शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
खेत-खलिहान

गन्ने की 72 करोड़ बकाया पेमेंट के लिए सड़कों पर उतरे पंजाब के दोआबे के किसान



इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गन्ना किसानों के साथ बैठक की अध्यक्षता की थी और कुछ महीने पहले भुगतान का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है.

पंजाब के जालंधर-लुधियाना नेशनल हाइवे पर गन्ने की बकाया पेमेंट न मिलने के कारण पिछले पांच दिन से आंदोलित किसानों ने हाइवे को दोनों तरफ से जाम कर दिया है. किसानों ने एक चीनी मिल द्वारा अपने बकाया 72 करोड़ रुपये के भुगतान में देरी का विरोध करते हुए 8 अगस्त को जालंधर-लुधियाना नेशनल हाइवे पर आंदोलन शुरू किया था.

किसानों ने भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) के बैनर तले चीनी मिल के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था. बीकेयू (दोआबा) के अध्यक्ष मनजीत सिंह राय ने कहा, “पंजाब सरकार ने हमारे विरोध को हल्के में लिया है, इसलिए हमने आज सुबह 10 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग के दूसरी तरफ जाम कर दिया है. हालांकि एंबुलेंस, स्कूल बसों और अन्य आपातकालीन वाहनों को गुजरने दिया जाएगा.”

इस मामले को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के तहत विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि आगे की कार्रवाई के लिए बैठक कर चुके हैं और आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दे चुके हैं. धरना स्थल पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर लगाए गए थे. किसानों का कहना है कि जब तक किसानों के खातों में 72 करोड़ रुपये ट्रांसफर नहीं हो जाते, वे पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार हमारी मांग को तुरंत पूरा नहीं करती है तो हम अपने आंदोलन को राज्यव्यापी आंदोलन में बदल देंगे.

गन्ना बकाया भुगतान का विरोध कर रहे किसानों ने गुरुवार को रक्षा बंधन के चलते यहां राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से से सड़क जाम हटा लिया था. किसानों ने होशियारपुर, नवांशहर और नकोदर की ओर जाने वाली सड़कों को भी ट्रैक्टर खड़े कर जाम कर दिया था, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया था.

धरनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है और आंदोलन स्थल के पास वाटर कैनन भी तैनात किए गए हैं.

धरने में शामिल गुरबचन सिंह ने हमें बताया, “किसानों को अनिश्चितकालीन धरना देने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि अधिकारियों ने किसानों के 72 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान नहीं किया है, जिसमें 2019-2020 के 30 करोड़ रुपये, 2020-2021 के 6 करोड़ रुपये और वर्ष 2021-22 के 36 करोड़ रुपये हैं.”

किसान चीनी मिल मालिकों के साथ-साथ राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ चार-पांच बैठकों के बावजूद बकाया नहीं देने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार से चीनी मिल को जब्त करने और कठिन समय का सामना कर रहे किसानों को बकाया भुगतान जारी करने का भी आग्रह किया है.

इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गन्ना किसानों के साथ बैठक की अध्यक्षता की थी और कुछ महीने पहले भुगतान का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है.

सभी किसान संगठनों को अपने गांवों से ट्रैक्टर लाने के निर्देश दिए गए हैं. दोआबे के गांवों से ट्रैक्टर आने शुरू हो गए हैं. अकेले फिल्लौर-गोरया क्षेत्र से 59 ट्रैक्टर आए हैं. धरने को लेकर विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों ने आज कपूरथला में बैठक की. आलू उत्पादक संगठनों जैसे अन्य संगठनों ने भी धरने के साथ एकजुटता दिखाते हुए अपने ट्रैक्टर फगवाड़ा राजमार्ग पर लेकर पहुंचे हैं. बीकेयू दोआबा के उपाध्यक्ष दविंदर सिंह संधवान ने कहा, “अगर सरकार नहीं सुनती है, तो एसकेएम के सभी 31 यूनियनों को शामिल करते हुए किसानों की एक पंचायत 25 अगस्त को फगवाड़ा या अन्य जगहों पर आयोजित की जाएगी. 17 अगस्त को 10,000 किसानों के एसकेएम के जत्थे भी लखीमपुर खीरी जाएंगे. वे 18, 19 और 20 अगस्त को वहां रहेंगे और 25 अगस्त को विरोध प्रदर्शन करने के बाद 21 अगस्त को वापस लौटेंगे.”