सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतों के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाएं, सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन!


गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएं

"2015 में रसोई गैस पर प्रति किलोग्राम 29 रुपये सब्सिडी थी जो अब तीन रुपये से भी कम रह गई है. यह भी कभी मिलती है कभी नहीं. रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी और इस पर सब्सिडी खत्म किए जाने से उज्ज्वला योजना विफल हो चुकी है."

समतामूलक महिला संगठन एवं जन संघर्ष मंच हरियाणा ने केन्द्र सरकार द्वारा रसोई गैस की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ गोहाना शहर में प्रदर्शन किया. घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 25 रुपये 50 पैसे बढ़ाया गया है. 25.50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद रसोई गैस सिलेंडर का दाम 809.00 रु से बढ़कर 834.50 रुपये हो गया है. वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर का दाम 84 रुपये बढ़ाकर 1,488 रुपये से 1,572 रुपये कर दिया गया है.

बता दें कि रसोई गैस की कीमतों में पिछले आठ महीनों में 240 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. पिछले सात सालों में रसोई गैस की कीमतों में दोगुना से ज्यादा बढ़ोतरी की गई है. मार्च 2014 में 410.50 रु में मिलने वाला एलपीजी सिलेंडर अब 834.50 रुपये में मिल रहा है.

समतामूलक महिला संगठन की अध्यक्षा डॉ. सुनीता त्यागी ने कहा, “2015 में रसोई गैस पर प्रति किलोग्राम 29 रुपये सब्सिडी थी जो अब तीन रुपये से भी कम रह गई है. यह भी कभी मिलती है कभी नहीं. रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी और इस पर सब्सिडी खत्म किए जाने से उज्ज्वला योजना विफल हो चुकी है. जिसके चलते लोगों ने एलपीजी सिलेंडर प्रयोग करना बन्द कर दिया है.”

जन संघर्ष मंच हरियाणा के नरेश विरोधिया ने कहा,”कोरोना महामारी के चलते बेरोजदारी के दौर में जनता को केन्द्र सरकार से उम्मीद थी कि वह रसोई गैस के दाम में कमी करके रसोई खर्च में राहत देगी लेकिन तेल व रसोई गैस के मालिक अम्बानी सरीखे मुट्ठीभर कॉरपोरेट घरानों की पिट्ठू केन्द्र सरकार ने रसोई गैस के दाम में अनाप-शनाप वृद्धि कर देशवासियों को मौत के मुंह में धकेलने का काम किया है.”