ट्रैक्टरों के साथ फिर दिल्ली जाएंगे किसान, बजट सत्र में करेंगे संसद मार्च!

26 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हरियाणा के जींद में हुई किसान महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान जुटे किसानों ने इस किसान महापंचायत के जरिए मुख्य रूप से गन्ना किसानों के लिए गन्ने का रेट 450 रुपये करने की मांग की. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने बजट सत्र के दौरान 15 से 22 मार्च के बीच मार्च टू पार्लियामेंट का आयोजन करने का प्रस्ताव पास किया. दिल्ली संसद मार्च की तारीख का एलान 9 फरवरी को कुरुक्षेत्र की मीटिंग में किया जाएगा.

वहीं किसान महापंचात में जुटे बड़े किसान नेताओं ने खेती किसानी से जुड़े मुख्य मुद्दों को हासिल करने के लिए अखिल भारतीय स्तर पर आंदोलन तेज करने की बात कही. किसान महापंचायत में केंद्र की मोदी सरकार पर लिखित आश्वासन के बावजूद पीछे हटने का आरोप लगाया गया.

जींद में हुई किसान महापंचायत में किसान नेताओं ने मंच से किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी प्राप्त करने, लखीमपुर खीरी हत्याकांड के आरोपी राज्य मंत्री अजय मिश्रा को हटाने और उसके बेटे आशीष मिश्रा को सजा दिलाने, बिजली संशोधन विधेयक-2022 को वापस करवाने और कर्जमाफी जैसे मुद्दों पर कमर कसने का आह्वान किया. यह घोषणा की गई कि बजट सत्र के दौरान 15 से 22 मार्च के बीच मार्च टू पार्लियामेंट का आयोजन किया जाएगा. सटीक तिथि की घोषणा 9 फरवरी को कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की एसकेएम बैठक में की जाएगी.

गन्ने के रेट में 10 रुपये की बढ़ोतरी पर ही राजी हुए चढ़ूनी, आंदोलन खत्म करने का किया एलान!

हरियाणा सरकार की ओर से गन्ने के लिए एसएपी में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के एक दिन बाद, भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने गन्ने की कीमतों के लिए अपना विरोध बंद कर दिया है और चीनी मिलों की आपूर्ति फिर से शुरू करने का फैसला किया है. बुधवार को सीजन के लिए एसएपी बढ़ाकर 372 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया था,जबकि किसान 450 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे थे. 20 जनवरी से आपूर्ति बंद कर दी गई थी, जिससे चीनी मिलों में कामकाज ठप हो गया था.

कृषि कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के बाद, बीकेयू (चढ़ूनी) के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा, “सरकार द्वारा बढ़ाया गया SAP अपर्याप्त था, लेकिन गन्ने को खेतों में खड़ा नहीं छोड़ा जा सकता है. किसानों को किसी तरह का आर्थिक नुकसान न हो, इसके लिए जनभावनाओं को देखते हुए चीनी मिलों को आपूर्ति फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है. हालांकि, अगर एसकेएम गन्ने की कीमतों को लेकर आंदोलन का आह्वान करता है, तो यूनियन एसकेएम को अपना समर्थन देगी.”

वहीं बीकेयू (चढ़ूनी) द्वारा आंदोलन को वापस लेने का निर्णय भाजपा के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है क्योंकि किसानों ने इससे पहले 29 जनवरी को गोहाना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के दौरान विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था.

गुरनाम चढ़ूनी ने कहा, “यह भी तय किया गया है कि अमित शाह की रैली के दौरान कोई प्रदर्शन नहीं किया जाएगा. लेकिन आने वाले चुनावों में बीजेपी का विरोध करने का भी सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है.”

