सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
गांव-देहात

विधायक के गांव में गिरा मकान, मदद न मिलने पर हताश परिवार के मुखिया ने की आत्महत्या!



एक बुजुर्ग पड़ोसी ने बताया,"मकान गिरने के बाद विधायक ने आश्वासन दिया था कि वो मकान देखने आएंगे लेकिन न तो विधायक आए और न ही प्रशासन के लोग. अगर प्रशासन के लोग आकर कुछ आर्थिक मदद कर जाते तो यह घटना न घटती"

करनाल से महज 12 किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे-44 पर गांव कुटेल के रहने वाले एक गरीब परिवार पर उस वक्त मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, जब परिवार के मुखिया ने बारिश के कारण मकान गिरने और गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर ली. मृतक नरेश कुमार का मकान 15 सितंबर को दिनभर चली भारी बारिश के कारण रात करीबन 11 बजे ढह गया. मकान गिरने से पूरा परिवार परेशान था. 21 सितंबर तक यानी नरेश की आत्महत्या के दिन तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित परिवार की मदद के लिए गांव नहीं आया.

15 सितंबर से परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है. परिवार के मुखिया की मौत का मातम मनाने के लिए लोगों को पड़ोसियों के घर बैठना पड़ रहा है. कुटेल, घरौंडा विधानसभा से बीजेपी विधायक हरविंदर कल्याण का गांव है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल के राजनीतिक क्षेत्र और विधायक का गांव होने के बावजूद भी इस पीड़ित परिवार की कोई मदद नहीं हुई. 


मकान गिरने के बाद गांव के कुछ लोग विधायक और सरपंच के पास मदद के लिए गए थे लेकिन मकान गिरने और नरेश की आत्महत्या की घटना के बीच के पांच दिन तक पीड़ित परिवार की कोई मदद नहीं की गई. शासन-प्रशासन की ओर से निराशा हाथ लगने और गरीबी से तंग आकर नरेश ने आधे गिरे मकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.  

38 वर्षीय नरेश गांव में ही दिहाड़ी-मजदूरी करके अपने परिवार का गुजारा चलाता था. मृतक नरेश की पत्नी सोमवती ने बताया कि वो भी गांव की महिलाओं के साथ मिलकर दिहाड़ी-मजदूरी करती हैं. नरेश के चले जाने के बाद सोमवती के साथ अब परिवार में केवल एक तीन साल का बच्चा है.  

अपने ताऊ के साथ तीन साल का अंश (मृतक का बेटा)

घर में करीबन दस-बाई-दस का केवल एक ही कमरा था जिसमें पूरा परिवार रहता था. 15 सिंतबर को दिनभर चली भारी बारिश के कारण कुटेल में रात को दो मकान गिरे थे. दूसरा मकान मृतक नरेश के बड़े भाई राजेश का है. बराबर के दो मकान गिरने से तीसरे भाई शमशेर के घर में भी दरारें आई हैं. नरेश और उसके दोनों बड़े भाईयों का मकान एक साथ है. इन तीनों मकानों के पीछे खेत हैं. खेत में पानी होने के कारण मकान की नींव में पानी भर गया था जिसके चलते तेज बारिश में मकान ढह गया और घर का सारा सामान मलबे में दब गया.   

मृतक नरेश के बड़े भाई शमशेर ने बताया “रात करीबन 11 बजे मकान ढहने से कुछ देर पहले बड़ी बेटी को बाहर कुछ गिरने की आवाज सुनाई दी. बेटी ने सबको जगाया और फिर हम सब घर से बाहर निकल गए. थोड़ी देर बाद हमारी आंखों के सामने मकान ढह गया. अगर बेटी सबको न जगाती तो बड़ा हादसा हो सकता था.”

वहीं पड़ोस की एक महिला ने बताया, “ये लोग बहुत दिनों से पक्के मकान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे. पक्का मकान बनवाने के लिये सरपंच से लेकर एमएलए और सरकारी अफसरों के पास धक्के खाए लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की. इऩके न तो गरीबी रेखा से नीचे वाले राशन कार्ड बने और न मकान”

वहीं एक बुजुर्ग पड़ोसी ने बताया,”मकान गिरने के बाद विधायक ने आश्वासन दिया था कि वो मकान देखने आएंगे लेकिन न तो विधायक आए और न ही प्रशासन के लोग. अगर प्रशासन के लोग कुछ आर्थिक मदद कर जाते तो यह घटना न घटती”

बीजेपी विधायक के गांव की यह घटना प्रधानमंत्री मोदी की पीएम आवास योजना और सीएम मनोहर लाल खट्टर के विकास के दावों की पोल खोल रही है.

वहीं ‘ग्रामीण भारत न्यूज’ के नाम से यू ट्यूब चैनल चलाने वाले पत्रकार सुलेख तंवर ने 15 सितंबर को सबसे पहले मकान गिरने की घटना की कवरेज की थी. पत्रकार सुलेख ने बताया, “इस घटना को लेकर मैनें कई स्थानीय यू ट्यूब चैनल चलाने वाले मीडिया कर्मियों को भी बताया लेकिन किसी ने इस खबर पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया इसकी वजह शायद रही हो कि यह खबर उन्के मतलब की नहीं थी. हां, परिवार के मुखिया द्वारा आत्महत्या करने के बाद मीडिया भी आया और मीडिया में खबर चलने के बाद प्रशासन और विधायक के लोग भी.

मकान गिरने के बाद विधायक और प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं की गई लेकिन नरेश की आत्महत्या की खबर ने सबका ध्यान खींचा. स्थानीय मीडिया मे किरकिरी होते देख विधायक की ओर से उनके भाई और प्रशासन के लोग मृतक के घर पहुंचे.

गांव की ही एक महिला ने कहा, “हमारे हल्के का एमएलए हमारे ही गांव का है. कम-से-कम उसको तो एक बार आना ही चाहिये था. मकान गिरने के बाद इस परिवार की कोई मदद नहीं की गई.”

वहीं मदद के नाम पर गांव के सरपंच ने कहा,”आत्महत्या के एक दिन पहले मैंने उनको कहा था कि जहां भी मेरी जरुरत होगी, मैं साथ खड़ा हूं.अलगे दिन सब मिलकर विधायक के पास भी जाने वाले थे लेकिन उसी रात यह हादसा हो गया बाकि अब तो ग्राम पंचायतें भी भंग हैं. हमारे हाथ में भी कोई पावर नहीं है. हमसे जितना बन सकता है हम मदद कर रहे हैं”

मधुबन पुलिस स्टेशन के एसएचओ ने बताया, “गरीब परिवार था. परिवार का मुखिया बारिश के कारण मकान गिरने से परेशान था. जिसके चलते उसने आत्महत्या की. पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में सामने आया है कि मौत फांसी लेने से हुई है.”
 
विधायक के पीए प्रवीण कुमार ने बताया,”विधायक के भाई पीड़ित परिवार से मिलने घर गए थे. हम परिवार की मदद कर रहे हैं. मकान को फिर से बनाने के लिये मिस्त्री लगाए हैं.” वहीं मकान गिरने के बाद मदद न होने के सवाल पर विधायक की ओर से बयान आया, “हम लोगों ने नरेश और उसके साथ मदद के लिए आए लोगों से कहा था कि अपने कागजात देकर जाए. संबंधित अधिकारी को बोलकर मुआवजा दिलाया जाएगा. लेकिन अगले दिन उसने आत्महत्या कर ली.”     

वहीं इस मामले पर करनाल उपायुक्त से बात करने की कोशिश की गई तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला.