बुधवार, 28 सितम्बर 2022
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मुख्यमंत्री खट्टर द्वारा किए गए वादों के पूरे होने के इंतजार में विमुक्त-घुमंतू जनजातियां!


2017 में मुक्ति दिवस पर फतेहाबाद रैली के दौरान मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री

"डीएनटी विकास बोर्ड बनने के बाद भी विमुक्त घुमंतू जनजातियों को कोई लाभ नहीं मिला. हरियाणा में करीबन दस हजार डीएनटी परिवार ऐसे हैं जिनके सिर पर छत तक नहीं है. 2017 में मुख्यमंत्री खट्टर ने इन लोगों को जमीन देकर पक्के मकान बनाने का वादा किया था लेकिन अब तक इन बेघर डीएनटी परिवारों को कुछ नहीं मिला."

10 सितंबर 2017 को हरियाणा के फतेहाबाद में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में विमुक्त घुमंतू जनजाति का विमुक्ति दिवस मनाया गया. इस मौके पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने अपने कईं कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में विमुक्त-घुमंतू जनजातियों के विकास के लिए अनेक वादे किए. गांव सवेरा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा इन जनजातियों के लिए मंच से किए गए वादों की पड़ताल की है. दिलचस्प बात है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंच से खुद को विमुक्त-घुमंतू जनजातियों का धर्म भाई बताया था.

इससे पहले मुख्यमंत्री खट्टर ने 2015 में पानीपत में विमुक्त घुमंतू समाज की रैली को संबोधित करते हुए खुद को घुमंतू ही बता दिया था. उन्होंने 2015 की पानीपत की रैली में कहा, “मैनें देश के अलग-अलग हिस्सों में घूम-घूमकर काम किया है. मैं भी आप लोगों की तरह घुमंतू ही हूं.” 

2017 में मुख्यमंत्री के वादे

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने फतेहबाद के मंच से डीएनटी समाज के लोगों को संबोधित करते हुए कईं वादे किए.

  1. करनाल, जींद, हिसार और फतेहाबाद में विमुक्त घुमंतू जनजाति के छात्रों के लिये हॉस्टल बनाने का वादा.
  2. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 9,920 बेघर डीएनटी परिवारों को पक्के मकान बनाकर देेने का वादा.
  3. पंचकुला में विमुक्त घुमंतू जनजातियों को समर्पित डीएनटी भवन का निर्माण करवाने का वादा.
  4. विमुक्त एवं घुमंतू जनजातियों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये जातिवार जनगणना करवाने का वादा
  5. हर तहसील स्तर पर विमुक्त घुमंतू जनजातियों की समस्या सुनने के लिए अंत्तोदय अधिकारी की नियुक्ति का वादा.

मुख्यमंत्री के वादों की पड़ताल

मुख्यमंत्री के पहले वादे के अनुसार डीएनटी छात्रों के लिए प्रदेश के चार जिलों हिसार, जींद, करनाल और फतेहाबाद में जगह चयनित कर छात्रावास बनाए जाने थे.       

पड़ताल करने पर पता चला कि हिसार, जींद, करनाल और फतेहाबाद में डीएनटी समुदाय के छात्रों के लिए छात्रावास बनाना तो दूर जिस जमीन पर ये छात्रावास बनेंगे उसके लिए जमीन तक नहीं ली गई है. जींद में पहले से चल रहा होस्टल पिछले दो साल से बंद है. जींद के रहने वाले और डीएनटी समाज से आने वाले विकास ने बताया कि पिछले साल मुझे ढूंढने से भी इस तरह का कोई होस्टल नहीं मिला. जींद में डीएनटी छात्रों के लिए कोई होस्टल नहीं बनाया गया है जींद में होस्टल सीएम की 2017 की घोषणा से कईं दशक पहले से चला आ रहा है.

यह होस्टल टपरीवास समाज के छात्रों के लिए बनाया गया था. सरकार की डीएनटी छात्रों को इसी होस्टल में एडजस्ट करने की योजना थी लेकिन यह होस्टल पिछले दो साल से बंद पड़ा है. वहीं फतेहाबाद में भी इसी तरह के पुराने चले आ रहे होस्टल में डीएनटी छात्रों को शिफ्ट करने की योजना है साथ ही करनाल और हिसार में अब तक अस्थाई होस्टल भी नहीं बनाया गया है.   

इसके साथ ही मुख्यमंत्री खट्टर ने अन्य 18 जिलों में अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए बने छात्रावासों में 25 फीसदी सीटें विमुक्त और घुमंतू जनजाति के बच्चों के लिए सुरक्षित रखे जाने का भी वादा किया था. पड़ताल करने पर पता चला कि इन जनजाति के बच्चों को मिलने वाली 25 फीसदी सीट तो छोड़िए अनूसुचित जाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए भी इन छात्रावासों में कोई खास सुविधाएं नहीं हैं.

सीएम खट्टर ने रैली के दौरान दूसरा वादा किया कि हरियाणा में 9,920 ऐसे डीएनटी परिवार हैं जिनके पास घर नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने मंच से इन बेघर डीएनटी परिवारों को प्रधानमत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान बनाकर देने का वादा किया. लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी इन दस हजार बेघर डीएनटी परिवारों को मकान देना तो दूर इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.  

