बीजेपी के भव्य कार्यालय बन सकते हैं तो वादे अनुसार 10 हजार बेघर घुमंतू परिवारों के घर क्यों नहीं?

 

हरियाणा सरकार के सर्वे के अनुसार प्रदेश में 10 हजार ऐसे परिवार हैं जिनके पास मकान बनाने के लिए जमीन तक नहीं है. वहीं 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में कुल बेघर लोगों की संख्या 10 लाख 30 हजार के करीब है, इनमें से अधिकतर बेघर लोग विमुक्त घुमंतू समुदाय से हैं. मकान बनाने के लिए जमीन न होने के कारण आजादी के सात दशक बाद भी डिनोटिफाइड ट्राइब्स (डीएनटी) के लोग घुमंतू जीवन जीने के लिए मजबूर हैं.

2017 में फतेहाबाद की एक रैली के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वादा किया था कि बीजेपी सरकार बेघर परिवारों को जमीन देकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाकर देगी. लेकिन एक लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी 10 हजार घुमंतू परिवारों को मकान बनाकर देना तो दूर जमीन तक नहीं दी गई.

हरियाणा सरकार ने 2015 में बेघऱ परिवारों के आंकड़े जुटाने और विमुक्त घुमूतू परिवारों से संबंधित समस्याओं के लिए राजीव जैन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया. मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी), डीएनटी विकास बोर्ड के अध्यक्ष और अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के निदेशक को जैन कमेटी का सदस्य बनाया गया. जैन कमेटी ने सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर प्रदेश में बेघर घुमंतू परिवारों के सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की लेकिन सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर जैन कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है.

जैन कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने पर विमुक्त घुमंतू समुदाय के बीच पिछले 20 साल से काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता बालक राम ने कहा,

“सरकार ने अपने द्वारा गठित जैन कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है. सरकार को डर है कि रिपोर्ट जारी होने के बाद सरकार पर रिपोर्ट की सिफारिशें लागू करने का दबाव होगा इसलिए सरकार जैन कमेटी की रिपोर्ट सार्वजिनक नहीं कर रही है.” बालक राम ने कहा,“सरकार की विमुक्त घुंमतू जनजातियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की नियत ही नहीं है. अब तक की सभी सरकारों ने हमारे साथ धोखा किया है.”       

बेघर घुमंतू परिवारों के सर्वे के दौरान अपनी सेवाएं दे चुके सामाजिक कार्यकर्ता हरिओम बागड़ी ने कहा,

“हालांकि बीजेपी एक पार्टी है और वह अपने फंड से कुछ भी कर सकती है लेकिन बेघर परिवारों को मकान देने का वादा भी इसी पार्टी ने किया था ऐसे में कोरोड़ों रुपये खर्च करके जिला कार्यालय बनाने वाली पार्टी को अपने किये वादे के अनुसार बेघर घुमंतू परिवारों को घर बनाकर देने चाहिए.” हरिओम बागड़ी ने आगे कहा, “हमारे साथ सभी सरकारों ने ऐसा ही किया है आज तक किसी भी सरकार ने विमुक्त घुमंतू जनजातियों के विकास के लिए नहीं सोचा है. देश के 20 करोड़ विमुक्त घुमंतू लोगों के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है. जब तक योजना ही नहीं बनेगी तब तक विकास के बारे में कैसे सोचा जा सकता.”   

हरियाणा में बीजेपी के भव्य दफ्तर

29 जुलाई 2020 को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरियाणा के 6 नये जिला कार्यालयों का उद्घाटन किया. हरियाणा के हिसार, फतेहाबाद, सोनीपत, पलवल, रेवाड़ी और नूंह में बीजेपी ने आधुनिक सुविधाओं से लैस हाईटेक कार्यालय बनाकर खड़े किए हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कार्यक्रम के दौरान कहा देशभर में पार्टी के 500 कार्यालयों का निर्माण हो चुका है और 400 कार्यालयों का काम जारी है.

हरियाणा में 13 जून, 2021 को प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ ने झज्जर में जिला कार्यालय की नींव रखी तो 17 जुलाई, 2021 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने फरीदाबाद के सेक्टर-15 में पार्टी कार्यालय की नींव रखी. वहीं मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र करनाल में भी भव्य कार्यालय बनाने की योजना है. करनाल जिला कार्यालय के लिए पार्टी ने सेक्टर-9 में जमीन खरीदी है. सात जिलों कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर, पानीपत, महेंद्रगढ़,सिरसा और फरीदाबाद में नींव रखी जानी है. वहीं गुरुग्राम, रोहतक, पंचकूला, अंबाला, कैथल, दादरी व भिवानी जिलों के कार्यालय बनकर तैयार हैं.

एक ओर बीजेपी पार्टी अपने भव्य कार्यालय बना रही है वहीं दूसरी ओर बीजेपी सरकार दस हजार बेघर परिवारों को जमीन और मकान बनाकर देने के अपने वादे के आस-पास भी नहीं है.

इस बीच सबसे दिलचस्प है कि डीएनटी विकास बोर्ड के चैयरमेन और बोर्ड के अन्य सदस्य बीजेपी के दफ्तर की नींव रखे जाने की तस्वीर साझा कर रहे हैं. यानी जिन लोगों पर 10 हजार बेघर परिवारों के घरों की नींव रखे जाने की जिम्मेदारी है वो बीजेपी कार्यालयों की नींव रखे जाने की तस्वीरें साझा कर रहे हैं.

    

डीएनटी बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों द्वारा साझा की गईं पोस्ट

वहीं केंद्रीय स्तर पर यूपीए सरकार में 2008 की रैनके कमीशन की रिपोर्ट और 2018 में एनडीए सरकार में भीखूराम इदाते की रिपोर्ट में भी विमुक्त घुमंतू जनजातियों के पूनर्वास पर जोर दिया गया है लेकिन अब तक किसी भी सरकार ने डीएनटी समुदाय के उत्थान की इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाया है. 

रैनके कमीशन, 2008 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 98 फीसदी विमुक्त घुमंतू परिवार ऐसे हैं जिनके पास रहने के लिए मकान और 50 फीसदी परिवारों के पास अपने दस्तावेज तक नहीं हैं. साथ ही विमुक्त घुमंतू जनजातियों के बेघर परिवारों तक सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं पहुंच पाता है. रिपोर्ट के अनुसार राशन वितरण प्रणाली (पीडीएस) से मिलने वाले राशन की उपलब्धता केवल 18 फीसदी बेघर लोगों तक ही है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि भोजन की पूर्ण मात्रा न मिलने के कारण घुमंतू आबादी के एक बड़े हिस्से के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता होगा.

वहीं हरियाणा डीएनटी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ बलवान ने कहा, “विमुक्त घुमंतू जनजातियों के बेघर परिवारों को सरकारी जमीन पर मकान बनवाकर देने के लिए तीन जगह जींद, असंध और फरीदाबाद में टेंडर किए गए हैं.”