सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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पंजाब के नये मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का MC से CM बनने तक का सफर!



2007 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट की मांग की थी. टिकट नहीं मिलने पर आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. आज उसी पार्टी से बनें पंजाब के मुख्यमंत्री.

चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के 17वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेकर 33 फीसदी दलित आबादी वाले सूबे के पहले दलित मुख्यमंत्री बन गए हैं. पंजाब के नये मुख्यमंत्री को लेकर कई दिनों से चली आ रही अटकलों पर उस वक्त विराम लगा जब पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने हाईकमान के आदेश के बाद सोमवार शाम 5 बजकर 36 मिनट पर ट्विट करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी के पंजाब के नये मुख्यमंत्री बनने की जानकारी साझा की.

चरणजीत सिंह के नाम की घोषणा से पहले दिल्ली में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के बीच करीबन आधा घंटा बैठक चली. बैठक के बाद दिल्ली से पंजाब संदेश भेजा गया और फिर एक ऐसे नाम की घोषणा हुई जिसकी मीडिया में कोई चर्चा नहीं थी.

मीडिया में पिछले कई दिनों से पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और सुखजिंदर रंधावा के नाम की चर्चा चलती रही. कांग्रेस आलाकमान के सिवाये किसी के जहन में यह बात नहीं थी कि कांग्रेस दलित चेहरे के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बना सकती है. चरणजीत सिंह चन्नी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है.    

दो अप्रैल 1972 को चमकौर साहिब के मकरोना कलां गांव में जन्मे चरणजीत सिंह चन्नी रामदासिया सिख समुदाय से आते हैं. चंडीगढ़ के गुरु गोविंद सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई की. इसके बाद एमबीए और अब पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे हैं.

ग्लोबल पंजाब टीवी को दिए अपने एक इंटरव्यू में चरणजीत सिंह चन्नी बताते हैं, “मेरा जन्म एक बेहद साधारण और गरीब परिवार में हुआ है. मिट्टी से बने कच्चे मकान में बचपन बीता है. मां को कच्चे घर में गारे का पोछा लगाते देखा है.”

चरणजीत सिंह को राजनीति में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले पिता हर्ष सिंह शुरुआती दिनों में टेंट की दुकान चलाते थे और बाद में गांव के सरपंच बने. पिता के कहने पर ही चरणजीत सिंह ने 1998 में पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इस जीत के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को अपने राजनीतिक सफर में कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा. तीन बार पार्षद और दो बार खरड़ म्यूनिसपल काउंसिल के चेयरमैन रहे. 2007 तक आते-आते चरणजीत सिंह चन्नी राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी बन चुके थे.

2007 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर हताश चरणजीत सिहं ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. लेकिन पिता की बेटे को पंजाब विधानसभा भेजने की जिद्द से सामने चरणजीत सिंह की नहीं चली. चुनाव न लड़ने की बात कहने पर पिता ने खुद चुनाव मैदान में उतरने की बात कही. इसके बाद चरणजीत सिंह ने रूपनगर जिले की चमकौर साहिब विधानसभा सीट से आजाद उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोक दी.

चरणजीत सिंह चन्नी, अकाली दल से लगातार दो बार विधायक रहे सतवंत कौर संधू को 1,758 मतों से मात देकर पहली बार चमकौर साहिब विधानसभा सीट से पंजाब विधानसभा पहुंचे. आजाद उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल करने के बाद पहले अकाली दल फिर मनप्रीत सिंह बादल और बाद में कैप्टन अमरिंदर की टीम में शामिल हुए.  

चरणजीत सिंह ने एक इंटरव्यू के दौरान 2007 विधानसभा चुनाव का किस्सा सुनाते हुए कहा. “वोटिंग से दो दिन पहले मैंने एक रैली में कहा, “मुझे अमीरों का वोट नहीं चाहिए मुझे केवल गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों का वोट चाहिए. मैं अमीरों की नुमाइंदगी नहीं कर सकता. अमीरों की नुमाइंदगी करने के लिए बादल परिवार है.”  

2012 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर दूसरी बार पंजाब विधानसभा पहुंचे और 2015-16 में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाई. 2017 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को 12 हजार वोट के बड़े अंतर से शिकस्त देकर चमकौर साहिब सीट से तीसरी दफे पंजाब विधानसभा पहुंचे.   

कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रीमंडल में तकनीकि शिक्षा मंत्री रहते 2018 में तब विवादों में आए जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ. वीडियो में चरणजीत सिंह सिक्का उछाल कर दो लेक्चररों के बीच पोस्टिंग विवाद निबटाने के लिए टॉस करते हुए दिखाई दिए थे. 

साथ ही 2018 में महिला आईएएस अधिकारी को अव्यवहारिक संदेश भेजने के मामले में भी चरणजीत सिंह चन्नी विवादों में रहे थे. हालांकि महिला अधिकारी ने चरणजीत सिंह के खिलाफ किसी तरह कि शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी.

अंधविश्वास के चलते कई बार मीडिया में सुर्खियां बटोर चुके चरणजीत सिंह चन्नी ने 2017 में कैबिनेट मंत्री बनते ही एक ज्योतिष के कहने पर चंड़ीगढ़ सेक्टर-2 के अपने घर के एंट्री गेट की दिशा बदलवा दी थी. चन्नी यहीं नहीं रुके इसके बाद फिर से ज्योतिष के कहने पर अपने घर के लॉन में हाथी की सवारी करते हुए नजर आए थे.

शेरो-शायरी और गायकी का शौक रखने वाले मुख्यमंत्री चरणजीत सिहं चन्नी को पार्टी की अंतरकलह से लेकर प्रदेश की अनेक समस्याओं को पार करने की चुनौतियां का सामना करना होगा.