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  • राजस्थान: शीत लहर और पाला पड़ने से 40 फीसदी सरसों की फसल बर्बाद, किसानों को हुआ भारी नुकसान!

    राजस्थान के सीकर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों के किसान मायूस हैं. शीत लहर ने उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे गंभीर पाला पड़ा है, जिससे उनकी सरसों, जीरा, अरंडी और सब्जियों की फसल नष्ट हो गई है. \’गांव कनेक्शन\’ में छपी पत्रकार पारुल कुलश्रेष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार हनुमानगढ़ जिले के एक गांव के रायसिंह जाखड़ बंसरीवाला ने दुख व्यक्त किया कि ठंड और पाले के कारण उनकी सरसों की लगभग 40 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई. शीत लहर और बारिश विनाशकारी साबित हुई.

    इसके अलावा, इंदिरा गांधी नहर में रखरखाव के काम के कारण, हमें सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला,\” बंसरीवाला ने रिपोर्टर को बताया,\”सरसों राजस्थान की प्रमुख फसलों में से एक है और उत्तर पश्चिमी राज्य अकेले भारत में सरसों के कुल उत्पादन का 43 प्रतिशत योगदान देता है. राजस्थान में, अलवर प्रमुख उत्पादक जिले के रूप में श्री गंगानगर, भरतपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, बारां और हनुमानगढ़ के बाद आता है.

    श्री गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में लगभग 556 हेक्टेयर भूमि सरसों के अधीन है. वहां के किसानों को डर है कि अगर शीत लहर जारी रही तो सरसों की 40 फीसदी फसल बर्बाद हो जाएगी. उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर तापमान शून्य से 2.8 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर गया है, जो रेगिस्तानी राज्य के लिए असामान्य है.

    श्री गंगानगर जिले के चपावली गांव के प्रह्लाद ने बताया, “ठंढ को मात देने का एकमात्र तरीका पर्याप्त सिंचाई है. सुबह जमीन को पानी देने से पाले से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन गांव में बिजली की आपूर्ति केवल रात में होती है, किसान केवल उस समय अपनी भूमि की सिंचाई कर सकते हैं जब तापमान शून्य के करीब गिर जाता है. अगर दिन के समय बिजली की आपूर्ति होती और हम दिन के उजाले में अपनी जमीन को सींच सकते तो यह बहुत अच्छा होता. लेकिन प्रशासन को किसानों की कोई परवाह नहीं है. जबकि सरकार भाषण देने में व्यस्त है लेकिन हम नुकसान उठा रहे हैं\”

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के जयपुर कार्यालय के अनुसार, 3 जनवरी, 2014 के बाद यह पहली बार है, जब तापमान शून्य से 2.7 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है. इससे पहले 1974 में चूरू में तापमान शून्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस नीचे गिर गया था, जो राज्य में अब तक का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया था. उन्होंने कहा, \’हमने राज्य सरकार को चेतावनी जारी की थी कि इस साल 14 जनवरी से पाला पड़ेगा. जबकि इस मौसम में जमीनी पाला असामान्य नहीं है, समस्या तब उत्पन्न होती है जब यह दो दिनों से अधिक समय तक रहता है. यह फसलों के लिए विनाशकारी है,\”

    किसान अपनी सरसों की फसल के 40 प्रतिशत तक नुकसान की सूचना दे रहे हैं, एक आधिकारिक आकलन किया जाना बाकी है. राजस्थान कृषि विभाग, हनुमानगढ़ जिले के सहायक निदेशक बी आर बाकोलिया ने कहा, \”नुकसान की सीमा का तुरंत पता लगाना संभव नहीं है. हम अगले कुछ दिनों में ही नुकसान के बारे में बता पाएंगे. अगर अगले दो दिनों में बारिश होती है तो स्थिति में सुधार हो सकता है. यदि नहीं, तो अधिक नुकसान हो सकता है. सहायक निदेशक ने बताया, \”हमारे अधिकारी फील्ड में जाकर, खासकर सरसों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करेंगे.\”

    किसानों के अनुसार सरसों के पकने से पहले अगर पाला पड़ जाए तो यह पौधे को मार देता है. इसलिए, क्षति से बचने के लिए भूमि को सिंचित रखना महत्वपूर्ण है. लेकिन श्री गंगानगर में हर साल ठंड पड़ रही है, किसान ने कहा, \”तापमान का चार डिग्री तक गिरना सामान्य है, लेकिन साल दर साल ठंडा होता जा रहा है और यह साल अब तक का सबसे खराब रहा है.\”

    इस बीच, भरतपुर स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन रेपसीड-मस्टर्ड (NRCRM), जो एक ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) संस्थान है, के निदेशक पी के राय ने चेतावनी दी कि अनुचित सिंचाई स्थिति को और अधिक नुकसान पहुंचा सकती है. राय ने बताया, \”जमीन में समय-समय पर सिंचाई करने से यह सुनिश्चित होता है कि कोई सूखापन नहीं है, खासकर उन जगहों पर जहां बीज अभी पूरी तरह से पके नहीं हैं\”

    बाड़मेर जिले में किसान अपने अनार, अरंडी के पौधे, जीरा और सरसों के पौधों को हुए नुकसान का हिसाब लगा रहे हैं. बाड़मेर के किसान हस्तीमल राजपुरोहित ने बताया, \”जिले में करीब 30 फीसदी अनार, 70 फीसदी अरंडी और 50 फीसदी सरसों नष्ट हो जाती है\” उन्हें बैंक का कर्ज चुकाने, बिजली बिल भरने आदि की चिंता सता रही थी. “बहुत ट्रिपिंग के साथ दिन में केवल दो से तीन घंटे बिजली की आपूर्ति की जाती है. किसी भी राजनेता को हमारी भलाई की चिंता नहीं है,”

    सीकर जिले के किसान गांवों में बिजली की अनियमित आपूर्ति को लेकर पिछले चार दिनों से डोढ़ गांव में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे उनके लिए अपनी जमीन को सिंचित रखना मुश्किल हो रहा है. “बिजली की आपूर्ति स्थिर नहीं है. कभी-कभी बिजली आने के छह मिनट के भीतर ही बिजली बंद हो जाती है,\” सीकर जिले के भुवाला गांव के राम रतन बगडिया ने बताया, \”सब्जियों में पहले ही 60 फीसदी और सरसों में 40 फीसदी नुकसान हो चुका है. बगडिया ने कहा, \”हम मांग करते हैं कि सरकार हमें नुकसान की भरपाई करे और हमें उचित बिजली मुहैया कराए.\”