हरियाणा में मनमाने ढंग से चलाया गया शिक्षकों का तबादला अभियान: हाई कोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा चलाए गए शिक्षकों के तबादला अभियान को गलत बताते हुए इसे स्पष्ट रूप से छात्रों के हितों की अनदेखी और अधिकारियों की सनक का नतीजा बताया. जस्टिस हरनरेश सिंह गिल ने शिक्षकों के तबादलों की वजह से छात्रों को आई दिक्कतों को स्पष्ट करने के लिए वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा के डिप्टी डायरेक्टर को अदालत में हाजिर रहने का निर्देश दिया है.

बता दें कि प्रदेश भर के शिक्षकों ने सरकार के ट्रांसफर ड्राइव अभियान का विरोध किया था. सरकार के ट्रांसफर ड्राइव अभियान के खिलाफ शिक्षक सड़कों पर भी उतरे थे लेकिन सरकार ने शिक्षकों की मांगों की परवाह किए बिना ट्रांसफर ड्राइव स्कीम लागू कर दी जिसके बाद शिक्षकों ने हाई कोर्ट का रुख किया और अब हाई कोर्ट ने भी शिक्षकों की ट्रांसफर ड्राइव स्कीम पर सवाल खड़े करते हुए इसे मनमाने तरीके से लागू करने वाली स्कीम बताया है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस गिल ने जोर देकर कहा कि यह समझ से परे है कि अधिकारी “इतनी गहरी नींद” में कैसे चले गए. स्कूलों में शिक्षकों की पोस्टिंग में अनुपातहीनता की गई है, जहां विषय के छात्रों की संख्या शून्य या न्यूनतम है वहां शिक्षक लगाए गए और दूसरी ओर जहां छात्रों की संख्या ज्यादा थी वहां विषय के शिक्षकों को तैनात नहीं किया गया.

याचिकाकर्ता के वकील की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों को पढ़ने और तर्कों को सुनने के बाद जस्टिस गिल ने कहा, “एक दस्तावेजों से पता चलता है कि आठ स्कूलों में, छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले विषय शिक्षकों की अनुपातहीन संख्या उपलब्ध है. कुछ स्कूलों में छात्र नहीं होने पर भी तीन-तीन शिक्षकों की पोस्टिंग की गई है. वहीं जहां छात्रों की अच्छी संख्या है वहां किसी भी विषय के शिक्षकों की पोस्टिंग नहीं किया गया है.”

गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों ने दूसरे दिन भी जड़ा शुगर मिलों पर ताला!

हरियाणा सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अखिरी दिन प्रदेश में गन्ने के दाम बढ़ाने की विपक्ष की मांग को नहीं माना था. गन्ने के दाम में बढ़ोतरी न होने से प्रदेश के किसान आक्रोषित हैं. जिसको लेकर आज नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी के नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन चढूनी ने प्रदेश की सभी शुगरमिलों को बंद

पिछले कईं दिनों से किसानों ने गन्ने की छिलाई बंद कर रखी है और किसान नेताओं की ओर से जारी कार्यक्रम के तहत प्रदेशभर की शुगर मिलों पर तालाबंदी की गई है. किसानों ने पानीपत ,फफड़ाना ,करनाल ,भादसोंभाली आनंदपुर शुगर मिल व महम शुगर मिल पर भी सुबह 9 बजे ताला लगाते हुए धरना शुरू किया. साथ ही जो भी गन्ने की ट्राली मिल पर पहुंची, उन्हें वापस लौटा दिया. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करती, तब तक शुगर मिलों को बंद रखते हुए प्रदर्शन किया जाएगा.

किसानों ने अम्बाला में नारायणगढ़ शुगर मिल के बाहर धरना दिया. सोनीपत के गोहाना में आहुलाना शुगर मिल पर ताला जड़कर किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तो वहीं किसानों का शाहबाद शुगर मिल और करनाल शुगर मिल पर भी धरना जारी है.

किसान गन्ने के रेट को बढ़ाकर 450 रुपए करने की मांग कर रहे हैं. बता दें कि पंजाब में गन्ना किसानों को 380 रुपये प्रति किवंटल का रेट मिल रहा है.

