राजस्थान की अलवर अतिरिक्त जिला एवं शेसन कोर्ट ने 2018 के रकबर खान मॉब लिंचिंग मामले में चार गौ रक्षकों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा और प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुनील कुमार गोयल ने 92 पेज के फैसले में परमजीत, धर्मेंद्र, नरेश और विजय को आईपीसी की धारा 304, 323 और 341 के तहत सजा सुनाई है.
घटना 20 जुलाई 2018 की है जब रकबर अपने दोस्त असलम खान के साथ राजस्थान के अलवर से नूंह के अपने कोलगांव एक दुधारु पशु को लेकर आ रहे थे. इस दौरान गौ तस्करी के शक में चार गौ रक्षकों ने रकबर की पीट पीटकर हत्या कर दी थी. इस बीच रकबर का दोस्त असलम भागकर बचने में कामयाब रहा था.
वहीं मौके पर पहुंची पुलिस रकबर को अस्पताल ले गई, जहां उसकी मौत हो गई थी. एफआईआर में पुलिस ने रकबर के अस्पताल में दिये बयान का जिक्र किया है जिसमें रकबर ने गौरक्षकों के एक समूह द्वारा हमला किए जाने की बात कही थी. वहीं इस मामले पर रकबर की पत्नी ने सजा को पर्याप्त नहीं बताते हुए कहा, ‘हम जैसे गरीब लोगों के लिए न्याय का कोई मतलब नहीं है.”
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में हुए बुढ़ापा पेंशन योजना को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए घोटाले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सौंप दी है. दरअसल हरियाणा सरकार के अधिकारी मृतक बुजुर्गों के नाम पर बुढ़ापा पेंशन जारी कर सरकारी खातों से खजाना लूट रहे थे. बुढ़ापा पेंशन से जुड़ा यह गबन कैग की रिपोर्ट में भी सामने आया था.
लेकिन सरकार की ओर से इस घोटाले में कोई जांच नहीं की गई जिसके सामाजिक कार्यकर्ता राकेश बैंस ने मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. यानी कैग की रिपोर्ट के सहारे घोटाले को कोर्ट में घसीटा गया जिसके बाद हाई कोर्ट ने अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है. हाई कोर्ट की ओर से सीबीआई को 8 हफ्ते के भीतर मामले की जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.
याचिकाकर्ता राकेश बैंस की ओर से हाई कोर्ट में मामले को देख रहे एडवोकेट प्रदीप राबड़िया ने बताया, “इस मामले में 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों और मृतक बुजुर्गों के नाम से भी पेंशन जारी की जा रही थी.” बता दें कि इस पूरे मामले में सीबीआई कईं बड़े आईएएस अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती है.
बता दें कि हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन एक सियासी टूल के तौर पर प्रयोग होता रहा है जहां पिछले विधानसभा चुनाव में जेजेपी नेता और मौजूदा उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बुढ़ापा पेंशन 5 हजार रुपये महीना करने का वादा किया था जो अब तक केवल 2750 तक पहुंच पाई है तो वहीं आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 6 हजार रुपये बुढ़ापा पेंशन करने का वादा कर दिया है.
एचपीएससी यानी हरियाणा लोकसेवा आयोग एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार विवाद 21 मई को हुए एचसीएस (हरियाणा सिविल सर्विस एंड एलाइड सर्विसिज) एग्जाम को लेकर हुआ है. इस एग्जाम के सीसेट पेपर में 32 सवाल पिछली बार हुई परीक्षा में से पूछे गए हैं. दरअसल, ये वे सवाल हैं, जो पिछली बार हुई परीक्षा में भी थे. वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसको लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए इसे एक भ्रष्टाचार का मामला बताया है.
