भाजपा की जेजेपी में सेंधमारी, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के विशेष सहायक समेत 200 कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल!

भाजपा ने जजपा में सेंधमारी करते हुए जजपा के कईं नेताओं समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के विशेष सहायक रहे रमेश चौहान समेत जजपा (जननायक जनता पार्टी) के करीबन 200 कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल करवाया है.

भाजपा ने अपनी सहयोगी जननायक जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को जिस तरह पार्टी में शामिल कराया है, संगठन के तौर पर दोनों पार्टियों के बीच तल्खी बढ़ती दिखाई दे रही है हालांकि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई बयान नहीं आया है. लेकिन बीजेपी की इस सेंधमारी से दोनों सहयोगी दलों के राजनीतिक रिश्तों पर असर पड़ना तय है.

वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी की विचारधारा का सम्मान करने वाला कोई भी व्यक्ति बीजेपी में शामिल हो सकता है. धनखड़ ने कहा कि ऐसे कईं मौके आए, जब जेजेपी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में शामिल कराया है. इसलिए यदि जेजेपी का कोई कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होता है तो इसमें कुछ गलत नहीं है.

वहीं इसपर जेजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंनत राम तंवर ने कहा कि हमारे पहले भी कईं साथी बीजेपी में शामिल हुए थे लेकिन बीजेपी में जाने के बाद उन लोगों की कोई पूछ नहीं हो रही है.

करनाल: सरकार से जांच की अनुमति नहीं मिलने पर DTP घोटाले में सभी आरोपियों को मिली जमानत!

सीएम सीटी और सौ स्मार्ट शहरों की पहली लिस्ट में आने वाले करनाल में हुए चर्चित घोटोले के सभी आरोपियों को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है. मार्च 2022 में उजागर हुए डीटीपी घोटले में करनाल के डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर और तहसीलदार को रंगे हाथों रिस्वत लेते हुए पकड़ा गया था लेकिन इस मामले में सरकार की ओर से जांच की अनुमति न मिलने के कारण हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों कोे जमानत दे दी है.

मार्च 2022 में सामने आए घोटाले के मामले में विजिलेंस ने डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर को 20 लाख की रिश्ववत के साथ पकड़ा था. डीटीपी विक्रम के जरिये विजिलेंस करनाल के तहसीलदार राजबक्स को पकड़ने में भी कामयाब रही थी. विजिलेंस की टीम ने तहसीलदार के यहां छापेमारी करते हुए पांच लाख कैश बरामद किया था. दोनों अधिकारी मिलकर एनओसी और रजिस्ट्री के नाम पर रिश्वत लेते थे. डीटीपी विक्रम सिंह और तहसीलदार राजबक्स मिलकर घोटाला कर रहे थे.

दरअसल कॉलोनी काटने के नाम पर डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर विक्रम सिंह द्वारा एक प्रोपर्टी डीलर से रिश्वत के तौर पर 20 लाख रुपये की मांग की गई थी. जिसके बाद डीलर ने विजिलेंस को इसकी जानकारी दी और विजिलेंस ने डीटीपी के ड्राइवर को रिश्वत की रकम समेत रंगेहाथों पकड़ लिया. वहीं जब डीटीपी के घर छापेमारी की गई तो कईं लाख रुपए का कैश बरामद हुआ और उनकी पत्नी के नाम अलग-अलग शहरों में महंगे प्लॉट के कागजाद भी बरामद हुए.

जमीन घोटाले से जुड़ा मामला हरियाणा विधानसभा में भी उठा था. जमीनों की रजिस्ट्री और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा दी जाने वाली एनओसी में धांधली व कथित तौर पर रिश्वत लेने के मामले में विपक्ष ने मिलकर विधानसभा में सरकार को घेरा था. विपक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाए थे कि पैसे लेकर एनओसी दी गई हैं. करनाल का डीटीपी और तहसीलदार ‘रिश्वत कांड’ भी सदन में सुर्खियां बना रहा. अभय सिंह चौटाला, निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू, किरण चौधरी ने इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदन में सवाल खड़े किये थे. घोटाला सामने आने के बाद 64 हजार से अधिक रजिस्ट्री मामले में रेवन्यू अधिकारियों की जांच करने की बात कही गई थी लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

बीजेपी नेता सोनाली फौगाट की मौत से जुड़े अनसुलझे सवाल!

हरियाणवी कलाकार और बीजेपी नेता सोनाली फौगाट की 23 अगस्त को गोवा में मौत हो गई. सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहने वाली सोनाली फौगाट की हार्ट अटैक से मौत होने की खबर चल रही हैं लेकिन सोनाली के परिवार ने मौत के पीछे साजिश पर शक जताया है. जिसके चलते सोनाली फौगाट की मौत को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं.

सोनाली फौगाट की मौत को शुरुआती तौर पर गोआ पुलिस ने भी संदिग्ध मानते हुए अप्राकृतिक मौत कहा है. इसी आधार पर पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है. आज 10:30 बजे डॉक्टरों का बोर्ड पोस्टमार्टम शुरू कर चुका है. शाम तक शव के हरियाणा पहुंचने और अंतिम संस्कार की उम्मीद जताई जा रही है. लेकिन, सोनाली से जुड़े कितने ही सवाल अभी भी अनसुलझे हैं.

इन सवालों का जवाब हर कोई जानना चाहता है. शायद इन सवालों का जवाब तो अंतिम यात्रा पर निकलने के दौरान सोनाली भी जानना चाहेगी, लेकिन लगता नहीं कि कभी भी इन सवालों के जवाब सार्वजनिक हो पाएंगे. क्योंकि, भाजपा नेत्री सोनाली की मौत के बाद न तो सीबीआई जांच का आदेश ही प्रदेश सरकार ने दिया है और न ही इस मौत की जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज से कराने का कोई फैसला लिया गया है.

ऐसे में बड़ी साजिश से इंकार नहीं किया जा सकता और अगर इन सवालों के जवाब नहीं दिए गए तो फिर सोनाली की आत्मा को भी शायद ही कभी शांति मिल पाए और उसकी मासूम बेटी भी कभी न्याय हासिल कर पाए. हां, सोनाली की मौत के बाद पूर्व में भाजपा संगठन से जुड़े रहे नेताओं के अलावा प्रदेश सरकार में मौजूदा एक वरिष्ठ मंत्री समेत कई लोग राहत की सांस जरूर ले रहे हैं.

1- सोनाली की मौत की सूचना के लिए उनके घर वालों को 8 बजे कॉल आई और गोआ पुलिस को 9 बजे, ऐसा क्यों?

2- मौत 8 बजे से भी पहले हुई, ऐसे में इतने वक्त में गोआ में क्या-क्या मैनेज किया गया? वहां सोनाली के अलावा और कौन-कौन था?

3- कुछ नजदीकी लोग कल सोनाली के फार्म हाउस पहुंचे, जबकि उन्हें पहुंचना सोनाली के घर फतेहाबाद के भूथन कलां चाहिए था, ऐसा क्यों?

4- फार्म हाउस में पहुंचने पर इन लोगों ने वहां पर क्या-क्या मैनेज किया, क्या किसी सामान को खोजा? इसका कोई जिक्र क्यों नहीं हो रहा?

