सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट, 11वीं में करीबन 40 हजार छात्र घटे!

हरियाणा सरकार एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने का दावा कर रही है लेकिन वहीं दूसरी ओर बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने से ही कतरा रहे हैं. देश के सरकारी स्कूलों में ग्यारहवीं कक्षा में दाखिलों में भारी गिरावट सामने आई है. स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़ो के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस साल 38,976 दाखिले कम हुए हैं. वहीं दसवीं कक्षा के मामले में भी लगभग यही स्थिति रही है.

शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में ग्यारहवीं और दसवीं कक्षा में दाखिलों में आई गिरावट के कारणों का पता लगाने में जुटा है. वहीं शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के बाद निजी स्कूलों में छात्रों की वापसी और आईटीआई और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में नौकरी दिलाने वाले पाठ्यक्रमों की ओर युवाओं का रुझान इसकी एक वजह हो सकती है.

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले सत्र में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ग्यारहवीं कक्षा में कुल 2,00,946 छात्रों का नाम दर्ज था लेकिन इस सत्र में यह संख्या घटकर 1,61,970 रह गई है. इसी तरह, सरकारी स्कूलों में पिछले साल दसवीं कक्षा में 2,01,962 छात्रों का प्रवेश हुआ था जबकि इस सत्र में यह आंकड़ा 1,84,106 है.

फरीदाबाद: खोरी गांव के विस्थापित परिवारों में से केवल 5.5 फीसदी को ही मिले मकान!

पिछले साल जून में फरीदाबाद के खोरी गांव में 10 हजार से ज्यादा लोगों के मकान गिराए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने खोरी गांव की इस कॉलोनी में रहने वाले लोगों के मकानों को अवैध बताकर जमीन खाली करवाने का आदेश दिया था. जिसके बाद फरीदाबाद प्रशासन ने 10 हजार परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाकर जमीन खाली करवा ली थी. इस विध्वंस के बाद विस्थापित हुए लगभग 10 हजार परिवारों में से केवल 550 परिवारों को ही पुनर्वास के लिए मकान दिए गए हैं.

खोरी गांव की करीबन 150 एकड़ से ज्यादा वन क्षेत्र को खाली करवाने के लिए फरीदाबाद नगर निगम द्वारा इन इन परिवारों का यहां से हटाने का अभियान चलाया गया था. विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया पिछले साल जुलाई में शुरू की गई थी लेकिन सरकार की अनेक शर्तों और कठिन प्रक्रिया के चलते अबतक केवल 5.5 प्रतिशत प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया गया है.

वहीं फरीदाबाद नगर निगम का कहना है कि पात्र पाए गए 4,100 में से 1,009 आवेदकों को आवंटन पत्र जारी किए गए हैं जबकि उनमें से 550 को कब्जा मिल गया. पुनर्वास योजना के तहत पात्र आवेदकों को 20 साल के लिए 10 हजार रुपये की एकमुश्त राशि जमा करवानी होगी और 1,950 रुपये की मासिक किस्त का भुगतान करना होगा.

वहीं अधिकतर लोग दस हजार की एकमुश्त राशि जमा करवाने और अन्य खर्च का भुगतान करने में असमर्थ रहे तो कई परिवार दस्तावेजों की कमी के कारण पुनर्वास की प्रक्रिया से बाहर हो गए.