पंचकूला: किसानों के सामने झुकी खट्टर सरकार, सभी मांगे मानी!

किसान आपनी मागों को लेकर सुबह 10 बजे से ही पंचकूला में जुटना शुऱु हो गए थे किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कईं जगह पर बैरिकेडिंग कर रखी थी. लेकिन अपने ट्रैक्टरों के साथ हजारों की संख्या में जुटे किसान बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गए. जिसके बाद पंचकूला के उपायुक्त ने मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत की जानकारी दी जिसके बाद किसान नेताओं के प्रतिनिधि राजभवन में सीएम खट्टर से मिलने पहुंचे. बातचीत के बाद किसान नेता के प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सभी मांगों पर सहमति बन गई है.

वार्ता के बाद किसान नेता सुरेश कौथ ने कहा कि शामलात जमीनों के मालिकाना हक के लिए सरकार नए सत्र में कानून लाएगी साथ ही जारी किए गए आदेश पर सरकार कोई एक्शन नहीं लेगी. उन्होंने कहा कि खराब फसलों की गिरदावरी और गन्ना बकाया भुगतान को लेकर भी सकारात्मक बात हुई. वहीं सीएम ने वादा किया कि वर्तमान सत्र में चीनी बिक्री से होने वाली आय से किसानों के बकाया गन्ना बिलों का किया भुगतान जाएगा.

किसानों की मुख्य मांगें

  1. देह शामलात, जुमला मुस्तका, पट्टे वाली व अन्य इस प्रकार की सभी जमीनों के किसानों को पक्के तौर पर मालिकाना हक देने के लिए नया कानून बनाया जाए.
  2. धान के बोने पौधे रहने की वजह से किसानों को हुए नुकसान का पूरे हरियाणा में उचित मुआवजा दिया जाए.
  3. 2022 में जलभराव से खराब हुई फसलों की स्पेशल गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए और पिछले साल के फसल मुआवजा का जल्दी से जल्दी किसानों के खातों में भुगतान किया जाए.
  4. लंपी वायरस से पशुओं में फैली महामारी के कारण किसानों के मरे हुए पशुओं के लिए उचित मुआवजा दिया जाए और जरूरी कदम सरकार द्वारा उठाए गए.
  5. नारायणगढ़ शुगर मिल के लगभग 62 करोड बकाया राशि का भुगतान जल्दी से जल्दी किया जाए.
  6. धान की फसल में “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल पर रजिस्टर्ड फसल की प्रति एकड़ लिमिट 25 से बढ़ाकर 35 कुंटल की जाए और 20 सितंबर से धान की खरीद पूरे हरियाणा में शुरू की जाए.
  7. सरकार द्वारा मोटे धान पर 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है उसको खत्म किया जाए, इसकी वजह से किसान को फसल की अच्छी कीमत नहीं मिलेगी.
  8. ट्यूबवेल कनेक्शन बिना देरी बिना शर्त जल्द दिए जाए.

किसानों ने बीजेपी सांसद को घेरा, फसल के मुआवजे की रखी मांग!

आदमपुर, बालसमंद और खीरी चोपटा के किसानों ने आज आदमपुर के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हिसार से बीजेपी सांसद बृजेंद्र सिंह का विरोध किया. किसानों ने बीजेपी सांसद को काले झंडे दिखाते हुए नारेबाजी भी की. किसान आदमपुर के तहसील कार्यालय में पिछले तीन महीने से कपास की फसल के नुकसान के मुआवजे की मांग को लकेर धरना दे रहे हैं.

धरना दे रहे किसानों ने बीजेपी सांसद बृजेंद्र सिंह से शिकायत की कि सरकार ने उन्हें 2020 और 2021 में खराब हुई कपास की फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं दिया है. वहीं एक किसान नेता ने सांसद को बताया कि किसान पिछले तीन साल से खरीफ सीजन की फसल में नुकसान झेल रहे हैं लेकिन सरकार की ओर से किसानों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया है.

किसानों ने सासंद से शिकायत करते हुए कहा कि सरकार ने 2020 के लिए मुआवजे को मंजूरी दी थी, लेकिन यह आज तक किसानों को नहीं दिया गया है. हमें पिछले तीन साल का मुआवजा मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही और इस साल फिर से जिले के कई हिस्सों में ज्यादा जलभराव के कारण कपास को भारी नुकसान हुआ है. किसानों ने कहा कि उन्होंने मुआवजे के भुगतान को लेकर कृषि मंत्री जेपी दलाल समेत अन्य नेताओं से भी मुलाकात की है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ.

