शनिवार, 04 फ़रवरी 2023
गांव-देहात

गाँवों में डाला जा रहा हांसी शहर का कूड़ा, बीमारियां फैलने के चलते ग्रामीण सड़कों पर  



यह डम्पिंग स्टेशन बीड़ गांव के बिलकुल साथ बनाया गया है. पूरे हांसी शहर का कूड़ा यहाँ पर डाला जा रहा है. जिस जगह पर इसे बनाया गया है वहाँ पर पहले दो गांवों का जोहड़ होता था. इस जोहड़ की जगह पर अब कूड़े का बहुत बड़ा ढेर हो गया है. इसके साथ ही तीनों गांवों का शमसान घाट है. शमसान घाट के बीच में भी प्रशासन ने कूड़ा डालना शुरू कर दिया जिसकी वजह से शमसान घाट की जगह भी कम होनी शुरू हो गई.

हिसार के हांसी तहसील के तीन गांव बीड फार्म, ढाणी पाल और राजीव के ग्रामीण 26 अप्रैल से धरने पर बैठे हुए हैं. थाइराइड, सांस की बीमारी(अस्थमा), और टीबी जैसी बीमारी गांवों में फैलने लगी है. एलर्जी की समस्या बढ़ती जा रही है. गांव वालों की माने तो इसका कारण गांवों के पास बनाया गया डम्पिंग स्टेशन है. यह डम्पिंग स्टेशन 2019 में बनाया गया था. तभी से ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं. विरोध करने के कारण ग्रामीणों की गिरफ्तारी भी हुई है.

यह डम्पिंग स्टेशन बीड़ गांव के बिलकुल साथ बनाया गया है. पूरे हांसी शहर का कूड़ा यहाँ पर डाला जा रहा है. जिस जगह पर इसे बनाया गया है वहाँ पर पहले दो गांवों का जोहड़ होता था. इस जोहड़ की जगह पर अब कूड़े का बहुत बड़ा ढेर हो गया है. इसके साथ ही तीनों गांवों का शमसान घाट है. शमसान घाट के बीच में भी प्रशासन ने कूड़ा डालना शुरू कर दिया जिसकी वजह से शमसान घाट की जगह भी कम होनी शुरू हो गई.

2019 से अब तक लगातार ग्रामीण इस डम्पिंग स्टेशन का विरोध कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब विरोध करते हैं तो दो तीन दिन प्रशासन कूड़ा नहीं डालता है लेकिन दो तीन दिन बाद फिर से डालने लगता हैं. जब प्रशासन से इस बारे में करने जाते तो प्रशासन की तरफ से जवाब आता था कि यह डम्पिंग स्टेशन स्थायी नहीं है बल्कि कुछ समय के लिए लगाया गया है. कुछ समय बाद इसे यहाँ से कहीं ओर शिफ्ट कर दिया जाएगा. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें सिर्फ झूठ बोलता रहा और देखते देखते यहाँ कूड़े का ढेर लग गया.

डम्पिंग स्टेशन की न तो कोई चारदीवारी की गई है न ही कोई गड्ढा खोदा गया. बिना किसी प्रबंधन वजह से अब गांवों में बीमारियाँ फैलने लगी हैं. गांवों में मक्खियाँ पहले से ज्यादा होने लगी हैं. कचरे के ढेर में आग लगी रहती है जिससे पास में जो खेत हैं उनमें फसलों में आग लगने का भी डर बना रहता है.

गांव में लगा कूड़े का ढेर

जब प्रशासन की तरफ से कोई स्थायी समाधान नहीं निकला तो ग्रामीण हारकर 26 अप्रैल 2022 को स्थायी धरने पर बैठ गए. अभी तक ग्रामीण धरने पर बैठे हुए हैं.

ग्रामीणों को अलग अलग राजनीतिक पार्टियों से भी समर्थन मिला है. कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दीपेंदर हूड्डा भी अपने पार्टी नेताओं तेलु राम जांगड़ा, कमलेश रंगा, सुमन शर्मा आदि सहित में धरनास्थल पर पहूंचे थे. सीपीएम के रामअवतार सुलचाना, आम आदमी पार्टी से मनोज राठी भी समर्थन में पहूंचे थे. बीच बीच में प्रशासन की तरफ से तहसीलदार और एसडीएम भी धरने पर बैठे लोगों से मिले हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला गया.   

प्रशासन समाधान के लिए समय मांगता रहा और ग्रामीण कहते रहे कि तीन साल से समय ही तो दे रहे थे.

4 मई को ग्रामीण इकट्ठे होकर हांसी के विधायक विनोद भयाना के घर का घेराव करने के लिए भी गए थे. विधायक आवास पर नहीं थे. बताया गया कि विधायक चंडीगढ़ गए हुए हैं. उनके परिवार का कोई सदस्य भी आवास पर नहीं था. धरना प्रदर्शन के दौरान लोगों ने माइक के माध्यम से विधायक के प्रति रोष जताया और जमकर नारेबाजी की. लोगों का कहना था कि वह चेतावनी देने के लिए आए हैं कि 6 मई को केबिनेट मीटिंग में यदि डंपिंग स्टेशन को हटाने का प्रस्ताव न रखा गया तो वह अगले दिन विधायक के घर के बाहर कचरा फेंकेंगे. साथ ही घर के बाहर बैठकर उपले सुलगाएंगे.

6 मई को डम्पिंग स्टेशन वहाँ से कहीं ओर शिफ्ट करना तय हो गया था लेकिन प्रशासन अभी भी 15 अगस्त तक का समय मांग रहा है.

प्रशासन का कहना है कि पास के सरकारी कृषि फार्म में 17 एकड़ जमीन डम्पिंग स्टेशन के लिए लेनी है जिसमें समय लगेगा. उधर ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कूड़े का यह ढेर कहीं ओर शिफ्ट नहीं हो जाता वो धरने से नहीं उठेंगे.