शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
जमीन

किसानों ने प्रधानमंत्री को जेवर हवाईअड्डे की आधारशिला नहीं रखने दी



170 दिनों से जेवर में 200 से अधिक किसान उचित मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं

10 मार्च, 2019 को जब शाम पांच बचे चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनावों की घोषणा की तो उसके कुछ वक्त पहले तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन कर रहे थे। इसके ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से सटे नोएडा में मेट्रो लाइन के विस्तार का उद्घाटन किया था। इसके पहले उन्होंने ग्रेटर नोएडा में कई परियोजनाओं की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री की योजना में ग्रेटर नोएडा से सटे जेवर में प्रस्तावित नए हवाई अड्डे की आधारशिला रखना भी शामिल था। लेकिन यहां के किसानों के विरोध ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री जब विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत के लिए ग्रेटर नोएडा पहुंचे तो भले ही वे जेवर हवाई अड्डे की आधारशिला नहीं रख पाए लेकिन उन्होंने अपने संबोधन में नए हवाई अड्डे के फायदों को गिनाया। उन्होंने बताया कि नवा हवाई अड्डा बन जाने से स्थानीय लोगों को कितना फायदा होगा।
हवाई अड्डे की आधारशिला प्रधानमंत्री के हाथों रखवाना भारतीय जनता पार्टी की योजना में कितना अहम था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्थानीय सांसद महेश शर्मा सार्वजनिक तौर पर पहले यह कह चुके थे कि 2019 के लोकसभा चुनावों में उनके लिए जेवर हवाई अड्डे का काम शुरू करवाना एक बड़ी कामयाबी होगी।
अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर राजनीतिक दृष्टि से इतनी महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री क्यों नहीं रख पाए? दरअसल, जेवर हवाई अड्डा बनाने में जिन किसानों की जमीन जा रही है, उनमें से 200 से अधिक किसान सरकार द्वारा तय दर पर अपनी जमीन नहीं देना चाह रहे हैं। ये किसान 170 दिनों से अधिक से अपना विरोध जाहिर करने के लिए धरने पर बैठे हैं। इनका कहना है कि ग्रामीण जमीन के अधिग्रहण के लिए भूमि अधिग्रहण कानून में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि ऐसी जमीन के लिए सर्किल रेट से चार गुना अधिक पैसे किसानों को दिए जाएंगे लेकिन सरकार उन्हें जमीन के बदले इतने पैसे नहीं दे रही है।
सरकार पर विभिन्न स्तर पर गुहार लगाने के बावजूद जेवर हवाई अड्डा परियोजना से प्रभावित किसानों की मांग नहीं मानी गई। इसके बाद इन किसानों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया। वहां इन किसानों ने जमीन अधिग्रहण के संबंध में याचिका डाली है। इससे जेवर हवाई अड्डे के लिए जमीन अधिग्रहण में देरी हो रही है। यही वजह है कि आखिरी समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस हवाई अड्डे की आधारशिला रखने की अपनी योजना को छोड़ना पड़ा।
जेवर हवाई अड्डा परियोजना में जिन किसानों की जमीन जा रही है, उन किसानों ने सरकार से अपनी जमीन की सही कीमत हासिल करने के लिए जेवर हवाई अड्डा संघर्ष समिति बनाई है। इसी समिति के बैनर तले जेवर के किशोरपुर गांव में 200 से अधिक किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इन किसानों ने जो याचिका दायर की है, उस पर तकरीबन 250 किसानों के दस्तखत हैं।
इस परियोजना के लिए पहले जिन किसानों ने जमीन देने को लेकर अपनी सहमति दी थी, उनमें से भी कई किसानों ने अपनी सहमति वापस ले ली है। यहां असल विवाद जमीन की कीमत को लेकर है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि हवाई अड्डा बनाने में जो जमीन जा रही है, वह उत्तर प्रदेश सरकार की अधिसूचना के हिसाब से शहरी जमीन है। इसलिए सरकार का कहना है कि वह सर्किल दर से तीन गुना अधिक कीमत मुआवजा के तौर पर देगी। जबकि संघर्ष कर रहे किसानों का कहना है कि हमारे गांव की जमीन शहरी कैसे हो सकती है, हमें तो भूमि अधिग्रहण कानून के हिसाब से ग्रामीण जमीन के लिए सर्किल दर से चार गुना अधिक पैसे चाहिए।
इस संघर्ष के अंत में इन किसानों से सरकार किस दर पर समझौता करती है, यह तो भविष्य में ही पता चलेगा। लेकिन यह जरूर सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी बड़ी परियोजना अगर विकसित हो रही है और उसमें किसानों की खेती की जमीन जा रही हो तो उन्हें कानून के हिसाब से उचित मुआवजा मिलना चाहिए। ऐसा न हो कि सरकार के स्तर पर नियमों में फेरबदल करके किसानों को उनका हक नहीं मिले।