बता दें कि एचसीएस चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए अभ्यर्थियों को सीटेट यानी सिविल सर्विस एप्टिट्यूट टेस्ट पास करना अनिवार्य है. सीटेट पास करने के लिए 33 अंक लेने अनिवार्य हैं ऐसे में 32 सवाल पुराने होने की वजह से विवाद गहरा गया है. विपक्ष ने आरोप लगाया कि जब 32 सवाल ही पुराने हैं तो फिर 33 अंक लेने में क्या परेशानी आएगी. कांग्रेस ने इसे साजिश करार देते हुए आरोप लगाया कि अपने चहेतों को पेपर पास करवाने के लिए आयोग ने यह काम किया है.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है. सुरजेवाला ने कहा, “नौकरियों में भर्ती घोटालों के चलते आयोग पहले से चर्चाओं में रह चुका है. आयोग के डिप्टी सेक्रेटरी रहे अनिल नागर को विजिलेंस द्वारा पैसों के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है. उनके कब्जे से ओएमआर शीट भी मिली थी. उन्होंने कहा कि पुरानी परीक्षा वाले सवाल पूछकर अपनों को एडजस्ट करने की कोशिश की है” सुरजेवाला ने कहा, “भाजपा-जजपा सरकार के चहेतों को सैट करने के मकसद से ‘सीसेट’ का पर्चा लीक करने का बड़ा ही बेशर्मीपूर्ण तरीका निकाला है. सीसेट’ के पेपर में 100 में से 32 प्रश्न पिछली बार की परीक्षा के पेपर से कॉमा-फुलस्टॉप तक बदले बिना यूं के यूं नकल करके दे दिए.”
एक बार फिर खट्टर सरकार ने हरियाणा के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया है।
BJP-JJP सरकार ने हरियाणा के बच्चों के भविष्य को मंडी में बोली लगाकर बेचा है!
HPSC बना ‘‘हरियाणा पोस्ट सेल्स काउंटर’’!
पहले ही चरण में कलंकित हो चुकी इस परीक्षा को तुरन्त रद्द करके एचसीएस (प्री) परीक्षा… pic.twitter.com/xY5niAzXYr
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) May 24, 2023
वहीं हरियाणा में होने वाली सरकारी भर्तियों पर नजर रखने वालीं सामाजिक कार्यकर्ता स्वेता ढुल ने भी इसको एक पेपर लीक मामला बताते हुए ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की.
HPSC ने CSAT का पेपर लीक कर दिया है स्वयं. CSAT qualify करने के लिए 33 प्रश्न चाहिए होते हैं,पिछले साल के पेपर से 32 सवाल word to word copied.List page पर है जो लोग कहते हैं कि qualifying ही तो है..उन्हे~ गलती करने वाले को एकबार कहने की हिम्मत पैदा कीजिये~ https://t.co/XjVkAkHxEepic.twitter.com/HPcp2sjlq8
कर्नाटक में अपने पांच प्रमुख दावों के चलते एक तरफा बहुमत की सरकार बनाने वाली कांग्रेस के नेता अब अन्य राज्यों में होने जा रहे चुनावों में भी यही मॉडल अपनाने जा रहे हैं. कर्नाटक जीत का असर हरियाणा कांग्रेस के प्रमुख नेता पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भी दिखाई दिया. दरअसल भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गढ़ी-सांपला में एक जनसभा के दौरान कईं बड़े वादे किए.
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो बुढ़ापा पेंशन 6 हजार रुपये महीना की जाएगी. गरीब परिवारों को 100-100 गज के प्लॉट दिए जाएंगे. कौशल रोजगार निगम को खत्म करके युवाओं को पक्की नौकरी देने का वादा किया. वहीं बढ़ती मंहगाई से राहत देने के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर केवल 500 रुपये में उपलब्ध करवाने की बात कही साथ ही युवाओं को रोजदार देने के लिए एक लाख 82 हजार रिक्त पदों को भरने का भी वादा किया. वहीं 300 यूनिट फ्री बिजली का वादा करने के साथ साथ पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने का भी वादा किया.
हरियाणा कांग्रेस के ट्विटर हैंडल ने जारी किया वीडियो
यानी हरियाणा में भी कांग्रेस कर्नाटक की तर्ज पर अपने इन मुख्य वादों के साथ चुनाव लड़ने जा रही है. ऐसे में कांग्रेस के इन वादों के बीच प्रदेश में जेजेपी के सहयोग से सरकार चला रही बीजेपी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती बन सकता है.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने कांग्रेस के वादों पर पलटवार करते हुए कहा. “कर्नाटक जीत के बाद जो कांग्रेस फूली नहीं समा रही है उसकी यह खुशफहमी कुछ ही दिनों की है, क्योंकि राजस्थान चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही कांग्रेस पार्टी ने हरेक चुनाव हारा था. अभी चुनावों में समय है और हम पूरी तरह आश्वसत हैं कि हमारी पार्टी प्रदेश में लोकसभा की दस की दस सीट जीतेगी और विधानसभा का चुनाव जीतकर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाएगी.”
ऐसा बहुत कम सुनने में आता है कि कोई करोड़ों में एक जमीन खरीदे और फिर दो महीने के भीतर उसे महज कुछ लाख रुपए में बेच दे. उस स्थिति में संशय और बढ़ जाता है जब ये पता चलता है कि उक्त जमीन की कीमत कई करोड़ बढ़ चुकी है क्योंकि उसका लैंडयूज़ बदल कर कॉमर्शियल हो चुका है, वह भी सिर्फ 19 दिन के भीतर.
आम आदमी के लिए यह सब सोच पाना भी मुश्किल है लेकिन अगर आप हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रिंसिपल ओएसडी नीरज दफ्तुआर हैं तो आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं है. नीरज दफ्तुआर साल 2016 में हरियाणा में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रिंसिपल ओएसडी के तौर पर नियुक्त हुए और अक्टूबर 2022 तक इस पद पर रहे. देखते ही देखते वो हरियाणा में एक शक्तिकेंद्र बन गए. उन्हीं की पत्नी अनुपम दफ्तुआर और बेटे आदित्य दफ्तुआर को नौ एकड़ जमीन का विशाल टुकड़ा और एक कंपनी कौड़ियों के भाव सौंप दी गई. आइए जानते हैं इस संदेहास्पद मामले को जहां सीधे तौर पर दफ्तुआर परिवार को फायदे पहुंचाने के लिहाज़ से पहले एक कंपनी बनायी गई, उसके जरिए ज़मीन खरीदी गई और फिर इसे दफ्तुआर परिवार के हवाले कर दिया गया. यह सब सिर्फ 70 दिनों में हुआ.
24 फ़रवरी, 2022 को एएनए रियल लॉजिस्टिक्स नाम से एक कंपनी का गठन हुआ. इस कंपनी का पंजीकृत पता है 4/212 हनुमान मंदिर, शिवाजी नगर, गुड़गांव. एएनए रियल लॉजिस्टिक्स की शुरुआत करने वाले दो लोग थे सिद्धार्थ लाम्बा और आशीष चांदना. दोनों इसके शुरुआती निदेशक बने. यह कंपनी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का काम करने के उद्देश्य से बनायी गई थी. कंपनी के गठन के ठीक 30 दिन बाद लाम्बा और चांदना ने रिलायंस कंपनी द्वारा संचालित मॉडल इकनॉमिक टाऊनशिप लिमिटेड (एमईटी) से हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित बादली तहसील के ख़ालिकपुर गांव में नौ एकड़ ज़मीन खरीदी. इसकी कीमत 2.73 करोड़ रुपए बताई गई. (न्यूज़लॉन्ड्री के पास इससे जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं)
22 मार्च को ज़मीन खरीदने के बाद 15 अप्रैल, 2022 को कंपनी के निदेशक चांदना ने डायरेक्टरेट ऑफ़ टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू यानी चेंज ऑफ़ लैंड यूज़) की अर्जी दाखिल की. अर्जी के मुताबिक़ वो लोग उक्त नौ एकड़ कृषि भूमि के ऊपर वेयर हाउस बनाना चाहते थे. हैरत की बात यह है कि मात्र 19 दिनों में डायरेक्टरेट ऑफ़ टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग ने उनकी अर्जी मंजूर कर सीएलयू पास कर दिया. हरियाणा भूमि राजस्व विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक आम तौर पर इस प्रक्रिया में कई-कई महीने लग जाते हैं. लेकिन इस लेन-देन के पीछे नीरज दफ्तुआर थे इसलिए सारा काम बिजली की तेजी से हुआ.