5- सुधीर सांगवान नाम का एक व्यक्ति जो विधानसभा चुनाव 2019 के दौरान सोनाली के सम्पर्क में आया, उससे पहले कहीं फ्रेम में नहीं था और फिर सारा कर्ता-धर्ता कैसे बन गया?

6- सुधीर ने आते ही सोनाली को एक बीएमडब्ल्यू गाड़ी दी. खुद को बड़ा कांट्रेक्टर बताया, जिसका विदेशों में भी कारोबार है, बाद में वह दिन-रात साथ रहने लगा और पब्लिकली जॉब टाइटल निजी सचिव का बताया जाने लगा, क्यों?

7- सुधीर सांगवान ने सोनाली के नजदीकी लोगों को उस से दूर करना क्यों शुरू किया?

8- सुधीर के ईशारे पर सोनाली के घर के केयरटेकर पर चोरी तक का मुकदमा दर्ज करवा कर उसकी पुलिस से छितर परेड क्यों करवाई गई?

9- सोनाली और निजी सचिव की शादी तक की बातें करीबी लोगों में आई, जिस पर बताया गया कि सोनाली के परिजन इस रिश्ते से राजी नहीं थे? क्यों?

10- सुधीर सांगवान का गोआ में सोनाली के साथ होना और मौत के बाद खुद का सार्वजनिक हो चुका फोन नंबर और सोनाली का पर्सनल फोन बंद क्यों किया गया? क्या छिपाने की साजिश थी?

11- सोनाली की बहनों ने भी सरेआम आरोप लगाया है कि उनके भाई को मात्र मौत की सूचना देते ही सुधीर ने फोन काट दिया, उसके बाद एक भी काल रिसीव नहीं की. क्यों?

12- सुधीर सांगवान खुद विवाहित हैं और उनके बच्चे भी हैं. ऐसा कौन सा कारण था कि लगभग 3 साल से वह अपने घर-परिवार, बच्चों से दूर सोनाली के ही चारों तरफ मंडरा रहा था और जैसा कि सुधीर ने शुरुआत में सोनाली को बताया था कि वह बड़ा कांट्रेक्टर है, वह काम धंधे छोड़कर उसका कारिंदा बनकर क्यों घूम रहा था?

13- क्या सुधीर का सोनाली के साथ हरदम रहना और उससे शादी तक के चर्चे सिर्फ सोनाली को ट्रैप करने तक सीमित था, या फिर यह कहें कि सुधीर को किन्ही शक्तियों ने वहां प्लांट किया था?

14- सोनाली फोगाट के सत्ता, संगठन और एडमिनिस्ट्रेशन के लोगों के साथ अति करीबी रिश्तो की चर्चाएं प्रदेश भर में हैं. क्या ये जांच में शामिल होंगे?

15- सोनाली की ताकत का अंदाजा इस बात से लगा लिया जाए कि आए दिन कई बड़े चेहरे उनके दरवाजे पर हाजिरी लगाए बगैर इस क्षेत्र में प्रवास नहीं कर सकते थे. अपने इसी दबदबे के बलबूते नलवा विधानसभा में उनकी दावेदारी के बावजूद टिकट कटने पर आदमपुर जैसे एक नए विधानसभा की बची हुई टिकट सोनाली को देकर शांत करना पड़ा था, क्यों?

16- सूत्रों की अगर मानें तो सोनाली फौगाट को विधानसभा चुनाव लड़ाने में मजबूरन अहम भूमिका निभाने वाले संगठन के एक बड़े चेहरे को अपना बड़ा राजनीतिक करियर बर्बाद कर खुड्डे लाइन लगना पड़ा, क्यों?

17- पुख्ता सूत्रों से जानकारी यह भी आ रही है कि प्रदेश सरकार के एक कद्दावर मंत्री ने सोनाली को पिछले दिनों गुरुग्राम में एक फ्लैट दिलवाया. जिसकी बुकिंग के लिए कागजात तक मंत्री महोदय ने अपने खुद के व्हाट्सएप से बिल्डर को भेजे. ऐसी क्या मजबूरी थी?

18- निजी सचिव के क्रियाकलाप ही नहीं, बल्कि बहनों के आरोप तक उन्हें कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. इसके बावजूद उनकी भूमिका का जिक्र कहीं पर क्यों दिखाई नहीं देता है. वह कौन सी शक्तियां हैं, जिन्होंने उसे वहां प्लांट किया और अब बचाने का प्रयास कर रहे हैं.

19- भजनलाल परिवार का नाता इससे पहले भी कुछ बड़े चर्चित कांड में रहा है. भजनलाल सरकार के दौरान एक शिक्षिका सुशीला की हत्या और उसका शव तक ना मिलना. उसके बाद अनुराधा बाली उर्फ फिजा की मौत और अब इशारा सोनाली फौगाट की तरफ भी आना, कुछ सिलसिलेवार तरीके से सवाल खड़े कर रहा है.

20- कुलदीप बिश्नोई के सोनाली फौगाट के आवास पर जाकर मुलाकात करने के मात्र 5 दिन बाद रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत होना, मौत से मात्र 4 दिन पहले अपने ही एक कार्यक्रम में सोनाली को बुलाकर बेइज्जत करते हुए वापस भेजना, खुद सोनाली फौगाट द्वारा इस बेइज्जती का अपने एक करीबी को बयां करना, काफी कुछ कहता है.

21- सोनाली फोगाट की मौत की सूचना मिलते ही आनन फानन में कुलदीप बिश्नोई का मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के लिए पहुंचना और मीडिया में इसे मानवीय संवेदनाओं से परे हलके की राजनीति पर चर्चा बताना कहां तक जायज था?

22- सोनाली फौगाट के पास कुछ बड़े चेहरों के सबूत होने की लगातार चर्चाएं रही हैं. अब सोनाली फौगाट की मौत के बाद वो सबूत किसके पास हैं या फिर कौन उन्हें नष्ट करने की कोशिश कर सकता है? क्या इन सबूतों को हासिल करने के लिए सोनाली की मौत का षड्यंत्र रचा गया?

23- जैसा की सोनाली ने एक पत्रकार को फोन पर बताया था कि हुड्डा साहब उन्हें कांग्रेस में लाना चाहते हैं और सर्वे के बाद टिकट की बात कह रहे हैं. तो क्या कांग्रेस उम्मीदवार बनने पर सोनाली फौगाट की वजह से कुलदीप अपना गढ़ हार जाते? कहीं यही भय तो सोनाली की मौत की वजह नहीं बना?

-अजय दीप लाठर, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं.


अंबाला: गोगा माड़ी का मेला देखने गए घुमंतू समुदाय के युवक की पिटाई, युवती से छेड़छाड़ के आरोप में भेजा जेल!

अंबाला कैंट के पास स्थित बब्याल में गोगा माड़ी पर भादवे के महीने में हर साल मेला लगता है. मेला देखने गए विमुक्त घुंमतू समुदाय के मंगता चमार समाज के युवक के साथ गोगा माड़ी कमेटी के लोगों ने मारपीट की और युवती छेड़ने का आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया. गोगा माड़ी मुख्य तौर पर राजपूत समुदाय के लोग पूजा करते हैं. गूगा माड़ी के नाम पर एक कमेटी भी चलती है जिसमें अधितकर सदस्य राजपूत समुदाय से ही हैं. हर साल लगने वाले इस मेले में झूलों सहित दर्जनों दुकानें लगती हैं. आस-पास के लोग अपने बच्चों के साथ मेला देखने आते हैं. इस पूरे मेले का रखरखाव राजपूत समुदाय के लोग ही करते हैं.

