सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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भारत में 47 फीसदी अस्वीकृत एंटीबायोटिक दवाओं का धड्डले से उपयोग जारी: रिपोर्ट



द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चला है कि 2019 में भारत के निजी क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले 47.1 प्रतिशत एंटीबायोटिक बिना स्वीकृति या अनअप्रूव्ड एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन थे.

द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चला है कि 2019 में भारत के निजी क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले 47.1 प्रतिशत एंटीबायोटिक बिना स्वीकृति या अनअप्रूव्ड एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन थे. एंटीबायोटिक दवाओं के इस तरह के अनुचित उपयोग को देखते हुए अध्ययन कड़े नियमों की आवश्यकता की और इशारा कर रहा है.

इसके अतिरिक्त अध्ययन में पाया गया है कि एजिथ्रोमाइसिन 500 मिलीग्राम टैबलेट की एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन में सबसे अधिक खपत थी, इसके बाद वर्ष के दौरान सफिक्सिम 200 मिलीग्राम टैबलेट का इस्तेमाल हुआ था.

अध्ययन में कहा गया है कि हालांकि भारत में एंटीबायोटिक दवाओं की प्रति व्यक्ति निजी क्षेत्र की खपत दर श्रीलंका और पाकिस्तान समेत कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है. भारत में बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन किया जा रहा है, जिन्हें सही तौर पर देखा जाए तो इनका इस्तेमाल कम किया जाना चाहिए.

अध्ययनकर्ता कहते हैं कि यह, आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची के बाहर फॉर्मूलेशन से निश्चित खुराक संयोजन या फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशंस (एफडीसी) के एक महत्वपूर्ण हिस्से और केंद्रीय दवा नियामकों द्वारा अनुमोदित एंटीबायोटिक दवाओं की एक बड़ी मात्रा के साथ, महत्वपूर्ण नीति और नियामक सुधार की जरूरत को दिखाते हैं.

अध्ययनकर्ताओं ने निजी क्षेत्र के एंटीबायोटिक उपयोग की जांच की, जो भारत में कुल खपत का 85 से 90 प्रतिशत के लिए जिम्मेवार है, यह हर रोज सुझाई गई खुराक के आधार पर मापी जाती है, जिसे डेली डिफाइंड डोसेस (डीडीडी) कहा जाता है.

अध्ययन में पाया गया कि भारत में 2019 में कुल डीडीडी की खपत 507.1 करोड़ (10.4 डीडीडी प्रति 1,000 प्रति दिन) थी. एनएलईएम में सूचीबद्ध फॉर्मूलेशन ने 49.0 प्रतिशत (248.6 करोड़ डीडीडी) के लिए जिम्मेवार है. एफडीसी ने 34 प्रतिशत (172.2 करोड़) लिए जिम्मेवार है, और अस्वीकृत फॉर्मूलेशन ने 47.1 प्रतिशत (240.8 करोड़ डीडीडी) लिए जिम्मेवार है.

डेली डिफाइंड डोसेस (डीडीडी) मेट्रिक्स का उपयोग करके भारत में प्रणालीगत एंटीबायोटिक दवाओं के निजी क्षेत्र की खपत का विश्लेषण करने वाला यह पहला अध्ययन है. भारत में 10.4 डीडीडी की प्रति व्यक्ति खपत दर 2015 (13.6 डीडीडी) की तुलना में कम पाई गई। एशियाई के संदर्भ में, श्रीलंका में 16.3 डीडीडी दर्ज किया, चीन में 8.4 और पाकिस्तान में बहुत अधिक 19.6 डेली डिफाइंड डोसेस (डीडीडी) दर्ज किया गया है।

एजिथ्रोमाइसिन का सबसे अधिक सेवन

एजिथ्रोमाइसिन 500 मिलीग्राम टैबलेट की एंटीबायोटिक फॉर्मूलेशन में सबसे अधिक खपत की गई जो कि 7.6 प्रतिशत थी, इसके बाद सफिक्सिम 200 मिलीग्राम टैबलेट का 6.5 प्रतिशत पाया गया.

सेफलोस्पोरिन सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला एंटीबायोटिक वर्ग 29.5 प्रतिशत था, उसके बाद पेनिसिलिन का 17 प्रतिशत और मैक्रोलाइड का उपयोग 16.5 प्रतिशत रहा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा तय किए गए मानक बिना अनुमोदित उत्पादों में एंटीबायोटिक दवाओं के निगरानी समूह ने 72.7 प्रतिशत का गठन किया और एफडीसी के 48.7 प्रतिशत का गठन किया. निगरानी में बहुत सारे एंटीबायोटिक्स शामिल हैं, जिनमें प्रतिरोध की उच्च संभावना केवल विशिष्ट संकेतों के आधार पर उपयोग की जाती है.

साभार – डाउन-टू-अर्थ