बुधवार, 28 सितम्बर 2022
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UAPA और PSA जैसे कड़े कानूनों के तहत देश की जेलों में बंद स्वतंत्र पत्रकार!



स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार के अलावा पत्रिका 'द कश्मीर वाला' के संपादक फहद शाह, पत्रिका 'कश्मीर नरेटर' के आसिफ सुलतान, 'ऑल्ट न्यूज' के पत्रकार मोहम्मद जुबैर और केरल के सिद्दीक कप्पन जैसे स्वतंत्र पत्रकार UAPA और PSA जैसे कड़े आपराधिक कानूनों के तहत जेल में बंद हैं.

आये दिन देश के अलग-अलग राज्यों में पत्रकारों को निशाना बनाये जाने की खबरें सामने आ रही हैं. हालंहि में झारखंड के स्वतंत्र पत्रकार रूपेश को गिरफ्तार किया गया है इसी तरह से कईं और भी पत्रकार हैं जो इस वक्त देश का अलग-अलग जेलों में बंद हैं. रूपेश कुमार के अलावा पत्रिका ‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह, पत्रिका ‘कश्मीर नरेटर’ के पत्रकार आसिफ सुलतान, ‘ऑल्ट न्यूज’ के पत्रकार मोहम्मद जुबैर और केरल के सिद्दीक कप्पन जैसे स्वतंत्र पत्रकार UAPA और PSA जैसे कड़े आपराधिक कानूनों के तहत जेल में बंद हैं.

फहद शाह

साप्ताहिक पत्रिका ‘द कश्मीर वाला’ के संपादक फहद शाह को कश्मीर पुलिस ने पांचवी बार गिरफ्तार किया है. फहद शाह को पहली बार 4 फरवरी को UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) लगाकर गिरप्तार किया गया था. इससे पहले स्वतंत्र पत्रकार फहद शाह को पुलवामा, सोपियां और श्रीनगर में अलग-अलग मामलों में पीएसए (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) लगाकर गिरफ्तार किया गया था. स्वतंत्र पत्रकार फहद शाह को साप्ताहिक पत्रिका ‘द कश्मीर वाला’ में 2011 में छपे एक लेख को आधार बनाकर 20 मई को पांचवी बार गिरफ्तार किया गया. 20 मई से लेकर अब तक यानि पिछले करीबन दो महीने से फहद शाह जेल में बंद हैं.

आसिफ सुलतान

34 साल के पत्रकार आसिफ सुलतान को पहली बार 27 अगस्त 2018 में मिलीटेंसी को बढ़ावा देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.करीबन चार साल जेल में रहने के बाद 5 अप्रैल को एनआईए कोर्ट से जमानत पर रिहा हुए आसिफ को फिर से पीएसए लगाकर जेल में बंद कर दिया गया. श्रीनगर से निकलने वाली पत्रिका’कश्मीर नरेटर’ के सह-संपादक आसिफ ने जुलाई 2018 में बुरहान वानी पर एक लेख लिखा था. बुरहान वानी पर चार हजार शब्दों के लिखे लेख के आधार पर ही पत्रकार आसिफ सुलतान को गिरफ्तार किया गया था.वहीं पत्रकारों के अधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी आसिफ के समर्थन में सामने आई हैं.’कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट’ ने भी आफिस के खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है.बता दें कि अगस्त 2019 में पत्रकार आसिफ को अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में’जॉन औबुशोन प्रेस फ्रीडम अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है. 

मोहमद जुबैर

फेक न्यूज के खिलाफ फेक्ट चैक करने वाले ‘ऑल्ट न्यूज’ के को-फाउंडर पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने 28 जून को गिरफ्तार किया था. पत्रकार ज़ुबैर को आईपीसी सेक्शन 153 A और सेक्शन 295A के तहत उनके चार साल पुराने ट्वीट को आधार बनाकर गिरप्तार किया गया है. पत्रकार मोहम्मद जुबैर पर कुल सात मामले  दर्ज हैं जिनमें से 6 उत्तर प्रदेश और एक दिल्ली में दर्ज है.