वहीं मेला स्थल यानी गोगा माड़ी से मजह सौ मीटर की दूरी पर सैनिक कॉलोनी में विमुक्त घुमंतू समुदाय से आने वाले मंगता चमार समाज के करीबन तीन सौ परिवार रहते हैं. आस-पास के लोग इस बस्ती को ‘डेहा बस्ती’ के नाम से बुलाते हैं. हालांकि इस कॉलोनी में डेहा समाज के लोग नहीं रहते हैं यहां अधिकतर मंगता चमार समाज से लोग रहते हैं.

वहीं 13 अगस्त को गोगा माड़ी कमेटी के लोगों ने मंगता चमार समाज के यहां रिश्तेदारी में आए एक 20 साल के युवक को युवती से छेड़छाड़ के आरोप में बुरी तरह पीट दिया. 20 साल के पत्रका के रिश्तेदारों ने बताया कि वह होशियारपुर से यहां कुछ दिन रहने के लिए आया था. मेले में गए पत्रका को राजपूत समुदाय के 10 से 12 लोगों ने मिलकर पिटा. उसका कसूर इतना था कि वह गोगा माड़ी में मेला देखने के लिए चला गया था. मेले में युवक की पिटाई के बाद मंगता चमार डेरे के लोग और गोगा माड़ी कमेटी के लोग आमने सामने हो गए. मंगता चमार समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि जब हम युवक को पिटने से बचाने के लिए गोना माड़ी पहुंचे तो हमारी महिलाओं और पुरुषों के साथ भी मारपीट की गई और हमें जातिसूचक गालियां दी गई. इस भिड़ंत में दोनों पक्षों के करीब 15 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और बचाव करने पहुंचे महेशनगर थाने के पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए.

मंगता चमार समाजी द्वारा लिखी शिकायत.

दरबार सिहं ने बताया, “इस मामले में थाने में शिकायत दर्ज करवाने गए मंगता चमार समुदाय के लोगों का मामला दर्ज नहीं किया गया. उलटा जो लोग अंबाला के महेशनगर थाने में शिकायत दर्ज करवाने के लिए गए थे पुलिस ने उनके खिलाफ ही मारपीट करने का आरोप लगाकर केस दर्ज करके लॉकअप में बंद कर दिया और अगले दिन कोर्ट में पेश कर रिमांड पर ले लिया. थाने में केस दर्ज करवाने के लिए गए ओम प्रकाश, दीप सिंह, जोरा सिंह और विकास चारों जेल में हैं.” जिस जोरा सिंह पर हमला किया गया जिसकी मेडिकल रिपोर्ट आप देख  सकते हैं उसको भी पुलिस ने गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश कर दिया.

जेल में बंद 24 वर्षीय जोरा सिंह की मेडिकल रिपोर्ट.

मंगता चमार डेरे के लोगों ने आरोप लगाया कि हमारी बस्ती के लोगों का गोगा माड़ी मेले में जाने की मनाही है. मंगता चमार डेरे के रहने वाले क्रांति ने बताया, “हमारे लोगों की गोगा माड़ी में जाने की मनाही है. हमारे डेरे के लोगों को गोगा माड़ी के मंदिर में प्रवेश नहीं जाने करने दिया जाता है. ये लोग हमें नीच समझते हैं और जातिसूचक गालियां तक देते हैं. पिछले कईं सालों से हमारे लोगों ने गोगा माड़ी के अंदर और मेले में जाना बंद कर दिया है. उन्होंने आगे बताया हमारे साथ मारपीट करने का यह पहला मौका नहीं है इससे पहले हमारी महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई थी. तब हमारे डेरे की दो तीन महिलाएं सूखी लकड़ी इकट्ठा करने के लिए गोगा माड़ी के अंदर चली गईं थीं उन लोगों ने हमारे समाज की महिलाओं पर हाथ उठाया जब हमने पुलिस में शिकायत की तो उस वक्त भी हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई थी.”  

वहीं गोगा माड़ी कमेटी की ओर से अनिल शिकायतकर्ता हैं. जिन्होंने 14 अगस्त को थाना महेशनगर में शिकायत दर्ज करवाई थी. शिकायतकर्ता अनिल ने अपनी शिकायत में बताया कि 13 अगस्त को गोगा माड़ी में मान सिंह, हरनेक सिंह, सुखदेव सिंह, नेक सिंह, क्रांति, रामबीर, जुगनु और 150 से 200 लोगों ने कमेटी के सदस्यों को जान से मारने की नीयत से हमला किया.

वहीं इस मामले पर जब ऑल इंडिया विमुक्त घुमंतू जनजाति वेलफेयर संघ के अध्यक्ष रविंद्र भांतू से बात की गई तो उन्होंने कहा, “अंबाला के विमुक्त घुमंतू समुदाय के लोगों के साथ यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है. हैरानी होती है कि आजादी के 75 साल बाद भी जाति के नाम पर लोगों के साथ मारपीट और भेदभाव हो रहा है. हमारे संगठन द्वारा हरियाणा के तमाम अधिकारियों तक यह शिकायत पहुंचाई गई जिले के बड़े अधिकारियों से मैंने खुद फोन पर बात की लेकिन उसके बाद भी हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई. अब पीड़ित लोगों पर ही समझौते का दबाव बनाया जा रहा है.”       

डीएनटी वेलफेयर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राजपूत समुदाय की ओर से घुमंतू समाज के लोगों को परेशान करने वाले बीजेपी के नेता हैं जिनमें डिंपल राणा, अनिल राणा, सोमपाल राणा शामिल हैं.

वहीं गूमा माड़ी की ओर से पक्ष रखते हुए करीबन 27 साल के राजन ने बताया कि डेहा समाज के लोग परिवार रहते हैं जिनमें से अधिकतर ईसाई बन चुके हैं. ये लोग यहां दर्शन करने के लिए नहीं मेले में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए आते हैं. 13 अगस्त को भी डेहा समाज के एक लड़के ने एक लड़की के साथ छेड़छाड़ की थी जिसके बाद उसको पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था.”

वहीं जब इस मामले में पुलिस अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है. यानि घटना के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी विमुक्त घुमंतू समाज के लोगों की शिकायत दर्ज नहीं की गई है.  

विभाजन के बाद भारत आए दलित सिख परिवारों के मकानों पर बुल्डोजर चलने का खतरा मंडरा रहा!

एक ओर देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से आजादी के 75 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव मनाने का आह्वान कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर बंटवारे का दंश झेल चुके पूर्वी दिल्ली में रह रहे सैंकड़ों दलित सिख परिवार अपने आसियाने गिराये जाने के डर में जी रहे हैं. दरअसल डीडीए द्वारा शाहदरा के कस्तूरबा नगर में 2 अगस्त को 18 अगस्त तक 4 कॉलोनियों को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया गया. डीडीए का कहना हैं कि जिस जमीन पर ये लोग मकान बनाकर रह रहे हैं वह सरकारी जमीन है जिसपर अवैध कब्जा किया गया है. वहीं स्थानीय लोगों ने डीडीए पर राजनैतिक दबाव के चलते शहर की आंतरिक सड़कों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए कॉलोनी की जमीन पर सड़क बनाने का आरोप लगाया है.

