शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
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विमुक्त घुमंतू जनजातियों को अलॉट बजट में से एक पैसा भी नहीं खर्च कर पाई सरकार



रेनके कमीशन 2006 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 50 फीसदी विमुक्त घुमंतू अवं अर्धघुमंतू जनजाति के पास दस्तावेज नहीं हैं वहीं 90 फीसदी लोगों के पास मकान नहीं हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से सम्बंधित स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट संख्या 31 के अनुसार विमुक्त, घुमंतू और अर्धघुमंतू जनजातियों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिये बीते वित्त वर्ष में अलॉट किये गए बजट में से एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया।

केंद्र सरकार की ओर से विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू समूह के लिये वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 200 करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया गया है। करीबन 15 से 20 करोड़ की विमुक्त, घुमंतू और अर्धघुमंतू जनजातियों के लिये यह बजट ऊँट के मुंह में जीरे के समान है लेकिन यहां तो ऊँट के मुंह से जीरा भी छीन लिया गया है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अन्दर आने वाले (DWBDNC) डेवलपमेंट एंड वेलफेयर बॉर्ड फॉर डिनोटिफाइड नोमेडिक कम्युनिटी के लिये वित्त वर्ष 2021-22 में केवल 50 करोड़ का बजट अलॉट हुआ था जिसे बाद में घटाकर 40.40 करोड़ किया गया लेकिन इसमें से भी एक पैसा खर्च नहीं किया गया।

वहीं आने वाले 2022-23 वित्त वर्ष के लिये बजट को 40 करोड़ से घटाकर 28 करोड़ कर दिया गया है।

2018 की इदाते कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत में 1262 विमुक्त, घुमंतू और अर्धघुमंतू, जनजातिया हैं जिनकी आबादी करीबन 15 से 20 करोड़ है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी आबादी के लिये पांच वर्ष में केवल 200 करोड़ का बजट और ऊपर से एक साल बीत जाने के बाद भी उस बजट में एक पैसा तक खर्च नहीं करना सरकार की इस वर्ग के प्रति उदासीनता है।

अंग्रेजी शासन कल के दौरान 1871 में क्रिमिनल ट्राईब एक्ट की भुगतभोगी जनजातियों के साथ आजादी के 70 साल बाद भी न्याय नहीं किया जा रहा है। रेनके कमीशन 2006 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 50 फीसदी विमुक्त घुमंतू अवं अर्धघुमंतू जनजाति के पास दस्तावेज नहीं हैं वहीं 90 फीसदी लोगों के पास मकान नहीं हैं।

ऐतिहासिक दृष्टि से विमुक्त-घुमंतू और अर्ध घुमंतू जनजातियां जल-जंगल और जमीन के रक्षक रहे हैं. विमुक्त घुमंतू जनजातियों ने एक लंबा दौर जंगलों में रहकर बिताया है. जंगल के रास्तों के जानकार होने और गोरिल्ला युद्ध कला में निपुण होने के चलते ये लोग अंग्रेजों  को चकमा देने में कामयाब रहे. विमुक्त घुमंतू जनजातियों की गोरिल्ला युद्ध में निपुणता के चलते अंग्रेजी हुकूमत इन जनजातियों से परेशान थी. इन लोगों पर दबिश डालने के लिए अंग्रेजों ने 1871 में क्रिमिनल ट्राइब एक्ट लगा दिया. क्रिमिनल ट्राइब एक्ट के बाद  इन जनजातियों पर अंग्रेजी हुकूमत का दमन बढ़ गया. 1857 की क्रांति में अपनी बड़ी भूमिका निभाने वाली विमुक्त घुमंतू जनजातियों की स्थिति आजाद भारत में दयनीय है.

देश और समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े विमुक्त घुमंतू जनजाति समूह की हर सरकार में अनदेखी हुई है।

DNT को अलॉट किये गए बजट को लेकर गांव-सवेरा ने पहले भी एक रिपोर्ट की थी। जिसे आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।


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