दो दिन पहले किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने ट्वीट किया था, “आज रात के बाद कोई भी किसान भाई किसी भी शुगर मिल में अपना गन्ना लेकर ना जाए अगर कोई किसी नेता या अधिकारी का नजदीकी या कोई अपना निजी फायदा उठाने के लिए शुगर मिल में भाईचारे के फैसले के विरुद्ध गन्ना ले जाता है और कोई उसका नुकसान कर देता है तो वह अपने नुकसान का खुद जिम्मेदार होगा.”

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने आज लिखा, “हरियाणा के सभी शुग़रमिल बंद करने पर सभी पदाधिकारियों व किसान साथियों का धन्यवाद, अगर सरकार 23 तारीख़ तक भाव नहीं बढ़ाती तो आगे की नीति 23 तारीख़ जाट धर्मशाला में बनायी जाएगी.”

सोनीपत गन्ना मिल के बाहर किसानों का प्रदर्शन.

धान घोटाला: 35 राइस मिलों से ढाई हजार क्विंटल से ज्यादा धान गायब!

हरियाणा में करनाल के बाद अब कैथल में भी धान घोटाला सामने आया है. कैथल उपायुक्त द्वारा गठित 17 टीमों की छानबीन में सामने आया कि जिले की 35 चावल मिलों के स्टॉक में 2630.82 क्विंटल धान की कमी पाई गई. मीडिया में यह रिपोर्ट आने के बाद टीमों का गठन किया गया था कि फर्जी गेट पास पर धान की फर्जी खरीद हो रही है और धान दूसरे राज्यों से आ रहा है.

उपायुक्त द्वारा गठित टीमों ने जिले की 165 मिलों का नवंबर-दिसंबर महीने में निरक्षण किया था. टीम ने कस्टम मिल्ड चावल (सीएमआर) की गुणवत्ता के साथ खरीद एजेंसियों द्वारा धान जारी करने के साथ मिलों में उपलब्ध स्टॉक का भी निरक्षण किया.

अंग्रेजी अखबार के हवाले से कैथल उपायुक्त संगीता तेतरवाल ने बताया कि “मैंने राइस मिलों का निरक्षण करने के लिए 17 टीमों का गठन किया है. टीमें चावल की गुणवत्ता के साथ-साथ धान के स्टॉक और कस्टम-मिल्ड चावल की जांच की है. टीम के सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट निदेशक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग को सौंप दी है. विभाग के निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी.”

उन्होंने बताया कि हमने 165 मिलों को 82,40,812.560 क्विंटल धान आवंटित किया है. टीम के सदस्यों को स्टॉक में 2,630.82 क्विंटल धान और 14.61 क्विंटल चावल कम मिला है.

हरियाणा में निकली बेरोजगारों की बारात, सेहरा बांध बीजेपी दफ्तर पहुंचे बेरोजगार दूल्हे!

हरियाणा के युवा बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर अनोखे तरीके से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते नजर आए. युवाओं ने हरियाणा के रोहतक में बेरोजगारों की बारात निकली. यहां से बेरोजगारों की बारात बीजेपी के प्रदेश कार्यालय जाकर रुकी. बेरोजगारों की बारात की अगुवाई आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने की. इस दौरान नाचते गाते हुए अनेक बेरोजगार युवा दूल्हे बनकर बारात में शामिल हुए. प्रदर्शनकारी युवाओं ने बीजेपी दफ्तर के बाहर दूल्हों के सेहरे को आग लगाकर विरोध जताया. बेरोजगारों की बारात में हजार की संख्या में युवा जुटे.

दरअसल हरियाणा में बेरोजगारी दर देश में सबसे ज्यादा है. हालंहि में आई सीएमआईई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा बेरोजगारी के मामले में एक बार फिर पहले नंबर पर रहा है. CMIE रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर के महीने में हरियाणा में बेरोजगारी की उच्चतम दर 37.4% रही.

