सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
गांव-देहात

खोरी गांव में मजदूरों के घर ढहाए जाने पर बरसे किसान नेता, खोरी में पंचायत करने का किया एलान



“क्या खोरी गांव की उसी जमीन पर जंगल बनाना जरूरी है जहां पिछले 50 साल से लोग रह रहे हैं, क्या खाली पड़ी जमीनों पर जंगल नहीं बनाए जा सकते, जब कॉलोनी काटी जा रही थी, लोग अपने मकान बना रहे थे तब सरकार और प्रशासन कहां था.”

फरीदाबाद के सुरजकुंड से सटी अरावली की पहाड़ियों के पास बसे खोरी गांव के 10 हजार मजदूर परिवारों के घर उजड़ने की कगार पर हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन इन घरों को हटाने की जुगत में है. घर गिराए जाने के नोटिस से परेशान खोरी गांव के लोग किसान आंदोलन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी के पास पहुंचे. गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इन परिवारों का साथ देने की बात कही. किसान नेता चढ़ूनी ने गरीब परिवारों के घर ढहाए जाने के फरमान के खिलाफ खोरी गांव में पंचायत बुलाने का एलान किया. साथ ही किसान नेता चढूनी ने पूरे हरियाणा और देश की जनता से खोरी गांव के लोगों का साथ देने की भी अपील की.   

खोरी गांव में मजदूरों के घर ढहाए जाने के आदेश पर गुरनाम सिंह चढूनी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “क्या खोरी गांव की उसी जमीन पर जंगल बनाना जरूरी है जहां पिछले कईं दशकों से लोग रह रहे हैं, क्या खाली पड़ी जमीनों पर जंगल नहीं बनाए जा सकते, जब कॉलोनी काटी जा रही थी, लोग अपने मकान बना रहे थे तब सरकार और प्रशासन कहां था.”

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “जहां लोग रह रहे हैं उनको वहां से उजाड़कर उसी जगह पर पेड़ लगाना कौन-सा कानून है. सरकार को हमारी चेतावनी है कि इन लोगों को वहां से न हटाया जाए. अगर हटाना है तो सरकार पहले इन लोगों को दूसरी जगह मकान बनाकर दिए जाएं वरना इन परिवारों को हटाने का कोई मतलब नहीं बनता है.

अगर खोरी गांव के लोगों के साथ छेड़छाड़ की गई तो इन एक लाख लोगों को भी कुंडली बॉर्डर जारी किसानों के धरने पर लेकर आएंगे. कुंडली बॉर्डर पर ही इन लोगों की खाने-पीने और रहने की व्यवस्था होगी और खोरी गांव के लाखों लोग भी हमारे साथ धरने में शामिल होंगे.     

बता दें कि इन घरों को हटाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गाँव के वन विभाग की ज़मीन पर गैर क़ानूनी तरीके से बसे होने की दलील दी है. कई सामाजिक संगठनों ने मिलकर इस मामले में पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी मगर सुप्रीम कोर्ट ने उसको खारिज करते हुए 6 हफ्तों के भीतर प्रशासन को गाँव खाली करवाए जाने के आदेश दिया है.