शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
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विमुक्त घुमंतू परिवारों पर जगह खाली करने का दबाव, प्रशासन ने बस्ती की बिजली काटी!



"राशन लेने के लिए डिप्पो पर जाते हैं तो हमें राशन देने से मना कर दिया जाता है. डिप्पो वाला सभी को राशन देता है लेकिन जब हमारी बारी आती है तो हमारे नाम का राशन खत्म हो जाता है. दो दिन पहले भी प्रशासन के लोग आए थे उन्होने हमें एक हफ्ते के अंदर जगह खाली करने को कहा है."

हरियाणा के यमुनानगर में न्यायायिक परिसर और उपायुक्त निवास से महज एक किलोमीटर की दूरी पर 50 से ज्यादा घुमंतू परिवार पिछले 15 साल से झुग्गियों में रह रहे हैं. यमुनानगर-जगादरी रोड़ पर करीबन चार कनाल के खाली पड़े प्लॉट में घुमंतू परिवार पिछले 15 साल से झुग्गी बनाकर रह रहे हैं. लेकिन अब इन 50 से ज्यादा घुमंतू परिवारों पर जगह खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

फेरी का काम करने वाले भरत ने बताया,“हमे यहां से हटाने के लिए दो महीने पहले प्रशासन के कुछ लोग आए थे. उसके बाद हम अपनी शिकायत लेकर मेयर से पास गए जिसके बाद घुमंतू विकास बोर्ड के कुछ लोग भी हमारे पास आए थे. घुमंतू बोर्ड के नेताओं ने आश्वासन दिया था कि जब तक सभी परिवारों को रहने के लिए दूसरी जगह नहीं दी जाएगी तब तक यहां से नहीं हटाया जाएगा. लेकिन प्रशासन के लोग बार-बार आकर जगह खाली करने के लिए बोल रहे हैं.”

भरत से बात करते देखकर आस-पास की झुग्गियों के लोग भी आ गए. ग्यारहवीं क्लास में पढ़ने वाले कर्ण ने बताया,

“हमारे पास राशन कार्ड भी है और वोटर कार्ड भी लेकिन जब हम राशन लेने के लिए डिप्पो पर जाते हैं तो हमें राशन देने से मना कर दिया जाता है. डिप्पो वाला सभी को राशन देता है लेकिन जब हमारी बारी आती है तो हमारे नाम का राशन खत्म हो जाता है. दो दिन पहले भी प्रशासन के कुछ लोग आए थे उन्होंने जगह खाली करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया, बताओं इतने कम समय में हम लोग यहां से हटकर कहां जाएंगे.”                  

करीबन 35 साल के कृष्ण ने बताया,”हम लोगों पर एक दूसरी जगह जाने का दबाव बनाया जा रहा है. नई जगह शहर से 5-6 किलोमीटर दूर है. वहां जाएंगे तो हमारा सारा रोजगार खत्म हो जाएगा. अभी लॉकडाउन से पहले तक हमारे बच्चे स्कूल जाते थे अब फिर से स्कूल शुरू हो जाएंगे अगर हम शहर से 5 किलोमीटर दूर चले गए तो हमारे बच्चे शहर में स्कूल कैसे आएंगे. हमारी मांग है कि हम लोगों को यहीं रहने दिया जाए यह भी तो सरकारी जमीन है.”

विमुक्त घुमंतू परिवारों के पास जीवन की मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं. इनके पास न रहने के लिए मकान है, न पीने के पानी की सुविधा और न ही खाने के लिए सरकारी राशन की उपलब्धता. 

मकान न होने के कारण ये लोग मौसम की हर मार झेल रहे हैं. बारिश के चलते झुग्गियों के आस-पास पानी भर गया है. पानी ठहरने से तमाम तरह की बीमारियां पनपने का खतरा बन रहा है.

वहीं सुरेश ने बताया, “हम लोगों को लगातार प्रशासन द्वारा परेशान किया जा रहा है. बिजली विभाग के कर्मचारियों ने हमारी बिजली काट दी और बिजली की तार भी साथ ले गए. सरकारी अधिकारी हमें परेशान कर रहे हैं ताकि हम यहां से जगह खाली कर दें. सुरेश ने बताया कि पिछले महीने जो अधिकारी आया था उसने तो जगह खाली नहीं करने पर झुग्गियों में आग लगाने तक की धमकी दी थी. सरकार की कोई भी सुविधा हम लोगों तक नहीं पहुंच रही है. शहर में गरीबी रेखा से नीचे वालों के लिए सरकारी मकान बने हैं. जब उनके पास गए तो बोले मकान के लिए ढाई लाख रुपये लगेंगे, बताओं हमारे पास इतने पैसे कहां से आंएगे?

बस्ती में रहने वाले एक और सदस्य ने बताया,”हमारे पास वोटर कार्ड समेत सभी कागज हैं. चुनाव के वक्त सभी नेता हमारे पास वोट मांगने के लिए आते हैं, नेता लोग मकान बनाने का वादा करते हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई हमारा हाल जानने नहीं आता. कईं बार मकान देने के नाम पर सर्वे करने वाले भी आए, मकान देने की पर्ची भी दी लेकन आजतक कोई मकान नहीं मिला.

मकान के लिए किए गए सर्वे की रशीद

इस मामले में गांव-सवेरा ने विमुक्त घुमंतू विकास बोर्ड के सदस्य ओम पाल से फोन पर बात की.

उन्होंने कहा, “जिस जगह पर घुमंतू परिवार रह रहे हैं वह किसी की प्राइवेट जगह है. इन परिवारों को शहर के आस-पास रहने के लिए दो जगह दिखाई हैं जहां पर बिजली, पानी और स्कूल की व्यव्स्था भी की जाएगी लेकिन ये लोग हमारी बात नहीं मान रहे हैं.”

बता दें कि हरियाणा सरकार के सर्वे के अनुसार प्रदेश में दस हजार ऐसे परिवार हैं जिनके पास अपने मकान नहीं है. 2017 में एक रैली के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर प्रदेश के दस हजार बेघर परिवारों को मकान देने का वादा कर चुके हैं. लेकिन आज तक इस दिशा नें कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. विमुक्त घुमंतू जनजातियों की 15 से 20 करोड़ की ऐसी आबादी है जिन तक पहुंचते-पहुंचते सारी सरकारी योजनाएं दम तोड़ देती हैं.