सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
राजनीति

मोदी और शाह ने सावरकर की टू नेशन थ्योरी पर अमल कर भारत को विभाजन की आग में झोंक दिया है


Chaibasa: Prime Minister Narendra Modi gestures as he addresses during an election rally for the Lok Sabha polls, at Chaibasa, in Jharkhand, Monday, May 6, 2019. (PTI Photo)(PTI5_6_2019_000258B)

आज़ाद भारत में आज यह जो हो रहा है, यह जरूर भारत को धर्म के सहारे विभाजित करने की कोशिश है। इससे अंग्रेजों की वह मनहूस भविष्यवाणी भी सच हो सकती है।

धर्म के आधार पर नागरिकता का प्रावधान संविधान की मूल आत्मा पर हमला है। पहली बार देश की सरकार ने अपने एक काले कानून को बचाने के लिए सफेद झूठ बोला कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया था।

टू नेशन थ्योरी सावरकर की थी। जिन्ना ने इस पर अमल किया। देश का धार्मिक आधार पर विभाजन जिन्ना ने कराया, अंग्रेजों ने उनकी मदद करके इसे हवा दी। जिन्ना से पहले हिन्दू कट्टरपंथियों ने ही आग लगाई थी कि भारत को हिन्दू राष्ट्र होना चाहिए। लेकिन हिन्दू कट्टरपंथी पूरे इतिहास में अंग्रेजों के मुखबिर से ज्यादा कोई भूमिका नहीं निभा सके। दंगा कराने में जरूर बढ़ चढ़ कर आगे रहे।

भारत सरकार एक ऐसा कानून बना रही है जिसके बारे में पहले से मालूम है कि यह असंवैधानिक है और कोर्ट इसे रद्द कर देगा. फिर भी सरकार संविधान के विरुद्ध यह काम क्यों कर रही है? भारत की सरकार, भारत के संविधान के ही विरुद्ध काम क्यों कर रही है?

क्योंकि यह बिल पास हुआ तो हिंदू मुस्लिम विभाजन का भाजपा सौ बरस पुराना एजेंडा कामयाब हो जाएगा. अगर बिल पास नहीं हुआ, या रद्द हो गया तो इसी आधार पर हिंदू मुस्लिम मुद्दे पर वे चुनाव लड़ेंगे. आखिर राम मंदिर का मुद्दा सुलझ गया. अर्थव्यवस्था ढह चुकी है और विकास का तेल निकल चुका है. अगला चुनाव किस मुद्दे पर लड़ेंगे? इनके चुनाव जीतने की कीमत आप चुकाएंगे. वे हिंदू मुस्लिम को आपस में लड़ाते रहे हैं, आगे भी लड़ाएंगे.

मार्कंडेय काटजू ने ठीक कहा था कि भारत की 90 प्रतिशत जनता के दिमाग में भूसा भरा है. 6 साल की आर्थिक बर्बादी में देश 50 साल पीछे चला गया है लेकिन भक्त अभी भी नशे में हैं. यह देश गुलामी और विभाजन ही डिजर्व करता है, क्योंकि लोग अपनी प्रवृत्ति से गुलाम हैं.

इस विधेयक का विरोध क्यों जरूरी?

इस विधेयक का विरोध इसलिए नहीं करना चाहिए कि यह मुसलमानों के साथ अन्याय करता है. इस विधेयक का विरोध इसलिए करना चाहिए ​क्योंकि यह बिल 50 साल तक लड़ी गई आजादी की लड़ाई और 72 साल में निर्मित हुए देश के साथ गद्दारी करता है.

यह बिल महात्मा गांधी, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे अमर योद्धाओं के साथ गद्दारी करता है. यह बिल उस बहादुरशाह जफर के साथ गद्दारी करता है जिसने अपनी आंखों के सामने अपने बेटों का सिर दे दिया था और खुद रंगून में दफन हो गया.

यह बिल बेगम हज़रत महल से लेकर बदरुद्दीन तैयबजी, नवाब बहादुर, दादा भाई नैरोजी, सैयद हसन इमाम, अब्दुल गफ्फार खान, मोहम्मद अली जौहर से लेकर गांधी, नेहरू, सुभाष और पटेल तक से गद्दारी करता है.

यह नेहरू और पटेल जैसे योद्धाओं के साथ धोखा है जिन्होंने अपनी लगभग जिंदगी अंग्रेजों से लड़ने में बिता दी और बची जिंदगी में अपनी मजबूत अस्थियां लगाकर भारत की ​बुनियाद रखी. यह पटेल के उस सपने पर हमला है जिसके तहत वे कहते थे कि ‘हम एक सच्चे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए प्रतिबद्ध हैं क्योंकि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र ही सभ्य हो सकता है. यह बिल उन हजारों लाखों हिंदुओं और मुसलमानों के साथ गद्दारी करता है जिन्होंने साथ में लड़कर इस देश को आजाद कराया. यह बिल हमारे पुरखों के सपनों के भारत को बदलना चाहता है.

