गुरुवार, 09 फ़रवरी 2023
खेत-खलिहान

हिमाचल: किसानों ने सेब पर एमएसपी की मांग को लेकर किया प्रदर्शन!



हिमाचल के किसानों ने ए ग्रेड सेब के लिए 60 रुपए, बी ग्रेड सेब की लिए 44 रुपए और सी ग्रेड सेब के लिए 24 रुपए निर्धारित किया जाने की मांग की है.

सेब पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को लेकर हिमाचल के किसानों ने जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर सेब पर एमएसपी की मांग की. संयुक्त किसान मंच ने फल एवं सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग और इस साल सेब के दामों में की गई गिरावट को लेकर धरना-प्रदर्शन किया.

सेब के दाम में गिरावट के बाद बागवानों ने सरकार से कश्मीर की तर्ज पर सेब की फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग की है. अपनी मांग मनवाने के लिए बागवानों के 17 संघ ने मिलकर संयुक्त किसान मंच का गठन किया है. संयुक्त किसान मंच ने कश्मीर की तर्ज पर ए ग्रेड सेब के लिए 60 रुपए, बी ग्रेड सेब की लिए 44 रुपए और सी ग्रेड सेब के लिए 24 रुपए निर्धारित किया जाने की मांग की.

किसानों ने सेब की कीमतें निर्धारित नहीं करने पर कईं दिन पहले धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी. लेकिन किसानों की इस मांग पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. ऐसे में संयुक्त किसान मंच ने सरकार को घेरने की तैयारी की है.

संयुक्त किसान मंच ने’किसानों का शोषण बंद करो’ और ‘सेब के मूल्य निर्धारित करों’ जैसे नारे लगाते लगाते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.

संयुक्त किसान मंच के संयोजक ने कहा, “प्रदेश सरकार के बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह द्वारा की गई किसान विरोधी टिप्पणी से किसान-बागवानों में भारी रोष है. जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाएंगी तब तक इस तरह के धरने प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे. संयुक्त किसान मंच एवं हिमाचल किसान सभा ने बागबानी मंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए किसान विरोधी रवैया अपनाने और कॉरपोरेट एवं अदानी का पक्ष लेने का आरोप लगाया.

किसान नेताओं ने हिमाचल में भी कश्मीर की तर्ज पर सेब का न्यूूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किए जाने की मांग की. वहीं 15 दिनों तक मांग नहीं माने जाने पर फिर से धरना बड़े स्तर पर धरना देने की चेतावनी देते हुए देशभर में 27 सितंबर को किसानों के बंद में शामिल होंगे का भी आह्वान किया.

बता दें कि कुछ हफ्ते पहले अदानी एग्री फ्रेश कंपनी ने हिमाचल में सेब के दाम गिरा दिए थे जिसके बाद से सेब किसान लगातार सरकार से सेब सब न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं.

दरअसल पिछले हफ्ते हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बागवानों को लेकर एक बयान दिया था जिसपर पूरे प्रदेश में उनकी किरकरी हुई थी.

बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बयान में कहा था, “मनाली के बागवान सेब तोड़कर बिना ग्रेडिंग कर क्रेट में भरकर मंडियों में बेच रहे हैं. ये बागवान कार्टन, ट्रे, पैकिंग, ग्रेडिंग, फल धुलाई पर कोई खर्चा नहीं करते हैं. सरकार बागवानों को क्रेट खरीद में 50 फीसदी उपदान दे रही है. बागवान क्रेट में सेब बेचते हैं तो कार्टन, ट्रे, पैकिंग, ग्रेडिंग और फलों की धुलाई के खर्चे से बचेंगे. लदानी कार्टन में पैक सेब को दोबारा खोलकर पैकिंग करके 28 किलो के बदले 20 किलो सेब की पैकिंग बना रहे हैं. क्रेट में भरकर सेब मंडियों में बेचा जाता है तो बागवानों को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.”

वहीं इसके उलट किसानों का कहना है कि सेब की बिक्री खुले में नहीं होती है. दरअसल, सूबे में सेब की पैदावार टनों में होती है और सूबे में इतने बड़े बाजार नहीं है कि टनों सेब भरकर लाएं और शाम तक वह ओपन मार्केट में बिक जाएगा. खुलें में बिक्री के बजाए बागवान ट्रकों में पेटियों में सेब लाकर मंडियों में बेचता है.

वहीं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बागवानों को सेब न तोड़ने की सलाह देते हुए कहा था कि बागवान फिलहाल फसल को मंडी में ना लाएं.