SIR प्रक्रिया के दौरान BJP–RSS से जुड़े लोगों की नियुक्ति पर बवाल, प्रशासन ने मानी ‘गलती!
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मध्य प्रदेश के दतिया जिले में तब विवाद खड़ा हो गया जब कथित तौर पर भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों के नाम बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) के असिस्टेंट की सूची में पाए गए. मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे “अनजाने में हुई गलती” बताते हुए विवादित नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया को भाजपा के रंग में रंगने की कोशिश की जा रही है. राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर शासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक सूची साझा करते हुए दावा किया कि सूची में शामिल कम से कम चार लोग भाजपा से जुड़े सदस्य या पदाधिकारी हैं.
जीतू पटवारी ने लिखा, “भाजपा सरकार SIR को संवैधानिक प्रक्रिया बताती है, लेकिन हर संवैधानिक व्यवस्था को पार्टी का एजेंडा लागू करने का साधन बना दिया गया है. यह लोकतंत्र का अपमान है और कांग्रेस इसे सफल नहीं होने देगी.”
वहीं दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि BLO असिस्टेंट की सूची में तीन राजनीतिक व्यक्तियों के नाम गलती से शामिल हो गए थे. वानखड़े ने बताया, “मैंने आदेश जारी नहीं किया था. यह दतिया विधानसभा के एसडीएम ने जारी किया था. उन्हें कुछ विभागों से नाम भेजे गए थे, जिनमें से तीन नाम गलत तरीके से शामिल हो गए. इन लोगों को सूची से हटाया जा रहा है. एसडीएम का कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन उनसे गलती हो गई है. हमने उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा है.”
भारतीय निर्वाचन आयोग ने 28 अक्टूबर से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की शुरुआत की है. इनमें मध्य प्रदेश के अलावा अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद देश के कुछ राज्यों से बीएलओ के काम के अत्यधिक दबाव में आत्महत्या और हार्ट अटैक से मौत की घटनाएँ भी सामने आई हैं. कई जगहों पर बीएलओ के निलंबन और FIR दर्ज होने के मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं.
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