सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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हरियाणा 34.5 फीसदी बेरोज़गारी दर के साथ फिर पहले स्थान पर



CMIE की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा सर्वाधिक बेरोजगारी दर के साथ एक बार फिर से पहले स्थान पर रहा. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने 2 मई को पूरे देश के बेरोज़गारी के आंकड़े जारी किए. मार्च महीने में भी हरियाणा 26.7% की बेरोज़गारी दर के साथ पहले स्थान पर था. वहीं अप्रैल महीने में 34.5 फीसदी की बेरोजगारी दर के साथ पहले स्थान पर है. CMIE की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में पिछले महीने की तुलना में करीबन 8 फीसदी बेरोजगारी दर बढ़ी है.

निम्न राज्यों में रही सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर
हरियाणा 34.5%
राजस्थान 28.8%
बिहार 21.1%
जम्मू और कश्मीर 15.6%
गोवा 15.5%

देश में सबसे कम बेरोज़गारी दर हिमाचल प्रदेश की रही जो महज 0.2 फीसदी है. पिछले महीने सबसे कम बेरोजगारी दर छतीसगढ़ की रही थी जो अब दूसरे स्थान पर सबसे कम है.

निम्न राज्यों में रही सबसे कम बेरोजगारी दर
हिमाचल प्रदेश0.2%
छत्तीसगढ़ 0.6%
असम 1.2%
उड़ीसा 1.5%
गुजरात 1.6%

फ़रवरी महीने में बेरोज़गारी दर में हरियाणा दूसरे स्थान पर चला गया था लेकिन मार्च में फिर से ऊपर आ गया. संस्थान हर महीने पूरे देश की बेरोजगारी के आंकड़े जारी करता है. इस महीने पूरे देश के स्तर पर बेरोज़गारी दर 7.83 फीसदी रही जो पिछली बार 7.6 फीसदी थी. शहरों में बेरोजगारी दर 9.22 फीसदी रही जो पिछली बार 8.6 फीसदी थी. वहीं ग्रामीण बेरोजगारी दर 7.18 फीसदी रही जो पिछली बार 7.8 फीसदी थी. जम्मू और कश्मीर पिछले महीने 25 फीसदी की बेरोजगारी दर के साथ दूसरे स्थान पर था जो अबकी बार 15.6 फीसदी के साथ चौथे स्थान पर चला गया है. फ़रवरी में राष्ट्रीय बेरोज़गारी दर 8.1% थी जो मार्च में घटकर 7.6% हो गई थी. लेकिन अप्रैल में बेरोजगारी दर फिर से बढ़ गई है.

बेरोज़गारी दर कैसे निकालते हैं

श्रम बाज़ार में उपलब्ध रोजगाररत और बेरोजगार श्रमिकों के औसत के आधार पर बेरोजगारी दर निकाली जाती है. बेरोजगारी दर उस श्रम बल का एक हिस्सा है जिसके पास वर्तमान में रोजगार नहीं है लेकिन उन्हें मिल सकता है.बेरोजगार वो हैं जो काम करने के इच्छुक हैं और व्यक्त सक्रिय श्रम बल के प्रतिशत के रूप में नौकरी की तलाश में हैं. जो बेरोजगार हैं और नौकरी की तलाश में नहीं हैं उनकी संख्या को बेरोजगारी दर निकालने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता. ऐसी आबादी लगातार बढ़ी है जिसने नौकरी की तलाश ही बंद कर दी है.  नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 45 करोड़ लोग नौकरी की तलाश छोड़ चुके हैं. अगर इस आबादी को भी शामिल कर लिया जाये तो बेरोजगारी दर के आंकड़े अलग ही होंगे.