मंगलवार, 07 फ़रवरी 2023
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करनाल में सरकार की हठधर्मिता और किसानों के हौसले का आमना-सामना, किसानों को रोकने के लिए लगाई पांच जिलों की पुलिस!


फोटो-एक्सप्रेस ग्रुप

करनाल के बसताड़ा में 28 अगस्त को किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में किसान आज करनाल के लघु सचिवालय का घेराव करेंगे. करनाल लघु सचिवालय के घेराव को लेकर किसान करनाल अनाज मंडी में इकट्ठा होंगे. लेकिन किसानों को अनाज मंडी पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने देर रात भारी बैरिकेडिंग की थी लेकिन आज सुबह पुलिस ने बैरिकेडिंग हटा दी है है. पुलिस का प्लान किसानों को शहर में प्रवेश करने से रोकने का था लेकिन अब किसानों को अनाज मंडी में जाने दिया जाएगा. .

किसानों को रोकने के लिए शहर में धारा-144 लगाई गई है. किसानों को लघु सचिवालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पैरामिल्ट्री फोर्स समेत सुरक्षाबलों की 40 कंपनियां लगाई गई हैं. वहीं पुलिस की 30 और पैरामिलिट्री फोर्स की 10 कंपनियां अलग से लगाई गई हैं साथ ही पांच एसपी और 25 डीएसपी स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है.

पुलिस ने लगभग पूरा शहर सील कर दिया है. शहर में करीबन 20 नाके लगाए गए हैं. जीटी रोड और शहर से लघु सचिवालय की ओर जाने वाले सभी रास्तों को बंद किया गया है. प्रशासन ने आम लोगों को करनाल सीमा से लगते नेशनल हाइवे के प्रयोग से मनाही की है. हर बार की तरह इस बार भी पुलिस ने रेत से भरे ट्रकों को नाकों पर लगाकर रास्ते बंद कर दिए हैं. 

करनाल समेत पांच जिलो में कल दोपहर से ही इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं बंद कर दी गई हैंं. करनाल के अलावा पानीपत, जींद, कुरुक्षेत्र और अंबाला में भी इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. कल करनाल प्रशासन और किसान नेताओं के बीच एक लंबी बैठक भी हुई थी लेकिन बैठक में कोई समाधान नहीं निकला.

इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने भी करनाल प्रदर्शन में शामिल होने की जानकारी देते हुए ट्वीट किया, “करनाल पुलिस की बर्बरता पूर्वक लाठी चार्ज में शहीद किया सुशील काजला को न्याय दिलाने हेतु संयुक्त किसान मोर्चा के साथियों सहित कुछ समय में करनाल पहुंच रहा हूं आप सभी करनाल पर नज़र बनाए रखें.”

28 अगस्त को हुए लाठीचार्ज के विरोध में किसानों ने 30 अगस्त को घरौंडा अनाज मंडी में एक दिन की कॉल पर किसान पंचायत की थी. घरौंडा अनाज मंडी की किसान पंचायत में ही 7 सिंतबर को करनाल लघु सचिवालय घेरने का एलान निर्णय लिया गया था.

घरौंडा किसान पंचायत में किसानों की ओर से मांग की गई थी कि किसानों पर लाठीचार्ज करने वाले सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए जाए. पुलिस लाठीचार्ज में मौत हुई किसान परिवार को 25 लाख और घायल किसानों को 2-2 लाख रुपये देने की मांग की थी. मांग नहीं माने जाने पर 7 सितंबर को करनाल लघु-सचिवालय के घेराव की चेतावनी दी थी.