4 मई, 2022 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने लैंडयूज़ परिवर्तित करने की अनुमति दी लेकिन इसके दो दिन पहले यानी 2 मई को एक महत्वपूर्ण घटना घटी. सिद्धार्थ लाम्बा और आशीष चांदना ने एक कानूनी करार के तहत एएनए रियल लॉजिस्टिक्स कंपनी और इसकी सारी संपत्तियां अनुपम दफ्तुआर और आदित्य दफ्तुआर के नाम कर दीं. ये दोनों लोग हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रिंसिपल ओएसडी नीरज दफ्तुआर की पत्नी और बेटे हैं. लांबा और चांदना ने इस हस्तांतरण की वजह बताई कि उनके पास वेयर हाउस बनाने और ट्रांसपोर्ट/ लॉजिस्टिक्स के व्यापार के लिए पैसे नहीं हैं.
यह पूरा लेनदेन बहुत सारे सवाल खड़े करता है. महज़ 20 दिन पहले वेयर हाउस बनाने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की अर्ज़ी लगाने वाले चांदना और लाम्बा के पास अचानक से पैसे खत्म कैसे हो गए, जबकि लैंडयूज़ बदलने के बाद उस ज़मीन की कीमत कई गुना बढ़ गई थी.
करार में इस बात का ज़िक्र करते हुए लिखा है- “एएनए लॉजिस्टिक्स ने नौ एकड़ कृषि भूमि खरीद कर उस पर ट्रासंपोर्ट/लॉजिस्टिक्स का व्यापार करने हेतु हरियाणा सरकार के सामने भूमि उपयोग परिवर्तन की अर्जी दाखिल की है जिसकी इज़ाज़त कभी भी मिल सकती है. पैसों की कमी के चलते एएनए लॉजिस्टिक्स अब व्यापार करने की स्थिति में नहीं है और इसलिए उसके दोनों निदेशकों (चांदना और लाम्बा) ने अनुपम और आदित्य दफ्तुआर से एएनए लॉजिस्टिक्स को अपने अधीन करने की गुजारिश की है. एएनए लॉजिस्टिक्स की गुज़ारिश को अनुपम और आदित्य दफ्तुआर ने मानकर कम्पनी को अपने अधीन ले लिया है जिसके चलते दोनों ही पूर्व निदेशकों ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया है और कंपनी से अपने सभी अधिकारों को त्याग दिया है.”
दूसरा सवाल इससे भी अहम है और इस पूरे लेन-देन की वैधता पर सवालिया निशान खड़ा करता है. जो ज़मीन एएनए रियल लॉजिस्टिक्स ने करीब दो महीने पहले 2 करोड़ 73 लाख रुपए में खरीदी थी उसे सिर्फ 75 लाख रुपए में कंपनी सहित अनुपम और आदित्य दफ्तुआर को सौंप दिया. क्या ऐसा सामान्य हालत में संभव है?
इस मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि पहले दिन से एएनए रियल लॉजिस्टिक्स कंपनी दरअसल नीरज दफ्तुआर की ही थी. एएनए का अर्थ है अनुपम, नीरज और आदित्य.
जिस बादली तहसील के खालिकपुर गांव में लाम्बा और चांदना ने नौ एकड़ ज़मीन 2.73 करोड़ में खरीद कर नीरज दफ्तुआर के परिवार को 75 लाख में बेच दी, वहां जमीनों के भाव आसमान छू रहे हैं क्योंकि झज्जर ज़िला दिल्ली एनसीआर रीज़न के तहत आता है. यहां आम तौर पर ज़मीनों की कीमत प्रति एकड़ दो से चार करोड़ रुपए हैं. अगर हम दफ्तुआर परिवार की नौ एकड़ जमीन की बात करें तो उसकी मौजूदा बाजार कीमत छह करोड़ रुपए प्रति एकड़ से ऊपर जा चुकी है क्योंकि उसका लैंडयूज़ बदल चुका है.
झज्जर में एलकेवीएस मालिक रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड नाम की रियल फर्म चलाने वाले सुरिंदर सिंह मलिक कहते हैं, “खलिकपुर के इलाके में एक एकड़ ज़मीन का भाव दो करोड़ रुपए से ऊपर है. जब से हमारे इलाके में कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे आया तब से जमीनों की कीमत आसमान छूने लगी है. खालिकपुर पहले से ही रिलायन्स स्पेशल इकोनॉमिक जोन से लगा हुआ था, इसलिए यहां ज़मीन के भाव बहुत ज़्यादा हैं.”
