CMIE रिपोर्ट: हरियाणा बेरोजगोरी में एक बार फिर पहले नंबर पर!

देश में बेरोजगारी दर अगस्त में एक साल के उच्चस्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गयी है. इस दौरान रोजगार पिछले महीने की तुलना में 20 लाख घटकर 39.46 करोड़ रह गया. वहीं इस बीच हरियाणा बेरोजगारी में एक बार फिर पहले स्थान पर रहा है. आंकड़ों के मुताबिक अगस्त के दौरान हरियाणा में सबसे ज्यादा 37.3 प्रतिशत बेरोजगारी थी. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में बेरोजगारी दर 6.8 प्रतिशत और रोजगार 39.7 करोड़ था.

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जुलाई में 6.1 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 7.7 प्रतिशत हो गई. वहीं रोजगार दर 37.6 प्रतिशत से गिरकर 37.3 प्रतिशत पर आ गई. सीएमआईई की ओर से जारी बयान में कहा गया कि, “आमतौर पर शहरी बेरोजगारी दर आठ फीसदी रहती है, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर लगभग सात फीसदी होती है. इस साल अगस्त में शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 9.6 फीसदी और ग्रामीण बेरोजगारी दर बढ़कर 7.7 फीसदी हो गई है. अनियमित वर्षा ने बुवाई गतिविधियों को प्रभावित किया है और यह ग्रामीण भारत में बेरोजगारी बढ़ने का एक मुख्य कारण है.”

वहीं विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्विट में लिखा “भर्ती के नाम पर घोटालों पर घोटाले, बेरोजगार युवाओं से लाखों की अवैध वसूली,बिन भर्ती पद खत्म करने व निवेश की बजाए नशे को बढावा देने की नीति का नतीजा है 37.3% बेरोजगारी. कांग्रेस कार्यकाल मे जो हरियाणा विकास के हर पैमाने पर अन्य राज्यो से आगे था,वो आज बेरोजगारी-भ्रष्टाचार मे आगे”

बता दें कि अगस्त के दौरान हरियाणा में सबसे ज्यादा 37.3 प्रतिशत बेरोजगारी रही. इसके बाद जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी 32.8 प्रतिशत, राजस्थान में 31.4 प्रतिशत, झारखंड में 17.3 प्रतिशत और त्रिपुरा में 16.3 प्रतिशत बेेरोजगारी दर थी. वहीं आंकड़ो के अनुसार छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर सबसे कम 0.4 फीसदी रही

भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या में आई भारी गिरावट, मात्र 9% महिलाएं ही वर्कफोर्स का हिस्सा-रिपोर्ट

कोरोना महामारी का देश में रोजगार और अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है. कोरोना की पहली लहर की वजह से 25 मार्च, 2020 को पूरे देश में लॉकडाउन किया गया. जिसकी वजह से लगभग सभी उद्योग और व्यापार अचानक ठप हो गए. कुछ ही हफ्तों में देश भर में अनुमानित 10 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी खो दी. साथ ही बड़ी संख्या में मजदूरों को गांव लौटना पड़ा. इस दौरान बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों का भी काम छुट गया.

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में कामकाजी महिलाओं की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कार्यबल में कामकाजी महिलाओं का अनुपात 2010 में जहां 26% था, वहीं 2020 में यह घट कर 19% से भी कम हो गया.

यही नहीं महामारी ने हालातों को और भी ज्यादा बिगाड़ दिया. देश में पहले से ही गिरती अर्थव्यवस्था के ग्राफ को महामारी ने और भी ज्यादा गिरा दिया. ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में अर्थव्यवस्था में कामकाजी महिलाओं की संख्या 19% से घट कर मात्र 9% ही रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में, महामारी के दौरान पुरुषों की तुलना में महिलाओं की नौकरी जाने की संभावना अधिक थी, और उनकी रिकवरी अभी भी धीमी रही है.

यह भारत की अर्थव्यवस्था, युवा महिलाएं और लड़कियों के लिए के लिए विनाशकारी खबर है, जिसे बिलकुल भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के वर्कफोर्स में लौटने की संभावना कम है.