नवीन जयहिंद ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तक सरकार बेरोजगारों के लिए रोजगार की व्यवस्था नहीं करेगी इसी तरह से प्रदेशभर में बेरोजगारों की बारात निकालते रहेंगे. जयहिंद ने विपक्ष को भी निशाने पर लिए. विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष गूंगा हो चुका है क्योंकि सरकार ने विपक्ष के नेताओं की फाइल दबा रखी है.

बेरोजगारों की बारात के लिए गूंगे विपक्ष को भाती बनाया गया साथ ही भोजन में युवाओं को सरकार के झूठे आश्वासन मिले. बीजेपी के रोहतक कार्यालय पहुंची बेरोजगारों की बारात का सरकार के मंत्रियों के मुकुट पहने युवाओं ने स्वागत किया.

हरियाणा में नवीन जयहिंद को इस तरह के अनोखे विरोध प्रदर्शन के लिए जाने जाता है. इससे पहले बुजुर्गों की बुढ़ापा पेंशन काटे जाने पर भी नवीन जयहिंद बुजुर्गों की बारात लेकर चंडीगढ़ पहुंच गए थे.

खेतों में जल भराव से परेशान किसानों ने किया हाइवे जाम!

खेतों में जल भराव की समस्या को लेकर हिसार के सिंघवा राघो गांव के किसानों ने करीब छह घंटे तक हांसी-बरवाला हाइवे जाम कर दिया. खेतों से पानी निकालने में विफल रहे अधिकारियों से नाराज किसानों ने हाइवे जामकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की.

हांसी-बरवाला हाइवे पर जाम लगाकर बैठे किसानोंं ने आरोप लगाया कि बारिश का पानी अभी भी उनके खेतों में खड़ा है, जिससे गांव के बाहरी इलाके में स्थित कुछ इलाकों की सड़कें पानी में डूब गई हैं, जिसके कारण गांव के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

अंग्रेजी अखबार ‘द ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में हुई भारी बारिश के कारण क्षेत्र के खेतों में पानी भर गया था. भारी जलभराव के कारण हिसार जिले के करीब 50 गांवों के किसान रबी की फसल नहीं बो पा रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार धावर, बिठमारा, सिंघवा राघो, गुराना, सिंधार, लाडवा, पाटन, मिर्जापुर, चैनत, गढ़ी, भटोल जाटन, खैरी, भगाना, हरिता सबसे ज्यादा प्रभावित गांव हैं. वहीं मुख्य सचिव संजीव कौशल ने दिसंबर के पहले सप्ताह में उपायुक्तों को जलभराव वाले खेतों से पानी की निकासी के लिए तत्काल उपाय करने का निर्देश दिया था.

वहीं गांव के नरेश कुमार ने कहा कि पिछले साल सितंबर से लगभग 800 एकड़ में अभी भी बारिश का पानी भरा हुआ है. उन्होंने कहा कि पूरा क्षेत्र खेती योग्य है और इस रबी मौसम में बाढ़ के कारण बुवाई नहीं की जा सकती है. ऐसे कई किसान हैं जो अपने खेतों में एक दाना भी नहीं बो पाते हैं और इस प्रकार उन्हें अगले साल के लिए अनाज दूसरों से खरीदना पड़ता है.

एक अन्य ग्रामीण सुनील कुमार ने कहा कि उन्होंने कई बार जिला अधिकारियों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा, “अधिकारियों द्वारा हमारी सुनवाई नहीं करने के बाद हमें सड़क जाम करनी पड़ी है,” उन्होंने कहा, यहां तक कि कुछ घरों की नींव में पानी के रिसाव के कारण इमारतों में दरारें भी आ गई हैं.

सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रुके हुए पानी को तेजी से निकालने के वादे पर ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की. लेकिन ग्रामीणों ने उसकी एक न सुनी. इसके बाद तहसीलदार गांव पहुंचे और ग्रामीणों से लंबी चर्चा की. तहसीलदार ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अपने जिला मुख्यालय से पाइप लाइन लाने और मोटर लगाकर पानी की निकासी शुरू करने का निर्देश दिया. उन्होंने गांवों से खेतों से पानी निकालने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा. ग्रामीणों ने समय सीमा पूरी नहीं होने पर फिर से सड़क जाम करने की चेतावनी दी है.

गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया तो 20 जनवरी से सभी चीनी मील बंद करेंगे किसान!

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू-चढूनी) के बैनर तले किसानों ने करनाल अनाज मंडी में गन्ने के (एसएपी) को मौजूदा 362 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की. ‘किसान महापंचायत’ के दौरान बीकेयू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा अगर हमारी मांग नहीं मानी गई तो हम अपनी फसल को आग लगा देंगे और हम 20 जनवरी से सभी चीनी मिलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देंगे. वहीं साथ ही 16 जनवरी को एसएपी तय करने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के साथ हुई बैठक में उनकी मांगों को नहीं माना गया तो किसानों ने 17 जनवरी से गन्ने की छुलाई बंद करने और चीनी मिलों को फसल नहीं भेजने की घोषणा की.

उन्होंने 20 जनवरी से अनिश्चितकाल के लिए राज्य की सभी चीनी मिलों को बंद करने की भी घोषणा की. बता दें कि राज्य सरकार ने गन्ने की कीमतों को देखने और 15 दिनों में एक रिपोर्ट देने के लिए एक समिति गठित की थी.

किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल 16 जनवरी को पंचकूला में समिति से मुलाकात करेगा. किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘हम समिति के सदस्यों से मिलेंगे और अपनी मांग उठाएंगे. हम हर तरह की कुर्बानी के लिए तैयार हैं. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हम अपनी फसलों को आग लगा देंगे.’ आगे उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन लागत बढ़ रही है और हमारी आय कम हो रही है.’

हम अपनी मांगों की पूर्ति तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे. हमारे निर्णय के अनुसार किसान 16 जनवरी से गन्ने की छुलाई नहीं करेंगे और अपनी फसल चीनी मिलों को नहीं भेजेंगे. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हम 20 जनवरी से सभी चीनी मिलों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर देंगे. उन्होंने कहा, किसान पिछले आठ दिनों से मिलों में धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर विचार नहीं किया, इसलिए हमने यह किसान महापंचायत की है.

महिला कोच से छेड़छाड़ के आरोपी मंत्री संदीप सिंह के बचाव में आए मुख्यमंत्री मनोहर लाल!

एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक सब्बरवाल का इस तरह से राज्य मंत्री संदीप सिंह की पैरवी के लिए चंडीगढ़ पुलिस के सामने खड़े होना सरासर गलत है. यह संदीप सिंह पर कोई सरकारी मामला नहीं है, जो सब्बरवाल खड़े हों. यह व्यक्तिगत मामला है. भले ही तकनीकी तौर पर सब्बरवाल संदीप सिंह की पैरवी कर सकते हों और नियम उनके हक में हों, लेकिन उनके ऐसा करने से हरियाणा में चल रही जांच प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकती. संदीप सिंह के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की केस फाइल में क्या कुछ है, यह वकील होने के नाते सब्बरवाल को पता चल जाएगा और यहां जो फैक्ट फाइंडिंग कमिटी काम कर रही है, उस पर उक्त जानकारी के आधार पर राज्य मंत्री संदीप सिंह के मार्फत दबाव डलवा सकते हैं. इस मामले के कई सारे लिंक हरियाणा से संबंध रखते हैं, इसलिए सब्बरवाल को न तो संदीप सिंह की वकालत करनी चाहिए और राज्य सरकार अगर सबकुछ निष्पक्ष चाहती है (हालांकि, मुझे नहीं लगता. क्योंकि मुख्यमंत्री खुद ही ऐसी-ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं, जो उनके कद के हिसाब से शोभा नहीं देता. इस प्रकरण में एक-एक शब्द के मायने निकालें जाएं तो यह अत्यंत निंदनीय हैं. कोई विपक्षी ऐसा बयान दे देता तो अभी तक भाजपाई उसकी खाल खींच देते.) तो सब्बरवाल पर कार्रवाई करनी चाहिए.

