गुरुवार, 09 फ़रवरी 2023
खेत-खलिहान

भाव गिरने से घाटे का सौदा साबित हुई टमाटर की खेती!



किसानों का कहना है कि टमाटर के दाम गिरने से खेती पर किया गया खर्च भी पूरा नहीं हो रहा है. दाम घटने की वजह से टमाटर की खेती अब किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है.

टमाटर के दामों मे अचानक से भारी गिरावट ने किसानों को परेशान कर दिया है. बुधवार को टमाटर के दाम 4 रुपए से10 रूपए किलो मिले. टमाटर की कीमत गिरने की एक वजह देश की मंडियो मे बंगलूरू और महाराष्ट्र से आ रहे टमाटर को भी माना जा रहा है.
सेब के दाम गिरने से पहले ही हिमाचल और कश्मीर के किसान परेशानी का सामना कर रहे हैं. अब टमाटर के दाम गिरने से किसान और भी हताश नजर आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि टमाटर के दाम गिरने से खेती पर किया गया खर्च भी पूरा नहीं हो रहा है. दाम घटने की वजह से टमाटर की खेती अब किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है.

एपीएमसी के सचिव सुशील गुलेरिया ने बताया कि सब्जी मंडी में चार से 10 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से टमाटर बिका है. दक्षिण भारत का टमाटर देश की विभिन्न मंडियों में आने से कीमतों में गिरावट आई है. किसानों ने बताया कि दाम कम मिलने से खेती का खर्च पूरा नहीं हो रहा है. एक बीघा जमीन पर दवाई, खाद, बीज और तार लगाने का खर्च करीब 20 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. अगर टमाटर 20 रुपये किलो से कम कीमत पर बिकता है तो खेती का खर्च भी पूरा नहीं हो पाता है. सरकार को टमाटर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करना चाहिए. इससे मंडियों में दाम स्थिर रहेंगे. साथ ही दवाइयों और खाद पर भी सब्सिडी दी जानी चाहिए.