शनिवार, 04 फ़रवरी 2023
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महाराष्ट्र: मराठवाडा में गहराया कृषि संकट, 8 महीने में 600 किसानों ने की आत्महत्या!



आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र के मराठवाडा क्षेत्र में 1 जनवरी 2022 और मध्य अगस्त के बीच लगभग 600 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. किसान कार्यकर्ताओं ने मौतों का कारण सरकार की नीतियों को बताया है.

आए दिन किसानों की आत्महत्या कि खबर पढ़ने और सुनने को मिलती है. तमाम प्रयासों और कोशिशों के बाद भी किसानों की आत्महत्या की सिलसिला नहीं रुक रहा है. 8 महीने में करीब 600 किसानों ने की आत्महत्या क्या मराठवाडा कृषि संकट का सामना कर रहा है. किसान संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मानना है कि मौसम की घटनाओं की बजाय किसानों की स्थिति के लिए सरकार की नीतियां ज्यादा जिम्मेदार हैं.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र के मराठवाडा क्षेत्र में 1 जनवरी 2022 और मध्य अगस्त के बीच लगभग 600 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. संभागीय आयुक्त कार्यालय औरंगाबाद से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से जुलाई तक लगभग 547 किसानों ने आत्महत्या की. तालुका कार्यालयों के अनुसार अकेले अगस्त में 37 मौतें दर्ज की गई. औरंगाबाद डिवीजन जिसमें अधिकांश मराठवाड़ा क्षेत्र शामिल है ने 2021 में 12 महीनों में 805 किसानों की आत्महत्या दर्ज की थी.

किसानों की आत्महत्या की एक वजह जुलाई में हुई बारिश के कारण लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को पहुंचे नुकसान को भी माना जा रहा है. 11 और 12 जुलाई को हुई ज्यादा बारिश ने मराठवाड़ा के 24 जिलों में एक लाख से अधिक किसानों को प्रभावित किया. जिससे मक्का, सोयाबीन धान, कपास और केले की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा.

डाउन-टू-अर्थ में छपी रिपोर्ट के अनुसार नांदेड़ जिले के टांडा गांव के अंकुश राठौड़ ने 5 अगस्त 2022 की रात करीब 10:30 बजे अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. वहीं अंकुश के रिश्तेदार मधुकर जाधव ने बताया, “मेरे जीजा के पास 4.5 एकड़ जमीन थी और उन्होंने इस मानसून में कपास की बुवाई की थी. ज्यादा बारिश से फसल को भारी नुकसान हुआ जिसके बाद 28 वर्षीय अंकुश तनाव में चला गया इस बीच उसने कई बार अपनी जीवन लीला समाप्त करने की बात कही क्योंकि वह बुवाई का खर्च वहन नहीं कर सकता था. अंकुश पर पहले से ही 2 लाख रुपए का कर्ज था और वह इस बात को जानता था कि वह यह कर्ज चुकाने में असमर्थ है.” साथ ही जाधव ने बताया, “मंहगाई के कारण लगातार बढ़ रही खाद्य कीमतों और खेती की लागत ने उनका मनोबल गिर गया था. अंकुश अपने परिवार को खिलाने के लिए चिंतित था क्योंकि उसके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं था. इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया.”