सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
खेत-खलिहान

जमाखोरी रोकने के लिए पुराने कानून का सहारा, सही निकली किसानों की आशंका



सरकार एक ओर तो कृषि कानून के जरिये आवश्यक वस्तुओं पर स्टॉक की सीमा हटाने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम के जरिए स्टॉक की निगरानी और डिजिटाइजेशन पर वाहवाही लूटना चाहती है

किसान जिन तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं उनमें नया ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ भी शामिल है. इस अधिनियम को लेकर सरकार का दोहरा चरित्र सामने आया है. सरकार एक ओर तो कृषि कानून के जरिये कृषि उपजों पर स्टॉक लिमिट हटाती है वहीं दूसरी ओर जमाखोरी रोकने के लिए पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम की मदद ले रही है. इतना ही नहीं, आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक पर निगरानी रखने के लिए डिजिटाइजेशन का प्रचार कर वाहवाही लूटने की कोशिश की जा रही है.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे मोदी सरकार ने कालाबाजारी को रोकने के लिए आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक को ऑनलाइन करने का कदम उठाया है. सरकार ने 22 आवश्यक वस्तुओं के थोक व खुदरा मूल्यों की निगरानी का दावा किया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया, “उपभोक्ता हित में देश में दालों के स्टॉक का डिजिटाइजेशन! खाद्यान्नों की ब्लैक मार्केटिंग रोकने व बफर स्टॉक के निर्माण में सहायक, अब दालों के स्टॉक की जानकारी अब एक क्लिक पर है उपलब्ध.”

अब सवाल है कि अगर पुराने आवश्ययक वस्तु अधिनियम के तहत उठाए गए ये कदम इतने प्रभावी हैं कि इसके लिए बाकायदा प्रधानमंत्री का फोटो लगाकर प्रचार किया जा रहा है तो फिर कृषि कानून के जरिये आवश्यक वस्तु अधिनियम को बदलने की क्या जरूरत है जिसका किसान भी पिछले दस महीने से विरोध कर रहे हैं.

आंदोलनकारी किसान स्टॉक लिमिट हटने से जमाखोरी की आशंका जताते हुए पहले दिन से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. अब ये आशंकाएं सही साबित हो रही है। जमाखोरी रोकने के लिए सरकार को पुराने कानून का सहारा लेना पड़ रहा है. यही सरकार कृषि कानून के जरिये स्टॉक लिमिट हटाने को ऐतिहासिक बता रही थी.

वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयक के ट्विट पर प्रतिक्रिया देते हुए खेती-किसानी को प्रमुखता से कवर करने वाले पत्रकार अजीत सिंह ने लिखा “कृषि कानून लाकर जमाखोरी की खुली छूट दी तो उसे ऐतिहासिक कदम बताया अब जमाखोरी रोकने के लिए पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम का सहारा लिया तो इसकी भी वाहवाही बटोरी जा रही है. नीतिगत विरोधाभास का गजब उदाहरण है.”

इसको लेकर बाकायदा पीआईबी (प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो) ने ‘उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय’ की ओर से प्रेस रिलीज भी जारी की है. प्रेस रिलीज में 11 हजार से अधिक स्टॉकिस्टों द्वारा सरकारी पोर्टल पर दालों का करीबन 31लाख मीट्रिक टन भंडार घोषित करने का दावा किया गया है.

सरकार के अनुसार ‘उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय’ का उपभोक्ता मामले विभाग 22 आवश्यक खाद्य वस्तुओं के खुदरा और थोक मूल्यों की निगरानी कर रहा है. यह विभाग कालाबाजारी पर अंकुश लगाने, बफर स्टॉक बनाने और असामान्य मूल्य वृद्धि को कम करने के लिए समय पर भंडार सुनिश्चित करने का काम करता है.

तीन नये कृषि कानूनों में से एक ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन’ के लागू होने से कई कृषि उत्पादों के भंडारण पर कोई रोक नहीं होगी और कोई भी व्यापारी बिना लिमिट स्टॉक कर सकेगा. इसका किसान लगातार विरोध कर रहे हैं. लेकिन अब सरकार द्वारा पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत उठाये गए कदम का प्रचार करना कहीं न कहीं किसानों की बात पर मुहर लगाता है कि कृषि कानून किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। इससे जमाखोरी बढ़ेगी।