शनिवार, 04 फ़रवरी 2023
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बाढ़ को असम से इतनी मोहब्बत क्यों?



अंग्रेजों के जमाने में नदी के पानी को बाढ़ बनने से रोकने के लिए नदी तट पर ‘तटबंध’ बनाए गए. प्राकृतिक रूप से बह रहे पानी में इंसान ने हस्तक्षेप किया. यह दो रूपों में हुआ. पहला, नदी के पानी को इंसान ने अपने हिसाब से नियत मार्ग में चलाने की कोशिश की. दूसरा, नदी में आकर मिल रहे अन्य जल मार्गों को रोक दिया.

हर बरस की बात है यहां. बारिश का सीजन आता है. बाढ़ की खबरें आती हैं. मौत के आंकड़े आते हैं और, अंत में ‘राहत की घोषणा’ होती है! घोषणा आते ही सरकार की वाहवाही शुरू हो जाती हैं. इस वाहवाही की गूंज के पीछे छिप जाती है आम लोगों की ‘चीत्कार’…ऐसी ही कहानी है ‘असम’ की. उत्तर–पूर्वी भारत का एक राज्य जो मई और जून के महीनों में बाढ़ से जूझता रहा.

असम का परिचय

असम मुख्यतः तीन भौगोलिक क्षेत्रों में बंटा हुआ है.

  1.  ब्रह्मपुत्र घाटी (पूर्वी हिमालय से सटा हुआ असम का उत्तरी भाग)
  2. बराक घाटी (असम का दक्षिणी भाग)
  3. मिकिर (कार्बी आंगलोंग) और कचार पहाड़ियां (दोनों घाटी क्षेत्रों को अलग करते हैं)

असम, हिमालय की तलहटी में होने के साथ-साथ जल भंडारण क्षेत्र से नजदीकी का संबंध रखता है. इस कारण नदियां खूब बहती हैं असम में.असम के दोनों घाटी क्षेत्र समतल इलाके के रूप में बसे हैं. जो बाढ़ को निमंत्रण देते है. राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के अनुसार देश का 9.40% बाढ़ संभावित क्षेत्र असम राज्य में आता है जोकि असम का 39.58% भूभाग को कवर करता है.


आजादी मिली लेकिन उस आधी रात का बाढ़ के संदर्भ में सवेरा नहीं हुआ. असम में आजादी के बाद 1954, 1962, 1972, 1977, 1984, 1988, 1998, 2002, 2004 और 2012 ऐसे वर्ष है जब बाढ़ का आगमन दो से तीन बार हुआ.


वर्ष 2022 में असम को दो बार बाढ़ से मुलाकात करनी पड़ी. ‘भारतीय मौसम विभाग’ के अनुसार मानसून ‘पूर्व’ बरसात ने 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. यह वर्षा सामान्य से 62% अधिक थी. मानसून के पहले महीने यानी जून में भी असम का निचला भाग बाढ़ से ग्रस्त रहा. जिसमें असम का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर सिलचर अधिक प्रभावित हुआभारतीय मौसम विभाग के पुणे स्थित केंद्र ने असम में आने वाली बाढ़ पर एक अध्ययन किया है. इसमें 30 वर्षों के आंकड़े शामिल हैं. अध्ययन कहता है कि वर्षा पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है.


जब वर्ष 2020 में पूरा देश कोरोना से झूझ रहा था तब असम बाढ़ से. अभी 2022 में भी दो बार असम की बाढ़ से मुलाकात हो गई है. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मई (2022) में हुई मानसून पूर्व वर्षा ने पिछले दस वर्षों का रिकॉर्ड तोडा है. यह वर्षा सामान्य से 62% अधिक थी. मानसून के पहले महीने यानी जून में भी असम का निचला हिस्सा बाढ़ के शौक से ग्रस्त रहा.
मौसम विभाग, ‘लंबे अंतराल का औसत’ (LPA-Long Period Average) निकाल कर वर्षा की गहनता को आंकता है. 

अगर वर्षा की मात्रा 96 से 104% के बीच रहे तो सामान्य वर्ष.

वर्षा का स्तर 104% से ऊपर रहे तो अतिवृष्टि वाला वर्ष.

और अगर वर्षा 96% से भी कम रहे तो कमवृष्टि वाला वर्ष.

तो आखिर क्यों आती है असम में बाढ़?

प्रकृति की अपनी एक साम्यावस्था (equilibrium) होती है. इस साम्यावस्था को कुछ प्राकृतिक कारक बिगाड़ते हैं (जैसे–सौर्य कलंक) लेकिन साम्यावस्था सबसे अधिक नुकसान मानव जाति पहुंचा रही है, विकास के नाम पर. जिसका परिणाम प्राकृतिक आपदा के रूप में सामने आता है. ऐसी ही एक आपदा है– बाढ़. तो फिर जानते है कि वो कौनसे मानवीय कारक है असम की बाढ़ के पीछे.

