सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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बड़बोले बयानों के चलते सुप्रीम कोर्ट की रामदेव को फटकार!



चीफ जस्टिस एन वी रमण ने टिप्पणी करते हुए कहा "बाबा रामदेव एलोपैथी डॉक्टरों पर आरोप क्यों लगा रहे हैं? उन्होंने योग को लोकप्रिय बनाया, अच्छा है. लेकिन उन्हें अन्य प्रणालियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए. इस बात की क्या गारंटी है कि वे जो कुछ भी करेंगे, वह सब कुछ ठीक कर देगा?"

सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ के संचालक रामदेव को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव द्वारा आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा प्रणाली पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में फटकार लगाई है. इस मुद्दे पर खुद चीफ जस्टिस एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा, “वह आयुर्वेद को लोकप्रिय बनाने के लिए अभियान चला सकते हैं, लेकिन अन्य चिकित्सा प्रणालियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए.”  

चीफ जस्टिस एन वी रमण ने टिप्पणी करते हुए कहा “बाबा रामदेव एलोपैथी डॉक्टरों पर आरोप क्यों लगा रहे हैं? उन्होंने योग को लोकप्रिय बनाया, अच्छा है. लेकिन उन्हें अन्य प्रणालियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए. इस बात की क्या गारंटी है कि वे जो कुछ भी करेंगे, वह सब कुछ ठीक कर देगा?”

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की है. जिसमें एलोपैथिक दवाओं, उनके डॉक्टरों और कोविड -19 टीकाकरण के खिलाफ अभियान का आरोप लगाया गया था. वहीं साथ ही पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर आईएमए की याचिका पर जवाब मांगा है.

पिछले साल, जब देश में हजारों लोगों की मौत हो गई, तो कोविड की दूसरी लहर के रूप में, रामदेव को एक वीडियो में यह कहते हुए सुना गया था,  “लाखों लोग एलोपैथिक दवाओं के कारण मारे गए हैं, जो मरने वालों की तुलना में कहीं अधिक हैं क्योंकि उन्हें इलाज या ऑक्सीजन नहीं मिला” रामदेव ने कथित तौर पर एलोपैथी को “बेवकूफ और दिवालिया” विज्ञान भी कहा था. साथ ही रामदेव ने यह भी दावा किया था कि भारत में कई डॉक्टरों की कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक मिलने के बाद भी मौत हो गई.

वहीं आईएमए ने मीडिया में बयान देते हुए कहा था कि, “केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को रामदेव पर कार्रवाई करनी चाहिए और महामारी रोग अधिनियम के तहत मुकदमा चलाना चाहिए क्योंकि उन्होंने “अनपढ़” बयान देकर लोगों को गुमराह किया और वैज्ञानिक दवा को बदनाम किया.”

भारतीय डॉक्टरों के सर्वोच्च संघ ने कहा कि, “जब वे महामारी के दौरान जीवन बचाने का प्रयास कर रहे थे रामदेव एलोपैथी और आधुनिक चिकित्सा के डॉक्टरों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे थे.”

इससे हफ्तेभर पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी रामदेव को आयुर्वेद पर भ्रामक टिप्पणी करने से बचने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट की पीठ, डॉक्टरों के अलग अलग संगठनों द्वारा रामदेव के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कथित रूप से पतंजलि के कोरोनिल के कोविड -19 के उपयोग के संबंध में गलत सूचना फैलाने के आरोप लगाए गये थे.

जब पीठ को यह जानाकरी दी गई कि रामदेव ने अमेरिका के राष्टरपति का उदाहरण देते हुए कहा था कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को कोविड का टीका लगाया गया था फिर भी वो कोविड के शिकार हो गए थे. इस पर न्यायमूर्ति अनूप जयराम ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, “इस तरह के बयान अन्य देशों के साथ देश के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, इसके अलावा आयुर्वेद की प्रतिष्ठा भी कम कर सकते हैं.”