गुरुवार, 09 फ़रवरी 2023
खेत-खलिहान

जमीन अधिग्रहण के खिलाफ दिल्ली-जयपुर हाईवे पर किसानों ने किया चक्का जाम!



प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मौके पर पहुंचे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया. किसानों ने मार्केट रेट पर जमीन का मुआवजा दिए जाने अन्यथा 2011 में हुए जमीन अधिग्रहण को रद्द किये जाने की मांग की.

मानेसर क्षेत्र के कुकड़ोला, कासन, नैनवाल और सहरावन सहित अन्य गांवों की 1 हजार 810 एकड़ जमीन अधिग्रहण मामले को लेकर किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए दिल्ली-जयपुर हाईवे को जाम कर दिया. किसानों की नाराजगी के चलते दिल्ली-जयपुर हाईवे 2 घंटे तक बंद रहा. प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मौके पर पहुंचे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया. किसानों ने मार्केट रेट पर जमीन का मुआवजा दिए जाने वरना 2011 में हुए जमीन अधिग्रहण को रद्द किये जाने की मांग की.

मौके पर पहुंचे पुलिस प्रशासन के अधिकारी मानेसर एसपी सुरेश कुमार के द्वारा किसानों को समझाया गया. लेकिन किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण मामले को गंभीरता से ना लेने पर रोषपूर्वक वहां हिलने से मना कर दिया. जिसके बाद मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई. इसके बाद एडीसी विश्राम कुमार मीणा भी मौके पर पहुंचे और घटना का जायजा लिया। लेकिन किसान किसी भी आला अधिकारी की बात से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने वहां से हटने से मना कर दिया. देखते ही देखते हाईवे पर जाम की स्थिति हो गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों के द्वारा पुलिस को उन्हें बलपूर्वक हटाने का निर्देश दे दिया गया. तत्काल कार्यवाही करते हुए पुलिस ने किसानों को धर-दबोचा और गिरफ्तारी करना शुरू कर दिया। रोष प्रदर्शन मे मौके पर पहुंचे गुरनाम सिंह चढूनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

प्रदर्शन में उपस्थित गांव कासन के सरपंच किसान ने बातचीत में बताया, “हम सब मर सकते हैं पर यहां से हट नहीं सकते. सरकार के द्वारा किसानों को पहले ही बहुत सी प्रताड़ना-यातनाएं दी जा रही हैं. स्थानीय विधायक के द्वारा भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया गया है परंतु फिर भी सरकार के द्वारा इसके ऊपर कोई एक्शन नहीं लिया गया. सरपंच किसान ने बताया कि 1 हजार 810 एकड़ जमीन में इस क्षेत्र के लगभग 25 गांव की जमीन है. सरकार अगर इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती है तो हजारों-लाखों की संख्या में किसान यहां इकट्ठा होंगे और अपना धरना प्रदर्शन करेंगे. इसलिए सरकार द्वारा इस मामले का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए.”

जानें क्या है मामला

सीएम मनोहर लाल के बयान की माने तो मामला 2011 का है और इसके बाद कोर्ट का स्टे हटा दिया गया है. अब एचएसडीआईसी ने जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 912 एकड़ जमीन का अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था. लेकिन उसी दौरान डीएलसी और कुछ बिल्डरों ने किसानों से संपर्क किया और जमीन ले ली. इसके बाद हरियाणा सरकार ने नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया.

इसके बाद किसानों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद बीजेपी सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिये और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी करने के साथ ही इस जमीन पर किसी भी निर्माण पर रोक लगा दी.

वहीं आगे चलकर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मानेसर में जमीन अधिग्रहण के मामले की सीबीआई जांच में दखल देने से इनकार कर दिया और 2018 में सीबीआई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई. वहीं किसानों की मांग है कि या तो उन्हें मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा दिया जाए, नहीं तो इस अधिग्रहण को रद्द किया जाए.