यह बिल स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के साथ, हमारे संविधान पर हमला करता है. यह बिल हमारे सेकुलर, लोकतांत्रिक गणराज्य को एक कठमुल्ला तंत्र में बदलने की घोषणा है. यह हमारी 140 करोड़ जनता को दो हिस्सों में बांटने का षडयंत्र रच रहा है. यह हमें स्वीकार नहीं करना चाहिए.

यह उनके द्वारा किया जा रहा है जिनपर गांधी को मार डालने का आरोप लगा. यह वे कर रहे हैं जिनपर भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत का मजाक उड़ाने का आरोप है. यह वे कर रहे हैं जो भारत के संविधान और भारतीय तिरंगे के विरोध में थे. यह वे कर रहे हैं जो ​आजादी आंदोलन से दूर हिंदू राष्ट्र मांग रहे थे, जिन्ना की तारीफ कर रहे थे और भारतीय शहीदों के​ खिलाफ अंग्रेजों की मु​खबिरी कर रहे थे.

जब कुर्बानी देनी थी, तब मु​खबिरी कर रहे थे. जब कुर्बानी देनी थी तब हिंदू मुस्लिम कर रहे थे, गांधी की हत्या करवा के मिठाई बांट रहे थे. अब जब आजादी को 70 साल हो गए हैं तो संसद में जबरन कुर्बानी का पाठ पढ़ा रहे हैं और देश पर कुर्बान हुए लोगों का अपमान कर रहे हैं.

सबसे बड़ी बात है कि इनकी नीयत ठीक नहीं है. ये अब भी हिंदू राष्ट्र का राग अलाप रहे हैं, जो अंतत: हिंदुओं के लिए ही दु:स्वप्न साबित होगा.

यह किसी हिंदू और मुसलमान का मुद्दा नहीं है. यह एक उदार लोकतंत्र को बचाने का मामला है. अगर बीजेपी यह बिल लाने में सफल हुई तो यह हर भारतीय की हार होगी. इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी.

असम में बीजेपी नेताओं को जनता ने दौड़ाकर पीटा

अब यही होना बाकी था कि विधायक और सांसद को जनता दौड़ाकर पीटे. गुवाहाटी में नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है. बीजेपी के असम अध्यक्ष रंजीत दास जा रहे थे. उनके काफिले में मंत्री नाबा कुमार और सिद्धार्थ भट्टाचार्य भी थे. एक फ्लाईओवर पर पहुंचे थे, कि प्रदर्शनकारी पब्लिक ने दौड़ा लिया. उनके काफिले पर ईंट पत्थरों और डंडों से हमला कर दिया और प्रदर्शनकारियों ने काफिले को वापस लौटा दिया.

थोड़ी देर बाद उसी रास्ते पर विधायक रमाकांत देवरी गुजरे. पब्लिक उनके लिए रामाधीर सिंह बन गई. जैसे रामाधीर सिंह ने अपने विधायक बेटे को कूट दिया था, उसी तरह पब्लिक ने विधायक जी को वापस ही नहीं लौटाया, इलाके से बाहर खदेड़ दिया. खबर है कि गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर मुकेश अग्रवाल के काफिले पर भी पब्लिक ने अटैक कर दिया.

यह कोई मजा लेने की बात नहीं है. सांसद, विधायक, पुलिस अधिकारी वे लोग होते हैं, जनता जिनके नाम से डरती है. अब आपने जनता को इतना डरा दिया कि उसके मन से डर निकल गया है. अगर किसी की नागरिकता पर ही संकट हो, तब उसके पास खोने के लिए क्या बचा है सरकार? अब भी वक्त है, समझ जाइए.

देश की जनता को विभाजन की आग में झोंकेंगे तो हाथ तो आपके भी झुलसेंगे. हो सकता है ​कि झुलसता हुआ पीड़ित अपने को बचाने के लिए छटपटाते हुए सामने पाकर आपसे और हमसे लिपट जाए, तब हम आप पूरा स्वाहा हो जाएंगे.

असम बंद

पूरा असम बंद है. स्कूल, कॉलेज, दुकानें, बाजार सब बंद हैं. परीक्षाएं रद्द कर दी गई ​हैं. जगह जगह प्रदर्शनों में आगजनी की घटनाएं हुई हैं. रेलवे ट्रैक जाम कर दिए गए हैं. ट्रेनें रोक दी गई हैं. गुवाहाटी विश्वविद्यालय, कॉटन यूनिवर्सिटी और असम कृषि विश्वविद्यालय के छात्र सड़कों पर हैं. जगह जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों में झड़पें हुई हैं.

पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से प्रदर्शन की खबरें हैं. डिब्रूगढ़, गुवाहाटी, जोरहाट में आगजनी के साथ हिंसक प्रदर्शन की खबरें हैं. त्रिपुरा से भी हिंसक प्रदर्शन और आगजनी की खबरें हैं. अगरतला में लोग सड़कों पर उतरे हैं. पूर्वोत्तर के लोग कह रहे हैं कि हमारी जमीनें शरणार्थियों के लिए नहीं हैं.

समस्या थी स्थानीय लोगों के संसाधनों में बाहर से आए लोगों की दावेदारी. लेकिन सरकार नागरिकों की समस्या से अलग अपनी सांप्रदायिक कुंठा को देश पर थोप रही है. पूरे देश को हिंदू मुस्लिम विभाजन में धकेला जा रहा है.

पूर्वोत्तर के राज्यों के अलावा दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि हर राज्य में छोटे मोटे प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन सरकार नागरिकों को सुने बगैर अपनी सनक में आगे बढ़ रही है. मीडिया इस सनक को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बोलकर हवा दे रहा है.

देश की भावना वह है जो सड़कों पर दिख रही है. देश की इकॉनमी वैसे भी डूब रही है. लोटा थारी बिकने के कगार पर है. खजाना चोरों, लुटेरों ने मिलकर खाली कर दिया है. बीजेपी से अपील है कि इस देश को हिंदू मुस्लिम झोंकने की जगह जितना लूट सकें लूट लें और चलते बनें. देश को दशकों के लिए आग में झोंक कर उन्हें क्या मिलेगा?

भारत धर्म के नाम पर नहीं बना था

“मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है. हम सिर्फ़ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं. मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों और सभी देशों के सताए गए लोगों को अपने यहां शरण दी.”

स्वामी विवेकानंद जब अपने शिकागो भाषण में यह बात बोल रहे थे, तब उन्हें यह नहीं पता था कि एक दिन जब देश आजाद हो जाएगा, उनके नाम का झंडा उठाने वाले लोग ही उनसे यह गर्व छीन लेंगे। ​फर्जी फकीरों और स्वामियों के दौर में विवेकानंद को अपनी इस महान भारतीयता पर शर्मिंदा ही होना था. विवेकानंद की आत्मा शर्मिंदा है।

भारत धर्म के नाम पर नहीं बना था। धर्म के नाम पर जो देश बना उसका नाम पाकिस्तान था जो मात्र 24 साल के अंदर फिर से टूट गया, वह भी भाषा के आधार पर। भारत के बारे में पूरी अंग्रेजी कौम कहती रही कि यह देश नहीं चल पाएगा। लेकिन भारत सलामत रहा और दुनिया के प्रतिष्ठित लोकतंत्रों में शुमार हुआ। आज भारत महाशक्ति का सपना देख रहा है तो उसकी एक वजह यह भी है कि भारत एक उदार और समावेशी लोकतंत्र बना।

आज़ाद भारत में आज यह जो हो रहा है, यह जरूर भारत को धर्म के सहारे विभाजित करने की कोशिश है। इससे अंग्रेजों की वह मनहूस भविष्यवाणी भी सच हो सकती है।

इस निकृष्ट विधेयक से पहले पाकिस्तान से आये तमाम हिंदुओं को ऑर्डिनेंस के जरिये भारत की नागरिकता दी गई है। पड़ोसी देशों से आये हिन्दू और सिखों को संरक्षण देने के लिए भारत के संविधान को कठमुल्लों की पोथी बनाने की जरूरत नहीं है, न ही भारत का संविधान किसी घुसपैठिये को संरक्षण देता है, न घुसपैठियों को बाहर भेजने से रोकता है।

यह बिल हिन्दू मुस्लिम में विभाजन करने के लिए लाया गया है। यह स्पष्ट तौर पर भारत देश पर हमला है। मंशा भी स्पष्ट है कि यह क्यों किया गया। सेकुलरिज्म पर जिस तरह संगठित हमला किया जा रहा है, जैसे साम्प्रदायिकता और नफरत कोई नियामत हो। यह दुनिया की अकेली पार्टी और अकेली सरकार है जो सेकुलरिज्म, सौहार्द, विविधता को बुरा कहती है और नफरत को महान विचार बताती है।
भाजपा भारत के एक सदी के संघर्ष को लीप रही है और आने वाली पीढ़ियों को नफरत और विभाजन की आग में झोंक रही है।