15 अप्रैल को लैंड यूज़ परिवर्तन की अनुमति मांगी गई.
4 मई को लैंड यूज़ परिवर्तन की अनुमति मिल गई.
2 मई को कंपनी मय संपत्ति नीरज दफ्तुआर की पत्नी अनुपम और बेटे आदित्य को सौंप दी गई.
लगभग 70 दिनों के भीतर हुआ यह सारा खेल कई सारे सवाल खड़े करता है. आइए अब इस मामले के सभी किरदारों पर गौर फरमाते हैं.
सिद्धार्थ लांबा-आशीष चांदना
लांबा और चांदना, जिन्होंने एएनए लॉजिस्टिक कंपनी का गठन किया, गुड़गांव स्थित ऐवेक ग्रुप (Evac Group) नाम की एक कंपनी में काम करते हैं. यह कम्पनी प्रॉपर्टी मॅनेजमेंट का काम करती है जिसके गुड़गांव के अलावा दुबई और सिंगापुर में भी दफ्तर हैं. मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स के दस्तावेजों के मुताबिक इस कंपनी के तीन निदेशक हैं वैभव ढींगरा, उनकी पत्नी वसुधा ढींगरा और उनकी मां दयावंती ढींगरा.
वसुधा ढींगरा के भाई सिद्धार्थ लाम्बा हैं जो कि एएनए लॉजिस्टिक्स के एक निदेशक थे. सिद्धार्थ 2018 से ऐवेक ग्रुप में काम कर रहे हैं और अभी वह इस कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट एडवाइज़री और ट्रांसैक्शन हैं. एएनए लॉजिस्टिक्स के दूसरे निदेशक आशीष चांदना भी ऐवेक ग्रुप में रेसिडेंशियल सेल्स मैनेजर के रूप में काम करते हैं. गौरतलब है कि एएनए लॉजिस्टिक्स का पंजीकृत पता किसी व्यवसायी इमारत का नहीं बल्कि चांदना के घर का पता था. आज भी दोनों ऐवेक ग्रुप में काम करते हैं.
इस मामले में हमने सिद्धार्थ लाम्बा से बात की. उन्होंने सीधे तौर पर इस तरह की किसी जानकारी से इनकार किया. उन्होंने कहा, “इस बारे में मुझे कुछ पता नहीं सर. मुझे आइडिया नहीं है, थैंक यू सो मच.” यह कहकर उन्होंने हमारा फोन काट दिया. इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका.
आशीष चांदना से संपर्क करने की हमारी सारी कोशिशें नाकाम रहीं. हमने उन्हें कुछ सवाल भेजे हैं. लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं मिला है.
नीरज दफ्तुआर और परिवार
झारखंड के चाईबासा स्थित मांगीलाल रुंगटा स्कूल के पढ़े नीरज दफ्तुआर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर्स की पढ़ाई की है. कोलकाता की एक कंपनी ऑडियो विजुअल आर्ट्स से अपने करियर की शुरुआत करने वाले दफ्तुआर ने इंटर ग्लोब फायनेंशियल लिमिटेड, वाइब्रेंट मीडिया आदि कंपनियों में काम किया है. हिम उर्जा प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के वो सीईओ रहे. साल 2016 तक अपनी पत्नी और बेटे के साथ कई कंपनियों में बतौर निदेशक काम कर रहे थे.
दफ्तुआर की पत्नी अनुपम तिवारी, जिनके नाम पर एनएनए लॉजिस्टिक्स हस्तांतरित हुई है, वह एनर्जी नेक्स्ट नाम की एक मैगज़ीन भी निकालती थीं जो फोकल पॉइंट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के अधीन थी. अनुपम तिवारी इस मैगज़ीन की पब्लिशिंग डायरेक्टर, बिज़नेस एंड इवेंट्स हेड थीं, जबकि उनके बेटे आदित्य दफ्तुआर इसके मार्केटिंग मैनेजर के पद पर थे.
