बुधवार, 07 दिसंबर 2022
खेत-खलिहान

बाजरा खरीद से हरियाणा सरकार ने पल्ला झाड़ा, भावांतर भरोसे छोड़े किसान!



किसान अभी तक सरकारी खरीद के इंतजार में थे, इसलिए उन्होंने बाजरे को मंडी में ले जाना शुरू नहीं किया था. लेकिन इस योजना के ऐलान के बाद सरकारी खरीद का तो रास्ता ही बंद हो गया.

बीते मंगलवार सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने खरीफ सीजन 2021-22 में बाजरे की फसल की सरकारी खरीद से हाथ खड़े कर दिए. इस बार बाजरे की खरीद एमएसपी यानी न्यूनतन समर्थन मूल्य की बजाय ‘भावांतर भरपाई योजना’ के तहत होगी. इस साल प्रदेश में 2.71 लाख किसानों ने ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर बाजरे की सरकारी खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था मगर अब उनकी उमीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.

सरकार का कहना है कि पिछले सीजन में 7 लाख टन बाजरा एमएसपी पर खरीदा. पिछले सीजन में खरीदे बाजरे को सरकार बाजार में अच्छे दामों पर नहीं बेच पाई इसलिए उसे लगभग 600 करोड़ का घाटा हुआ था. इसके अलावा सरकार ने पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी हरियाणा में बाजरे की आवक का हवाला देते हुए इस बार एमएसपी पर खरीद करने से मना कर दिया है.

हैरानी की बात ये है कि इसी साल जून महीने में केंद्र सरकार ने बाजरे के दामों में 100 रुपये की बढ़ोतरी भी की थी. इस बढ़ोतरी के बाद बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2250 रूपए/प्रति क्विंटल हो गया था जो कि अबतक का सर्वाधिक दाम है.

हालांकि सरकार ने अपनी इस योजना में बाजरे का बाजार भाव 1650 रूपए/प्रति क्विंटल माना है. भावांतर योजना के तहत सरकार 600 रूपए/प्रति क्विंटल के हिसाब से किसान के खाते में डालेगी यानी अगर किसी किसान का बाजरा प्राइवेट मंडी में 1650 रूपए/प्रति क्विंटल बिका तो इसके बाद सरकार 600 रूपए/प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसा उसके खाते में डालेगी. इस तरह जो बाजार भाव और एमएसपी के बीच का अंतर है उसको सरकार अपनी भावांतर भरपाई योजना के तहत भरने का काम करेगी.

भावांतर भरपाई योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने ‘मेरी फ़सल,मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया है. इस योजना में भी सरकार ने इलाके की औसत उपज के हिसाब से भरपाई करने की बात कही है. पहले एमएसपी पर खरीद के दौरान सरकार प्रति एकड़ उपज की सीमा तय करती थी और केवल उतनी ही उपज की एमएसपी पर खरीद करती थी. हालांकि इस योजना में सरकार ने एक निश्चित उपज सीमा का ऐलान तो नहीं किया है लेकिन इलाके की औसत उपज के तहत भावांतर भरपाई का लाभ देने की बात सरकार कह रही है.

अब सवाल खड़ा होता है कि अलग-अलग इलाकों में बाजरे की अलग-अलग औसत झड़त आती है तो क्या सरकार इलाके के हिसाब से अलग-अलग उपज सीमा तय करेगी या पूरे हरियाणा में एक ही औसत उपज सीमा तय की जाएगी और उसके तहत ही भुगतान होगा. इसको लेकर सरकार ने अभी स्तिथि स्पष्ट नहीं की है.

सरकार ने अपनी तरफ से बाजरे का बाजार भाव 1650 रूपए/प्रति क्विंटल मान लिया है लेकिन वास्तव में बाजार भाव इस से कम है. आज 30 सितम्बर, 2021 को रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और गुडगांव मंडी में बाजरे का बाजार भाव मात्र 1300 से 1400 रुपये/प्रति क्विंटल है. इसका मतलब ये है कि यदि किसान 1300 रुपये/प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजार भाव पर अपना बाजरा बेचता है और 600 रुपये/प्रति क्विंटल पर उसको सरकार देती है, तो उस किसान का बाजरा बिका 1900 रूपए/प्रति क्विंटल. इस हिसाब से किसान को प्रति क्विंटल 350 रूपए का नुकसान होगा क्योंकि बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2250 रुपये/प्रति क्विंटल है.

किसान अभी तक सरकारी खरीद के इंतजार में थे, इसलिए उन्होंने बाजरे को मंडी में ले जाना शुरू नहीं किया था. लेकिन इस योजना के ऐलान के बाद सरकारी खरीद का तो रास्ता ही बंद हो गया. ऐसे में किसान के पास अपना बाजरा बेचने के लिए एकमात्र जगह बची है प्राइवेट मंडी. हमने इस विषय में मंडियों में बैठें व्यापारियों से भी बात की तो उनका कहना है कि जब मंडी में बाजरा भारी मात्र में आना शुरू हो जाएगा तो वर्तमान में बाजरे का बाजार में जो भाव है उसके और भी कम होने की संभावनाएं हैं क्योंकि सरकारी खरीद न होने के कारण सारा बाजरा प्राइवेट मंडियों में ही आएगा.

ऐसे में भाजपा सरकार का बार बार एमएसपी को लेकर दावा करना. एक-एक दाने की खरीद करने की बात कहना ये महज भाषण ही साबित होता नजर आ रहा है.