खट्टर सरकार ने छीनी विमुक्त घुमंतू समुदाय के 40 लोगों की सरकारी नौकरी!

 

हरियाणा सरकार ने डिनोटिफाइड ट्राइब्स यानी विमुक्त घुमंतू जनजाति के अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों में मिलने वाले पांच अतिरिक्त अंकों का लाभ पहले ही बंद कर दिया है अब इससे आगे बढ़ते हुए सरकार ने विमुक्त घुमंतू समुदाय के अभ्यर्थियों को एक ओर झटका दिया है. सरकार ने 2020 से पहले विमुक्त घुमंतू समुदाय के जिन अभर्थियों को सरकारी नौकरियों में अतिरिक्त पांच अंकों का लाभ दिया था उसको वापस लेते हुए विमुक्त घुमंतू समुदाय के बच्चों को सरकारी नौकरी से हटाकर घर बैठा दिया है. 

मामला 2019 की विज्ञापन संख्या 05/2019 से जुड़ी क्लर्क भर्ती का है. क्लर्क भर्ती में चयनित हुए उम्मीदवारों को सितंबर 2020 में जोइनिंग करवाई गई थी. इस भर्ती में पांच अंकों का अतिरिक्त लाभ लेकर भर्ती हुए विमुक्त घुमंतू समुदाय के भी कुछ उम्मीदवार थे. ये लोग पिछले करीबन दो साल से राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे लेकिन सरकार ने भर्ती को रिवाइज करने के नाम पर डीएनटी समुदाय से आने वाले अभ्यर्थियों को दिए गए पांच अंक वापस लेकर चयनित उम्मीदवारों को नौकरी से हटा दिया है.

दरअसल इस भर्ती के अंतिम परिणाम को रिवाइज करने का सिलसिला परीक्षापत्र की आंसर-की पर उठे सवाल से शुरू हुआ था. हरियाणा स्टाफ स्लेक्शन कमीशन की ओर से क्लर्क भर्ती की परीक्षापत्र की आंसर-की में तीन सवालों के जवाब गलत दिए गए थे जिसको लेकर कुछ अभ्यर्थी कोर्ट चले गए और कोर्ट ने भर्ती के परिणाम को दोबारा रिवाइज करने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने अपने आदेश में विमुक्त घुमंतू समूह के अभ्यर्थियों को दिए गए पांच अतिरिक्त अंकों के लाभ पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन इसके बावजूद हरियाणा सरकार ने डीएनटी समूह के अभ्यर्थियों को दिए गए पांच नंबर वापस लेकर करीबन 40 अभ्यर्थियों को नौकरी से हटा दिया है. 

नौकरी से भारमुक्त किये जाने का नोटिस

इसको लेकर नौकरी से हटाए गये सभी क्लर्क मानसिक तनाव में हैं. नाम न बताने की शर्त पर एक कर्मी ने बताया, “कईं ऐसे भी कर्मचारी हैं जिन्होंने अन्य नौकरी छोड़कर क्लर्क की नौकरी ज्वाइन की थी. साथ ही कुछ ऐसे भी साथी हैं जिनके पूरे परिवार की जीविका का साधन केवल यह नौकरी ही थी और कुछ ऐसे भी साथी हैं जिनके पूरे परिवार में पहली सरकारी नौकरी लगी थी.”

वहीं क्लर्क की नौकरी से हटाए गए एक और अभ्यर्थी ने बताया, “समाज के सबसे नीचने पायदान पर खड़े विमुक्त घुमंतू समाज के बच्चों को सरकारी नौकरियों में लाने की सरकार की एक अच्छी पहल थी लेकिन यह हमारे साथ धोखा हुआ है. एक तो सरकार ने विमुक्त घुमंतू समाज के बच्चों को आने वाली भर्तियों में मिलने वाले पांच अतिरिक्त अंक बंद कर दिये हैं ऊपर से हमारी लगी लगाई पक्की नौकरी छीन ली. सरकार ने हमारे डीएनटी समाज के साथ धोखा किया है.”

डीएनटी समूह के अभर्थियों को दिये गए 5 नंबर

हरियाणा में करीबन 20 लाख की आबादी वाले डीएनटी समूह को लेकर सरकार ने इससे पहले भी अनेक वादे किये हैं लेकिन आज तक एक भी वाद पूरा नहीं किया गया है. वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने विमुक्त घुमंतू जातियों के बीच सरकारी नौकरियों में अतिरिक्त पांच अंकों का लाभ देने के वादे के साथ प्रचार-प्रसार किया था लेकिन चुनाव के बाद स्थिति यह है कि इसी समुदाय के करीबन 40 बच्चों को नौकरी से हटाकर घर बैठा दिया है.

वहीं इस मामले को लीड कर रहे और नौकरी से हटाए गए कर्मी ने बताया, “कोर्ट की ओर से क्लर्क भर्ती की रि-इवेल्युएशन के आदेश थे न कि भर्ती की एक्सरसाइज के लेकिन सरकार की ओर से इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की रि-इवेल्युएशन करने की बजाए री-एक्सरसाइज कर दी गई है.” 

हरियाणा सरकार द्वारा डीएनटी बोर्ड बनाया गया है. डीएनटी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ बलवान सिंह ने इस मामले पर कहा, “यह मामला हमारे संज्ञान में है और हम इस मसले पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात करके अपनी बात रखेंगे.”