गुरुग्राम की ‘बंजारा मार्केट’ को हटाने पर अड़ी सरकार, हजारों घुमंतू परिवारों के रोजगार पर लटकी तलवार!

 

गुरुग्राम के सेक्टर-53 में बड़ी इमारतों से घिरी बीस एकड़ जमीन पर बनीं करीबन तीन सौ झुग्गियां और बांस-तिरपाल से बनी पांच सौ से ज्यादा झोपड़ीनुमा दुकानें लंबे समय से सरकार की आँख की किरकिरी बनी हुई हैं. गुरुग्राम रेपिड मेट्रो स्टेशन-54 से महज 500 मीटर की दूरी पर बांजारा मार्केट चलाने वाले करीबन तीन सौ परिवारों को अपने रोजगार पर प्रशासन का पीला पंजा चलने का डर सता रहा है. दो किलोमीटर लंबी बंजारा मार्केट में लकड़ी, लौहे और अन्य धातुओं से बना डेकोरेशन का सामान मिलता है.

मार्केट की शुरुआती दुकानों में से सड़क के एक ओर बनी पटरी पर अपने दो छोटे बच्चों के साथ चीनी-मिट्टी के बर्तन बेचने के लिये बैठीं गीता ने बताया,“हमें यहां से हटाने की बात चल रही है कुछ दिन पहले सरकारी लोग आए थे उन्होंने हमारी कईं दुकानें तोड़ दीं.”

बंजारा मार्केट के दुकानदार उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग शहरों से लकड़ी, लौहे और अन्य धातुओँ से बना सामान लेकर आते हैं. गीता ने बताया, “सामान लेकर आने में बहुत किराया लग जाता है. कईं बार सामान रास्ते में टूट भी जाता है. टूटा हुआ सामान हमारे किसी काम का नहीं रहता और पूरा नुकसान झेलना पड़ता है.

शानिवार और रविवार को बंजारा मार्केट में गुरुग्राम, दिल्ली और आसपास के लोग बड़ी संख्या में खरीददारी करने के लिए आते हैं. बंजारा मार्केट में अधिकतर दुकानदार गाड़िया-लौहार जनजाति से हैं. ये लोग पहले लौहे का सामान बनाकर बेचते थे लेकिन अब बना-बनाया सामान बेचते हैं.

गीता से बातचीत करते देख करीबन 55 बरस के लंबी और सफेद दाढ़ी मूंछ वाले व्यक्ति ने दूर से ही आवाज लगाते हुए कहा, “यो नेट वालो सो, बीडियो बणा की नेट पर बेची दिये थो”

बंजारा मार्केट में गीता अपने दो बच्चों के साथ

मामला समझाने पर उस व्यक्ति ने भी बातचीत की और बताया,”बंजारा मार्केट इस सामान की सबसे बड़ी मार्केट बन गई है. पहले आस-पास जो इस तरह का सामान बेचते थे अब वो भी यहां आकर सामान बेचते हैं. साई धाम, सोहना रोड़, सेक्टर 42, सुभाष चौक पर जो दुकानें लगाते थे अब वो भी बंजारा मार्केट में आकर सामान बेचते हैं. अगर हमें यहां से हटाया तो हमारे सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जायेगा. एक तो कोरोना की वजह से पूरा साल बिना काम के निकल गया ऊपर से अब सरकार हमें यहां से हटाना चाहती है. यह हम लोगों पर दोहरी मार हो जाएगी”

वहीं दोनों बाजुओं पर टैटू गुदवाए पास में बैठे करीबन 25 साल के दीपक ने बताया, कोई भी तोड़-फोड़ करने से पहले सरकार का कोई ऑर्डर आता हैं. लेकिन हमें कोई ऑर्डर नहीं दिया गया. आते ही हमारी झुग्गी तोड़ दी. उसके बाद कहा कि दो दिन बाद आएंगे और तब तक सामान हटाने को बोल गए. इससे अच्छा तो पहले बोल देते कि सामान हटाओं कम-से-कम हमारा सामान तो न टूटता. बताओ ये कहां कि बात हुई की पहले सामान तोड़ दो और फिर बोले की सामान हटाओ.”

बंजारा मार्केट में सामान बेचने वाले अधिकतर लोग मार्केट के पीछे बनी झुग्गियों में रहते हैं वहीं कुछ ऐसे भी दुकानदार हैं जो कईं किलोमीटर दूर से आकर दुकान लगाते हैं. ऐसे ही एक  दुकानदार ने बताया कि वह सोहना रोड़ से यहां दुकान चलाने के लिए आते हैं. घर से आने जाने में हर रोज सौ रुपये से ज्यादा का किराया लग जाता है. अगर यहां से मार्केट हटा दी तो पता नहीं सामान बेचने के लिए कितनी दूर जाना होगा.” 

