शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
गांव-देहात

लम्पी त्वचा रोग: खतरे में अन्नदाता का पशुधन



लम्पी स्किन डिजीज (LSD) कैप्रीपोक्सवायरस नामक वायरस के कारण होता है और "दुनिया भर में पशुधन के लिए एक उभरता हुआ खतरा" है.

हरियाणा के अंबाला के मुलाना इलाके में दुधारू पशुओं में एक “रहस्यमय बीमारी” फैलने से क्षेत्र के पशुपालकों में चिंता पैदा हो गई है. मुलाना के होली गांव और उसके आसपास अब तक लगभग 100 जानवर इस बीमारी की चपेट में हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, सभी बीमार पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जो पशुओं में फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है.

अंबाला में पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि लम्पी बिमारी जानवरों में तेजी से फैल सकती है, और वर्तमान में कोई इलाज उपलब्ध नहीं होने के कारण, उनके पास बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करने का एकमात्र सुझाव है. हालाँकि, बीमारी से बचाव के लिए एक टीकाकरण उपलब्ध है. होली गांव के पशु मालिकों को डॉक्टरों ने अपने बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करने की सलाह दी है ताकि प्रसार की जांच की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य जानवर पहले से पीड़ित पशुओं के संपर्क में न आए.

हरियाणा के पड़ौसी राज्य पंजाब में भी यह बिमारी तेजी से फैल रही है. पंजाब में एक महीने के भीतर 400 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि 20,000 संक्रमित हो गए हैं. उन्होंने कहा कि इस बीमारी के शिकार ज्यादातर गायें हैं.

पंजाब पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक राम पाल मित्तल ने कहा कि चंडीगढ़, मुक्तसर, मोगा, जालंधर, बठिंडा फरीदकोट और बरनाला सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं. वायरल संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है. मित्तल ने कहा कि लम्पी त्वचा रोग के पहले सत्यापित मामले की पहचान 4 जुलाई को पंजाब में हुई थी. उन्होंने बताया, “पंजाब में अब तक लम्पी त्वचा रोग के लगभग 20,000 मामले सामने आए हैं और 424 मवेशियों की मौत हो चुकी है. ज्यादातर गायें इस बीमारी से प्रभावित हुई हैं, जिसमें ‘गौशालाओं’ और डेयरी फार्मों से संक्रमण की सूचना मिली है.”

पशु चिकित्सकों का कहना है कि एक बार संक्रमित होने के बाद, एक मवेशी को ठीक होने में आमतौर पर सात से चौदह दिन लगते हैं. हालाँकि, यह रोग जूनोटिक नहीं है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से मनुष्यों में नहीं फैलता है, और मनुष्य इससे संक्रमित नहीं हो सकते हैं. हालांकि यह वायरस मनुष्यों में नहीं फैलता है, एक संक्रमित जानवर के दूध को उबालने या पास्चुरीकरण के बाद उसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

अंबाला पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ प्रेम सिंह ने बताया, “यदि उनके मवेशियों में एलएसडी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो किसानों को विभाग से संपर्क करना चाहिए. बीमारी के प्रसार को रोकने का एकमात्र तरीका बीमार जानवरों को स्वस्थ जानवरों से अलग करना है. संक्रमित पशुओं का सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है ताकि बीमारी से बचाव के उपाय किए जा सकें. विशेषज्ञ यह भी पता लगाएंगे कि पहली बार बीमारी कैसे शुरू हुई.”

मुख्यत राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पालतु पशु लम्पी त्वचा रोग के प्रकोप की चपेट में हैं. लेकिन लम्पी रोग (एलएसडी) के कारण सबसे खराब स्थिति गुजरात के पशुओं की है. गुजरात में अब तक राज्य सरकार 1600 से अधिक मवेशियों की मौत दर्ज कर चुकी है. यह वायरस राज्य के 2,200 गांवों में फैल गया है, जिससे 58,500 से अधिक मवेशी पहले ही वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. जिसके कारण राज्य सरकार ने इस महीने के अंत में आयोजित होने वाले वार्षिक तरनेतर पशु मेले और बैलगाड़ी दौड़ को रद्द करना पड़ा है. द्रौपदी के स्वयंवर की कथा से जुड़ा तरनेतार मेला, कोविड के कारण दो साल के अंतराल के बाद सुरेंद्रनगर जिले के चोटिला तालुका के तरनेतर गांव में आयोजित किया जा रहा है.

राजस्थान में स्थिति काबू से बाहर है. राज्य में इस बिमारी से अब तक 4000 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है जबकि 90,000 से अधिक मवेशी संक्रमित हुए हैं. पशुपालन विभाग में सचिव पी.सी. किशन ने बताया, “संक्रमण 16 जिलों में फैल गया है, बाड़मेर, जोधपुर और जालौर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं जबकि गंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जिलों में इसका असर कम हो रहा है. मरने वालों पशुओं की संख्या 4000 को पार कर गई है.”