क्योंकि, इससे पहले डिप्टी एडवोेकेट जनरल रहे गुरदास सिंह सलवारा को हरियाणा सरकार ने हटा दिया था. पंचकूला सीबीआई कोर्ट द्वारा गुरमीत सिंह को दुष्कर्म के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद सलवारा उनके साथ खड़े नजर आए थे. इस मामले में भी राज्य मंत्री संदीप के मामले की तरह प्रोसिक्यूसन एजेंसी हरियाणा नहीं अलग थी. संदीप सिंह के मामले में चंडीगढ़ पुलिस प्रोसिक्यूसन एजेंसी है तो गुरमीत सिंह के मामले में सीबीआई थी. सलवारा ने गुरमीत सिंह की तरफ से पैरवी भी नहीं की थी, जबकि सब्बरवाल तो संदीप सिंह की पैरवी कर रहे हैं. जब हरियाणा सरकार सलवारा की मौजूदगी को लीगल Propriety का मामला मानते हुए हटाने का कदम उठा सकती है तो फिर सब्बरवाल पर कार्रवाई से क्यों बच रही है? क्या मुख्यमंत्री ने ही सब्बरवाल को संदीप सिंह का साथ देने के लिए भेजा है? अगर कार्रवाई नहीं होती है तो फिर यही समझा जाएगा कि जिस तरह से बयानबाजी में मुख्यमंत्री संदीप सिंह को क्लीन चिट देने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं, कानूनी तौर पर भी उसे बचाने की हद तक जाने को तैयार हैं. लेकिन, ये जनता है, सब समझती है.

आज के अखबारों में मुख्यमंत्री मनोहर लाल का लंबा-चौड़ा बयान पढ़ा. इसे पढ़ कर हंसी भी आई, पीड़ा भी हुई. हंसी की वजह यह रही कि महिला कोच से छेड़छाड़ के आरोपी राज्य मंत्री संदीप सिंह के पक्ष में मुख्यमंत्री कितनी मुखरता के साथ खड़े हो गए हैं. पीड़ा इस बात की हुई कि प्रदेश की राजनीति के सर्वोच्च ओहदे पर विराजमान मनोहर लाल ने ये शब्द कहे. यानी, वहां बैठे किसी भी शख्स के मुखारविंद से इस तरह की शब्दावली की उम्मीद कम से कम कोई भी कानून पसंद आम हरियाणवी तो कर ही नहीं सकता.

मुख्यमंत्री जी, आप भले ही छेड़छाड़ के मामले की गंभीरता को न समझते हों, लेकिन यह जरूर समझने का प्रयास करें कि किसी भी बेटी-महिला की अस्मिता से इस तरह किसी को भी छेड़छाड़ की खुली छूट कतई नहीं दी जा सकती. अभी तक मैं कितनी ही बार सोचता था, कहता भी था, कि मुख्यमंत्री भले आदमी हैं, लेकिन उनके चारों ओर कुछ ऐसे लोग हैं, जो समय-समय पर उन्हें गुमराह करते हैं. अपने निजी स्वार्थ में मुख्यमंत्री से कुछ न कुछ ऐसा करवा जाते हैं, जो कम से कम मुख्यमंत्री को नहीं कहना या करना चाहिए. लेकिन, इस बार जो बयान आपके पास से आया है, उसमें चारों ओर मौजूद जुंडली-मंडली का कोई अधिक रोल न मानते हुए मैं तो सीधे तौर पर आपको ही जिम्मेदार मानता हूं. आप बार-बार कहते हैं कि हरियाणा आपका परिवार है. हर हरियाणवी आपका भाई, बेटा, बहन, मां आदि आदि हैं. तो फिर अब क्या हो गया, जो बेटी को न्याय दिलाने की बजाए अपने राज्य मंत्री को हर तरीके से बचाने की भाषा बाेल रहे हैं? क्यों चंडीगढ़ पुलिस के सामने पैरवी करने के लिए हरियाणा सरकार के अडिशनल अटॉर्नी जनरल दीपक सब्बरवाल की अंदरखाने जिम्मेदारी तय की गई?

