शनिवार, 04 फ़रवरी 2023
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इंसाफ के लिए आवाज उठाना कोई जुर्म नहीं, यह जुर्म हम बार-बार करेंगे – हिमांशु कुमार



"कोर्ट ने मुझसे कहा पांच लाख जुर्माना दो तुम्हारा जुर्म यह है तुमने आदिवासियों के लिए इंसाफ मांगा. मैं जुर्माना नहीं दूंगा. जुर्माना देने का अर्थ होगा मैं अपनी गलती कबूल कर रहा हूं. मैं दिल की गहराई से मानता हूं कि इंसाफ के लिए आवाज उठाना कोई जुर्म नहीं है. यह जुर्म हम बार-बार करेंगे.”

2009 में छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के गोमपाड़ में 16 आदिवासियों के मारे जाने के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच की मांग ख़ारिज कर दी है। जस्टिस एएम खानविलकर और जे बी पारदीवाला की पीठ ने गोमपाड़ में 16 आदिवासियों के मारे जाने के मामले की जांच की मांग ख़ारिज करते हुए याचिकाकर्ता हिमांशु कुमार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया है.

साल 2009 में सुकमा जिले के गोमपाड़ में पुलिस ने 16 माओवादियों के मारे जाने का दावा किया था. लेकिन इस मामले में घायल हुई एक आदिवासी महिला ने दावा किया था कि सुरक्षाबलों ने गांव के निर्दोष लोगों की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की है. इसके बाद इस मामले में दंतेवाड़ा में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

लगभग 13 सालों तक चली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की भी बात कही थी. लेकिन स्वतंत्र जांच की बात टल गई. लेकिन इसी साल अप्रैल में केंद्र सरकार द्वारा हिमांशु कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ़ अदालत में आवेदन दिया गया और याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ ही जांच की मांग की गई.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में कहा, “यह आदिवासियों के न्याय मांगने के अधिकार पर बड़ा हमला है. इस फैसले के बाद आदिवासी न्याय मांगने में डरेगा.  इससे तो यही साबित होता है कि पहले से ही अन्याय से जूझ रहा आदिवासी अगर अदालत का रुख करेगा तो उसे सजा दी जाएगी. इसके साथ-साथ जो भी आदिवासियों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, उन लोगों के भीतर डर पैदा करेगा.”

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हिमांशु कुमार ने अपना बयान भी जारी किया है, हिमांशु कुमार ने अपने ब्यान में कहा, ” चंपारण में गांधी जी से जज ने कहा तुम्हें सौ रुपये के जुर्माने पर छोड़ा जाता है. गांधी जी ने कहा मैं जुर्माना नहीं दूंगा. कोर्ट ने मुझसे कहा पांच लाख जुर्माना दो तुम्हारा जुर्म यह है तुमने आदिवासियों के लिए इंसाफ मांगा. मैं जुर्माना नहीं दूंगा. जुर्माना देने का अर्थ होगा मैं अपनी गलती कबूल कर रहा हूं. मैं दिल की गहराई से मानता हूं कि इंसाफ के लिए आवाज उठाना कोई जुर्म नहीं है. यह जुर्म हम बार-बार करेंगे.”