सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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चंडीगढ़: ट्रांसफर ड्राइव स्कीम के विरोध में सीएम निवास का घेराव करने पहुंचे हजारों शिक्षक!



सरकारी स्कूलों में रेशनालाइजेशन और ट्रांसफर ड्राइव के खिलाफ शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं. जिसके चलते आज प्रदेशभर से चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने जा रहे शिक्षकों को रास्ते में ही रोक लिया गया.

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में रेशनालाइजेशन और ट्रांसफर ड्राइव में कमियों के खिलाफ प्रदेश सरकार और प्रदेश की टीचर्स एसोसिएशन आमने-सामने आ गई हैं. इसी के चलते आज प्रदेशभर के अध्यापक चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए जुटे. सीएम आवास तक पहुचनें से पहले ही शिक्षकों को पुलिस बैरिकेंडिंग करके रोक दिया गया.

प्रदेशभर में अध्यापक संघ की ओर से सभी शिक्षकों को सोशल मीडिया पर मैसेज के जरिये चंडीगढ़ पहुंचने का आह्वान किया गया. जिसके चलते सोमवार सुबह प्रदेशभर से हजारों की संख्यां में शिक्षक चंडीगढ़ पहुंच गए. इस बीच राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ और पंजाबी अध्यापक संघ ने भी हसला (हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन) को समर्थन दिया है.

हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन हसला के प्रधान सतपाल संधु ने कहा, “प्रदर्शनकारी शिक्षकों को पंचकूला-चंडीगढ़ बॉर्डर पर रोका गया. जहां से 24 शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री ओएसडी से मुलाकात के लिए पंचकूला से चंडीगढ़ रवाना हुआ. हसला प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सिंधु ने कहा कि शिक्षा विभाग की तबादला नीति मुख्यमंत्री मनोहर लाल की एक महत्वकांक्षी योजना है और जिस सपने के साथ सीएम ने इस योजना को शुरू किया था, अगर यह वैसे ही आगे बढ़ जाती तो शायद इसके परिणाम कुछ और ही होते, लेकिन सीएम की इस योजना को शिक्षा विभाग के ही सर्वगुण संपन्न अधिकारी मनमाफिक बदलाव करके पलीता लगाने में जुटे हैं. जिसके चलते शिक्षकों को सडक़ों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. हालांकि इससे पहले हसला सहित तमाम शिक्षक संगठन इन विसंगतियों को दूर करने के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात साबित हुआ. उनका कहना है कि विभाग के अधिकारी शिक्षकों की समस्यों का निवारण करने की बजाए पदों को ही खत्म करने में लगे हुए हैं. जिसके विरोध में शिक्षकों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है.”

शिक्षकों का कहना है कि हाई स्कूल में हिंदी, इंग्लिश के प्राध्यापक पदों को खत्म कर दिया गया है. सीनियर सेकेंडरी स्कूल में जहां केवल आर्ट स्ट्रीम है वहां पीजीटी साइंस व पीजीटी गणित के पदों को अनावश्यक तौर पर सरप्लस कर दिया है. कार्यभार होते हुए पांच साल से पहले अनेक पद कैप्ट कर दिए गए हैं. फिजिकल एजुकेशन, फाइन आर्ट समेत अनेक विषयों का नार्मलाइजेशन ठीक नहीं किया गया है. वाणिज्य संकाय वाले ज्यादातर स्कूल से अर्थशास्त्र विषय को कैप्ट कर दिया गया है और गैर कानूनी रूप से वोकेशनल लेक्चरर को पीजीटी पद के खिलाफ ड्राइव में शामिल किया जा रहा है. सेंटा एग्जाम के माध्यम से आरोही स्कूल में गए पीजीटी का एमआईएस अभी तक ठीक नहीं किया है.

बता दें कि प्रदेश सरकार को पहले ही चंडीगढ़ में प्रदर्शन में भारी भीड़ उमडऩे अंदेशा था जिसके चलते शिक्षा विभाग की ओर से एक रात पहले सर्कुलर जारी कर दिया गया, जिसमें प्रदेश के सभी अध्यापकों को सोमवार को स्कूल में उपस्थित रहना अनिवार्य कर दिया गया था, अन्यथा उन्हें सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी.

शिक्षकों की मुख्य मांगें

1. ट्रांसफर ड्राइव के कारण अनेक स्कूलों में टीजीटी के पद खत्म कर दिए गए हैं, उन्हें दोबारा बहाल किया जाए.

2. कैप्ट किये गए पदों को रिलीज किया जाए.

3. स्कूलों को मर्ज करने के नाम पर पदों को कम किया गया है, इस निर्णय को वापिस लिया जाए.

4. 300 पदों से कम संख्या वाले विषयों के लिए जोन की बाध्यता को हटाई जाए.

5. क्लस्टर लेवल पर तीनों स्ट्रीम दिए जाएं.

6. साइंस स्ट्रीम के तीनों विषयों फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में टोटल पार्टिसिपेट से 5 प्रतिशत ज्यादा पद उपलब्ध करवाए जाएं.

7. जिन विद्यालयों में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय को पॉलिटिकल साइंस के पीजीटी पढ़ा रहे थे, उन पदों को कैप्ट न किया जाए.

8. सभी समस्याओं को दूर करके स्कूल ऑप्शन भरने का उचित समय दिया जाए.