वहीं किसानों से घिरे सांसद ने कहा कि उन्होंने पहले भी राज्य सरकार के समक्ष किसानों की मांग उठाई थी और आगे भी उठाउंगा.

सेब किसानों के आंदोलन के बीच अडानी ने फिर घटाए सेब के दाम!

एक ओर सेब किसान और बागवान सेब की कम कीमत मिलने के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं. वहीं इस बीच अडानी की कंपनी एग्रोफ्रेस ने एक बार फिर सेब के दाम घटा दिए हैं. इस बार सेब के दाम में 2 रुपए प्रतिकिलो की कमी की गई है. पिछले एक माह से सेब बागवान विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलनरत हैं. पहले बागवानों ने जीएसटी की दरों और पैकेजिंग मेटेरियल में बढ़ोतरी को लेकर सरकार के खिलाफ सचिवालय का घेराव किया था. इसके बाद बागवानों ने जेल भरो आंदोलन किया और उनपर एफआईआर तक भी हुई. इन सबके बीच में सरकार ने बागवानों के आंदोलन को देखते हुए सेब के दामों को तय करने के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया, लेकिन प्रदेश में सेब बागवानी से जुड़ी बड़ी कंपनी अडानी ने हाईपावर कमेटी के गठन वाले दिन ही सेब खरीद के दाम जारी कर दिए थे.

हिमाचल प्रदेश के किसान अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. कंपनी की ओर से जारी ताजा दामों में ईईएस (एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा स्माल) श्रेणी के सेब का खरीद मूल्य 60 रुपये से घटाकर 58 रुपये प्रतिकिलो हो गया है. वहीं मंडियों में सेब के दाम 200 से 300 रुपये प्रति पेटी कम हुए हैं. कंपनियों की ओर से सेब के दाम मे गिरावट का कारण खराब मौसम बताया जा रहा है. सेब कीमतों में बढ़ोतरी की मांग के लिए आंदोलनरत संयुक्त किसान मंच ने दाम घटाने के फैसले पर नाराजगी जताई है.

पिछले हफ्ते शिमला फल मंडी में सेब का प्रति पेटी औसत रेट 1400 से 2000 रुपए था. इस हफ्ते के आखिर में दाम घटकर 1100 से 1800 रुपये पहुंच गए हैं. सेब की एक पेटी में 25 किलो सेब आता है. दूसरी ओर अदाणी कंपनी इससे पहले ईएल (एक्सट्रा लार्ज) और पित्तू (ग्रेड से छोटा आकार) के सेब का दाम भी दो रुपए प्रतिकिलो कम कर चुकी है. अदाणी कंपनी ने इस महीने 15 अगस्त से अपने तीन कंट्रोल्ड एटमोसफेयर स्टोरों पर सेब खरीद शुरू की थी. जिसके खिलाफ किसान आंदोलन कर रहे हैं.

शुरुआत में कंपनी ने एक्स्ट्रा लार्ज सेब के 52 रुपये, लार्ज मीडियम स्माल के 76, एक्स्ट्रा स्माल के 68, एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा स्माल के 60 और पित्तू सेब के 52 रुपये प्रतिकिलो खरीद दाम तय किए थे. एक हफ्ते बाद कंपनी ने एक्स्ट्रा लार्ज और पित्तू आकार के सेब के रेट 52 से घटाकर 50 कर दिए. अब एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा स्माल श्रेणी के सेब के दामों में भी दो रुपये की कटौती कर दी है. सेब के दामों मे कटौती से आदोलन कर रहे किसान बहुत रोष में है.

जींद: अधिकारियों ने खड़ी फसल में चलवाया ट्रैक्टर, सदमे में आकर किसानों ने खाया जहर,एक की मौत!

जींद में नरवाला के बडनपुर गांव के दो किसानों ने अधिकारियों के रवैये से तंग आकर जहर खा लिया जिसके चलते किसान इंद्र सिंह की मौत हो गई. किसानों और परिजनों ने मृतक किसान का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है. किसान मृतक किसान के शव के साथ नरवाना के बद्दोवाल टोल प्लाजा पर बैठ गए हैं. किसानों ने अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की है.