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स विश्लेषण के अनुसार, देश में पुरुषों और महिलाओं के बीच रोजगार का अंतर 58 फीसदी है, जिसे अगर जल्द ही खत्म किया जाता है तो 2050 तक भारत की अर्थव्यवस्था लगभग एक-तिहाई तक बढ़ सकती है.

दूसरी ओर, यदि कुछ नहीं किया जाता तो वैश्विक बाजार के लिए भारत का प्रतिस्पर्धी उत्पादक बनने का लक्ष्य और सपना पटरी से उतरने का जोखिम होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं भारत की कुल जनसंख्या का 48% हैं लेकिन देश के सकल घरेलू उत्पाद जिसे अंग्रेजी में जीडीपी कहते हैं, में उनका योगदान केवल 17% ही है. वहीं दुसरी ओर दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश चीन की जीडीपी में महिलाओं का योगदान 40% तक है.

रिपोर्ट के अनुसार लैंगिक असमानता को खत्म करके कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ाने से 2050 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 20 ट्रिलियन (लगभग 1,552 लाख करोड़ रुपये) जोड़ने में मदद मिलेगी.

रिपोर्ट के अनुसार अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महामारी से पहले ही भारत की आर्थिक वृद्धि धीमी हो गई थी. कार्यबल में कामकाजी महिलाओं की गिरावट चिंताजनक है. दूसरी ओर, सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए काम करने की स्थिति में सुधार के लिए बहुत ही कम प्रयास किया है. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं.

भारतीय जॉब मार्किट में महिलाओं के साथ साथ पुरुषों के भी हालात कुछ खास ठीक नहीं है. स्थिति इतनी खराब हो गई है कि भारत में रोज़गार की उम्र वाले लोगों में से आधे लोगों ने अब किसी रोज़गार की तलाश ही छोड़ दी है और घर बैठने का निश्चय किया है. और इन लोगों की संख्या में लगातार इज़ाफा भी हो रहा है. अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमईआई) के जारी नए आंकड़ों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था में भाग लेने वाले कामगारों का हिस्सा 2016 के मुकाबले 15% और अधिक कम हो गया है.

दुनिया भर में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन की दर करीब 60 फीसदी है, यानी काम करने वाले उम्र के सभी लोगों में 60 फीसदी या तो काम कर रहे हैं या फिर काम ढूंढ़ रहे हैं. जबकि भारत में पिछले दस सालों में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन की दर गिरते-गिरते दिसंबर, 2021 में 40 फीसदी पर जा पहुंची है. जबकि पांच साल पहले यह 47 फीसदी थी.

“पेपर रद्द होने की ख़बर सुनी तो मन किया कि घर न जाकर रेल के नीचे सिर दे दूं”

हरियाणा सरकार ने 7 अगस्त 2021 को हुई हरियाणा पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा रद्द कर दी है. सरकार की दलील है कि पेपर लीक होने की वजह से ये फैसला लिया गया है. परीक्षा के दौरान ही हरियाणा पुलिस ने कैथल से 5 और हिसार से 2 व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया था. इसके बाद से ही पेपर लीक की खबरें आने लगी थी. अंत में हरियाणा कर्मचारी आयोग ने 7 और 8 अगस्त की सभी परीक्षाओं को रद्द कर दिया.

साल 2020 में प्रदेश सरकार ने हरियाणा पुलिस के कुल 7,298 पदों पर भर्ती निकाली थी. जिनमें 5,500 पद पुरुष कांस्टेबल, 1100 महिला कांस्टेबल और 698 पद दुर्गा शक्ति बल में महिला कांस्टेबल के लिए थे.

लगभग 8 लाख 39 हजार युवाओं ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था. एक पद पर लगभग 114 उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए रेस में थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने की वजह से इन सब के अरमानों पर पानी फिर गया.

