किसान आंदोलन के पांच साल पूरे होने पर गरजे किसान, फिर से आंदोलन करने की तैयारी!

26 नवंबर को किसान आंदोलन के पांच साल पूरे होने पर पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों के हजारों किसान संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान पर चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित दशहरा ग्राउंड में जुटे. 2020–21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन की पाँचवीं वर्षगांठ पर आयोजित इस रैली में किसानों ने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया.

रैली में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों अनुसार कानूनी रूप देने, फसल-नुकसान का उचित मुआवजा देने, 2025 के बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने सहित कई प्रमुख मांगों को दोहराया. किसानों का कहना है कि फसलों की बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार में अनिश्चितता के कारण खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है, जबकि सरकार की ओर से राहत के ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं.

रैली के दौरान बड़ी संख्या में युवा किसान भी शामिल हुए, जिन्होंने कहा कि खेती का भविष्य सुरक्षित न होने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होती है. कई किसान नेताओं ने मंच से चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर तत्काल बातचीत शुरू नहीं करती तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

कार्यक्रम के अंत में SKM नेताओं ने घोषणा की कि बुधवार, 27 नवंबर को मोर्चे की अहम बैठक होगी, जिसमें आंदोलन के अगले चरण का फैसला लिया जाएगा. किसान संगठनों का कहना है कि इस बार आंदोलन केवल प्रतीकात्मक नहीं रहेगा, बल्कि मांगें पूरी होने तक चरणबद्ध तरीके से संघर्ष जारी रहेगा.

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