स्थानीय लोग और कुछ युवा संगठन डीडीए के इस आदेश का कड़ा विरोध कर रहे हैं. मकान तोड़े जाने के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी हैं. कॉलोनी के निवासियों का मानना है कि सड़क निर्माण के लिए डीडीए के पास खाली जमीन है. जिसका इस्तेमाल शिवम एनक्लेव के लोग पार्किंग के लिए करते हैं. 2021 के नोटिस के मुताबिक डीडीए ने वहां सड़क निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया था परंतु शिवम एन्क्लेव के लोगों ने ‘स्टे-आर्डर’ ले लिया और यह केस जीत कर पार्किंग की जगह बनने वाली सड़क का निर्माण रुकवा दिया.

कस्तूरबा नगर में रहने वाले लोगों में ज्यादातर मजदूर, ऑटोचालक और छोटे-मोटे काम करके जीवन यापन करने वाले लोग हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपना एक घर खड़ा किया है और अब उनके घर के बाहर एक नोटिस लगा दिया गया है, जिसमें बस्ती को गिराने और केवल 15 दिन में मकान खाली करने के लिए कहा गया है.

डीडीए द्वारा जारी नोटिस.

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े भगत सिंह छात्र एकता मंच संगठन की छात्रा संगीता जो स्थानीय लोगों के साथ डीडीए के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रही हैं, वह कहती हैं कि इस साल हम आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ मना रहे जिसमें हर घर तिरंगा अभियान चल रहा है मगर इन लोगों के घर ही तोड़े जा रहे हैं तो ये तिरंगा कहां लगाएंगे. संगीता कहती है कि, “उनके साथ पढ़ने वाले मित्र भी इसी बस्ती में रहते हैं जिनका घर भी टूटने की कगार पर है अगर उन्हें यहां से बेदखल किया जाएगा तो उनके आगे की पढ़ाई और भविष्य का क्या होगा. उनके मित्र की तरह ही इस बस्ती में बहुत सारे युवा है, जिनका भविष्य दांव पर लगा हुआ है.”

वहीं कस्तूरबा नगर में रहने वाले विक्की ने बताया, “यहां रहने वाले अधिकतर परिवार बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत लौटकर आए थे. इनमें ज्यादातर सिख दलित परिवार हैं. हम लोगों को पिछले 75 सालों से दिल्ली में कहीं भी बसने नहीं दिया जा रहा है. हमारे लोग जहां भी जाते हैं वहीं परेशान किया जाता है.”

घर न तोड़े जाने की अपील करते बच्चे

वहीं मेडिकल से बारहवीं की पढ़ाई पूरी कर चुकीं एक बच्ची ने बताया, “मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं. 12वीं पास करने के बाद अब नीट की तैयारी करना चाहती हूं लेकिन जब से डीडीए द्वारा हमारी बस्ती को गिराने का नोटिस जारी किया गया है तब से मुझे डर सता रहा है कि अगर हमारे घर तोड़ दिए गए तो हम सड़क पर आ जाएंगे और मेरी आगे की पढ़ाई कैसे होगी.”

डिनोटिफाइड ट्राइब्स से आने वाले सामाजिक कार्यकर्ता गुरुदत्त भांतू ने बताया कि, “यहां पर कुछ परिवार ऐसे हैं जो 1960 से रह रहे हैं जिनकी पांचवी पीढ़ी यहां रहती है और उन लोगों के पास सभी डाक्यूमेंट्स हैं उसके बावजूद भी उनके घरों को तोड़ा जा रहा है. गुरुदत्त कहते हैं, “सरकार की नोटिस के मुताबिक जो परिवार यहां पर 12 साल से ज्यादा रहे हैं उनके घरों को नहीं तोड़ा जाएगा लेकिन डीडीए इस फैसले को दरकिनार कर रहे हैं, यहां रह रहे ज्यादातर लोग शिक्षित नहीं हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ खड़े हो पाए, स्थानीय लोग मदद मांगने के लिए जब अपने विधायक के पास गए तो, उन्होंने साफ-साफ इंकार कर दिया और कहा कि जल्द-से-जल्द अपना मकान खाली कर दो नहीं तो सरकारी काम में अड़चन बनने के लिए तुम्हें भुगतान करना पड़ेगा.

‘786’ लिखा देख काटे गए हाथ, झूठे मुक़दमे में फंसे, डेढ़ साल बाद हुए बरी. अख़लाक़ सलमानी की पूरी कहानी

20 मई को, पानीपत की एक फास्ट-ट्रैक ट्रायल कोर्ट ने अखलाक सलमानी को बाल यौन उत्पीड़न और अपहरण से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया. उसके खिलाफ एफआईआर तब दर्ज की गई जब दो नशे में धुत्त लोगों ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की और उसे एक मुस्लिम होने के एहसास होने पर उसका दाया हाथ काट दिया जिस पर ‘786’ का टैटू बना हुआ था. अख़लाक़ पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोस्को) के तहत आरोप लगाए गए थे.

निचली अदालत के फैसले के अनुसार उन्होंने अख़लाक़ सलमानी पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया और इसी के साथ अदालत ने पुलिस द्वारा की गई जांच में कई खामियों की ओर भी इशारा किया.

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष (आरोप लगाने वाले) के पूरे बयान पर छानबीन करना संभव नहीं है और विश्वसनीय सबूतों से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है.

पोक्सो अदालत के न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह ने एफआईआर दर्ज करने में देरी, अख़लाक़ की एफआईआर दर्ज होने के दिन ही उसके खिलाफ़ एफआईआर दर्ज होने पर शक, अख़लाक़ के खिलाफ ज़रूरी सबूत पेश करने में अभियोजन पक्ष की नाकामी और पीड़िता की ज़रूरी चिकित्सीय-कानूनी जांच की कमी का हवाला देते हुए अख़लाक़ सलमानी के खिलाफ़ सभी आरोपों से उसे बरी कर दिया.

आदेश ने शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज करने में लंबे समय तक देरी पर भी सवाल उठाया और कहा कि इसे एफआईआर में शिकायत को पर्याप्त रूप से समझाया नहीं गया है.

आदेश में अदालत ने यह भी कहा कि अख़लाक़ वास्तव में शिकायतकर्ता पक्ष का शिकार बना है, जिसने पहले अख़लाक़ पर हमला किया और फिर उसे मरने के लिए छोड़ने से पहले एक आरा मशीन की मदद से उसका दाहिना हाथ काट दिया.

क्या हुआ था अख़लाक़ सलमानी के साथ?

उत्तर प्रदेश सहारनपुर का रहने वाला, पेशे से नाई, 28 वर्षीय अख़लाक़ सलमानी काम की तलाश में हरियाणा के पानीपत में आया था. 24 अगस्त की शाम वह थक हार कर पानीपत में किशनपुरा रेलवे लाइन के पास पार्क में बैठा जहां उस के साथ मारपीट हुई. नशे में धुत्त 2 लोगों ने अख़लाक़ को रात के डेढ़ बजे मारा पीटा और मशीन वाली आरी से उस का दाया हाथ काट दिया जहां उस ने ‘786’ का टैटू बनवाया हुआ था.

