हरियाणा: देहातियों की जमीनों के पैसे डकारती अफसरशाही!

 

हरियाणा में ग्राम पंचायतों की जमीन से होने वाली करोड़ों रुपए की कमाई में हेराफेरी का मामला सामने आया है. पंचायतों की आय तो हुई लेकिन यह पैसा पंचायत खाते में जमा करवाने की बजाय अफसरों ने ही आपस में बाँट लिया. राज्य के बाढ़डा, भिवानी, पलवल, दादरी सहित दर्जनों ब्लॉक में इस तरह की घटना हुई हैं. अब पूरे प्रदेश में इसकी जांच होगी. सभी ब्लॉक से पंचायती जमीनों और इनसे होने वाली सालाना आय का रिकार्ड विकास एवं पंचायत मंत्री ने अपने ऑफिस में मंगवाया है.

ग्राम पंचायतों की आय का बड़ा हिस्सा पंचायती जमीनों से आता है. पंचायती जमीनों को हर साल खेती के लिए ठेके पर दिया जाता है. प्रदेश में ठेके के रेट अलग-अलग एरिया और जमीन के हिसाब से अलग-अलग हैं. सोनीपत में ठेके का रेट प्रति एकड़ सालाना 30 से 50 हजार है. जीटी रोड बेल्ट पर यह 50 से 70 हजार और अहीरवाल एरिया में 15 से 30 हजार रुपये तक है. जिस एरिया में पानी का पूरा प्रबंध है और सालाना दो से तीन फसलें ली जा सकती हैं, वहां रेट काफी अधिक है. यह ठेका बोली के जरिए छोड़ा जाता है.

नियमों के हिसाब से ठेकों से आने वाला पैसा पंचायतों के खातों में जमा होना चाहिए. सैकड़ों की संख्या में ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनकी जमीन तो ठेके पर दी गई लेकिन पैसा उनके खाते में नहीं आया. आरोप है कि यह पैसा अफसर लोग ही जीम (डकार) गए. इससे जुड़ी हुई काफी संख्या में शिकायतें चंडीगढ़ पहुंची हैं. विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने नोटिस लेते हुए पूरे प्रदेश का रिकार्ड मंगवाया है. पंचायतों को जमीन के अलावा भी जो आय हुई है उसका ब्योरा और बैंक खातों का ब्योरा भी मंत्री ने मांगा है.

इससे पहले भी पंचायत विभाग में कई घोटाले सामने आए हैं. पिछले महीने पलवल जिले में 25 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आ चुका है. यहां विकास कार्यों के लिए 60 करोड़ रुपये के करीब खर्च किए गए. इसमें से 30 से 40 प्रतिशत ऐसे काम हैं, जो ग्राउंड पर हुए ही नहीं. कागजों में काम दिखाए गए और बिल पास करके अधिकारियों ने पैसे हजम कर लिए.

पंचायत मंत्री ने इस मामले में दर्जन अधिकारियों व कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करवाई है. एक ओर केस दर्ज करवाने की तैयारी विभाग की ओर से चल रही है ताकि संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से गबन किए गए पैसे की रिकवरी हो सके. मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच पलवल के ए.डी.सी. को सौंप दी गई. मंत्रालय ने इस पर नाराज़गी जताते हुए अधिकारियों से पूछा है कि यह फैसला किस स्तर पर और किन नियमों के तहत लिया गया. मंत्रालय इस मामले की जांच विजीलैंस से करवाना चाहते हैं.

इसके अलावा मनरेगा कार्यों में भी घोटाला हुआ है. अधिकारियों और ग्राम सचिवों ने सरपंचों के साथ मिलकर आर्थिक तौर पर मजबूत और अपने यारे प्यारों के जॉब कार्ड बनाए. मनरेगा का काम पास किया गया. यह काम हकीकत की बजाय सिर्फ कागजों में हुआ. इस काम के पैसे अधिकारियों, ग्राम सचिवों और सरपंचों ने आपस में बाँट लिए. इस मामले की भी जांच अभी चल रही है.

इसी तरह की एक घटना कैथल के पंचायत विभाग में भी सामने आई. कैथल में सफाई का ठेका विभाग की तरफ से एक कंपनी को दिया गया. इस ठेके में 5 करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आया है.

सिरसा में पौने चार करोड़ का स्ट्रीट लाइट घोटाला और हिसार व भिवानी जिले में भी विकास कार्यों में करोड़ों रुपये के घोटाले हुए हैं. भिवानी के नगर परिषद के अनेकों कर्मचारियों को तो जेल में जाना पड़ा है.

इस सब पर विकास एवं पंचायत मंत्री, देवेंदर सिंह बबली ने मीडिया को बताया, “मैंने अधिकारियों को कह दिया था कि विभाग में धांधली नहीं चलेगी. सिस्टम में 10 प्रतिशत लोग भ्रष्ट हैं, जो पूरे विभाग को बदनाम कर रहे हैं. पंचायत विभाग में ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू हो चुका है. मुख्यमंत्री के निर्देशों पर विभाग को चुस्त-दुरुस्त किया जाएगा. पंचायती जमीनों की बोली के पैसों में धांधली सामने आई है. पूरे प्रदेश का रिकार्ड तलब किया है. इसकी जांच होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.”