दरअसल रविवार को नरवाना के बडनपुर गांव में अधिकारियों ने दो किसानों के खेत में खड़ी फसल को ट्रैक्टर चलवाकर नष्ट कर दिया था. मृतक किसान के परिजनों ने आरोप लगाया कि हमारे पास कोर्ट के सारे कागजात हैं हमने अधिकारियों को सारे कागजात दिखाए लेकिन वो नहीं माने और खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया.

वहीं भारतीय किसान किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रवक्ता ने बताया कि देह शामलात और जुमला मालकान जमीन से जुड़े मामले में किसान की ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने आया बीडीओ और अन्य पंचायत अधिकारियों ने तैयार फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया जिसके दो किसानों ने सल्फ़ास दवाई खा ली जिसमें किसान इंद्र सिंह की मौत हो गई.

हरियाणा: मंत्रियों के घर के बाहर किसानों का प्रदर्शन!

किसान प्रदेशभर में ‘किसान देह शामलात और जुमला मालकाल भूमि के इंतकाल तोड़ने के आदेश के खिलाफ दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. देह शामलात व जुमला मालकन भूमि किसानों से छीनने के आदेश को वापस करवाने के लिए मंत्रियों के घरों के बाहर किसान पंचायत जारी रहेगी. इस बीच किसान करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आवास के बाहर प्रदर्शन करने के लिए पहुंच गए. किसानों को सीेएम आवास तक पहुंचने से पहले रोकने के लिए पुलिस द्वारा भारी बैरिकेंडिंग की गई है किसानों ने सीएम आवास के पास धरना दिया है.

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पंचायत की सारी व्यवस्था व खाने पीने का सारा इंतजाम मंत्रियों के जिम्मे लगाया था और मंत्रीयों की ओर से ऐसा न करने पर धरना बढ़ाने की भी चेतावनी दी है. ठीक ऐसे ही पंचकूला में हरियाणा विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता के घर के बाहर खुद किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी किसानों के साथ प्रदर्शन करते नजर आये. किसान जब विधानसभा स्पीकर के घर के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे तो स्पीकर किसानों के आने की सूचना मिलते ही बाहर निकल चुके थे.

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, “मुख्यमंत्री ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कहा था कि किसानों की जमीन के इंतकाल बदले जाएंगे और मलकियत नहीं बदली जाएगी, लेकिन अगर इंतकाल बदल जाता है तो किसान न तो जमीन को बेच सकता है न ही रहन कर सकता है और न ही बच्चों के नाम ट्रांसफर कर सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने बुर्दी बरामदगी की जमीन को लेकर भी किसानों को गुमराह किया है। बुर्दी बरामदगी की जमीन पहले शामलात से बाहर रहती थी, किंतु 2020 में सरकार ने एक्ट में संशोधन कर इस छूट को हटा लिया था और बुर्दी बरामदगी को जमीन को शामलात देह में दर्ज कर दिया था.”

अडानी एग्रीफ्रेश के खिलाफ सड़कों पर उतरने को क्यों मजबूर हुए सेब किसान!

हिमाचल प्रदेश में इनदिनों सेब सीजन पीक पर है और पिछले एक माह से सेब बागवान विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलनरत हैं. पहले बागवानों ने जीएसटी की दरों और पैकेजिंग मेटेरियल में बढ़ोतरी को लेकर सरकार के खिलाफ सचिवालय का घेराव किया. इसके बाद बागवानों ने जेल भरो आंदोलन किया और एफआईआर तक भी हुई. इन सबके बीच में सरकार ने बागवानों के आंदोलन को देखते हुए सेब के दामों को तय करने के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया, लेकिन प्रदेश में सेब बागवानी से जुड़ी बड़ी कंपनी अडानी ने हाईपावर कमेटी के गठन वाले दिन ही सेब खरीद के दाम जारी कर दिए.

इससे बागवान भड़क गए और उन्होंने अब कंपनी के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है. सेब बागवानों ने अब 25 अगस्त को अडानी एग्रोफ्रेश के शिमला के तीन स्थानों मेंदहली, बीथल और सैंज के स्टोर्स का घेराव करने का फैसला लिया है. सेब बागवानी से जुडे़ 30 संगठनों को मिलाकर बने संयुक्त किसान मंच के अध्यक्ष हरीश चौहान ने डाउन टू अर्थ को बताया कि कंपनियां बागवानों और सरकार को गुमराह कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि अडानी एग्रोफ्रेश हिमाचल प्रदेश में सेब की सबसे अधिक खरीद करने वाली कंपनियों में से एक है और अडानी की ओर से जारी किए गए दामों का बाजार में चल रहे दामों पर गहरा असर पड़ता है.