फतेहाबाद कार्यक्रम के दौरान हजारों विमुक्त घुमंतू जनजाती के लोगों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री खट्टर ने पंचकुला में विमुक्त घुमंतू जनजाति समाज के लोगों को समर्पित डीएनटी भवन का निर्माण करने का भी वादा किया. पड़ताल करने पर पता चला कि पंचकुला में भवन बनाना तो दूर पिछले चार साल में डीएनटी भवन बनाने के लिए जमीन तक नहीं खरीदी गई है. 

मुख्यमंत्री ने अगले वादे में विमुक्त एवं घुमंतू जनजातियों की जातिगत जनगणना करवाने  की बात कही. सीएम खट्टर ने तीन महीने में जातिगत सर्वे का काम पूरा करने की घोषणा की थी. तीन महीने छोड़िए 2017 से 2021 आ चुका है लेकिन इन जनजातियों की जातिवार जनगणना के आंकड़े सरकार सार्वजनिक नहीं कर पाई है.    

आगे सीएम खट्टर ने घोषणा की कि जनकल्याण विभाग के तहत तहसील स्तर पर एक-एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी. ये कर्मचारी डीएनटी समाज के लोगों तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का काम करेंगे और इन अधिकारियों को अंत्योदय अधिकारी के नाम से जाना जाएगा. पड़ताल करने पर पता चला कि तहसील स्तर पर डीएनटी समुदाय की बात सुनने वाले अधिकारियों की कोई नियुक्ति नहीं की गई है.

फतेहाबाद के रहने वाले और गाड़िया लौहार समाज के बीच काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हरि ओम ने फतेहाबाद में डीएनटी छात्रों के लिए किसी भी तरह के होस्टल के निर्माण नहीं होने की पुष्टि करते हुए फतेहाबाद में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए वादों पर कहा “शुरुआत में सरकार द्वारा डीएनटी विकास बोर्ड बनाए जाने पर लगा था कि डीएनटी समाज के लिए सरकार सजग है. लेकिन बोर्ड बनाने के बाद भी विमुक्त घुमंतू जनजातियों को कोई लाभ नहीं मिला. हरियाणा में करीबन दस हजार डीएनटी परिवार ऐसे हैं जिनके सिर पर छत तक नहीं है. खुद मुख्यमंत्री साहब ने इन लोगों को जमीन देकर पक्के मकान बनाने का वादा किया था लेकिन अब तक इन बेघर डीएनटी परिवारों को कोई पक्के मकान नहीं दिए गए हैं.”

सामाजिक कार्यकर्ता हरि ओम बागड़ी ने डीएनटी विकास बोर्ड के गठन पर तंज कसते हुए कहा, “बोर्ड का गठन कुछ ऐसा है जैसे सरकार ने पुरानी इमारत पर रंग-रोगन से पुताई कर दी हो लेकिन इमारत के अंदर कोई काम नहीं हुआ. अगर ऐसे ही चलता रहा तो कुछ समय बाद इस पुताई का रंग भी धुल जाएगा.”

हरियाणा सरकार द्वारा डीएनटी जनजातियों के विकास को लेकर राजीव जैन की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ने 2016 में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी. रेनके कमीशन और इत्तादे कमीशन की तरह जैन कमेटी ने भी राज्य स्तर पर इन जानजातियों के विकास के लिए कईं सिफारिशें की हैं. लेकिन रिपोर्ट आने के 5 साल बाद भी सरकार ने जैन कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की.

डीएनटी समाज के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठन लगातार जैन कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और इसकी सभी सिफारिशें लागू करने की मांग करते रहे हैं. वहीं इस पर डीएनटी बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा, “रिपोर्ट आ चुकी है और रिपोर्ट की अधिकतर सिफारिशें लागू भी कर दी गई हैं,”  

डीएनटी विकास बोर्ड का पक्ष

सीएम खट्टर द्वारा किए गए इन वादों पर विमुक्त-घुमंतू जनजाति विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ बलवान ने अपना पक्ष रखते हुए बताया,“जींद और फतेहाबाद में किराए की बिल्डिंग में0 विमुक्त घुमंतू जातियों के लिए होस्टल चल रहे हैं.करोना काल की वजह से यह हॉस्टल दो साल से बंद हैं और तीन हॉस्टल रोहतक, हिसार और करनाल में किराए की बिल्डिंग पर चलाए जाएंगे. वहीं पंचकूला में डीएनटी भवन के निर्माण पर उन्होंने कहा, “डीएनटी भवन के निर्माण की फाइल चली हुई है, जल्द ही काम पूरा हो जाएगा.

डीएनटी समाज के बेघर लोगों को मकान देने के सवाल पर डीएनटी बॉर्ड के चेयरमैन डॉ बलवान ने बताया, “विमुक्त घुमंतू जनजातियों के बेघर परिवारों को सरकारी जमीन पर घर देने के लिए तीन जगह जींद असंध और फरीदाबाद में टेंडर किए जा चुके हैं.” वहीं विमुक्त घुमंतू जनजातियों की जातिवार गणना के सवाल पर उन्होंने कहा, “हाउस-टू-हाउस जल्द ही सर्वे शुरू होगा क्योंकि भारत सरकार ने भी राज्य सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि जल्द ही विमुक्त घुमंतू जनजातियों का सर्वे कराया जाए.”