शनिवार, 04 फ़रवरी 2023
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सड़क मांग रही जनता पर लाठीचार्ज, मुख्यमंत्री बोले – आंदोलनजीवियों के बहकावे में ना आएं



सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों पर लाठीचार्ज से गरमाई उत्तराखंड की राजनीति, सरकार को घेरने में जुटे विपक्षी दल

उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में एक मार्च से विधानसभा का बजट सत्र प्रारम्भ हुआ। बजट सत्र के पहले ही दिन भाजपा सरकार द्वारा गत लगभग तीन महीनों से घाट क्षेत्र में सड़क को चौड़ा किए जाने की मांग  को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों पर बर्बर ढंग से लाठीचार्ज कर दिया गया। क्या जनता द्वारा अपने क्षेत्र में लगातार हो रही गंभीर सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए सड़क के चौड़ीकरण की मांग करना इतना बड़ा अपराध हो गया है कि भाजपा सरकार को उनके ऊपर बिना किसी चेतावनी के बर्बर ढंग से लाठीचार्ज करवाना पड़ा?

विधानसभा के बजट सत्र को देखते हुए क्षेत्र की आंदोलनरत जनता सरकार के सामने अपनी पीड़ा रखने के लिए भराड़ीसैंण में स्थित विधानभवन के घेराव के लिए निकली थी, ताकि सरकार पूरी संवेदना के साथ उनकी पीड़ा को समझे और सड़क के चौड़ीकरण की उनकी मांग पूरी हो सके। पर सरकार ने उनके पास जाने की बजाय पुलिस के द्वारा उन्हें लठियाकर भागने को विवश किया। पुलिस लाठीचार्ज के कारण बुजुर्ग महिला व पुरुषों सहित 25 आंदोलनकारियों को गंभीर चोटें आईं। आंदोलनकारियों पर बर्बर लाठीचार्ज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे प्रदेश और देश भर से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है। विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया।

सड़क के लिए लंबा संघर्ष

चमोली जिले के घाट क्षेत्र की जनता पिछले 87 दिनों से नंदप्रयाग-घाट मार्ग के केवल 19 किलोमीटर मोटर मार्ग को चौड़ा करने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन और धरना-प्रदर्शन कर रही है। क्षेत्र का यह अब तक का सबसे लंबा आंदोलन है। गत 5 दिसम्बर, 2020 को घाट के व्यापार संघ और टैक्सी यूनियन ने सड़क को चौड़ा करने की मांग को लेकर क्रमिक अनशन प्रारम्भ किया था।

नंदप्रयाग-घाट सड़क 1970 के दशक में बनी थी। लगभग पांच दशक बाद भी इसका चौड़ीकरण नहीं हो पाया है। हरीश रावत में 2015 में सड़क के चौड़ीकरण की घोषणा की थी, लेकिन घोषणा धरातल पर अमल में नहीं आई। इसके बाद 2017 में भाजपा सत्ता में आई। इसके बाद 2018 में थराली सीट पर उपचुनाव हुआ। भाजपा ने फिर से थराली विधानसभा सीट का चुनाव जीता। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आभार रैली में शीघ्र ही सड़क को चौड़ा करने की घोषणा की, पर हुआ कुछ नहीं।

क्षेत्र के हितों से जुड़ी मांग के कारण धीरे-धीरे इस आंदोलन में आमजन जुड़ते चले गए और आंदोलन ने आसपास के 54 गांवों के लोगों को लामबंद कर लिया। स्थानीय जनता ने अपनी मांगों को लेकर 20 किलोमीटर लंबा जुलूस तक निकाला। लेकिन सरकार व जिम्मेदार अधिकारियों ने इसके बाद भी जनता की नहीं सुनी। गत 21 जनवरी 2021 से स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। लोगों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए हर तरीका अपना लिया। पर सरकार कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है।

कैसे हुआ लाठीचार्ज?

