री अजय मिश्र के कार्यकर्ता



लखीमपुर की घटना को लेकर सांसद अजय मिश्र के गाँव में लगभग लोगों की एक ही राय है, कोई भी व्यक्ति इस मामले पर खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है.

जब पंजाब से उनके नेता उनको सपोर्ट करने यहाँ आ रहे हैं तो हम भी अपने नेता को सपोर्ट करेंगे, हम हमारे टेनी महाराज के साथ हैं” – लखीमपुर के निघासन में एक फल बेचने वाले ने नाम न छापने की शर्त के साथ हमें ये बात कही. जब हमने उनसे पुछा कि आप तो सांसद अजय मिश्र के पक्ष में बोल रहे है फिर नाम क्यों नहीं बताना चाहते, उत्तर में उस फल बेचने वाले ने कहा, “यहाँ माहौल टाइट है, हम कोई मुसीबत अपने सर नहीं लेना चाहते. कल ही एक फल बेचने वाले का पुराना वीडयो सरदारों ने वायरल कर दिया क्योंकि उसने भी टेनी महाराज के पक्ष में सोशल मीडिया पर लिखा था.”

लखीमपुर जिले को यूपी का मिनी पंजाब कहते हैं, यहाँ लगभग 6 लाख से अधिक सिख रहते हैं. यूपी के किसी अन्य जिले में इतनी सिख आबादी नहीं है, साथ ही इस इलाके में किसान आंदोलन में भी मुख्य रूप से सिख किसान ही शामिल हो रहे हैं. लखीमपुर खीरी के जिन-जिन गाँवों में सिख किसान रहते हैं, उनके पास अन्य समुदायों की तुलना में जमीन अधिक है. रिपोर्टिंग के दौरान हमें ये देखने को मिला कि गाँवों के दुसरे समुदाय तो गाँव के अंदर ही रहते हैं वहीँ सिखों ने खेतों में अपने मकान बनाए हुए हैं. सिखों की सघन आबादी की वजह से यूपी का लखीमपुर खीरी जिला खेती उत्पादकता में प्रदेश का सबसे अग्रणी जिला है. साल 2019-20 के दौरान यूपी की खेती उत्पादकता में लखीमपुर खीरी जिले की भागेदारी 12,414.40 करोड़ रूपए थी. यहाँ रहने वाले सभी सिख परिवार बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आकर यहाँ बसे थे.
सिख इस इलाके में आर्थिक तौर पर तो मज़बूत है मगर राजनीतिक तौर पर प्रदेश सरकारों में उनकी भागेदारी न के बराबर रही है. वर्तमान में लखीमपुर खीरी लोकसभा सीट से ब्राह्मण जाति से आने वाले अजय कुमार मिश्र लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए है, इस से पहले यहाँ से केवल कुर्मी सांसद बनते रहे हैं.

लखीमपुर के वास्तविक बाशिंदे इलाके के सिखों से अलग अपनी पहचान बताने के लिए खुद को “देशी/देहाती” कहते हैं. सांसद अजय मिश्र के गाँव बनवीरपुर से वर्तमान प्रधान आकाश मित्तल किसान आन्दोलन के बारे में कहते है, “क्या सिख ही किसान हैं? हम भी तो किसान है. जो मरे हैं उनको मुआवजा मिल तो गया और क्या लेंगे? किसान आंदोलन की आड़ में सिख और विपक्षी पार्टी वाले नाटक कर रहे हैं, इनकी जांच होनी चाहिए.”

उमरा गाँव के किसान विकास का कहना है कि, “टेनी महाराज के बेटे की गिरफ़्तारी दबाव के कारण हुई है, मोनू भईया इसमें शामिल नहीं थे.” जब हमने उनसे पुछा कि वो किस आधार पर ये कह रहे है तो उन्होनें कहा कि मोनू भैया के वहां मौजूद होने के भी तो कोई सबूत नहीं है.
बनवीरपुर के ही मोनू अग्रवाल कहते है, “हमारे यहाँ के देशी लोग इनके खेतों में जाकर काम करते हैं जबकि ये बाहर से आकर यहाँ बसे हैं. इन्होनें गरीब लोगों की पट्टे की जमीन पर अवैध कब्जे कर रखे हैं. जंगल की कटाई सबसे अधिक हमारे जिले में सरदारों ने ही की है.”
मोनू ने आगे कहा, “लखीमपुर की घटना के बाद से सिसवारी और जस नगर टोटली गाँव के लोगों ने तो सरदारों के यहाँ खेतों में काम पर जाने से भी मना कर दिया है चाहे वो दिहाड़ी बढ़ा दे मगर अब देशी लोग उनके यहाँ काम पर नहीं जाएंगे.” जब हमने इसकी पड़ताल के लिए सिसवारी और जस नगर गाँव में कुछ लोगों से बातचीत की तो नाम न बताने की शर्त पर उन्होनें इस बात को स्वीकार किया और कहा कि सांसद अजय मिश्र से जुड़े लोग इस तरह की बातों को बढ़ावा दे रहे हैं.

बनवीरपुर के ही विजयपाल कहते है, “यदि सरदार इकट्ठे होंगे तो हम सब भी उनके खिलाफ़ एकजुट होंगे. इस घटना के बाद भाजपा का वोटर और संगठित होगा क्योंकि वो देख रहा है कैसे विपक्ष और सरदार लोग मिलकर हंगामा कर रहे हैं.”

सांसद अजय मिश्र के इस्तीफ़े को लेकर सवाल किया तो बनवीरपुर के एक दुकानदार ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर कहा कि, “टेनी महाराज का इस्तीफ़ा लेकर भाजपा ब्राह्मणों को नाराज़ नहीं करना चाहती. पहले ही यूपी में ब्राह्मण योगी से चिढ़े हुए हैं. लखीमपुर कोर्ट में मोनू भईया की पेशी के दौरान भी हजारों की संख्यां में ब्राह्मण लोग मोनू भईया के समर्थन में वहां पहुंचे थे.”

लखीमपुर की घटना को लेकर सांसद अजय मिश्र के गाँव में लगभग लोगों की एक ही राय है, कोई भी व्यक्ति इस मामले पर खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है. गाँव का प्रधान और सांसद अजय मिश्र से जुड़े लोग ही बोल रहे हैं और वो भी पूरे घटनाक्रम के लिए किसानों को आरोपी ठहरा रहे हैं.

स्थानीय किसान नेता गुरबाज सिंह का कहना है कि सांसद अजय मिश्र और भाजपा से जुड़े लोग इस मामले को देसी बनाम सिख बनाने में लगे हैं लेकिन हम उनके मंसूबों को कामियाब नहीं होने देंगे. गुरबाज सिंह आगे कहते है, “हम लोग किसान के हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं और किसान किसी एक धर्म के नहीं होते, किसान तो सभी धर्मों में हैं. अपने राजनीतिक फायदे के लिए कुछ लोग इस घटना को धर्म से जोड़ रहे हैं, ऐसे लोगों की हम पहचान कर के, सबके सामने उनकी पोल खोलेंगे.”

पूरे मामले को देशी बनाम सिख का रंग देने पर जब हमने सांसद अजय मिश्र से बात करनी चाही तो कई बार कोशिश करने के बाद भी उनसे संपर्क न हो सका. यदि सांसद अजय मिश्र से हमारी बात होती है तो हम ख़बर को अपडेट करेंगे.