‘किसान महापंचायत’ से पहले क्या है मुजफ्फरनगर और आस-पास के गांवों का माहौल, देखिए ग्राउंड रिपोर्ट!

कल यानी रविवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत होने जा रही है. मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउंड में होने जा रही इस किसान महापंचायत से यूपी में किसान पंचायतों की शुरुआत होगी. तीन नये कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर पिछले नौ महीने से आंदोलरत किसानों ने यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ प्रचार करने का फैसला किया है. मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत के जरिए किसान यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ प्रचार अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं.

मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत में हरियाणा और पंजाब से भी बड़ी संख्या में किसान शामिल होने के लिए जा रहे हैं.

गांव-सवेरा के पत्रकार मंदीप पुनिया दो दिनों से मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत की तैयारियों को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट दिखा रहे हैं. इसी कड़ी में आज उन्होंने किसान नेता गुलाम मोहम्मद जौला से बात की. बातचीत के दौरान किसान नेता गुलाम मोहम्मद जौला ने कहा, “पिछले मनमुटाव खत्म करके हम सब एकजुट हैं. हमारे गिले-शिकवे दूर हो चुके हैं. हम सभी साथ मिलकर मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत की तैयारियों में जुटे हैं.

किसान नेता गुलाम मोहम्मद जौला से बातचीत

इसके बाद गांव-सवेरा की टीम ने मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान का जायजा लिया. मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में ही किसान महापंचायत होने जा रही है. शुक्रवार शाम हुई भारी बारिश के कारण जीआईसी मैदान में पानी भर गया था. जिसके बाद आज दिनभर किसान मैदान से पानी निकालने में जुटे रहे.

जिस ग्राउंड में मुज़्ज़फरनगर किसान महापंचायत होने वाली है, वहां कैसी तैयारियां चल रही हैं।

मुजफ्फरनगर के आस-पास के गांवों के किसान बाहर से आने वाले किसानों की मेहमाननवाजी के लिए तैयारियों में जुटे हैं. मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान की ओर आने वाले रास्तों पर किसानों के लिए भोजन-पानी की व्यव्स्था की गई है.

मुज़्फ्फरनगर महापंचायत से पहले भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत का इंटरव्यू

बृज में किसान महापंचायत कर गठबंधन की मजबूती पर अखिलेश-जयंत का जोर

कई महीनों से चल रहा किसान आंदोलन दिल्ली की सरहदों से निकलकर सियासी हलचलों तक पहुंच गया है। किसान आंदोलन से बनी सत्ता विरोधी लहर को भुनाने के लिए विपक्षी दल लगातार किसान महापंचायतें कर रहे हैं तो किसान यूनियनों के नेता भाजपा के खिलाफ प्रचार करते घूम रहे हैं। शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने एक मंच पर आकर चौधरी चरण सिंह के विचारों को आगे बढ़ाने का दावा किया। दोनों युवा नेताओं को सुनने के लिए मथुरा के बाजना में बड़ी तादाद में लोग जुटे।

बृज में हुई इस किसान महापंचायत के कई सियासी मायने हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद सपा और रालोद के नेता पहली बार एक साथ आये हैं। इसी के साथ दोनों दलों ने किसानों के मुद्दे पर संघर्ष करने और गठबंधन जारी रखने का इरादा साफ जाहिर कर दिया। दोनों नेता एक साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर मंच तक पहुंचे। एक-दूसरे के दलों और नेताओं के प्रति काफी सम्मान जाहिर किया और किसानों के मुद्दोंं पर साथ मिलकर संघर्ष करने की बात कही। आज यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार चार साल पूरे होने का जश्न मना रही है। इस दिन राज्य के दो प्रमुख विपक्षी दलों के साथ आने को विधानसभा चुनाव की तैयारियों का बिगुल माना जा रहा है।

मथुरा राष्ट्रीय लोकदल का गढ़ रहा है और जयंत चौधरी यहां से सांसद रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी रालोद के परंपरागत जनाधार के बूते पश्चिमी यूपी की राजनीति में अपनी खोयी जमीन तलाश रही है तो रालोद के सामने अपना वजूद बचाने की चुनौती है। जिस प्रकार किसान आंदोलन ने व्यापक रूप लिया और किसानों के मुद्दोंं को राष्ट्रीय राजनीति में जगह दिलायी, उसका फायदा राष्ट्रीय लोकदल को मिलने की उम्मीद है। इसी आस में रालोद की ओर से लगातार किसान महापंचायतें कराई जा रही हैं, जिसमें अच्छी खासी भीड़ जुट रही है।

मथुरा में किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं का जिक्र कर गठबंधन को पुख्ता करने का संकेत दिया। साथ ही उन्होंने चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर किसानों के मुद्दों पर संघर्ष करने का दावा भी किया। भाजपा पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने हमेेेेेशा लोगों को बांटकर और साजिशें कर सत्ता पाई है। हम किसानों को जगाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि अगली बार जब मतदान करने जाएं तो भाजपा को सबक सिखाने का काम करें।

कृषि कानूनों की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अगर खेती को बाजार के हाल पर छोड़ दिया तो किसानों को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता। किसान जब तक खुशहाल नहीं हो सकता, जब तक किसानों की बात करने वाले दल सत्ता में नहीं होंगे। भाजपा पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि किसान आंदोलन से कोई घबराया हो या नहीं, लेकिन भाजपा जरूर घबरा रही है। भाजपा को पता चल गया है कि अब किसान नहीं रुकने वाला है। जब तक काले कानून वापस नहीं होंगे, यह लड़ाई चलती रहेगी।

किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने किसान आंदोलन को एक जाति से जोड़ने की कोशिशों पर प्रहार करते हुए कहा कि यह किसी एक जाति या समाज का मुद्दा नहीं है। इसलिए सभी किसानों को एकजुट होकर एक-दूसरे का साथ देना चाहिए। भाजपा पर दंगों के जरिये राजनीति करने का आरोप लगाते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि भाजपा की राजनीति दंगों पर शुरू होती है और दंगों पर खत्म होती है। इस राजनीति का विरोध करना जरूरी है। जयंत चौधरी ने कहा कि आंदोलन के दौरान 300 से ज्यादा किसान शहीद हो गये, लेकिन उनके प्रति संवेदना व्यक्ता करना तो दूर उन्हें आंदोलनजीवी और आंतकवादी बताया जा रहा है।

चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि आज किसान दोबारा से अपनी उस ताकत को पहचान रहा हैं जो उसने चौधरी चरण सिंह जी के समय में प्राप्त की थी। जयंत चौधरी ने कहा कि जिस प्रकार चौधरी चरण सिंह जी को वोट देते हुए कोई जाति देख कर वोट नही देता था। मैं दोबारा से वही दिन देखना चाहता हूंं। वह दिन देखना चाहता हूंं जब अखिलेश यादव मथुरा से चुनाव लड़े और मैं गाजीपुर से।