गौरतलब है कि इस मैगज़ीन को चलाने में इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी जो की भारत सरकार का प्रकल्प है से भी मदद मिलती थी. अनुपम दफ्तुआर मौजूदा समय में सात कंपनियों में निदेशक हैं. इसमें इनकोर बिज़नेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, जियोस्पेशियल सोल्यूशंस एंड कंसल्टेंसी सर्विसेस, एएनए लॉजिस्टिक्स, स्ट्रेटकॉम एडवायज़री प्राइवेट लिमिटेड, इनविजन रिसर्च एंड कम्युनिकेशन्स प्राइवेट लिमिटेड, इनकोर एग्रो बिज़नेस और इनविजन स्ट्रेटेजिक एंड रेगुलेटरी अफेयर्स कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड. इन सभी कंपनियों में उनके बेटे आदित्य भी उनके साथ निदेशक हैं.
अप्रैल 2016 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का प्रिसिंपल ओएसडी बनने के बाद नीरज दफ्तुआर लगातार ताकतवर होते गए. सरकारी कामों में मुख्यमंत्री की मदद करने के अलावा दफ्तुआर खट्टर के इतने भरोसेमंद और विश्वासपात्र बन चुके थे कि सितम्बर 2021 में करनाल में हुआ किसानों का एक धरना खत्म करवाने के लिए खट्टर ने दफ्तुआर को भेजा था. उन्होंने अपना काम बखूबी किया और धरना समाप्त करवाया था. अक्टूबर 2022 में दफ्तुआर ने प्रिंसिपल ओएसडी के पद से त्यागपत्र दे दिया और दिल्ली आ गए.
जानकार बताते हैं कि दफ्तुआर के अवैध लेनदेन की भनक भाजपा में ऊपर तक लग गई थी इसलिए उन्हें चुपचाप हरियाणा से हटाकर दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन आज भी वो हरियाणा सरकार के कामकाज में गहरी दखल रखते हैं.
इस मामले में हमने नीरज दफ्तुआर से बात की. उन्होंने कहा, “जब यह कंपनी गठित हुई, उसके बाद इन लोगों (चांदना और लाम्बा ने) 2.73 करोड़ रुपए में एक ज़मीन खरीदी. इन्होंने 50 लाख रुपए एडवांस दिए थे और बाकी पोस्ट डेटेड चेक्स दिए थे. लेकिन बाकी पैसे ये नहीं दे पा रहे थे. तब इन्होंने हमसे बात की. इन लोगों ने 2.93 करोड़ मेरी पत्नी और बेटे से ज़मीन की कीमत के तौर पर लिया जिसमे रजिस्ट्री की कीमत भी शामिल थी. बाद में 75 लाख रुपए अलग से मुनाफे के तौर पर लिए. कुल मिलाकर हमारा लगभग चार करोड़ खर्च हो गया. यह गलत बताया जा रहा है कि 75 लाख में नौ एकड़ ज़मीन ली गई.”
हमने उनसे पूछा कि जिस इलाके में जमीन की कीमत दो करोड़ प्रति एकड़ के ऊपर है वहां पर उन्हें पौने तीन करोड़ में नौ एकड़ जमीन कैसे मिल गई. इस सवाल को टालते हुए बोले, “आप तो कुछ भी लिख सकते हैं. (फिर हंसते हुए) आप भी जानते हो, हम भी जानते हैं, छोड़ दो ना बाकी, बाकी देश में क्या हो रहा है, छोड़ दो ना आप.”
हमने एक बार फिर नीरज दफ्तुआर से पूछा कि अगर आपने लांबा और चांदना को अलग से 2.93 करोड़ का भुगतान किया है तो उसका प्रमाण है क्या? इस पर नीरज कहते हैं, “मेरे पास कागज़ात हैं, लेकिन मैं उन्हें साझा नहीं कर सकता.”
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस मामले में नीरज दफ्तुआर के बेटे आदित्य दफ्तुआर से भी बात की लेकिन उन्होंने खराब नेटवर्क का जिक्र करते हुए कॉल बीच में ही काट दिया.