स्थानीय लोगों को जब एक मार्च से भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में विधानसभा के बजट सत्र की जानकारी मिली तो उन्होंने सत्र के पहले ही दिन विधानसभा कूच करने का निर्णय किया, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंच सके और सड़क को चौड़ा करने की उनकी मांग पूरी हो सके। बजट सत्र के पहले दिन घाट व उसके आस-पास के गांवों के लगभग 4,000 से अधिक लोग भराड़ीसैंण में विधानसभा कूच के लिए निकले। इसमें बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड क्रांति दल, भाकप-माले और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी शामिल थे।

आंदोलनकारी कर्णप्रयाग-गैरसैंण सड़क में जंगलचट्टी पहुंचे तो वहां पुलिस ने उन्हें रोक लिया। मगर आंदोलनकारियों की लगातार बढ़ती संख्या के सामने पुलिस लाचार नजर आई। आंदोलनकारी पुलिस बैरियर को हटाकर पैदल ही आगे बढ़ गये और दोपहर ढाई बजे के लगभग 5 किलोमीटर दूर दिवालीखाल पहुंचे। 

मिली जानकारी के अनुसार, आंदोलनकारियों के दिवालीखाल पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने वहां भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। यहां पुलिस ने आंदोलनकारियों को आगे जाने से रोक दिया। जिसके बाद आंदोलनकारी आगे बढ़ने की जिद पर अड़ गए और फिर पुलिस व आंदोलनकारियों के बीच भराड़ीसैंण जाने के लिए धक्का-मुक्की होने लगी। पुलिस ने आंदोलनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछार भी की। जिसके बाद आंदोलनकारियों ने पुलिस का बैरियर गिरा दिया। तभी प्रशासन ने बिना किसी चेतावनी के आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज करवा दिया। जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। पुलिस लाठीचार्ज व भगदड़ से लगभग 25 लोग घायल हो गए।

लाठीचार्ज के बाद गैरसैंण के उपजिलाधिकारी कौस्तुब मिश्रा घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने आक्रोशित आंदोलनकारियों से बातचीत की। बातचीत के बाद आंदोलनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गये। धरने पर बैठे सभी लोगों को पुलिस-प्रशासन ने “हिरासत” में ले लिया और शाम छह बजे के बाद रिहा किया। इस बीच प्रशासन के अनुरोध पर पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल देर शाम मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मुलाकात के लिए तैयार हुआ।

विपक्षी दलों ने बताया सत्ता का अहंकार

पुलिस द्वारा लोगों पर लाठीचार्ज की कार्रवाई पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार ने लाठीचार्ज से अपनी कायराना हरकत का परिचय दिया है। आखिर जनता की अनसुनी क्यों की जा रही है? नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा ह्रदयेश ने इस घटना को भाजपा सरकार की संवेदनहीनता करार दिया और कहा कि जनता अपनी पीड़ा व परेशानी को सरकार को नहीं बतायेगी और किसे बतायेगी? उक्रांद के पूर्व अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने इसे भाजपा का सत्ता का अहंकार बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार अपने अहंकार में जनता की पीड़ा तक को समझने को तैयार नहीं है। विपक्ष की ओर से लाठीचार्ज की तीखी आलोचना किए जाने के अलावा सोशल मीडिया में भी जमकर भाजपा सरकार को कोसा गया। लोगों ने कहा कि जिस मातृशक्ति की बदौलत उत्तराखण्ड राज्य बना, उसी मातृशक्ति पर बर्बर लाठीचार्ज करवाने में भाजपा सरकार को जरा भी शर्म नहीं आई?

उत्तराखंड में भी आंदोलनजीवी?

लाठीचार्ज को लेकर चौरतरफा आलोचना से घिरे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि सभी भाई-बहनों से अनुरोध है कि आप पेशेवर आंदोलनजीवियों के बहकावे में ना आएं। इससे पहले किसान आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आंदोलनजीवी शब्द का इस्तेमाल किया था।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिये हैं। राज्य सरकार के प्रवक्ता और शहरी विकास व संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ने घटना पर खेद जताते हुए उसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि सरकार जनता की समस्याओं के निराकरण के प्रति गम्भीर है। इस मामले में भी आंदोलनकारियों की सुनी जाएगी और उनकी मांगों का समाधान भी किया जाएगा।