सरकार की ओर से सेब के दामों को तय करने के लिए कमेटी का गठन किया गया था, लेकिन अडानी कंपनी ने अपने दाम बिना कमेटी की अप्रुवल के जारी कर दिए. इसके अलावा कमेटी की ओर से बुलाई गई बैठक में भी अडानी कंपनी के बड़े अधिकारी चर्चा के लिए नहीं आए और वे सरकार को हल्के में ले रहे हैं.

यंग एडं यूनाईटेड प्रोग्रेसिव ऐसोसिएशन के महासचिव प्रशांत सेहटा ने बताया कि अडानी कंपनी फल के रंग और आकार के अनुसार उन्हें कई ग्रेड्स में बांटकर अलग-अलग रेट्स पर खरीदता है. इस बार भी अडानी एग्री फ्रेश ने राज्य के सेब बागवानों से करीब पच्चीस हजार मीट्रिक टन सेब खरीदने का लक्ष्य रखा है.

उन्होंने कहा कि इस साल अडानी एग्री फ्रेश ने जो सेब के रेट्स खोले हैं वह बीते साल की तुलना में 12 से पंद्रह फीसदी कम है. पिछले साल कंपनी ने 85 रुपए प्रति किलो तक उच्चतम दाम रखे थे, वहीं इस बार यह रेट 76 रुपए है. जबकि बीते बरस की तुलना में इस बार सेब उत्पादन लागत में लगभग 30 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.

आंदोलन कर रहे बागवानों की मानें तो इस बार मौसमी बेरुखी की वजह से फसल के रंग और आकार में अन्य वर्षों की तुलना में कमी रह रही है. जिसका अर्थ है कि बागवानों के पास छोटा आकार और कम रंगत का सेब अधिक है. ऐसे में अडानी जो रंग के आधार पर सेब खरीदता है तो उसके कम दाम मिलना तय है.

प्रशांत सेहटा कहते हैं कि अब अगर हम ओपन मार्केट की बात करें तो सबसे पहले 60 से 100 फीसदी रंग वाले सेब की 25 किलो की पेटी लार्ज से लेकर पिट्टू आकार तक रेट में 1700 से 2300 तक बिक रही है. जिसका औसत मूल्य 68 रुपए से 92 रुपए रह रहा है. अगर पैकिंग का खर्चा हटा दिया जाए तब भी औसत रेट 62 से 85 रुपए तक मिल रहा है. इसी आधार पर अगर हम अडानी एग्री फ्रेश के रेट का औसत लें तो यह दोनो ग्रेड्स को मिलाकर 60 से 70 रुपए के आस पास रह रहा है.

सेब बहुल इलाके रतनाड़ी के सेब बागवान आशुतोष चौहान कहते हैं कि अडानी कंपनी के रेट खुलने से मार्केट पर बहुत बुरा असर होता है. जैसे ही कंपनी ने इस बार 13 अगस्त को रेट खोले उसके अगले दिन से मार्केट में सेब के दामों 400 से 500 रुपए गिर गए. जबकि पिछले वर्ष यह गिरावट 1 हजार रुपए तक थी. उन्होंने कहा कि सेब के दामों में एकरूपता होनी चाहिए और प्राइवेट कंपनियों की ओर से तय किए जा रहे मनमाने दामों को सरकार की ओर से रेग्युलेट किया जाना चाहिए.

सेब के दामों को तय करने के लिए बीते मंगलवार को नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में बनी हाई पावर कमेटी की बैठक हुई. इस बैठक में प्रदेश में बड़े स्तर पर सेब की खरीद करने वाली 18 कंपनियों को बुलाया गया था लेकिन इसमें 18 में से केवल 8 कंपनियां ही आई.

संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि कंपनियां इस कमेटी और सरकार के निर्देशों को गंभीरता से नहीं देखती है। इसलिए इसमें ज्यादातर कंपनियों के प्रतिनिधि नहीं आए. बैठक के दौरान जब अडानी जैसी बड़ी कंपनियों के साथ किए गए करार और नियम व शर्ताें को मांगा गया तो न ही तो सरकार और न ही कंपनियों की ओर से कोई एमओयू नहीं दिखाया गया. उन्होंने कहा कि कोई नियम कानून न होने की वजह से कंपनियां अपनी मनमर्जी कर रही है. अब हम लोग कंपनियों की मनमर्जी को नहीं मानेंगे और अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे.