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मुख्यमंत्री जी, आपके अनुसार अगर छेड़छाड का आरोपी अपने दफ्तर आकर राज्य मंत्री के तौर पर काम कर सकता है तो फिर पुलिस को कह दीजिए कि सैकड़ों छुटपुट मामलों के आरोपियों को पकड़ना बंद कर दे. क्यों लूट की योजना बनाते पकड़े गए युवाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है? जबकि, उन्होंने तो सिर्फ योजना बनाई थी, और तो कुछ किया ही नहीं. क्यों, चोरी के आरोपी को पकड़ कर जेल भेजा जाता है, क्योंकि मौके पर तो वह भी नहीं पकड़ा गया. क्यों, स्नैचिंग के आरोपी को पकड़ कर जेल भेजते हैं, जबकि मौके पर तो यह भी नहीं पकड़ा गया. क्यों, चाकू-कट्टे के साथ पकड़े गए आरोपी को अरेस्ट किया जाता है, जबकि कोई भी वारदात तो इन्होंने अभी तक की भी नहीं? बदलवा दीजिए नियम-कायदे. क्यों हजारों बेगुनाहों को आरोपी बनते ही अरेस्ट होना पड़ता है, क्यों तुरंत जेल जाना पड़ता है. इन्हें भी संदीप सिंह की तरह राहत दिलाने का प्रयास तो कीजिए. ले लीजिए इनका भी पक्ष. जितने न्याय प्रिय होकर आप राज्य मंत्री को बचाने की कोशिश में दिखाई दे रहे हैं, उतनी कोशिश इन बाकी के लिए भी करेंगे तो आपको तो अगले चुनाव में वोट मांगने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. ये ही जितवा देंगे आपको चुनाव. तो बिना देरी किए आज ही जारी करवा दीजिए आदेश कि पुलिस अब हरियाणा में किसी भी आरोपी को दोष साबित होने तक अरेस्ट नहीं करेगी.

अजय दीप लाठर, लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं.

एक्सप्रेस-वे पर रास्ते की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे एक किसान की ठंड से मौत!

नूंह में बनने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अपने गांव के पास सड़क के रास्ते की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों में से एक किसान की ठंड के कारण मौत हो गई. मृतक किसान राम खिलाड़ी नूंह ब्लॉक के मंडोकला गांव के रहने वाले थे. वह गांव के अन्य किसानों के साथ, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अपने गांव के पास सड़क से कटने वाले रास्ते की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.

गांव के किसान एक जनवरी से धरने पर बैठे हैं जिनमे से सोमवार तड़के एक किसान की मौत हो गई. ग्रामीणों ने मांग पूरी होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है. ग्रामीणों का दावा है कि उनके खेत तीन तरफ से हाइवे से घिरे हुए हैं और उनके पास अपनी जमीन तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. उन्हें सड़क पार अपने खेतों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. किसानों ने सितंबर में भी विरोध किया था और उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था.

प्रदर्शन कर रहे किसानों में से एक किसान ने बताया, “निर्माण कंपनी ने वादा नहीं निभाया और रास्ते के लिए कोई प्रावधान नहीं किया. हम अपनी मांग पूरी होने तक विरोध करेंगे.”