अखलाक ने बताया कि दो लोगों ने नशे की हालत में उस पर हमला किया, जब उन्होंने उसकी बांह पर ‘786’ का टैटू देखा था. अखलाक के परिवार ने आरोप लगाया कि यह एक सांप्रदायिक घृणा से जुड़ा अपराध था.

अख़लाक़ के हाथ काटने की यह घटना 24 अगस्त 2020 को हुई थी लेकिन इस की एफआईआर 7 सितम्बर 2020 को लिखी गई. एफआईआर दोनों पक्षों ने एक दुसरे के खिलाफ़ लिखवाई. अख़लाक़ ने उस के साथ हुए घटनाक्रम को बताते हुए चांदनी बाग पुलिस थाने में आरोपियों के खिलाफ़ एफआईआर लिखवाई तो दुसरी ओर आरोपित पक्ष ने भी अख़लाक़ के खिलाफ़ बाल यौन उत्पीड़न और अपहरण से जुड़े विभिन्न धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोस्को) के तहत प्राथमिकी लिखवाई.

अख़लाक़ के खिलाफ़ हुई हिंसा के बावजूद उस पर लगे आरोपों के चलते उसे 1 साल से ऊपर जेल में सज़ा काटने को मजबूर होना पड़ा.

अदालत में अख़लाक़ का केस लड़ रहे वकील अकरम अख्तर ने बताया है कि पुलिस ने अभी तक अख़लाक़ के परिवार द्वारा दायर मामले में कार्यवाही शुरू नहीं की है. अकरम ने बताया कि “इस मामले में एक साथ दो प्राथमिकी दर्ज की गईं थी. जिस में से एक मामले में मुकदमा खत्म हो गया है जबकि दूसरे मामले में पुलिस ने अभी तक चार्जशीट तक दाखिल नहीं की है.”

अहीरवाल क्षेत्र में राव इंद्रजीत सिंह का खूंटा हिलाने में जुटी भाजपा!

”न मैं गिरा और न मेरी उमीदों के मीनार गिरे, पर लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे.” बीते मंगलवार को रेवाड़ी भास्कर के फ्रंट पेज पर ऊपर लिखे शेर के साथ एक विज्ञापन छपा जिसके बाद अहीरवाल की राजनीति में गहमागहमी तेज हो गई. दरअसल ये विज्ञापन अहीरवाल के सबसे बड़े नेता राव इंद्रजीत सिंह की फ़ोटो के साथ छापा गया था. पूरे विज्ञापन में कहीं भी उनकी पार्टी भाजपा का कोई चिन्ह या नाम नहीं था. ये विज्ञापन ऐसे समय में आया जब केंद्र में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव अहीरवाल में अपनी जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे थे. यही वज़ह है कि इस विज्ञापन के राजनीतिक मायने अहीरवाल की आगामी राजनीति के लिहाज़ से काफ़ी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

‘राजा राव इंद्रजीत सिंह विचार मंच’ नामक संगठन ने दैनिक भास्कर अखबार को ये विज्ञापन दिया था. विज्ञापन देने वाले प्रवीन राव ने गाँव सवेरा से बातचीत में कहा, “राजा राव इंद्रजीत सिंह विचार मंच, अहीरवाल के जन नेता राव इंद्रजीत सिंह के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का एक समूह है जो समय-समय पर राव इंद्रजीत सिंह के लिए काम करता रहता है.”

यह विज्ञापन केंद्र में मंत्री भूपेंद्र यादव की अहीरवाल यात्रा के दौरान ही क्यों दिया गया, इसके जवाब में वो कहते हैं कि, “कुछ लोगों द्वारा भूपेंद्र यादव और राव इंद्रजीत सिंह के बीच तकरार पैदा करने की कोशिश की जा रही थी. अहीरवाल में भूपेंद्र यादव की यात्रा शुरू होने के एक हफ़्ते पहले ही इस तरह का माहौल बनाना शुरू कर दिया गया कि उनकी ये यात्रा राव इंद्रजीत सिंह के लिए खतरे की घंटी है. ऐसे लोगों को हम ज़वाब देना चाहते थे इसलिए ये विज्ञापन दिया गया.”

मोदी सरकार ने बीते दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल करते हुए कईं नए चेहरों को शामिल किया था. केंद्र में मंत्री बनने वालों में एक नाम भूपेंद्र यादव का भी था जिन्हें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ क्ष्रम एवं रोज़गार मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गई थी.

मंत्रीमंडल फेरबदल में नए चेहरों को शामिल करने के बाद भाजपा ने रणनीति बनाई कि सभी नए मंत्री अपने-अपने गृह क्षेत्र और कार्य क्षेत्र में लोगों के बीच जाएंगे और सरकार की उपलब्धियां जनता के बीच रखेंगे.

इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी 16 अगस्त, 2021 से “जन आशीर्वाद यात्रा” नाम से यात्रा शुरू की. चूँकि भूपेंद्र यादव का गृह क्षेत्र हरियाणा का गुड़गाँव ज़िला है और कार्यक्षेत्र राजस्थान है इसलिए उन्होंने अपनी यात्रा पहले गुडगाँव में उनके पैतृक गाँव जमालपुर से ही शुरू की. भूपेंद्र यादव ने गुडगाँव, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ इन तीनों ज़िलों में 16 से 17 अगस्त के बीच कई जनसभाएं की और पूरे अहीरवाल क्षेत्र को यात्रा में कवर किया.

अहीरवाल राव इंद्रजीत सिंह का गढ़ माना जाता है, ऐसे में एक और अहीर नेता द्वारा इस क्षेत्र में यात्रा करने के फैसले से इस बात को हवा मिलने लगी है कि कहीं भाजपा अहीरवाल में राव इंद्रजीत सिंह का विकल्प तो नहीं तलाश रही है.

अपने पैतृक गाँव जमालपुर में भूपेंद्र यादव ने एक बड़ी जनसभा का आयोजन किया जिसमें सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा से भाजपा के सांसद कृषणपाल गुर्जर, सुनीता दुग्गल, चौधरी धर्मबीर सिंह, हरियाणा भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े, पूर्व मंत्री राव नरबीर सिंह और हरियाणा भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ सहित प्रदेश भाजपा के तमाम बड़े चेहरे शामिल हुए.

भूपेंद्र यादव की यात्रा से अहीरवाल का राजनीतिक माहौल गरमा गया. भाजपा के तमाम बड़े चेहरे इस यात्रा में शामिल हुए मगर अहीरवाल के सबसे बड़े नेता और वर्तमान में गुड़गाँव से भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने निमंत्रण के बावजूद इस यात्रा से दूरी बनाए रखी.

राव इंद्रजीत सिंह हरियाणा के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं जिनका पार्टी से इतर खुद का एक बड़ा वोट बैंक रहा है. साल 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राव इंद्रजीत सिंह का प्रदेश में भाजपा सरकार को सत्तासीन करने में अहम योगदान रहा है.