  1. हिमालय से पैदा होने वाली नदियां युवावस्था में है. यानी बहने की गति तेज है. पर्वतों को चीर कर ‘वी’ (‘V’) आकार की घाटियां बना देती है. घाटियां बनाने के क्रम में घर्षण होता है. पर्वत से पत्थर टूटकर अलग हो जाते हैं. पत्थर से बने कंकड़, गाद नदी के भाग बन जाते हैं. इन (गाद, कंकड़ और पत्थरों) आभूषणों से सुसज्जित नदी असम में प्रवेश करती है.यह आभूषण नदी का तल ऊंचा उठा देते हैं. ऊंचे उठे हुए तल पर भाग रही नदी की गति तेज है. अब यह नदी कभी भी बाढ़ का रूप धारण कर असम वालों के आशियाने उजाड़ देती है.
  2. अंग्रेजों के जमाने में नदी के पानी को बाढ़ बनने से रोकने के लिए नदी तट पर ‘तटबंध’ बनाए गए. प्राकृतिक रूप से बह रहे पानी में इंसान ने हस्तक्षेप किया. यह दो रूपों में हुआ. पहला, नदी के पानी को इंसान ने अपने हिसाब से नियत मार्ग में चलाने की कोशिश की. दूसरा, नदी में आकर मिल रहे अन्य जल मार्गों को रोक दिया. अगर अब नदी तल में भराव हो जाए तो तल ऊपर उठ जाएगा. वहीं पानी की आवक अधिक हो जाए तो हो सकता है चारों ओर बाढ़ की त्राहि–त्राहि मच जाए.
  3. तटबंध ने नदी में मिल रहे अन्य नालों को रोका गया तो उसके कारण भी बाढ़ आने लगी. स्थानीय निवासी उससे निजात पाने के लिए तटबंध तोड़ देते हैं. तो कभी–कभी यह टूटे तटबंध निजात की जगह भारी बाढ़ से मुलाकात करवा देते हैं. जून,2022 असम का सिलचर इसकी गवाही दे रहा है.
  4. निरंतर विकास की ओर दौड़ते शहर ने आर्द्रभूमियों को नष्ट किया है. आर्द्रभूमि बाढ़ को रोकती हैं, पानी की गति को कम करती हैं. नष्ट करने का खामियाजा बाढ़ की व्यापकता और बारंबारता के रूप में भुगतना पड़ा. असम राज्य के शहरी क्षेत्रों में आ रही बाढ़ के प्रमुख कारणों में से एक यह भी है.
  5. शहर में आ रही बाढ़ का एक और कारक जल निकास तंत्र का कमजोर होना है. वहीं अनियोजित स्वरूप में हो रहा विकास बाढ़ की तीव्रता को और बढ़ा देता है. कमजोर जल निकासी तंत्र के कारण फ्लैश फ्लड (अचानक आई हुई बाढ़) का सामना भी करना पड़ता है. इसका जीवंत उदाहरण है हाल ही में असम के गुवाहाटी शहर में आई बाढ़. आधुनिक भारत के मंदिर यानी बड़े-बड़े बाँध. बरसात के मौसम में इनमे पानी नाक से ऊपर जाने लगता है तब या टूट जाते है या पानी छोड़ दिया जाता है. असम के बारपेटा जिले में आई बाढ़ के पीछे का कारण बांध के पानी को छोड़ना था.

प्रसिद्ध पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र कहते हैं– “दीवारें खड़ी करने से समुद्र पीछे हट जाएगा, तटबंध बना देने से बाढ़ रुक जाएगी, बाहर से अनाज मंगवाकर बांट देने से अकाल दूर हो जाएगा, बुरे विचारों की ऐसी बाढ़ से, अच्छे विचारों के ऐसे ही अकाल से हमारा सामने यह संकट है”.

नीति बनाते समय अक्सर निर्माता यह बताते हैं कि हम आपको यह दे रहे हैं..वगैरा-वगैरा! महत्वपूर्ण यह है कि जनता क्या चाहती है. क्योंकि असल दर्द उसका है. प्रसिद्ध लेखक पी.साईनाथ के लहजे में कहें तो सूखा या संकट को पसंद करने वाले प्रशासनिक  तंत्र को सुधारना होगा. दूसरा और महत्वपूर्ण सुधार यह है कि विकास की अवधारणा को फिर से परिभाषित करना होगा.



सन्दर्भ- Observed Rainfall Variability and Changes over Assam State.click here

Salient Features of Monsoon 20212020

वार्षिक रिपोर्ट- 2021
 

Is concrete the way forward in rebuilding the Sunderbans? -Megnaa Mehtta & Debjani Bhattacharyya, The Telegraph, 1 July, 2020, click here 

Engineering a season of floods -Amitangshu Acharya, Livemint.com, 18 November, 2019,click here

Flood-control methods deployed in Assam have actually worsened the problem -Mitul Baruah, Scroll.in, 2 August, 2016,click here

Debate over using embankments for flood control grows louder -Dinesh Mishra, National Herald, 4 August, 2019,click here

As World’s Deltas Sink, Rising Seas Are Far from Only Culprit – Vaishnavi Chandrashekhar, 13 January, 2021, click here

how communal rumours hid the truth about the deluge in assams silchar,Rokibuz Zaman Jul 12, 202 click here

As World’s Deltas Sink, Rising Seas Are Far from Only Culprit – Vaishnavi Chandrashekhar, 13 January, 2021,  click here

Yogendra yadav articles. if india starts acting on the yearly floods in bihar and assam that would be true nationalism.  click here

फोटो सौजन्य- न्यूज़ ऑन एयर

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