इससे पहले प्रदेश की दो बड़ी भर्तियों – नायब तहसीलदार और ग्राम सचिव का पेपर भी लीक हुआ था. उस वक़्त ग्राम सचिव के 697 पदों के लिए लगभग 8 लाख़ युवाओं ने आवेदन किया था. इसके बाद हरियाणा सरकार ने ग्राम सचिव की परीक्षा को रद्द कर दिया, वहीं नायब तहसीलदार पेपर लीक मामले में जांच ज़ारी रखी मगर पेपर लीक होने के बावज़ूद भी परीक्षा को रद्द नहीं किया गया.

नायब तहसीलदार और ग्राम सचिव दोनों परीक्षाओं को 2 साल से ज़्यादा का वक़्त हो गया है मगर इन मामलों में जांच अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और न ही अब तक कोई बड़ा नाम जांच में सामने आया है.

इसके अलावा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में जूनियर सिस्टम इंजीनियर भर्ती को इसी साल जून महीने में सरकार ने रद्द कर दिया. 146 पदों की इस भर्ती को उम्मीदवारों के चयन के समय ये कहकर रद्द कर दिया गया कि अभी विभाग को इनकी जरुरत नहीं है. परीक्षा के लगभग एक साल बाद इसका परिणाम दिया गया और फिर ज्वाइनिंग के वक़्त नियुक्तियां रद्द कर दी गईं. इसको लेकर भी चयनित युवा कईं महीनों से सरकार से गुहार लगा रहे हैं मगर अभी तक इसको लेकर कोई सुनवाई नहीं हुई है.

इसी तरह फरवरी 2021 में प्रदेश सरकार ने टीजीटी अंग्रेज़ी के 1,035 पदों पर होने वाली भर्ती को भी रद्द कर दिया. साल 2015 में इस भर्ती को निकाला गया था और फिर सब कुछ हो जाने के बाद ज्वाइनिंग से ठीक पहले, 6 साल बाद इस भर्ती को भी रद्द कर दिया गया. वहीं साल 2015 में ही पीजीटी संस्कृत के 626 पदों पर निकली भर्ती को भी प्रदेश सरकार ने फरवरी, 2021 में रद्द कर दिया. इस भर्ती में भी अभ्यर्थियों का केवल ड्यूटी जॉइन करना बचा था.

हरियाणा में रोजगार और भर्ती परीक्षाओं को लेकर सक्रिय श्वेता ढुल ने गाँव सवेरा को बताया, “हरियाणा राज्य सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार और धांधलेबाजी का हब बन गया है. बिना खर्ची, बिना पर्ची और पारदर्शी भर्ती – ये इस सरकार का सबसे बड़ा जुमला साबित हुआ है. किसी भी भर्ती में हुई धांधली की जांच पूरी नहीं की जा रही, जांच का दायरा कभी भी बड़े अधिकारीयों तक नहीं पहुँचता.”

श्वेता ढुल हरियाणा में होने वाली सरकारी भर्तियों को लेकर उम्मीदवारों की कानूनी सहायता भी करती हैं. परीक्षा रद्द होने से युवाओं पर पड़ने वाले सामाजिक और मानसिक दबाव के बारे में श्वेता कहती है, “मेरे पास हरियाणा पुलिस कांस्टेबल का पेपर रद्द होने पर युवाओं के बहुत निराशा भरे संदेश आए. बच्चे पिछले 2 सालों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, ऐसे में उनके लिए ये बहुत दुखी करने वाली घटना है. अगली परीक्षा तक किसी की उम्र निकल जाएगी, किसी के पास और कोचिंग लेने के पैसे नहीं होंगे, किसी की पारिवारिक स्तिथि ठीक नहीं है – ऐसे में इन बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है और वो मानसिक तनाव के शिकार हो जाते हैं.”

इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी मुहीम चलाई गई. ट्विटर पर #hsscsystemfail #hsscpaperleak जैसे हैशटैग्स के साथ हजारों ट्वीट किए गए. सामान्य ज्ञान विषय पढ़ाने वाले फ़तेहाबाद ज़िले के अध्यापक प्रदीप ने इस मुहीम की शुरुआत की.

