शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
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अग्निवीर की तर्ज पर बैंकों में भी होगी भर्ती, अब SBI में ठेके पर रखे जाएंगे कर्मचारी!



स्टेट बैंक की ऑपरेशन और सपोर्ट सब्सिडियरी को हाल ही में आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) से सैद्धांतिक अनुमति दे दी है. शुरुआत में यह कंपनी ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं में कर्मचारियों का प्रबंधन देखेगी.

सेना में अग्निवीरों की तर्ज पर अब बैंकों में भी कर्मचारियों की नियुक्ति होगीं. अब बैंक में भी कॉन्ट्रेक्ट पर कर्मचारी रखे जाएंगे. देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक अपना खर्च कम करने के लिए मानव संसाधन संबंधित मुद्दों के लिए एक अलग कंपनी शुरू करने जा रहा है. स्टेट बैंक की ऑपरेशन और सपोर्ट सब्सिडियरी को हाल ही में आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) से सैद्धांतिक अनुमति दे दी है. शुरुआत में यह कंपनी ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं में कर्मचारियों का प्रबंधन देखेगी.

हिंदी समाचार पत्र ‘हिंदुस्तान न्यूज’ में छपि खबर के अनुसार बैंकिग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम उठाकर बैंक अपना कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो कम करना चाहता है, जो अभी इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के हिसाब से बहुत ज्यादा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पूरे देश में एसबीआई ने बैंक शाखाओं का एक बहुत बड़ा नेटवर्क स्थापित कर रखा है. चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में एसबीआई के कुल ऑपरेशन खर्च में वेतन का हिस्सा करीब 45.7 फीसदी था और सेवानिवृत्ति लाभ व अन्य प्रोविजन की हिस्सेदारी 12.4 फीसदी है.

वहीं ऑल इण्डिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव डीएन त्रिवेदी ने अखबार को बताया, “स्टेट बैंक ऑपरेशन सपोर्ट सर्विसेस जिन कर्मचारियों की नियुक्ति करेगी वो सभी नियुक्तियां अनुबंध के आधार पर होंगी. अनुबंध के आधार पर नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को एसबीआई के स्थायी कर्मियों को मिलने वाले सभी लाभ नहीं मिल सकेंगे.”

दूसरे बैंक भी उठा सकते हैं कदम

इस नई व्यवस्था का असर पूरी बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ सकता है. एसबीआई ऑपरेशन सपोर्ट सर्विसेस भारतीय बैंकिंग जगत में अपनी तरह की पहली सब्सिडियरी होगी. हालांकि अब अन्य बैंक भी इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं. इससे पहले कई बैंक आरबीआई के पास इस तरह की सब्सिडियरी बनाने के लिए प्रस्ताव दे चुके हैं लेकिन तब आरबीआई ने इसकी अनुमति नहीं दी थी. लेकिन अब एसबीआई को अनुमति मिलने के बाद अन्य बैंक भी अपने पुराने प्रस्तावों को एक बार फिर आगे बढ़ाने के लिए आरबीआई से ऐसी सब्सिडियरी के लिए मंजूरी मांग सकते हैं. इस तरह बैंक में भी अग्निवीर योजना की तर्ज पर एक नई योजना शुरू हो सकती है.