बंजारा मार्केट के पीछे दुकानदारों की झुग्गियां

वहीं बंजारा मार्केट के पीछे बनी झुग्गी में जन्मे विष्णू भी अपनी दुकान चलाते हैं. परिवार के साथ दुकान पर बैठे विष्णु ने बताया कि इससे पहले हम लौहे के बर्तन बनाने का काम करते थे. अगर हम लोगों को यहां से हटाया गया तो हमारा सारा रोजगार चौपट हो जायेगा. हम चाहते हैं कि हमारी अगली पीढ़ी हमारी तरह अनपढ़ न रहे और हमारे बच्चे पढ़ाई करें लेकिन यहां तो सरकार हमें काम करने से भी रोक रही है. हमारी सरकार से एक ही प्रार्थना है कि हम लोगों को यहां काम करने दिया जाए या हमें कोई दूसरी जगह दी जाए जहां हम अपनी रोजी-रोटी चला सकें.”    

अपनी पारंपरिकर वेशभूषा पहने हुए करीबन 40 साल की बंजारा मार्केट की प्रधान सुशीला ने बताया, “केवल यहां की बात नहीं है. हमें कहीं भी रहने नहीं दिया जाता है. हम जहां भी जाते हैं वहीं से सरकार के लोग हटाने आ जाते हैं. पीढ़ियों से हमारे पूर्वज भी ऐसे ही भटकने पर मजबूर रहे हैं. हमारे कईं लोगों ने ब्याज पर पैसे लेकर काम शुरू किया है. आज भी कईं लोग कर्जदार हैं. हम लोगों को यहीं रहने दिया जाए अगर हटाना ही है तो पहले हमें कोई दूसरी जगह दी जाए जहां हम अपना काम कर सकें. हमने कईं बार प्रशासन के लोगों से भी मिलने की कोशिश की लेकिन कोई नहीं मिलने देता. यहां गरीब लोगों की कोई सुनवाई नहीं होती. जब मन करता है आते हैं हमारा सामान तोड़ कर चले जाते हैं. सरकार हमें सुविधाएं देने की बजाए उलटा हमारे जीवन में संकट क्यों लाना चाहती है. हमारे लिए यहां न पीने के पानी की सुविधा है न औरतों के लिए शौचालय हैं.”       

बंजारा मार्केट की प्रधान सुशीला

दिल्ली से  परिवार के साथ बंजारा मार्केट में खरीददारी करने के लिये आईं एक महिला ने बताया, “बंजारा मार्केट बंद होने से लोगों को भी काफी परेशानी होगी क्योंकि यहां, एक ही जगह पर अलग-अलग तरह का सामान मिल जाता है और साथ ही बड़ी दुकानों से थोड़ा सस्ता भी पड़ता है. सरकार अगर बंजारा मार्केट को हटा रही है तो इन लोगों के लिए कोई दूसरी जगह देनी चाहिए.”

इस मुद्दे पर हरियाणा विमुक्त घुमंतू जनजाती बोर्ड के चेयरमैन बलवान सिंह से गांव-सवेरा ने फोन पर बात की तो उन्होंने बताया, “गुरुग्राम की बांजरा मार्किट को हटाने का मामला मेरे संज्ञान में आया है. हमनें गुरुग्राम कमिश्नर से इस विषय में बात की है उन्होने आश्वासन दिया है कि जब इन लोगों को दूसरी जगह नहीं दी जाती तब तक बंजारा मार्केट को नहीं हटाया जायेगा.”

वहीं इस मामले पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारी ने कहा, “इससे पहले भी बंजारा मार्केट को हटाने की कोशिश की गई है. लेकिन हर बार फिर से दुकानें शुरू कर दी जाती हैं. मार्केट के आस-पास के लोगों की शिकायत मिलीं है कि मार्केट में भीड़ होने की वजह से सड़कों पर जाम लगा रहता. केवल बंजारा मार्केट का सवाल नहीं है शहर में अन्य जगहों पर भी अतिक्रमण हटाया जा रहा है. सरकारी जमीन को हर तरह के अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है.” सरकार बंजारा मार्केट और यहां बनी झुग्गियों को हटाकर जगह की नीलामी की योजना बना रही है.”