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए दानदाताओं, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, कर्मियों और समाज के सभी वर्गों से अपील की है कि प्रदेश के पशुओं में फैल रहे ढेलेदार चर्म रोग की रोकथाम के लिए आर्थिक सहयोग करें.

GAVI, ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन्स एंड इम्यूनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, लम्पी स्किन डिजीज (LSD) कैप्रीपोक्सवायरस नामक वायरस के कारण होता है और “दुनिया भर में पशुधन के लिए एक उभरता हुआ खतरा” है. यह आनुवंशिक रूप से गोटपॉक्स और शीपपॉक्स वायरस परिवार से संबंधित है.

लम्पी बिमारी मुख्य रूप से खून चूसने वाले कीड़ों जैसे वाहकों के माध्यम से गायों और भैंसों को संक्रमित करता है. संक्रमण के लक्षणों में जानवर की खाल या त्वचा पर गोलाकार फोड़े उभर आते हैं, जो गांठ जैसे दिखाई देते हैं. संक्रमित जानवरों का तुरंत वजन कम होना शुरू हो जाता है और दूध कम होने के साथ-साथ बुखार और मुंह में घाव हो जाते हैं. अन्य लक्षणों में अत्यधिक नाक और लार स्राव शामिल हैं. गर्भवती गायों और भैंसों को अक्सर गर्भपात का शिकार होना पड़ता है और कुछ मामलों में इसके कारण रोगग्रस्त पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है.

देश के “कई इलाकों” को प्रभावित करने वाली लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) से निपटने के लिए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने गुजरात, राजस्थान और पंजाब में बकरी के टीके की 28 लाख खुराक की आपूर्ति की है. एनडीडीबी के अध्यक्ष मीनेश शाह ने बताया, “हमारे पास गुजरात, पंजाब और राजस्थान से मामले सामने आए हैं. इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड नामक एक सहायक कंपनी है, जो वैक्सीन बनाती है. उसकी मदद से हमने पिछले 15 दिनों में 28 लाख बकरी पॉक्स वैक्सीन खुराक की आपूर्ति की है.”

भारतीय अमेरिकी पशु चिकित्सक ने भारत में लम्पी त्वचा रोग के प्रसार को रोकने के लिए मवेशियों के सामूहिक टीकाकरण और उनके एक जगह से दूसरी जगह चरने जाने पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है. राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (आरएएनए) के सदस्यों ने पिछले कुछ दिनों में मवेशियों को बीमारी से बचाने के अपने प्रयासों में किसानों को उनके गृह राज्य में समर्थन देने के लिए स्वयं सेवकों की एक टीम तैयार की है. अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ वेटरनेरियन ऑफ इंडियन ओरिजिन के अध्यक्ष रवि मुरारका ने शनिवार को कहा कि मवेशियों का सामूहिक टीकाकरण और उनकी आवाजाही पर तत्काल रोक लगाना दो प्रमुख कदम हैं, जो घातक बीमारी के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक हैं.

मुरारका ने कहा, “अभी राजस्थान में स्थिति बहुत गंभीर है. बड़े पैमाने पर गायों की मौत का किसानों और अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा. मच्छरों को नियंत्रित करना या कीड़ों को संवेदनशील जानवरों से दूर रखना महत्वपूर्ण है. जोखिम वाले जानवरों को मच्छरों से दूर रहने के लिए रात में घर के अंदर रखना चाहिए. रात में जानवरों की किसी भी तरह की आवाजाही से बचें. जोखिम वाले जानवरों को चूना, बुझा हुआ चूना या बुझे हुए चूने से ब्रश करने की सलाह दी जाती है जो त्वचा पर एक परत बनाता है और मच्छरों की त्वचा तक पहुंचने की क्षमता को कम करता है. मुझे लगता है कि अगर हम इन उपायों का पालन करेंगे तो शायद इस बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.”

केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने अपने एक ब्यान में कहा है कि राजस्थान के 11 जिलों में लम्पी त्वचा रोग के प्रकोप से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. बिमारी प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम के साथ गए श्री रूपाला ने शनिवार को लोगों को प्रभावित गायों का दूध पीने के प्रति आगाह किया और कहा कि ऐसे जानवरों को अलग बांधना चाहिए.

मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मवेशियों में इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए गंभीर प्रयास कर रही हैं और जल्द ही इसे नियंत्रित करने में सक्षम होंगी. उन्होंने कहा कि संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाए और स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराया जाए. उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए समर्पित डिटेनशन सेंटर स्थापित किए जाने चाहिए. इस बीमारी को रोकने के लिए बकरी पॉक्स का टीका पूरी तरह से प्रभावी है.