यही वजह है कि समय-समय पर राव इंद्रजीत सिंह भाजपा को आँख दिखाते रहते है और कई बार रैलियों और पब्लिक बैठकों में मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर भी निशाना साध चुके है. मगर इस यात्रा को यदि करीब से देखा जाए तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा ने अब राव इंद्रजीत सिंह के आँख दिखाने वाले तेवरों का समाधान ढूंढना शुरू कर दिया है.

निमंत्रण होने के बावजूद राव इंद्रजीत सिंह का भूपेंद्र यादव के गाँव जमालपुर में आयोजित विशाल जनसभा में न पहुंचना, राव समर्थकों का भी यात्रा से दूरी बनाएं रखना और भाजपा में राव विरोधियों का बढ़-चढ़कर भूपेंद्र यादव का स्वागत करना, ये तमाम ऐसी घटनाएं है जो अहीरवाल की राजनीति में एक बड़े फेरबदल की ओर इशारा कर रही हैं.

2019 के विधानसभा चुनावों में राव इंद्रजीत सिंह चाहते थे कि रेवाड़ी विधानसभा से उनकी बेटी आरती राव को भाजपा टिकट दे मगर पार्टी ने परिवारवाद का हवाला देते हुए ऐसा करने से इंकार कर दिया. उधर भाजपा में सालों से संगठन का काम कर रहे अरविंद यादव भी टिकट की दौड़ में शामिल थे मगर फिर पार्टी ने राव इंद्रजीत सिंह के दबाव में उनकी बेटी को टिकट न देकर, उनके ही करीबी सुनील मुसेपुर को टिकट दे दी.

इससे रेवाड़ी में कई भाजपा कार्यकर्ता नाराज हो गए. इसके बाद अरविंद यादव ने एक मीटिंग में खुलकर मीडिया के सामने राव इंद्रजीत सिंह का विरोध किया. विरोध के चलते राव को वो मीटिंग बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा था.

हालांकि राव समर्थित सुनील मुसेपुर रेवाड़ी से चुनाव हार गए. इस हार के पीछे भाजपा की अंदरूनी बगावत के अलावा एक और मुख्य कारण रहा पूर्व विधायक रणधीर सिंह कापडीवास का निर्दलीय चुनाव लड़ना. कापडीवास साल 2014-19 तक रेवाड़ी से भाजपा की टिकट पर विधायक रहें, साल 2019 में निर्दलीय चुनाव लड़कर 50 हजार वोट लेकर उन्होंने राव समर्थित उम्मीदवार की हार में अहम भूमिका निभाई.

इसके बाद से ही राव इंद्रजीत सिंह ने इन दोनों नेताओं के ख़िलाफ पार्टी आलाकमान को शिकायत देना शुरू कर दिया था. उस समय राव की नाराजगी के चलते भाजपा ने अरविंद यादव को पार्टी के  राज्य उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया था मगर रणधीर सिंह कापडीवास को लेकर पार्टी की तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं की गई.

लेकिन इसी साल भाजपा ने अरविंद यादव को हरको बैंक (हरियाणा स्टेट को-ऑपरेटिव अपैक्स बैंक लिमिटेड) का चेयरमैन बना दिया और साथ ही रोहतक जिलें में भाजपा अध्यक्ष के रूप में भी उनकी नियुक्ति कर दी. इस से ये साबित होता है कि किस तरह से भाजपा लगातार राव इंद्रजीत सिंह को अनदेखा कर रही है.

इतना ही नहीं, कापडीवास और अरविंद यादव दोनों ही नेताओं ने कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव का भव्य स्वागत किया और उनके सम्मान में जनसभा का आयोजन भी करवाया. रेवाड़ी के मसानी गाँव में अरविंद यादव द्वारा आयोजित जनसभा को संबोधित करने के बाद भूपेंद्र यादव ने सीधा नांगल चौधरी विधानसभा में जनसभा को संबोधीत किया.

रेवाड़ी से नांगल चौधरी के बीच बावल, अटेली और नारनौल – ये तीन विधानसभा पड़ती है मगर यहाँ भूपेंद्र यादव की एक भी जनसभा तय नहीं की गई. इन तीनों सीटों पर राव समर्थित विधायक हैं और इनमें से 2 विधायक तो मंत्री भी हैं, बावजूद इसके इन विधायकों की तरफ से केंद्रीय मंत्री के स्वागत में कोई जनसभा नहीं बुलाई गई.

नांगल चौधरी से विधायक अभय सिंह यादव राव के विरोधी माने जाते हैं कयास लगाए जा रहे है कि इसलिए ही उन्होनें भूपेंद्र यादव के स्वागत में जनसभा का आयोजन किया. यात्रा की रूप रेखा देखने पर अहीरवाल की राजनीति में जारी इस गुटबाजी को आसानी से पहचाना जा सकता है.

दैनिक भास्कर रेवाड़ी के ब्यूरो चीफ अजय भाटिया ने इस मामले में गाँव सवेरा से बातचीत में कहा, “राव इंद्रजीत सिंह भाजपा की विचारधारा के साथ अपने रूतबे और उसूलों की राजनीति करते हैं. राव समर्थक भी भाजपा के संगठन मंडल और उसके कार्यों पर राव के मिजाज को तवज्जो देते रहे हैं, कई बार ऐसा मैसेज दिया है कि उनके लिए राव इंद्रजीत सिंह ही पूरी पार्टी हैं. जबकि भाजपा चाहती है कि उनकी पार्टी का नेता पार्टी विचारधारा और पार्टी लाइन दोनों को फॉलो करे. भाजपा नए लोगों को मौका देने की बात कहकर भूपेंद्र यादव में भविष्य देख रही है, भाजपा की विचारधारा वाले ये नेता अमित शाह के करीबी भी हैं. भाजपा ने भूपेंद्र यादव के सहारे अहीरवाल में नया अहीर नेता खड़ा कर दिया है, इसके कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. राव समर्थक इसे राव को कमजोर करने की साजिश मान रहे हैं.”

न्यूज-18 हरियाणा के साउथ हरियाणा हेड धर्मवीर शर्मा का कहना है, “यदि भाजपा ये सोच रही है कि भूपेंद्र यादव को वो राव इंद्रजीत सिंह के विकल्प के तौर पर कामयाब कर लेगी तो ये मुझे संभव होता नजर नहीं आ रहा. इसको भाजपा के एक प्रयोग के रूप में जरूर देखा जा सकता है कि कल को राव इंद्रजीत सिंह पार्टी छोड़ दे तो उनके पास राव का विकल्प रहे. राव इंद्रजीत सिंह की विचारधारा कभी भी भाजपा से नहीं मिल सकती इसलिए भाजपा संघ की क्यारी से आए भूपेंद्र यादव पर भविष्य के लिए दांव लगा रही है. राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल में कभी भी नम्बर दो पर रहना पसंद नहीं करते, यही कारण है कि वो भूपेंद्र यादव की सम्मान यात्रा में भी शामिल नहीं हुए.”

