सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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पर्यावरण नियमों को ताक पर रखने वाली कंपनियों के लिए मुख्यमंत्री खट्टर ने की लॉबिंग!



एनजीटी ने सीएम द्वारा केमिकल कंपनियों को 6 महीने की रियायत देने को गैर-कानूनी बताते हुए कहा, “राज्य सरकार के पास केमिकल कंपनियों को रियायत देने का कोई अधिकार नहीं है.”

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा केमिकल कपंनियों को एनवायरमेंट क्लीयरेंस दिलाने के लिए लॉबिंग का मामला सामने आया है. यमुनानगर स्थित 15 केमिकल कंपनियां पर्यावरण नियमों का पालन किये बिना धड़ल्ले से चल रही थी. कई साल बाद ये कंपनियां पर्यावरण अनुमति हासिल करने के योग्य नहीं थी लेकिन ऐसे में खुलासा हुआ है कि मुख्यमंत्री खट्टर ने इस साल मार्च में इन केमिकल कंपनियों को पर्यावरण मंत्रालय से एनवायरमेंट क्लीयरेंस दिलाने के लिए लॉबिंग की है.     

यह खुलासा अंग्रेजी की वेबसाइट ‘द मॉर्निंग कॉन्टेक्स्ट’ के पत्रकार अक्षय देशमाने की रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘फॉर्मेल्डिहाइड’ नाम का केमिकल बनाने वाली 15 कंपनियों के लिए लॉबिंग की है. हरियाणा के यमुनानगर में स्थित ये कंपनियां प्लाईवुड के कारोबार में प्रयोग होने वाले केमिकल पदार्थ ‘फॉर्मेल्डिहाइड’ बनाने का काम करती हैं.

साल 2009 के बाद शुरू हुई ये कंपनियां अनिवार्य पर्यावरण अनुमति लिए बिना ही कारोबार कर रही थी. यह पर्यावरण से संबधी देश के मुख्य कानून जैसे पर्यावरण प्रभाव आकलन, 2006 का उल्लंघन है. किसी भी केमिकल कंपनी को उसके स्थापित होने के दौरान ही एनवायरमेंट क्लीयरेंस दी जाती है ताकि उसके सामने आने वाली पर्यावरण संबंधी दिक्कतों को देख-परख कर एनवायरमेंट क्लीयरेंस दी जा सके. लेकिन हरियाणा में अलग ही मामला सामने आया है. कंपनियां एक दशक से चल रही थी और एनवायरमेंट क्लीयरेंस की मांग अब की जा रही है. ऐसी कंपनी जो पहले से चली आ रही हैं उसकी एनवायरमेंट क्लीयरेंस की मांग और उसे अनुमति देना एक तरह से पहले हो चुके पर्यावरण के नुकसान को अनदेखा करने जैसा है.  

हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन बोर्ड के सामने 2019 में यह बात सामने आई थी कि यमुनानगर में 15 केमिकल कंपनियां खुले तौर पर पर्यावरण के नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं. जिसके बाद हरियाणा स्टेट पॉल्युशन बोर्ड ने इन कंपनियों के केमिकल बनाने पर रोक लगा दी थी. लेकिन इसके बाद 23 अक्टूबर 2020 को हरियाणा में फॉर्मेल्डिहाइड केमिकल बनाने वाली एसोशिएशन ने हरियाणा सरकार से केमिकल बनाने की अनुमति देने की अपील की जिसके बाद 11 नवंबर 2020 को इन सभी कंपनियों को केमिकल बनाने के लिए छह महीने की रियायत दे दी गई.

मुख्यमंत्री खट्टर द्वारा पर्यावरण मंत्री को लिखा पत्र

हालांकि इस बीच 2020 में केंद्र सरकार ने इस तरह का नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें पहले से स्थापित केमिकल कंपनियों को बाद में एनवायरमेंट क्लीयरेंस दी जा सकती है. लेकिन इसके खिलाफ कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से यह अभी लागू नहीं किया जा सका है.

बावजूद इसके हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर 3 मार्च को पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर को केमिकल कंपनियों की लॉबिंग करते हुए पत्र लिखते हैं. वहीं सीएम खट्टर द्वारा पर्यावरण मंत्री को लिखे पत्र के तीन महीने बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केमिकल कंपनियों को 6 महीने की रियायत देने की बात को गैर-कानूनी बताते हुए कहा, “राज्य सरकार के पास केमिकल कंपनियों को रियायत देने का कोई अधिकार नहीं है.”

केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में सीएम खट्टर ने पर्यावरण की गंभीरता की अनदेखी करते हुए लिखा कि यमुनानगर में चलने वाली प्लाईवुड मार्केट एशिया की सबसे बड़ी मार्केट है. ऐसे में अगर यहां की केमिकल फैक्ट्रियों को काम करने में दिक्कत आती है तो प्लाईवुड इंडस्ट्री का बड़ा नुकसान होगा.” प्रदेश का पर्यावरण मंत्रालय खुद सीएम मनोहर लाल खट्टर के पास है लेकिन वे खुद ही पर्यावरण को लेकर चिंचित होने की बजाए केमिकल कंपनियों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.  

वहीं सरकार ने इसका ठीकरा लॉकल अथॉरिटी पर फोड़ते हुए जवाब दिया, “इन केमिकल कंपनियों को काम करने की अनुमति लॉकल अथॉरिटी से मिली थी जिनके पास इस विषय में ज्यादा जानकारी नहीं थी. इस तरह की छोटी केमिकल कंपनियों को पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड जैसे अन्य राज्यों में भी अनुमति मिली हुई है.”   

सीएम खट्टर ने केमिकल कंपनियों की लॉबिंग क्यों की? इस सवाल के जवाब में सरकार ने कहा, “इस मामले में बड़े स्तर पर जनता का हित जुड़ा हुआ है. यमुनानगर एशिया की सबसे बड़ी प्लाईवुड मार्केट है. इस केमिकल के बिना प्लाईवुड मार्केट का काम नहीं चल सकता है. लोगों के रोजगार को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.”