सेब के दाम तय करने को लेकर बनाई गई कमेटी के अध्यक्ष प्रो राजेश्वर सिंह चंदेल का कहना है कि बैठक में न आने वाली कंपनियों और उच्च अधिकारियों के न आने को लेकर कंपनियों से जवाब मांगा जाएगा. इसके अलावा अडानी कंपनी से सेब के रेट खोलने को लेकर भी जवाब मांगा जाएगा. इसके अलावा किसानों की मांगों पर कमेटी की ओर से विचार किया जा रहा है.

साभार- डाउन-टू-अर्थ

दिल्ली: दिल्ली पुलिस की रोक-टोक के बाद भी किसान महापंचायत में जुटे हजारों किसान!

किसान संगठनों द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय किसान महापंचायत बुलाई गई है. यह किसान महापंचायत लखीमपुर हत्याकांड के मुख्यारोपी राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र को सजा दिलाने और मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाई गई है. किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए सरकार के इशारों पर दिल्ली पुलिस किसानों का रास्ता रोकने में जुटी थी. सड़क के रास्ते को रोका गया तो किसान रेल के रास्ते दिल्ली पहुंच गए.

दिल्ली पहुंचे किसानों ने गांव-सवेरा के पत्रकार मनदीप पुनिया को बताया कि दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद भी पुलिस ने हमारा रास्ता रोकने की कोशिश की. पुलिस ने हमें अपनी बसों में बैठने को कहा लेकिन हम लोगों ने पुलिस की बसों में बैठने से मना कर दिया. पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग कर रखी है.

वहीं पंजाब के मानसा से दिल्ली पहुंची 70 साल की बुजुर्ग माता ने कहा हम लखीमपुर में मारे गए किसानों को न्याय दिलाने के लिए पहुंचे हैं. साथ ही बिजली संशोधन बिल-2022 वापिस होना चाहिए.

संयुक्त किसान मोर्चा अराजनैतिक की ओर से जारी प्रेस रिलीज में किसान महापंचायत की प्रमुख मांगें.
1). लखीमपुर खीरी नरसंहार के पीड़ित किसान परिवारों को इंसाफ, जेलों में बंद किसानों की रिहाई व नरसंहार के मुख्य दोषी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी की जाए.
2). स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए.
3). देश के सभी किसानों को कर्जमुक्त किया जाए.
4). बिजली संशोधन बिल-2022 रद्द किया जाए.
5). गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए और गन्ने की बकाया राशि का भुगतान तुरन्त किया जाए.
6). भारत WTO से बाहर आये और सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द किया जाए.
7). किसान आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाएं.
8). प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के बकाया मुआवज़े का भुगतान तुरन्त किया जाए.
9). अग्निपथ योजना वापिस ली जाए.

जंतर-मंतर किसान महापंचायत में कुछ गड़बड़ हुई तो सरकार होगी जिम्मेदार: SKM

संयुक्त किसान मोर्चा अराजनैतिक ने 22 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान महापंचायत का ऐलान किया हुआ है. इस पंचायत को लेकर देश अलग-अलग राज्यों के किसान दिल्ली की तरफ रवाना हो चुके हैं. एक दिन का यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा. पंचायत के बाद राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की भी रणनीति है. संयुक्त किसान मोर्चा अराजनैतिक ने कहा यदि सरकार किसी भी तरह का व्यवधान डालने का प्रयास करेगी तो उसके लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाली पंचायत में जहां एक ओर किसान भारी संख्या में पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस किसानों को जंतर-मंतर पर पहुंचने से रोकने के लिए पहले की तरह बैरिकेडिंग करने में जुट गई है. जंतर-मंतर पर होने जा रही किसान पंचायत के एक दिन पहले ही दिल्ली में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों की चैकिंग की जा रही है खासकर किसानी झंड़े लगे वाहनों को रोका जा रहा है. खबर है कि दिल्ली पुलिस द्वारा टिकरी बॉर्डर पर बड़े-बड़े पत्थर रखने के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इसके साथ ही दिल्ली में प्रवेश करने वाले हर रास्ते पर नाके लगाकर चैकिंग की जा रही है.