पत्रकार जुबैर को दिल्ली, सीतापुर, हाथरस और लखीमपुर खीरी में दर्ज मामलों के तहत हिरासत में लिया गया है. इन चार केसों में से जुबैर को सीतापुर और दिल्ली मामले में जमानत मिल चुकी है. वहीं लखीमपुर वाले मामले में कोर्ट ने जुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया है कि अभी तक पुलिस उन लोगों को सामने क्यों नहीं ला पाई है जो मोहम्मद जुबैर के ट्वीट की वजह से आहत हैं और पीड़ित महसूस कर रहे हैं. पत्रकार मोहम्मद जुबैर पर साल 2018 में किये गए ट्वीट को लेकर केस दर्ज किया गया है ट्वीट में एक हिंदी फिल्म का वीडियो शेयर किया गया था. जिसमें ‘हनीमून होटेल’ का नाम बदलकर ‘हनुमान होटेल’ दिखाया गया है.

सिद्दीक कप्पन

केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को अक्तूबर 2020 में उत्तर प्रदेश के मथुरा से गिरफ्तार किया गया था. पत्रकार कप्पन एक दलित पीडिता के बलात्कार की रिपोर्टिंग के सिलसिले में यूपी के हाथरस जा रहे थे. पुलिस ने पत्रकार कप्पन पर मुस्लिमों को भड़काने’ के लिए रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया गया है. सिद्दीकी कप्पन पर यूएपीए के तहत कईं अपराधों में मामला दर्ज किया गया है. शुरुआत में उन्हें शांति भंग करने की आशंका के तहत गिरफ्तार किया गया था इसके बाद कप्पन को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और इसके बाद उनपर यूएपीए के तहत मामला दर्ज कर दिया गया.

पुलिस ने पत्रकार कप्पन पर हाथरस सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले में सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं. अक्तूबर 2020 से जेल में बंद कप्पन पर लगे शांति भंग करने के आरोपों को मथुरा कोर्ट ने खारिज करते हुए उन्हे आरोप मुक्त कर दिया था. ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि यूपी पुलिस कप्पन की गिरफ्तारी के 6 महाने बाद तक भी जांच पूरी नहीं कर पाई थी.    

वहीं इसी साल तीन मई को विश्व प्रेस आजादी दिवस पर USCIRF यानि यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम  ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता  के मामले में भारत पर निशाना साधा. USCIRF ने कहा है कि वो भारत के उन पत्रकारों के साथ खड़ा है जो धार्मिक स्वतंत्रता उत्पीड़न और हिंसा के शिकार हैं. धार्मिक स्वतंत्रता पर अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी पैनल ने अपने ट्वीट में भारत का खासतौर से जिक्र किया है. पैनल ने कहा कि वो उन पत्रकारों के साथ खड़ा है जिन्हें मुसलमान, ईसाइयों, दलित, सिखों और आदिवासियों के ख़िलाफ हो रही हिंसाओं के बारे में रिपोर्ट करने की वजह से सरकार द्वारा निशाना बनाया जा रहा है और हिरासत में लिया जा रहा है…पैनल ने सिद्दीक़ी कप्पन का भी अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है. 

स्वतंत्र पत्रकार रुपेश कुमार  

झारखंड के स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार को 17 जुलाई को उनके घर से गिरफ्तार किया गया. झारखंड पुलिस सर्च वारंट का हवाला देकर पत्रकार रूपेश कुमार के रायगढ़ स्थित घर पर सुबह साढे पांच बजे पहुंच गई पुलिस ने दोपहर तक खोजबीन अभियान जारी रखा और करीबन दो बजे पत्रकार रूपेश कुमार को गिरफ्तार कर साथ ले गई.  पुलिस ने पत्रकार रूपेश कुमार पर भी अन्य पत्रकारों की तरह UAPA  की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. गिरफ्तारी को लेकर पत्रकार रूपेश की पत्नी ने गांव-सवेरा से बातचीत में बताया…पुलिस दो लैपटोप, दो मोबाइल फोन और गाड़ी और मोटरसाइकिल के कागजात एक पुरानी कॉपी और नोटबुक जब्त कर ले गई है. ईप्सा ने बताया पुलिस ने वह आइफोन भी जब्त किया, जो सुप्रीम कोर्ट में पेगासस जासूसी कांड की शिकायत के बाद लोगों के चंदे से खरीदा गया था.

स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार पहले से ही सरकार के निशाने पर रहे हैं. पेगासस के जरिये उनके फोन की अवैध तरीके से निगरानी के मामले में केंद्र सरकार ने उन्हें पेगासस सूची में रखा है. बिहार पुलिस ने पत्रकार रूपेश कुमार को साल 2019 में यूएपीए की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था. बिहार पुलिस उस मामले में तय समय के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पायी और कुछ महीने जेल में रहने के बाद रूपेश कुमार को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था.