दल-बदल विरोधी कानून में अयोग्य घोषित विधायक ले रहे पेंशन, आरटीआई से हुआ खुलासा!

 

हरियाणा विधानसभा में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित 11 विधायक पिछले कईं साल से पेंशन और अन्य सरकारी सुविधायों का लाभ ले रहे हैं. 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा विधानसभा के 6 और 2009 में विधानसभा स्पीकर ने 5 विधायकों को
दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया था.

आरटीआई से खुलासा हुआ है कि दल बदलने वाले कुल ग्यारह अयोग्य घोषित पूर्व विधायक कईं साल से पेंशन और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने हरियाणा विधानसभा सचिवालय में आरटीआई लगाकर यह जानकारी ली है.

25 जून 2004 को दल-बदल विरोधी कानून के तहत हरियाणा विधानसभा के पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान ने 6 विधायकों को अयोग्य घोषित किया था. जिसके बाद इस मामले को लेकर अयोग्य घोषित विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की अपील खारिज कर दी और स्पीकर के फैसले को बरकरार रखते हुए विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया. दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित विधायकों में कर्ण सिंह दलाल,राजेन्द्र सिंह बीसला, भीम सेन मेहता, जगजीत सांगवान और देव राज दीवान और शामिल थे.

2009 में हरियाणा जनहित पार्टी की टिकट पर चुनाव जीत कर कांग्रेस में शामिल हुए पाँच विधायक भी पेंशन समेत अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं. इनमें जिले राम शर्मा, राव नरेंद्र सिंह, धर्मसिंह छोकर, विनोद भ्याना और सतपाल सांगवान शामिल हैं. पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा द्वारा दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन पांचों विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया था. अयोग्य घोषित इन सभी पांच विधायकों की अपील 2014 से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है.

दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित हुए कुल 11 पूर्व विधायक कईं साल से 51,800 रुपये पेंशन और 10 हजार रुपये भत्ता प्रति माह ले रहे हैं.

आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने हरियाणा विधान सभा सचिवालय से आरटीआई में मिली जानकारी से यह खुलासा करते हुए इन सभी दलबदलू ग्यारह पूर्व विधायकों की पेंशन को जनता के पैसे की लूट बताया.

पीपी कपूर ने अयोग्य घोषित विधायकों को मिलने वाली पेंशन और अन्य सरकारी भत्तों को बंद करने और समस्त पेंशन, भत्ते, वेतन राशि की ब्याज सहित वसूली की मांग की.