प्रदीप ने हमें बताया, “पेपर रद्द होने से बच्चे बेहद मायूस हैं. लगातार सरकारी नौकरियों में इसी तरह पेपर लीक और रद्द होने का दौर चल पड़ा है. पहले कोरोना की वजह से लगभग 2 साल तक कोई भर्ती नहीं हुई और अब ये हो गया. हमने एक ट्विटर कैंपेन के माध्यम से इस लच्चर व्यवस्था की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहा है.”

हरियाणा पुलिस कांस्टेबल भर्ती का जो पेपर रद्द हुआ है उसके पाठ्यक्रम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. रेवाड़ी में कोचिंग सेंटर चलाने वाले कुलदीप यादव से हमने इस विषय में बात की. कुलदीप ने बताया, “हर पेपर में विषय तय होते हैं कि कहाँ-कहाँ से प्रश्न पूछे जाएंगे. मगर हरियाणा पुलिस कांस्टेबल के पेपर में तय विषयों से बाहर भी सवाल पूछे गए. पशुपालन से सम्बंधित बहुत सारे प्रश्न थे, भला पशुपालन का पुलिस विभाग से क्या संबंध?. इतिहास, राजनीति, भूगोल, अर्थव्यवस्था, हिंदी आदि से कोई एक सवाल भी नहीं पूछा गया. ये हम अध्यापकों के लिए भी हैरानी का विषय था.”

फ़तेहाबाद के मनीष ने बताया, “मैं पिछले 4 सालों से सरकारी नौकरी के लिए कोशिश कर रहा हूँ. जिस किसी परीक्षा की तैयारी करता हूँ, वही रद्द हो जाती है. साल 2019 में एचएसएससी-जेई का पेपर दिया वो भर्ती अब तक अटकी हुई है, फिर ग्राम सचिव का पेपर दिया वो रद्द हो गया. अब ये हरियाणा पुलिस कांस्टेबल का दिया ये भी रद्द हो गया. मैंने 2017 में इंजीनियरिंग की थी उसके बाद 4 साल हो गए मगर नौकरी नहीं मिल रही. आस-पड़ोस के लोग टोकते हैं, घरवाले भी अब तो परेशान हो गए. समझ में नहीं आता क्या करूँ?

महेंद्रगढ़ ज़िले के 24 वर्षीय चिंकी कुमार ने बताया, “मैं पिछले 7 महीनों से दिन-रात इस पेपर की तैयारी में लगा हुआ था. मेरा सेंटर हिसार था, पेपर देकर वापस आते वक़्त जब यह ख़बर सुनी कि पेपर रद्द हो गया तो मन किया कि ट्रेन के नीचे आकर जान दे दूँ. घर जाने की हिम्मत नहीं बची थी. मगर किसी तरह खुद को संभाला, मुझे नहीं लगता कि मैं दोबारा इतनी अच्छी तैयारी कर पाउँगा.”


सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) की रिपोर्ट के मुताबिक़ हरियाणा में बेरोज़गारी दर पूरे देश के मुक़ाबले सबसे अधिक है. अगस्त 2021 में हरियाणा में बेरोज़गारी की दर 28.1% है. ये हाल तब है जब हरियाणा कर्मचारी आयोग के चेयरमैन भोपाल सिंह ने पिछले महीने पंजाब केसरी हरियाणा को दिए एक इंटरव्यू में 9 महीनों में प्रदेश के 50 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी देने की बात कही थी.

बिना पर्ची-खर्ची, पारदर्शी भर्ती के नारे के साथ भाजपा हरियाणा में सत्ता में आई थी. इससे लोगों को काफ़ी उम्मीदें भी बंधी थी. लेकिन अब हर भर्ती किसी न किसी विवाद में फंसकर या तो पूरी नहीं हो पाती या रद्द कर दी जाती है. जिस तरह से लगभग परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, उसको देखकर तो यही लगता है कि वर्तमान सरकार नौकरियों में धांधली रोकने में नाकाम साबित हो रही है.