संयुक्त किसान मोर्चा अराजनैतिक की ओर से जारी प्रेस रिलीज में किसान महापंचायत की प्रमुख मांगें.
1). लखीमपुर खीरी नरसंहार के पीड़ित किसान परिवारों को इंसाफ, जेलों में बंद किसानों की रिहाई व नरसंहार के मुख्य दोषी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी की जाए.
2). स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के अनुसार एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए.
3). देश के सभी किसानों को कर्जमुक्त किया जाए.
4). बिजली संशोधन बिल-2022 रद्द किया जाए.
5). गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए और गन्ने की बकाया राशि का भुगतान तुरन्त किया जाए.
6). भारत WTO से बाहर आये और सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द किया जाए.
7). किसान आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाएं.
8). प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के बकाया मुआवज़े का भुगतान तुरन्त किया जाए.
9). अग्निपथ योजना वापिस ली जाए.

22 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसान पंचायत, रोड़े अटकाने में जुटी दिल्ली पुलिस!

संयुक्त किसान मोर्चा ने एसएसपी यानि न्यूनतम समर्थन मूल्य, अग्निपथ योजना और लखीमपुर हिंसा के मुद्दों पर केंद्र सरकार के विरोध में 22 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पंचायत की कॉल दी है. जंतर-मंतर पर पंचायत के बाद किसान अपनी सभी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सैंपेंगे. वहीं कोई भी राजनीतिक संगठन इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होगा.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाली पंचायत में जहां एक ओर किसान भारी संख्या में पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस किसानों को जंतर-मंतर पर पहुंचने से रोकने के लिए पहले की तरह बैरिकेडिंग करने में जुट गई है. जंतर-मंतर पर होने जा रही किसान पंचायत के एक दिन पहले ही दिल्ली में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों की चैकिंग की जा रही है खासकर किसानी झंड़े लगे वाहनों को रोका जा रहा है. खबर है कि दिल्ली पुलिस द्वारा टिकरी बॉर्डर पर बड़े-बड़े पत्थर रखने के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इसके साथ ही दिल्ली में प्रवेश करने वाले हर रास्ते पर नाके लगाकर चैकिंग की जा रही है.

करीबन एक साल तक दिल्ली के बॉर्डरों पर धरना देने वाले किसान सरकार के वादों से संतुष्ट नहीं हैं. सरकार ने हालंहि में बिलजी संशोधन बिल-2022 पेश कर दिया है जिसको लेकर देशभर के किसान रोष व्यक्त कर चुके हैं. वहीं किसानों पर दर्ज केस अब तक वापस नहीं लिए गए हैं जिसके चलते किसान सरकार से नाखुश हैं. साथ ही सरकार ने एमएसपी गारंटी को लेकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों जंतर-मंतर पर किसान पंचायत करने जा रहे हैं.

जेल में बंद किसानों से मिले किसान नेता, जिलाधिकारी कार्यालय तक निकालेंगे विरोध मार्च!

तिकुनिया में शहीद किसानों को न्याय दिलाने के लिए लखीमपुर में दूसरे दिन भी किसानों का महापड़ाव जारी रहा. दूसरे दिन के महापड़ाव में किसानों की संख्या पहले दिन से ज्यादा रही. महापड़ाव के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा टीम ने झूठे केसों में जेल में बंद किसानों से मुलाकात की. महापड़ाव के दबाब में प्रशासन ने पहली बार संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को जेल में बंद किसानों से मिलने की अनुमति दी.

जेल में किसानों से मुलाकात करने वाली टीम में राकेश टिकैत, डॉ दर्शन पाल, जोगेन्द्र सिंह उगराहा, मंजीत राय, सुरेश कोथ, डा आशीष मित्तल तजिन्दर सिंह विर्क रणजीत सिंह राजू ऋचा सिंह गुरअमनीत सिंह मांगट शामिल रहे. जेल में झूठे केसों में बंद किसानों से मिलकर बाहर आए किसान नेताओं ने कहा कि किसानों का हौंसला बुलन्द है.

महापड़ाव के मंच पर शहीद किसानों के परिवारजनों और घायल किसानों को हरा साफा भेंटकर सम्मानित किया गया. महापड़ाव में शामिल किसान संगठनों के नेताओं की बैठक में निर्णय लिया कि राज्य सरकार से लखीमपुर किसान हत्या कांड के मामले में वादाखिलाफी आंदोलन तेज किया जाएगा. बैठक के दौरान प्रशासन से मांग की कि संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मुख्यमंत्री से इस संबंध में वार्ता निर्धारित करें. सभी किसान संगठनों के नेताओं ने सर्वसम्मति से तय किया कि जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला जाएगा.