शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
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विमुक्त घुमंतू जनजातियों को लेकर राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग ने फिर जारी किया योगी सरकार को नोटिस!



दरअसल उत्तर प्रदेश में 29 जातियों को विमुक्त घुमंतू जनजाति का दर्जा प्राप्त है. फिलहाल ये जनजातियां अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं. जिसके चलते इन जातियों को डीएनटी (डिनोटिफाईड ट्राईब्स)  को मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा विमुक्त घुमंतू और अर्धघुमंतू जनजातियों को सरकारी योजनाओं से वंचित रखने की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तरप्रदेश की योगी सरकार को एक बार फिर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इससे पहले अगस्त 2021 में राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग ने विमुक्त घुमंतू और अर्धघुमंतू जनजातियों संबंधी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई न करने पर कानूनी दंढ भुगतने की चेतावनी जारी की थी. 

इस मामले में उत्तर प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता मोहित तंवर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को यूपी सरकार के खिलाफ शिकायत की है. मोहित तंवर ने अपनी शिकायत में सरकार द्वारा विमुक्त एवं घुमंतू जनजातियों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचाने का आरोप लगाया है.

दरअसल उत्तर प्रदेश में 29 जातियों को विमुक्त घुमंतू जनजाति का दर्जा प्राप्त है. फिलहाल ये जनजातियां अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं. जिसके चलते इन जातियों को डीएनटी (डिनोटिफाईड ट्राईब्स)  को मिलने वाली योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

इन जनजातियों को अब तक विमुक्त घुमंतू जाति के प्रमाणपत्र भी जारी नहीं किये गए हैं. जाति प्रमाण पत्र न होने के कारण इन जनजातियों को सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल रहा है.  

इन जातियों को न केवल उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं का बल्कि केंद्र सरकार की योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है. डीएनटी प्रमाण पत्र बनाने की मांग को लेकर कईं सामाजिक संगठन लगातार मांग कर रहे हैं.

दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने विमुक्त जातियों को मिलने वाली योजनाओं के लाभ को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ मिला रखा है. ऐसे में अगर विमुक्त घुमंतू जनजाति का कोई अभ्यर्थी दावेदार नहीं मिलता है तो उनके बजट का पूरा लाभ अपने आप अनुसूचित जातियों के खाते में ट्रांसफर हो जाता है. विमुक्त जाति के प्रमाण पत्र के अभाव में विमुक्त जाति के छात्र और अभ्यर्थी अपने हक का दावा नहीं कर पा रहे  हैं.

इससे पहले भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव से इस मामले में दो हफ्ते के भीतर विमुक्त जातियों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का कड़ा निर्देश देते हुए फटकार लगाई थी लेकिन कोई कर्रवाई नहीं हुई. एक बार फिर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी सरकार को चार सप्ताह के भीतर विमुक्त घुमंतू समुदाय संबधी शिकायत दूर करने के निर्देश दिए हैं.