किसानों का सर फोड़ने के आदेश देने वाले एसडीएम आयुश सिंहा को तुरंत बर्खास्त करे सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

संयुक्त किसान मोर्चा आज मुख्यमंत्री खट्टर के विधानसभा क्षेत्र करनाल में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा करता है और कैमरे पर पुलिस को आदेश देने वाले एसडीएम आयुश सिंहा को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करता है।

संयुक्त किसान मोर्चा आज करनाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हरियाणा के भाजपा-जजपा सरकार द्वारा की गई क्रूर हिंसा की कड़ी निंदा करता है। किसानों के खिलाफ यह हिंसा मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, जब मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम के संदर्भ में स्थानीय किसानों द्वारा काले झंडे से विरोध किया जा रहा था। सरकार की क्रूर कार्रवाई, और करनाल में तैनात पुलिस बल को प्रदर्शनकारियों के “सिर तोड़ने“ के लिए एसडीएम का आदेश पूरी तरह से अस्वीकार्य और असहनीय है और हमारे लोकतंत्र के लिए अपमान और शर्म की बात है। पीएम मोदी जब जलियांवालाबाग वर्चुअल रैली कर रहे थे, वहीं करनाल में हुआ जलियांवालाबाग दोगुना शर्मनाक है। एसकेएम ने खट्टर-चौटाला सरकार को चेतावनी दी है कि किसान पीछे नहीं हटेंगे और वर्तमान ऐतिहासिक आंदोलन को जनविरोधी सरकार के इस बर्बर कृत्यों से दबाया नहीं जा सकता है। दमन के सरकार के प्रयास ही किसानों के संकल्प और शांतिपूर्ण आंदोलन को मजबूत करेंगे। आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होगा।

संयुक्त किसान मोर्चा ने हरियाणा के लोगों से हर जगह सड़क जाम करने का आह्वान किया है। एसकेएम ने एसडीएम आयुश सिंहा को तत्काल बर्खास्त करने की भी मांग की, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों के सिर तोड़ने का आदेश दिया था, जिसके सबूत के रूप में एक वीडियो वायरल हो चुका है।

दमनकारी पुलिस कार्रवाई के जवाब में राज्य में कई जगह विरोध हुआ जहां किसानों ने कुरुक्षेत्र, अंबाला, जींद, रेवाड़ी, नरवाना, फतेहाबाद, सिरसा, किटलाना टोल, गोहाना, रोहतक, भिवानी, केएमपी आदि जैसे कई स्थानों के अलावा उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर भी राजमार्ग जाम किया गया। यह रोड जाम अब भी विभिन्न स्थानों पर जारी है।

एसकेएम अमृतसर में किसानों पर लाठीचार्ज की भी निंदा करता है, जहां किसान जलियांवाला बाग के आधुनिकीकरण के उद्घाटन में पीएम के आभासी भाषण का विरोध कर रहे थे। जलियांवालाबाग हत्याकांड स्थल पर जाने की चाह में हजारों युवा जमा हो गए थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। युवाओं ने इस आयोजन में शामिल होने के श्री नरेंद्र मोदी के नैतिक अधिकार का विरोध किया।

एसकेएम मोदी सरकार के 3 किसान विरोधी, कॉर्पोरेट समर्थक काले कानूनों के खिलाफ तमिलनाडु राज्य विधानमंडल द्वारा एक प्रस्ताव पारित करने का स्वागत करता है। कई राज्य सरकारों ने इन कानूनों का विरोध किया है, और किसान आंदोलन को अब तक विभिन्न तरीकों से अपना समर्थन दिया है।

एसकेएम भारत भर के सभी किसान संगठनों से 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर महापंचायत के लिए और अधिक लोगों को जुटाने के लिए ट्रेड यूनियनों, महिला संगठनों, छात्र और युवा संगठनों और अन्य प्रगतिशील नागरिक समूहों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित करने और 25 सितंबर को भारत बंद को एक बड़ी सफलता बनाने का अपील करता है।

किसान आंदोलन की रणनीति का ऐलान, चुनावी राज्यों में भाजपा के खिलाफ चलेगा अभियान

चौथे महीने में प्रवेश कर चुके किसान आंदोलन के माहौल को बनाये रखने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने अगले 15 दिनों की रणनीति का ऐलान किया है। मंगलवार को सिंघू बॉर्डर पर आयोजित एक आम बैठक में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया है।

जिन राज्यों में अभी चुनाव होने वाले है, उन राज्यो में संयुक्त किसान मोर्चा भारतीय जनता पार्टी की किसान-विरोधी, गरीब-विरोधी नीतियों को दंडित करने के लिए जनता से अपील करेगा। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि इस मकसद से इन राज्यों का दौरा करेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

गौरतलब है कि 28 जनवरी के बाद से ही किसान आंदोलन से जुड़े नेता देश के कई राज्यों में किसान महापंचायतों का आयोजन कर रहे हैं। इन पंचायतों में जुट रही भीड़ को नए इलाकों में किसान आंदोलन के उभार के साथ-साथ सियासी संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

6 मार्च 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन के 100 दिन हो जाएंगे। उस मौके पर किसान आंदोलन के विभिन्न विरोध स्थलों को जोड़ने वाले कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर 5 घंटे की नाकाबंदी होगी। यह चक्का जाम सुबह 11 से शाम 4 बजे के तक किया जाएगा। यहां टोल प्लाजा को भी फ्री कराया जाएगा।

शेष भारत में किसान आंदोलन के समर्थन और सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए घरों और कार्यालयों पर काले झंडे लहराए जाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शनकारियों को उस दिन काली पट्टी बांधने का भी आह्वान किया है।

8 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा महिला किसान दिवस के रूप में मनाएगा। देश भर के सभी सयुंक्त किसान मोर्चे के धरना स्थल 8 मार्च को महिलाओ द्वारा संचालित होंगे। इस दिन महिलाएं ही मंच प्रबंधन करेंगी और वक्ता होंगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने उस दिन महिला संगठनों को आमंत्रित किया है कि वे किसान आंदोलन के समर्थन में इस तरह के कार्यक्रम करें और देश में महिला किसानों के योगदान को उजागर करें।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 15 मार्च 2021 को निजीकरण विरोधी दिवस का समर्थन करते हुए सयुंक्त किसान मोर्चा द्वारा विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा इस दिन को ‘कॉरपोरेट विरोधी’ दिवस के रूप में देखते हुए ट्रेड यूनियनों के इस आह्वान का समर्थन करेगा, और एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

संयुक्त किसान मोर्चा पूरे भारत में एक “MSP दिलाओ अभियान” शुरू करेगा। अभियान के तहत विभिन्न बाजारों में किसानों की फसलों की कीमत की वास्तविकता को दिखाया जाएगा, जो मोदी सरकार के झूठे दावों और वादों को उजागर करेगा। यह अभियान दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा। पूरे देश में किसानों भी इस अभियान में शामिल किये जाएंगे।