मंगलवार, 07 फ़रवरी 2023
गांव-देहात

जंतर-मंतर पर मनरेगा मजूदरों ने किया आंदोलन तेज, मोदी सरकार पर लगाया फंड रोकने, भुगतान में देरी का आरोप



वर्तमान में, अप्रैल 2020 से 21,850 करोड़ रुपये से अधिक मजदूरी लंबित है, जिसमें से 6,800 करोड़ रुपये का वेतन अकेले इस वर्ष के लिए लंबित है.

देश भर के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत काम करने वाले हजारों मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है. मनरेगा के तहत काम के लिए नामांकित लोगों के वेतन का भुगतान करने में देरी, योजना के लिए अपर्याप्त धन आवंटन और उसमें भी देरी, वेतन वितरण में अनियमितता और वर्तमान में रोजगार योजना के कार्यान्वयन को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों के खिलाफ देश भर के मनरेगा मजदूर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र सरकार पर मनरेगा मजदूरों का 6,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मनरेगा मजदूरों का यह आंदोलन 2 अगस्त से शुरू हुआ. मनरेगा मजदूरों के संगठन ने बताया, “केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष 2022-23 में मनरेगा के लिए आवंटित धन का 66.44% पहले ही समाप्त कर चुकी है. इस वित्तीय वर्ष में आवंटित किए गए 73,000 करोड़ रुपये में से चालू वित्त वर्ष के चार महीनों के भीतर कुल व्यय 48,502 करोड़ रुपये है, जिसमें छह महीने से अधिक समय से बकाया भुगतान शामिल हैं.””

मजदूरी भुगतान में लगातार देरी के बारे में मनरेगा मजदूरों का कहना है कि जब उन्होंने काम की मांग की तो उन्हें काम नहीं मिला. उनमें से कई मजदूरों ने NMMS ऐप की शुरुआत के बारे में चिंता जताई, जिसे पिछले साल मई में मनरेगा योजनाओं की उचित निगरानी सुनिश्चित करने और साइटों पर श्रमिकों की वास्तविक समय उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लॉन्च किया गया था. NMMS का मतलब राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली है.

ऐप में तकनीकी खराबी के कारण कई श्रमिकों को मजदूरी का नुकसान हुआ है. ऐप का उपयोग करने की मजबूरी ने कई लोगों में निराशा पैदा की है. बहुतेरे मजदूरों को स्मार्टफोन खरीदने के लिए कर्ज लेना पड़ा है. साथ ही, उन्हें हर महीने मोबाइल इंटरनेट डेटा पैक के लिए भी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.

नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप्लिकेशन का उपयोग करने से काम करने में अधिक बाधाएं पैदा हुई हैं. ऐप में तकनीकी खराबी की वजह से श्रमिकों को अपने वेतन के 50 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है. मजदूरों की मांग है कि एनएमएमएस आधारित मौजूदा व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए.

कई मजदूरों ने महंगाई के कारण एक दिन में दो बार भोजन करने में कठिनाइयों के बारे में भी बात की, यह कहते हुए कि एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1,000 रुपये से अधिक हो गई है. प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को सार्वभौमिक बनाने की मांग की और कहा कि पीडीएस में दाल, बाजरा और तेल शामिल होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) को तब तक बढ़ाया जाना चाहिए जब तक हमारा खाद्य संकट टल नहीं जाता. वर्तमान में, अप्रैल 2020 से 21,850 करोड़ रुपये से अधिक मजदूरी लंबित है, जिसमें से 6,800 करोड़ रुपये का वेतन अकेले इस वर्ष के लिए लंबित है.

गौरतलब है कि देश में कोरोना संक्रमण के कारण केंद्र सरकार ने मनरेगा का बजट 70 हजार करोड़ से बढ़ाकर 1.11 लाख करोड़ कर दिया था. वहीं, इस साल 2022 के बजट में सरकार ने मनरेगा का बजट घटा दिया है. इसके अलावा गैर भाजपा शासित राज्यों जैसे झारखंड और पश्चिम बंगाल में मनरेगा में भ्रष्टाचार के मामले आए हैं, जिसके कारण केंद्र सरकार ने इन राज्यों को फंड ही नहीं जारी किया है. इसके कारण सीधे तौर पर इन राज्यों के करीबन एक करोड़ मजदूर प्रभावित हुए हैं.

विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे मनरेगा संघर्ष मोर्चा (एनएसएम) के प्रतिनिधियों ने 3 अगस्त को संसद सदस्यों से मुलाकात की और उन्हें अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों से अवगत कराया. ज्ञापन और मांगों का चार्टर आर कृष्णैया (वाईएसआरसीपी), उत्तम कुमार रेड्डी (कांग्रेस), धीरज साहू (कांग्रेस), दीया कुमारी (बीजेपी) और जगन्नाथ सरकार (बीजेपी) को सौंपा. दस्तावेजों को समाजवादी पार्टी के कार्यालय में भी भेजा गया है. इनमें से कुछ सांसदों ने अपना समर्थन व्यक्त किया और इस मुद्दे को संसद में उठाने का वादा किया.