 हालांकि यात्रा के दौरान गुरुग्राम में मीडिया से बातचीत करते हुए इस मामले पर सीएम मनोहर लाल खट्टर ने किसी भी तरह की गुटबाजी से इंकार करते हुए कहा कि,“राव साहब हमारे दिग्गज नेता हैं, रातों-रात कोई उनकी जगह नहीं ले सकता.” लेकिन राव इंद्रजीत सिंह के यात्रा में शामिल न होने और भास्कर में उनके समर्थकों द्वारा छपवाए गए विज्ञापन के बाद गुटबाजी की सुगबुगाहट तेज हो गई थी. राव के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर खुलकर भाजपा के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया था.

केंद्रीय मंत्री भूपेद्र यादव की जन आशीर्वाद यात्रा का आखिरी पड़ाव झुंझुनू जिले के खांदवा गाँव में था, उसके बाद उन्हें वापस दिल्ली जाना था और 19 अगस्त से अलवर, जयपुर और अजमेर की यात्रा करनी थी.

तभी 17 अगस्त की सुबह तकरीबन 11 बजे यह खबर आई कि भूपेंद्र यादव और राव इंद्रजीत सिंह साथ में रात्रिभोज करेंगे जिसका आयोजन राव इंद्रजीत सिंह के पैतृक निवास रामपुर हाउस पर किया जाएगा. यह ख़बर हैरान करने वाली थी क्योंकि जो तय कार्यक्रम था उसमें इस तरह के आयोजन की कोई जानकारी नहीं थी.

भूपेंद्र यादव ने अपनी सभा पूरी करने के बाद वापस दिल्ली जाते हुए राव इंद्रजीत सिंह से उनके घर पर मुलाकात की, यहाँ वो केवल आधे घंटे ही रुके. दोनों नेताओं की साथ बैठे तस्वीर भी रात करीब 10 बजे सामने आ गई जिसको बाद में राव इंद्रजीत सिंह ने अपने ट्विटर और फेसबुक पर शेयर भी किया मगर भूपेंद्र यादव ने इस मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर किसी तरह की कोई पोस्ट नहीं की. इस से एक बार फिर यह साफ हो गया कि अहीरवाल में भाजपा भले ही सबकुछ ठीक होने का दावा करे मगर पार्टी में गुटबाजी नजर आने लगी है. 

बड़ी मशक्कत के बाद पार्टी हाईकमान ने दोनों नेताओं के बीच रात्रिभोज के बहाने मीटिंग तय करवाई थी ताकि गुटबाजी की अटकलों को लगाम दिया जा सके मगर पूरी जन आशीर्वाद यात्रा की दर्ज़नों फोटो सोशल मीडिया पर डालने वाले भूपेंद्र यादव ने रात्रिभोज के बारे में सोशल मीडिया पर कोई प्रतिक्रिया न देकर राव इंद्रजीत सिंह से हिसाब बराबर कर लिया. इस पूरे घटनाक्रम के हिसाब से देखे तो आने वाले वक्त में अहीरवाल की राजनीति और दिलचस्प होने वाली है.

क्या विशाल जूड की रिहाई की मांग के पीछे धार्मिक और जातीय उन्माद की स्क्रिप्ट छिपी है?

विशाल जूड को सिडनी पुलिस ने 16 अप्रैल 2021 को गिरफ़्तार किया था. उस पर आरोप है कि वह हैरिस पार्क इलाक़े में सिखों पर हुए तीन अलग-अलग नस्लीय हमलों में शामिल था. पुलिस ने अपने ब्यान में कहा कि उनके पास विशाल के ख़िलाफ़ सीसीटीवी फुटेज है, जिसमें वह अपने कुछ अन्य साथियों के साथ सिडनी के हैरिस पार्क इलाके में सिखों पर हमला करते हुए देखा जा सकता है.

हैरिस पार्क में हुई जिन तीन अलग–अलग घटनाओं का ज़िक्र सिडनी पुलिस ने किया है उनमें से पहली घटना 16 सितम्बर 2020 की है, जब रात के करीब 8:30 बजे ब्रिसबेन स्ट्रीट के पास से गुजर रहे एक व्यक्ति पर पांच लोगों के समूह ने मिलकर हमला कर दिया. इस हमले में उस व्यक्ति के मुहं और सर पर गंभीर चौटें आई, जिसके चलते उसे पास के ही वेस्टमीड हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया.

दूसरी घटना 14 फ़रवरी 2021 की है, जब लगभग शाम के 6:30 बजे मैरिओन स्ट्रीट पर एक व्यक्ति की काली रेंज रोवर को जबरन रुकवाकर लाठी डंडो से ताबड़तोड़ हमला किया गया. इस हमले में कार चालक तो किसी तरह बच गया लेकिन उसकी गाड़ी को काफ़ी नुकसान हुआ.

तीसरी घटना 28 फ़रवरी 2021 की है, जब कैंडल स्ट्रीट पर लगभग दस लोगों ने मिलकर एक गाड़ी में जा रहे चार लोगों को घेरकर उनपर हमला किया. ये पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसके आधार पर पुलिस ने विशाल को गिरफ़्तार किया. इस घटना में घायल एक व्यक्ति ने लोकल टीवी चैनल 7 न्यूज को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि उनको इसलिए टारगेट किया गया क्योंकि वह सिख है.

हालांकि इन मामलों में आरोपी विशाल ने स्थानीय अदालत में बेल के लिए अर्जी भी लगाई थी, जो अदालत ने खारिज़ कर दी. सिडनी पुलिस का यह भी कहना है कि विशाल का वीज़ा खत्म हो चुका था और वह ऑस्ट्रेलिया में गैर क़ानूनी रूप से रह रहा था. विशाल के फेसबुक अकाउंट को देखने पर उसके कट्टर हिंदुवादी संगठनों से जुड़े होने का पता चलता है. हालांकि अब उसका फेसबुक अकाउंट प्रतिबंधित कर दिया गया है.

टाइम्स नाऊ को दिए गए अपने ब्यान में विशाल के बड़े भाई का कहना है कि विशाल हैरिस पार्क इलाके में किसान आन्दोलन के समर्थन में निकाली जा रही रैली में पंहुचा तो उसने पाया कि वहां देश विरोधी नारे लग रहे थे और तिरंगे का अपमान किया जा रहा था. विशाल ने इसका विरोध किया जिसके चलते उसके साथ रैली में मौजूड लोगों ने मारपीट की. परिवार के मुताबिक उनके बेटे की कोई गलती नहीं है और उसे रैली में मौजूद लोगों के दबाव के कारण ही उसे गिरफ़्तार किया गया है. हालांकि जिस तरह के आरोप विशाल के भाई ने लगाए हैं, उनकी कोई अधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.

इधर भारत में भी यह मामला तूल पकड़ रहा है. भाजपा नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक, सभी दक्षिणपंथी लोग इस मामले को लगातार धार्मिक और जातीय रंग देने की कोशिश कर रहे हैं.

इस मामले को किसान आंदोलन से भी जोड़ा जा रहा है.भारतीय किसान यूनियन (चढुनी) के करनाल जिलाध्यक्ष जगदीप सिंह ओलख ने हमें बताया, “विशाल की रिहाई हम भी चाहते है, वो हमारा ही बच्चा है. हो सकता है कि वह गलत लोगों के संपर्क में आकर भटक गया हो, लेकिन वह हमारा ही बच्चा है. भाजपा सरकार इस पूरे मामले को हिन्दू बनाम सिख बनाने में लगी है. करनाल से भाजपा सांसद संजय भाटिया का यह पूरा प्लान है और उनके कहने पर ही इस पूरे मामले को जातीय और धार्मिक रंग देने का काम किया जा रहा है.”

