शनिवार, 30 सितम्बर 2023
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31 अगस्त को 72वां विमुक्ति दिवस मनाएंगी 193 विमुक्त जनजातियां!



मास्टर जिले सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम हमारे लिए एक त्योहार की तरह है इस बार समस्त विमुक्त घुमंतू समाज 72वां विमुक्ति दिवस 31 अगस्त को करनाल के मंगलसेन सभागार में धूमधाम से मानने जा रहा है.

आजादी के बाद से लेकर अब तक पिछड़ेपन का दंश झेल रही विमुक्त घुमंतू जनजातियां हर साल की तरह इस बार भी 31 अगस्त को विमुक्ति दिवस मनाने जा रही हैं. करनाल के मंगलसेन सभागार में अखिल भारतीय विमुक्त घुमंतू जनजाति वैलफेयर संघ, हरियाणा की ओर से प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करके यह जानकारी दी गई.प्रेस कांफ्रेंस में DNT संघ की ओर से 31 अगस्त को विमुक्ति दिवस मनाये जाने सम्बंधी जानकारी दी गई. संघ के अध्यक्ष मास्टर जिले सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम हमारे लिए एक त्योहार की तरह है इस बार समस्त विमुक्त घुमंतू समाज 72वां विमुक्ति दिवस 31 अगस्त को करनाल के मंगलसेन सभागार में धूमधाम से मानने जा रहा है.

वहीं अखिल भारतीय विमुक्त घुमंतू जनजाति वैलफेयर संघ के राष्ट्रीय महासचिव बालक राम ने विमुक्त घुमंतू जनजातियों का इतिहास बताते हुए कहा, “गोरिल्ला युद्ध में निपुणता के चलते अंग्रेजों के खिलाफ अभियान छेड़ने वाली इन जनजातियों पर दबिश डालने के लिए 1871 में अंग्रेजी हुकूमत ने जैराइम पेशा काला कानून (क्रीमिनल ट्राइब एक्ट) लगा दिया. इन जनजातियों पर काला कानून लगाकर, समाज में इनके प्रति नफरत फैलाने के मकसद से अंग्रेजों ने इनकों जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया. कानून के तहत इन लोगों को गाँव व शहर से बाहर जाने के लिए स्थानीय मजिस्ट्रेट के यहां अपना नाम दर्ज करवाना अनिवार्य कर दिया गया था ताकि पता रहे कि ये लोग कहां, क्यों और कितने दिनों के लिए जा रहे हैं. सबसे पहले इस कानून को उत्तर भारत में लागू किया गया.”

बता दें कि 1876 में क्रीमिनल ट्राइब एक्ट को बंगाल प्रांत पर भी लागू किया गया और 1924 तक आते-आते इस कानून को पूरे भारत में रहने वाली सभी करीबन 193 जनजातियों पर थोप दिया गया. 15 अगस्त 1947 को देश तो आजाद हो गया लेकिन ये लोग आजादी के पांच साल बाद तक भी गुलामी का दंश झेलते रहे और गांव के नंबरदार और पुलिस थाने में हाजिरी लगाने के लिए मजबूर रहे. आखिरकार 1948 में बैठाई गई क्रीमिनल ट्राइब एक्ट इन्क्वारी कमेटी ने 1949-50 में सरकार को रिपोर्ट सौंपी जिसमें देश की ऐसी 193 जातियों को है 31 अगस्त सन 1952 को संसद में बिल पास होने के बाद इस दंश से मुक्त किया गया. उस दिन से इन जनजातियों को विमुक्त जाति अर्थात डिनोटिफाइड ट्राइब्स के नाम से जाना जाता है. 1871 में क्रिमिनल ट्राइब एक्ट लगने से लेकर 31 अगस्त 1952 तक यानी करीबन 82 साल तक आजाद भारत में भी ये लोग गुलामी का दंश झेलते रहे. पूरे देश में विमुक्त घुमंतू जनजाति की आबादी करीबन 20 से 25 करोड़ है इनमें से अधिकतर लोग आज भी खुले आसमान, पुलों के नीचे, सीवरेज के पाइपों, तिरपालों में अपना जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं.

वहीं विमुक्त एवं घुमंतू कर्मचारी वैलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रोशन लाल माहला ने बताया कि 31 अगस्त को विमुक्ति दिवस के मौके पर मुख्य अथिति के तौर पर हरियाणा बीजेपी प्रदेश प्रभारी बिप्लब देव वहीं विशिष्ट अथिति के तौर पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री एस पी बघेल, राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा, करनाल से लोकसभा सांसद भाटिया और राज्यसभा सांसद कृष्ण लाल पंवार शामिल रहेंगे. इसके अलावा शाहबाद से विधायक रामकरण, घरौंडा से विधायक हरविंद्र सिंह कल्याण, रतिया से विधायक लक्षमण नापा, इंद्री से विधायक रामकुमार कश्यप, नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर, करनाल से मेयर रेणु बाला गुप्ता और डीएनटी बॉर्ड के चैयरमेन डॉ बलवान सिंह भी कार्यक्रम में शामिल होंगे.