रोहतक के बहलबा गांव स्थित प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (पैक्स) में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत प्राप्त करीबन 1.40 करोड़ रुपये की राशि का घोटाला सामने आया है. किसानों का आरोप है कि पांच साल पहले जारी 1.40 करोड़ रुपये की राशि में से 42 लाख रुपये पैक्स अधिकारियों द्वारा गबन कर लिया गया है वहीं बाकि 98 लाख रुपये की राशि आज तक भी किसानों को वितरित नहीं की गयी है.
अंग्रेजी समाचार पत्र दैनिक ट्रिब्यून में छपी पत्रकार सुमित धवन की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व सरपंच मनोज अहलावत ने कहा, “2017 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 1.40 करोड़ रुपये की राशि उन किसानों को भुगतान करने के लिए जारी की गई थी जिनकी फसल खराब हो गई थी लेकिन किसानों को राशि जारी करने के बजाय, 42 लाख रुपये का गबन किया गया और 98 लाख रुपये उनके ऋण खातों में जमा कर दिए गए”
इस पूरे मामले पर रोहतक के उपायुक्त अजय कुमार ने कहा, “मामले की जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द उनका बकाया मिले”
वहीं भुगतान में देरी से आक्रोशित किसानों ने बुधवार को रोहतक केंद्रीय सहकारी बैंक की ग्राम शाखा पर धरना दिया.
हरियाणा सरकार में मंत्री संदीप सिंह ने महिला कोच छेड़छाड़ मामले में लाई डिटेक्टर यानी पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया है. मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ पिछले साल केस दर्ज किया गया था जिसके बाद उनको खेल मंत्री के पद से तो हटा दिया गया था लेकिन अब भी वो खट्टर की कैबिनेट में बने हुए हैं.
बता दें कि मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस जांच कर रही है. इस बीच चंडीगढ़ पुलिस ने एक स्थानीय कोर्ट के सामने मंत्री का लाई डिटेक्टर टेस्ट यानी पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति के लिए दायर आवेदन का जवाब जारी किया है. आवेदन में चंडीगढ़ पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने कहा कि सही तथ्यों को सामने लाने के लिए मंत्री के लाई डिटेक्टर/पॉलीग्राफ टेस्ट की आवश्यकता थी, क्योंकि उनके दावे पीड़िता द्वारा दिए गए बयानों का खंडन कर रहे थे. लेकिन मंत्री संदीप सिंह ने लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने से मना कर दिया है.
बता दें कि हरियाणा सरकार में मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ पिछले साल 31 दिसंबर को एक जूनियर महिला कोच की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था. महिला कोच ने आरोप लगाया था कि मंत्री ने पिछले साल चंडीगढ़ के सेक्टर 7 में अपने सरकारी आवास पर उनका यौन शोषण किया था.
26 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हरियाणा के जींद में हुई किसान महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान जुटे किसानों ने इस किसान महापंचायत के जरिए मुख्य रूप से गन्ना किसानों के लिए गन्ने का रेट 450 रुपये करने की मांग की. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने बजट सत्र के दौरान 15 से 22 मार्च के बीच मार्च टू पार्लियामेंट का आयोजन करने का प्रस्ताव पास किया. दिल्ली संसद मार्च की तारीख का एलान 9 फरवरी को कुरुक्षेत्र की मीटिंग में किया जाएगा.
वहीं किसान महापंचात में जुटे बड़े किसान नेताओं ने खेती किसानी से जुड़े मुख्य मुद्दों को हासिल करने के लिए अखिल भारतीय स्तर पर आंदोलन तेज करने की बात कही. किसान महापंचायत में केंद्र की मोदी सरकार पर लिखित आश्वासन के बावजूद पीछे हटने का आरोप लगाया गया.
जींद में हुई किसान महापंचायत में किसान नेताओं ने मंच से किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी प्राप्त करने, लखीमपुर खीरी हत्याकांड के आरोपी राज्य मंत्री अजय मिश्रा को हटाने और उसके बेटे आशीष मिश्रा को सजा दिलाने, बिजली संशोधन विधेयक-2022 को वापस करवाने और कर्जमाफी जैसे मुद्दों पर कमर कसने का आह्वान किया. यह घोषणा की गई कि बजट सत्र के दौरान 15 से 22 मार्च के बीच मार्च टू पार्लियामेंट का आयोजन किया जाएगा. सटीक तिथि की घोषणा 9 फरवरी को कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की एसकेएम बैठक में की जाएगी.