जगदीप ओलख ने दबे स्वर में बताया कि भाजपा सरकार को यह एहसास हो गया है कि हिसार और जींद में तो वे अपनी तिकड़मों से आन्दोलन को तोड़ नहीं पाए. अब करनाल और कुरुक्षेत्र इनका नया टारगेट है और उसी प्लान के तहत यहां इनकी पार्टी के नेता काम कर रहे हैं.

इस मामले में एक दिन पहले ही यानी 18 जून को विशाल के समाज से कुछ लोग उसकी रिहाई की मांग को लेकर भाजपा सांसद संजय भाटिया से भी मिलने गए थे, जिसके जवाब में संजय भाटिया ने हर संभव मदद का भरोसा दिया था.

जब हमने इस मामले को लेकर भाजपा सांसद संजय भाटिया से बात करनी चाही तो उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया, जैसे ही उन से बात होगी हम स्टोरी अपडेट करेंगे.

इस मामले को लेकर करनाल और आसपास के इलाकों में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, एक समुदाय विशेष के लोग लगातार दूसरे समुदाय के धार्मिक स्थलों को टारगेट करके उनके सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और यात्राएं निकली जा रही हैं. ऐसा ही एक मामला करनाल के निस्सिंग इलाके से सामने आया है, जहाँ रोहरी साहिब गुरूद्वारा को निशाना बनाते हुए उसके सामने से विशाल जूड के समर्थन में यात्रा निकाली गई और वहां रूक कर नारेबाज़ी की गई.

इस घटना के जवाब में सिख समुदाय ने भाजपा नेता संजय भाटिया द्वारा मामले को धार्मिक रंग देने का आरोप लगाया. भाजपा नेताओं के खिलाफ सिख समुदाय ने एक रोष मार्च निकालकर अपना विरोध भी दर्ज करवाया है. करनाल के एक गुरुद्वारा प्रमुख कंवरजीत सिंह ने हमें बताया, “स्थानीय भाजपा नेता इस घटना के जरिए समाज का आपसी भाईचारा बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं और साथ ही किसान आन्दोलन को भी टारगेट कर रहे हैं. हमें विशाल की रिहाई से कोई दिक्कत नहीं है मगर इस पूरे मामले की आड़ लेकर सिख समुदाय और उनके गुरुद्वारों को टारगेट न किया जाए. हमने आज प्रशासन को ज्ञापन देकर इस मामले में सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है.”

इसके उलट दक्षिणपंथी संगठन इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं. इसी कड़ी में आज एक और यात्रा ‘राजपूत यूथ ब्रिगेड’ के बैनर तले पंचकुला से शुरू होकर अम्बाला, कुरुक्षेत्र होते हुए करनाल पहुंची. इस यात्रा में कट्टर धार्मिक नारे लगाते हुए युवाओं की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

किसान यूनियन के नेता जगदीप ओलख का मानना है कि सत्ताधारी पार्टी इस मामले की आड़ में करनाल और आसपास के इलाकों में धार्मिक और जातीय ध्रुवीकरण की राजनीति को हवा दे रही है, जिसका मुख्य उद्येश्य इस इलाक़े में मजबूत हो रहे किसान आन्दोलन को कमज़ोर करना है. 

भाजपा के घोषणापत्र में किसानों के लिए क्या है?

पिछले दिनों केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया। पार्टी इसे संकल्प पत्र कहती है। इस घोषणा-पत्र में हर क्षेत्र के लिए बड़े-बड़े वादे किए गए हैं। आम तौर पर हर पार्टी चुनावों के पहले बड़ी घोषणाएं करती है। भाजपा भी इसका अपवाद नहीं है।

भाजपा के संकल्प पत्र में किसानों के लिए भी बड़ी-बड़ी घोषणाएं की गई हैं। इसमें सबसे पहले तो यही कहा गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का जो लक्ष्य रखा है उसे पूरा करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।

चुनावों से ठीक पहले मोदी सरकार ने दो हेक्टेयर तक जमीन वाले किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी. इसके तहत हर परिवार को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलनी है. भाजपा ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि जीतने के बाद वह इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसे देश के सभी किसानों के लिए लागू करेगी।

भाजपा ने यह घोषणा भी की है कि वह छोटे और सीमांत किसानों के लिए पेंशन की योजना लाएगी जिससे उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने के मकसद से भाजपा ने इस क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपये के निवेश का वादा भी किया है।

भाजपा के घोषणापत्र में किसानों के लिए एक बड़ा वादा यह है कि एक से पांच साल तक के लिए किसानों को एक लाख रुपये की अधिकतम सीमा वाले किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे। कृषि निर्यात को बढ़ावा देने और कृषि आयात को कम करने के लिए जरूरी नीतियां बनाने की बात भी भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में की है।

भाजपा ने घोषणापत्र में किसानों से यह वादा भी किया है कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि किफायती दरों पर बेहतर बीज किसानों को समय पर उपलब्ध हो सकें और घर के पास ही उनकी जांच की सुविधा उपलब्ध हो। तिलहन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के मकसद से भाजपा ने नए तिलहन मिशन की शुरुआत करने का वादा भी किया है।

इसके अलावा भाजपा ने पूरे देश में कृषि भंडारण की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए यह वादा किया है कि वह पूरे देश में वेयरहाउस का नेटवर्क विकसित करेगी। भाजपा ने इस संदर्भ में अपने संकल्प पत्र में कहा है, ‘किसानों को अपनी उपज का भंडारण अपने गांव के निकट करने तथा उचित समय पर उसे लाभकारी मूल्य पर बेचने के लिए सक्षम करने के उद्देश्य से हम कृषि उत्पादों के लिए नई ग्राम भंडारण योजना आरंभ करेंगे। हम कृषि उत्पादों की भंडारण रसीद के आधार पर किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराएंगे।’

भाजपा ने संकल्प पत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाने का वादा अपने घोषणापत्र में किया है। भाजपा ने वादा किया है कि अगले पांच सालों में वह पहाड़ी, आदिवासी एवं वर्षा सिंचिंत क्षेत्रा में 20 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन पर रसायन मुक्त जैविक खेती को प्रोत्साहित करेगी।

भाजपा ने अपतने घोषणापत्र में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन शुरू करने की बात भी कही है। साथ ही सिंचाई का मिशन मोड पर विस्तार करने का वादा भी भाजपा ने किया है। सहकारी संस्थाओं के प्रोत्साहन के साथ-साथ कृषि और प्रौद्योगिकी का मेल कराने की बात भी भाजपा ने अपने घोषणापत्र में की है।

भूमि रिकाॅर्ड का डिजिटलीकरण के साथ पशुपालन और मछली पालन के लिए भी कुछ वादे भाजपा ने अपने घोषणापत्र में किए हैं। लेकिन इन घोषणाओं को कैसे जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा, इस सवाल पर कोई संतोषजनक जवाब भाजपा घोषणापत्र जारी करते हुए पार्टी के शीर्ष नेताओं ने नहीं दिया।