हरियाणा सरकार की ओर से गन्ने के लिए एसएपी में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के एक दिन बाद, भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने गन्ने की कीमतों के लिए अपना विरोध बंद कर दिया है और चीनी मिलों की आपूर्ति फिर से शुरू करने का फैसला किया है. बुधवार को सीजन के लिए एसएपी बढ़ाकर 372 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया था,जबकि किसान 450 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे थे. 20 जनवरी से आपूर्ति बंद कर दी गई थी, जिससे चीनी मिलों में कामकाज ठप हो गया था.
कृषि कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के बाद, बीकेयू (चढ़ूनी) के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा, “सरकार द्वारा बढ़ाया गया SAP अपर्याप्त था, लेकिन गन्ने को खेतों में खड़ा नहीं छोड़ा जा सकता है. किसानों को किसी तरह का आर्थिक नुकसान न हो, इसके लिए जनभावनाओं को देखते हुए चीनी मिलों को आपूर्ति फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है. हालांकि, अगर एसकेएम गन्ने की कीमतों को लेकर आंदोलन का आह्वान करता है, तो यूनियन एसकेएम को अपना समर्थन देगी.”
वहीं बीकेयू (चढ़ूनी) द्वारा आंदोलन को वापस लेने का निर्णय भाजपा के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है क्योंकि किसानों ने इससे पहले 29 जनवरी को गोहाना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के दौरान विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था.
गुरनाम चढ़ूनी ने कहा, “यह भी तय किया गया है कि अमित शाह की रैली के दौरान कोई प्रदर्शन नहीं किया जाएगा. लेकिन आने वाले चुनावों में बीजेपी का विरोध करने का भी सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है.”
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा चलाए गए शिक्षकों के तबादला अभियान को गलत बताते हुए इसे स्पष्ट रूप से छात्रों के हितों की अनदेखी और अधिकारियों की सनक का नतीजा बताया. जस्टिस हरनरेश सिंह गिल ने शिक्षकों के तबादलों की वजह से छात्रों को आई दिक्कतों को स्पष्ट करने के लिए वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा के डिप्टी डायरेक्टर को अदालत में हाजिर रहने का निर्देश दिया है.
बता दें कि प्रदेश भर के शिक्षकों ने सरकार के ट्रांसफर ड्राइव अभियान का विरोध किया था. सरकार के ट्रांसफर ड्राइव अभियान के खिलाफ शिक्षक सड़कों पर भी उतरे थे लेकिन सरकार ने शिक्षकों की मांगों की परवाह किए बिना ट्रांसफर ड्राइव स्कीम लागू कर दी जिसके बाद शिक्षकों ने हाई कोर्ट का रुख किया और अब हाई कोर्ट ने भी शिक्षकों की ट्रांसफर ड्राइव स्कीम पर सवाल खड़े करते हुए इसे मनमाने तरीके से लागू करने वाली स्कीम बताया है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस गिल ने जोर देकर कहा कि यह समझ से परे है कि अधिकारी “इतनी गहरी नींद” में कैसे चले गए. स्कूलों में शिक्षकों की पोस्टिंग में अनुपातहीनता की गई है, जहां विषय के छात्रों की संख्या शून्य या न्यूनतम है वहां शिक्षक लगाए गए और दूसरी ओर जहां छात्रों की संख्या ज्यादा थी वहां विषय के शिक्षकों को तैनात नहीं किया गया.
याचिकाकर्ता के वकील की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों को पढ़ने और तर्कों को सुनने के बाद जस्टिस गिल ने कहा, “एक दस्तावेजों से पता चलता है कि आठ स्कूलों में, छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले विषय शिक्षकों की अनुपातहीन संख्या उपलब्ध है. कुछ स्कूलों में छात्र नहीं होने पर भी तीन-तीन शिक्षकों की पोस्टिंग की गई है. वहीं जहां छात्रों की अच्छी संख्या है वहां किसी भी विषय के शिक्षकों की पोस्टिंग नहीं किया गया है.”